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छात्रों से दुर्व्यवहार : रोकने को क्या किया जाए

November 26
08:14 2018

किसी को डराना-धमकाना ऐसा व्यवहार है जो जान-बूझकर किया जाता है। अक्सर लोग इसके द्वारा दूसरों पर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करते हैं। यह व्यवहार शारीरिक, मौखिक या संबंधपरक हो सकता है। स्कूलों में इस तरह का व्यवहार आमतौर पर देखा जा सकता है। जहां लड़कों को अन्य ताकतवर लोगों द्वारा डराया धमकाया जा सकता है, वहीं लड़कियों को अक्सर उनकी सामाजिक अस्वीकार्यता का फायदा उठाकर धमकाया जाता है।

लंबे समय से इस तरह का व्यवहार कार्यस्थलों और स्कूलों का हिस्सा रहा है। अभी हाल ही में टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण इसके दायरे और बढ़ गए हैं। ऑनलाइन या सेलफोन के माध्यम से किसी को डराने-धमकाने के मामले बढ़ रहे हैं, जिसे ‘साइबर बुलिंग’ कहा जाता है।

छात्रों को चार तरीकों से डराया धमकाया जा सकता है। इसमें दो तरीके प्रत्यक्ष (उदाहरण किसी अन्य छात्र या व्यस्क द्वारा धमकाया जाना) और दो तरीके अप्रत्यक्ष (किसी छात्र को मानसिक रूप से परेशान करना, उनके बारे में अफवाहें फैलाना) हैं। शरारती तत्वों द्वारा इस तरह का व्यवहार चार तरीकों से किया जा सकता है शारीरिक, मौखिक, संबंधपरक (किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा या संबंधों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश) और संपत्ति को नुकसान पहुंचाना।

शैक्षिक सांख्यिकी राष्ट्रीय केंद्र के अनुसार, हर पांच में से एक से अधिक व्यक्ति (20.8 फीसदी) के साथ बुलिंग यानी डराने-धमकाने जैसा व्यवहार किया जाता है।

इस तरह का व्यवहार अक्सर मिडल स्कूलों होता है। आमतौर पर सामाजिक या मौखिक तरीकों से इस तरह का व्यवहार किया जाता है। 83 फीसदी छात्र जो ऑनलाइन माध्यमों से किसी को डराने धमकाने की कोशिश करते हैं, वे निजी जीवन में भी इस तरह का व्यवहार करते हैं। 84 फीसदी छात्र जिन्हें ऑनलाइन डराया धमकाया गया है, उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी डराया धमकाया जाता है।

किन लोगों के साथ दुर्व्यवहार का अंदेशा ज्यादा?

-अक्सर कुछ बच्चे दूसरे बच्चों को कई कारणों से चिढ़ाते हैं। जैसे किसी का वजन कम या ज्यादा होना, ऊंचाई कम होना, चश्मा या कपड़े पहनने का तरीका या अक्सर स्कूल में नए आने वाले बच्चे को चिढ़ाया जाता है।

-कमजोर लोग जो अपने आप को सुरक्षित नहीं रख पाते, उनके साथ इस तरह का व्यवहार होने की संभावना अधिक होती है।

-अवसाद पीड़ित लोगों जिनमें आत्मविश्वास की कमी है, जो असहज महसूस करें, उनके साथ अक्सर इस तरह का व्यवहार किया जाता है।

-परीक्षा में फेल होने पर या कम नंबर लाने पर दूसरे छात्र बच्चों को चिढ़ाते हैं।

-कोई छात्र अगर स्कूल में कम लोकप्रिय है, तो उसे अक्सर चिढ़ाया जाता है।

-वे छात्र जो दूसरों के साथ घुलमिल न सकें या जिन्हें अध्यापक द्वारा सजा दी जाए, उन्हें भी अक्सर दूसरे बच्चे चिढ़ाते हैं।

डराने-धमकाने या चिढ़ाने जैसा व्यवहार कहां होता है?

इस तरह का व्यवहार कई स्थानों, स्थितियों में हो सकता है। कई बार ऑनलाइन या सेलफोन के माध्यम से भी इस तरह का व्यवहार किया जाता है। आजकल लोग टेक्नोलॉजी जैसे सेलफोन, चैटरूम, इंसटेंट मैसेज, ईमेल या सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी दूसरों के साा इस तरह का व्यवहार करते हैं। इसे इलेक्ट्रॉनिक बुलिंग कहा जाता है।

स्कूली बच्चों के साथ इस तरह के ज्यादातर मामले खेल के मैदान, स्कूल बस, कैफेटेरिया, रेस्टरूम या लॉकर रूम में होते हैं।

वयस्कों के साथ इन मामलों को लेकर दूरी :

पया गया है कि अक्सर बच्चे बड़ों के साथ इस तरह की बातें साझा नहीं करते। और अगर उन्हें बताया भी जाता है तो व्यस्क नहीं जानते कि उन्हें इस मामले पर किस तरह की प्रतिक्रिया देनी चाहिए। मात्र 20 से 30 फीसदी बच्चे ही अपने साथ होने वाले गलत व्यवहार के बारे में माता-पिता को बताते हैं।

रोकथाम के तरीके :

