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चीन भारत का दुश्मन नहीं बल्कि सहयोगी : चीनी राजदूत

July 10
22:55 2020

नई दिल्ली, 10 जुलाई । भारत में चीन के राजदूत सन विडोंग ने कहा है कि चीन और भारत एक-दूसरे के दुश्मन और विरोधी नहीं बल्कि सहयोगी हैं। चीन के राजदूत ने भारत-चीन सीमा विवाद के बारे में शुक्रवार को एक वीडियो संदेश में कहा कि सीमा विवाद इतिहास की विरासत है जो बहुत संवेदनशील और पेचीदा मामला है। इसका न्याय संगत समाधान करने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से विचार विमर्श की आवश्यकता है ताकि दोनों पक्षों को स्वीकार्य हल खोजा जा सके।उन्होंने कहा कि सीमा पर शांति और सामान्य स्थिति कायम करने के लिए उच्च सैन्य अधिकारियों के बीच बनी सहमति के अनुरूप अग्रिम सैन्य टुकड़ियों को हटाया जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने सीमा विवाद के लिए नियुक्त राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बातचीत का भी उल्लेख किया।उन्होंने खेद व्यक्त किया कि भारत में कुछ लोग गलवान घाटी में सामान्य स्थिति कायम करने के लिए बने मतैक्य के पर संदेह कर रहे हैं तथा भारत-चीन संबंधों के बारे में गलत छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे द्विपक्षीय संबंधों में व्यवधान पैदा होता है।भारत और चीन के बीच दो हजार वर्षों के ऐतहासिक संबंधों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच दोस्ताना सहयोग रहा है। दोनों देश विकास और दोबारा मजबूत बनने के लिए प्रयासरत हैं तथा दोनों के रणनीतिक हित एक जैसे हैं।उन्होंने कहा कि 90 के दशक से ही भारत और चीन के बीच यह सहमति बनी है कि वह एक दूसरे के लिए खतरा नहीं बनेंगे। वर्ष 2018 में वुहान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने फिर दोहराया था कि दोनों देश एक दूसरे के लिए खतरा बनने की बजाय विकास अवसरों का उपयोग करेंगे। दोनों नेताओं के बीच बनी यह सहमति द्विपक्षीय संबंधों की आधारशिला है।राजदूत ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि हाल के दिनों में कुछ हलकों में द्विपक्षीय संबंधों को गलत अर्थ में पेश किए जाने की कोशिश की जा रही है। चीन की मंशा के बारे में गलत धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है तथा संघर्ष को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा है। इससे बड़े पैमाने पर संघर्ष को उठाया जा रहा है। हजारों वर्ष से एक निकट पड़ोसी रहे देशों को दुश्मन और रणनीतिक खतरे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यह ना तो वास्तविकता है न ही द्विपक्षीय संबंधों के लिए सहायक है।उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे को खुले मन और सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिए ताकि संतुलित और दीर्घकालिक संबंधों का विकास हो सके।सीमा विवाद के संबंध में उनकी सलाह थी कि किसी प्रकार के रणनीतिक गलत आकलन से बचा जाना चाहिए।गलवान घाटी पिछले घटनाक्रम के बारे में चीन के राजदूत ने दोहराया कि जाहिर है कि वहां कौन सही है और गलत है। चीन अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करेगा तथा सीमा पर शांति सुनिश्चित करेगा।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत और चीन दोनों में ऐसी बुद्धिमत्ता और क्षमता है कि वह अपने मतभेदों को उचित प्रकार से हल करें तथा संघर्ष के जाल में ना फंसे।राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय माहौल का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और चीन आपस में क्यों लड़े जिससे उनके दोस्तों को नुकसान पहुंचे और दुश्मनों को लाभ। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों में ‘विन विन’ (दोनों की जीत) का फार्मूला सुझाया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन दुनिया के दो सबसे बड़े विकासशील देश और उभरती हुई अर्थव्यवस्था हैं। विकास दोनों देशों का सामान्य लक्ष्य है तथा दोनों के हित एक दूसरे से जुड़े हुए हैं इस संबंध में कोरोना वायरस महामारी के रूप में एक सामान्य शत्रु का उल्लेख किया। महामारी से लड़ने के लिए उन्होंने सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।द्विपक्षीय व्यापार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चीन लगातार कई वर्षों से भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। चीन ने भारत में 8 अरब डॉलर का निवेश किया है। मोबाइल फोन, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, आधारभूत ढांचा और ऑटोमोबाइल निर्यात से भारत में रोजगार सृजन हुआ है। भारत में चीनी माल के बहिष्कार के अभियान की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि यह भारतीय उद्योग और उपभोक्ताओं के हित में नहीं है।

(हि.स.)

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