ग़ाज़ा और इसराइल में हिंसा, सभी पक्षों से तत्काल लड़ाई रोकने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ों और इसराइल में हिंसा के मद्देनज़र सभी पक्षों से तत्काल लड़ाई रोके जाने की पुकार लगाई है. उन्होंने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि हिंसक घटनाओं को ना रोका गया तो ऐसे सुरक्षा व मानवीय संकटों के पैदा होने का जोखिम है, जिन पर क़ाबू पाना फिर कठिन होगा.

पूर्वी येरूशलम में रह रहे फ़लस्तीनी परिवारों को उनके घरों से बेदख़ल किये जाने की आशंका की वजह से, पिछले कई दिनों से तनाव व्याप्त था. अल-अक्सा परिसर के पास बीते दिनों में प्रदर्शनकारियों और इसराइली सुरक्षाकर्मियों में झड़पें हुईं.

Growing #humanitarian crisis in #Gaza. Now 10,000 displaced within Gaza. Israeli and Palestinian authorities must allow humanitarian relief and access. READ my statement here: https://t.co/rIpBOIRZoW pic.twitter.com/7EcVttILgw— Lynn Hastings (@LynnHastings) May 14, 2021

इसराइल की हवाई कार्रवाई और ग़ाज़ा से किये जा रहे रॉकेट हमलों से मौजूदा तनाव चरम पर पहुँच गया है.
यूएन प्रमुख के प्रवक्ता ने महासचिव की ओर से शुक्रवार को एक बयान जारी किया, जिसमें हिंसा में आई तेज़ी और उससे उपजी पीड़ा व विध्वंस पर दुख ज़ाहिर किया गया है.
“इसमें बड़ी संख्या में आम लोगों की जानें गई हैं, जिनमें बच्चे भी हैं, जो त्रासदीपूर्ण है.”
यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि मौजूदा लड़ाई के एक ऐसे सुरक्षा व मानवीय संकट में तब्दील में हो जाने की आशंका है जो क़ाबू से बाहर होगा और चरमपंथ को हवा देगा – ना सिर्फ़ क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ों और इसराइल में, बल्कि पूरे क्षेत्र में.
यूएन प्रमुख ने मध्यस्थता के प्रयासों को गति देने का आहवान करते हुए कहा कि यूएन इन प्रयासों का सक्रिय हिस्सा है.
ग़ाज़ा में जीवनरक्षक सहायता की आपूर्ति को सुनिश्चित बनाए रखने के लिये इसे अहम बताया गया है.
मानवीय राहत मामलों में समन्वय के लिये यूएन कार्यालय (OCHA) ने भी शुक्रवार को अलार्म जारी करते हुए चेतावनी दी कि हिंसा लगातार बढ़ रही है जिसका ख़ामियाज़ा, दोनों पक्षों की ओर आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है.
ख़बरों के अनुसार, शुक्रवार को, इसराइली सुरक्षा और चरमपंथी गुट हमास के बीच सबसे भीषण हिंसक घटनाएँ हुई हैं.
हमास के नियंत्रण वाले ग़ाज़ा में लगातार इसराइली हवाई कार्रवाई और गोलाबारी हो रही है जबकि हमास की ओर से इसराइल में रॉकेट दागे जा रहे हैं.
मानवीय हालात पर चिन्ता
यूएन सुरक्षा परिषद ने रविवार को बदतर होते हालात पर एक बैठक बुलाने की घोषणा की है. इसके समानान्तर, क्षेत्र में हिंसा पर विराम लगाने के लिये कूटनीतिक प्रयासों को तेज़ कर दिया गया है.
क्षेत्र में यूएन मानवीय राहत समन्वयक लिन हेस्टिंग्स ने बताया कि 10 हज़ार फ़लस्तीनी ग़ाज़ा में अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थान की तलाश में चले गए हैं.
फ़िलहाल हिंसा प्रभावित इलाक़े में जल, भोजन, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओँ की क़िल्लत है.
यूएन एजेंसी प्रवक्ता येन्स लार्क ने शुक्रवार को जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ग़ाज़ा पट्टी के घनी आबादी वाले इलाक़ों में नागरिक प्रतिष्ठानों को हिंसा में भारी क्षति हुई है.
बताया गया है कि 200 से ज़्यादा घर पूरी तरह ध्वस्त या क्षतिग्रस्त हुए हैं.
एजेंसी के प्रवक्ता के मुताबिक ज़मीनी स्तर पर राहत कार्यों के ज़रिये मानवीय सहायता पहुँचाने के प्रयास किये जा रहे हैं, मगर मौजूदा सुरक्षा हालात में यह कठिन साबित हो रहा है.
येन्स लार्क ने ज़ोर देकर कहा कि बुनियादी सेवाओं के संचालन के लिये, विद्युत उत्पादन संयंत्रों को ईंधन की आपूर्ति की जानी महत्वपूर्ण है., संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ों और इसराइल में हिंसा के मद्देनज़र सभी पक्षों से तत्काल लड़ाई रोके जाने की पुकार लगाई है. उन्होंने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि हिंसक घटनाओं को ना रोका गया तो ऐसे सुरक्षा व मानवीय संकटों के पैदा होने का जोखिम है, जिन पर क़ाबू पाना फिर कठिन होगा.