स्टाफ और छात्रों को ध्यान रखना चाहिए कि अगर खेल या लंच टाइम के दौरान किसी बच्चे के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है तो उस पर ध्यान दें। स्कूल में अध्यापकों, प्रधानाध्यापक, प्रशासकों, काउंसलर, अन्य स्टाफ जैसे बस ड्राइवर, नर्स, स्कूल रिसोर्स ऑफिसर, कैफेटेरिया के कर्मचारी और लाइब्रेरियन, अध्यपकों, सीनियर छात्रों एवं अन्य छात्रों आदि सभी को इस तरह के मामलों पर नजर रखनी चाहिए। छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए कि अगर उनके साथ ऐसा व्यवहार हो या वे किसी को ऐसा व्यवहार करते हुए देखें तो क्या करें।

स्कूल में इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए एक समूह बनाया जा सकता है। स्कूल के स्टाफ, छात्रों और अभिभावकों को इन नियमों और नीतियों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि ऐसे किसी भी मामले पर तुरंत कार्रवाई की जाए और उसे रोका जा सके।

स्कूल में इस तरह के व्यवहार की रोकथाम के लिए एक छात्र परामर्श समूह भी बनाया जा सकता है, जो व्यस्कों से सुझाव लेकर इस तरह के व्यवहार को रोकने की कोशिश कर सकता है।

बुलिंग और आत्महत्या :

डराने-धमकाने और आत्महत्या के बीच गहरा संबंध है। कई बार स्कूल कॉलेजों में इस तरह के मामले देखे जाते हैं, जब छात्र उनके साथ होने वाले ऐसे व्यवहार के कारण आत्महत्या कर लेते हैं। इस तरह के व्यवहार के कारण छात्र अकेलापन, अवसाद, आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं और ये मनोवैज्ञानिक कारक उन पर इतने हावी हो जाते हैं कि कई बार वे आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठा लेते हैं। हालांकि बहुत से मामलों में छात्र आत्महत्या नहीं करते। युवाओं में अन्य कारणों से भी आत्महत्या के मामले देखे गए हैं।

बुलिंग विरोधी कानून :

भारत में बुलिंग पर लगाम लगाने के लिए कई कानून बनाए गए हैं। लोगों को इनके बारे में जागरूक होना चाहिए।

स्कूलों के लिए कानून :

पूर्व मानव संसाधन मंत्री ने स्कूलों में बुलिंग की जांच और रोकथाम के लिए एक समिति का गठन किया। तदनुसार, सीबीएसई द्वारा निर्धारित स्कूलों में बुलिंग से सुरक्षा के लिए कानून के अनुसार, अगर कोई छात्र दूसरे छात्र के साथ रैगिंग करता है या उसे डराता धमकाता है तो उसे लिखित में नोटिस दिया जाएगा और उसे स्कूल से निकाला जा सकता है।

-नोटिस बोर्ड पर नोटिस लगाया जाएगा कि अगर कोई छात्र दूसरे छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

-स्कूल में बुलिंग की रोकथाम के लिए एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें वाईस प्रिंसिपल, एक वरिष्ठ अध्यापक, डॉक्टर, काउंसलर, अध्यापक-अभिभावक प्रतिनिधि, स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधि और कानूनी प्रतिनिधि एवं सहकर्मी शिक्षक शामिल होंगे।

कॉलेजों में कानून :

भारत सरकार ने कॉलेजों में रैगिंग की रोकथाम के लिए कानून बनाया है जो सभी उच्च शिक्षा संस्थानों और कॉलेजों पर लागू होता है। इसके अनुसार, पीड़ित भारतीय दंड संहिता के तेरह प्रावधानों के तहत उस क्षेत्र के पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर सकता है, जहां अपराध हुआ है। व्यक्ति भारतीय कानूनों के तहत शिकायत दर्ज कर सकता है, ये कानून हैं :

धारा 294-अश्लील कृत्य और गीत, धारा 339-गलत व्यवहार, धारा 340-गलत कारावास, धारा 341-गलत व्यवहार के लिए सजा, धारा 342-गलत कारावास के लिए सजा और धारा 506-आपराधिक धमकी के लिए सजा

बहुत ज्यादा हिंसक व्यवहार के मामले में धारा 323- जानबूझकर किसी के नुकसान पहुंचाने के लिए सजा, धारा 324- जानबूझ कर खतरनाक हथियार आदि से नुकसान पहुचाना, धारा 325- जानबूझ कर किसी को गंभीर चोट पहुंचाने के लिए सजा, धारा 326- जानबूझकर खतरनाक हथियान से किसी को चोट पहुंचाना।

ऐसे मामलो में जहां पीड़ित की जान चली जाए : धारा 304-अपराधी के लिए हत्या की सजा, धारा 306-आत्महत्या के लिए उकसाना, धारा 307-आत्महत्या के लिए प्रयास। हालांकि इन मामलों में यूजीसी एंटी रैगिंग एवं आईपीसी कानून स्कूलों पर लागू नहीं होंगे।

साइबर बुलिंग के कानून :

अगर कोई छात्र साइबर बुलिंग का शिकार होता है तो वह भारतीय दंड संहिता के तहत शिकायत दर्ज कर सकता है। आईटी अधिनियम-2000 के तहत पीड़ित धारा 67 के तहत दो प्रकार के अपराधों (अश्लीलता ओर गोपनीयता का उल्लंघन) की शिकायत दर्ज कर सकता है।

(लेखिका मालिनी सबा, सबा फैमिली फाउंडेशंस और सबा इंडस्ट्रीज की संस्थापक हैं)

–आईएएनएस

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