पूर्वी येरूशलम में रह रहे फ़लस्तीनी परिवारों को उनके घरों से बेदख़ल किये जाने की आशंका की वजह से, पिछले कई दिनों से तनाव व्याप्त था. अल-अक्सा परिसर के पास बीते दिनों में प्रदर्शनकारियों और इसराइली सुरक्षाकर्मियों में झड़पें हुईं.

Growing #humanitarian crisis in #Gaza. Now 10,000 displaced within Gaza. Israeli and Palestinian authorities must allow humanitarian relief and access. READ my statement here: https://t.co/rIpBOIRZoW pic.twitter.com/7EcVttILgw

— Lynn Hastings (@LynnHastings) May 14, 2021

इसराइल की हवाई कार्रवाई और ग़ाज़ा से किये जा रहे रॉकेट हमलों से मौजूदा तनाव चरम पर पहुँच गया है.

यूएन प्रमुख के प्रवक्ता ने महासचिव की ओर से शुक्रवार को एक बयान जारी किया, जिसमें हिंसा में आई तेज़ी और उससे उपजी पीड़ा व विध्वंस पर दुख ज़ाहिर किया गया है.

“इसमें बड़ी संख्या में आम लोगों की जानें गई हैं, जिनमें बच्चे भी हैं, जो त्रासदीपूर्ण है.”

यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि मौजूदा लड़ाई के एक ऐसे सुरक्षा व मानवीय संकट में तब्दील में हो जाने की आशंका है जो क़ाबू से बाहर होगा और चरमपंथ को हवा देगा – ना सिर्फ़ क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ों और इसराइल में, बल्कि पूरे क्षेत्र में.

यूएन प्रमुख ने मध्यस्थता के प्रयासों को गति देने का आहवान करते हुए कहा कि यूएन इन प्रयासों का सक्रिय हिस्सा है.

ग़ाज़ा में जीवनरक्षक सहायता की आपूर्ति को सुनिश्चित बनाए रखने के लिये इसे अहम बताया गया है.

मानवीय राहत मामलों में समन्वय के लिये यूएन कार्यालय (OCHA) ने भी शुक्रवार को अलार्म जारी करते हुए चेतावनी दी कि हिंसा लगातार बढ़ रही है जिसका ख़ामियाज़ा, दोनों पक्षों की ओर आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है.

ख़बरों के अनुसार, शुक्रवार को, इसराइली सुरक्षा और चरमपंथी गुट हमास के बीच सबसे भीषण हिंसक घटनाएँ हुई हैं.

हमास के नियंत्रण वाले ग़ाज़ा में लगातार इसराइली हवाई कार्रवाई और गोलाबारी हो रही है जबकि हमास की ओर से इसराइल में रॉकेट दागे जा रहे हैं.

मानवीय हालात पर चिन्ता

यूएन सुरक्षा परिषद ने रविवार को बदतर होते हालात पर एक बैठक बुलाने की घोषणा की है. इसके समानान्तर, क्षेत्र में हिंसा पर विराम लगाने के लिये कूटनीतिक प्रयासों को तेज़ कर दिया गया है.

क्षेत्र में यूएन मानवीय राहत समन्वयक लिन हेस्टिंग्स ने बताया कि 10 हज़ार फ़लस्तीनी ग़ाज़ा में अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थान की तलाश में चले गए हैं.

फ़िलहाल हिंसा प्रभावित इलाक़े में जल, भोजन, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओँ की क़िल्लत है.

यूएन एजेंसी प्रवक्ता येन्स लार्क ने शुक्रवार को जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ग़ाज़ा पट्टी के घनी आबादी वाले इलाक़ों में नागरिक प्रतिष्ठानों को हिंसा में भारी क्षति हुई है.

बताया गया है कि 200 से ज़्यादा घर पूरी तरह ध्वस्त या क्षतिग्रस्त हुए हैं.

एजेंसी के प्रवक्ता के मुताबिक ज़मीनी स्तर पर राहत कार्यों के ज़रिये मानवीय सहायता पहुँचाने के प्रयास किये जा रहे हैं, मगर मौजूदा सुरक्षा हालात में यह कठिन साबित हो रहा है.

येन्स लार्क ने ज़ोर देकर कहा कि बुनियादी सेवाओं के संचालन के लिये, विद्युत उत्पादन संयंत्रों को ईंधन की आपूर्ति की जानी महत्वपूर्ण है.

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