जनसंख्या दिवस: कोविड का यौन व प्रजनन स्वास्थ्य पर गहरा असर

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने कहा है कि  कुछ महिलाओं के लिये, ये दौर मातृत्व को टाल देने के लिये मजबूर होने का रहा है, जबकि कुछ अन्य के लिये, स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा उत्पन्न होने के कारण, अनचाहा गर्भधारण करना पड़ा है.

यूएन जनसंख्या कोष की कार्यकारी निदेशिक डॉक्टर नतालिया कनेम ने 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर एक वक्तव्य जारी किया है… 
हालाँकि, प्रजनन पर कोविड-19 के प्रभाव की पूर्ण तस्वीर अभी हासिल किया जाना बाक़ी है, लेकिन इस तरह के रुझानों ने बड़ी संख्या में बच्चे पैदा होने या फिर कुछ के इस सुख से वंचित होने पर, बड़ी चिन्ताओं को जन्म दिया है.
जो सबसे बड़ी चिन्ता की बात होनी चाहिये वो ये कि जब महिलाओं को अपने यौन व प्रजनन अधिकारों और अपनी पसन्द चुनने का मौक़ा नहीं मिलता, चाहें उसके लिये स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा उत्पन्न होना ज़िम्मेदार हो, या फिर लैंगिक भेदभाव उन्हें अपनी तरह के विकल्प चुनने से रोकता हो, गर्भनिरोधक इस्तेमाल करने या नहीं करने की बात हो या फिर अपने साथी के साथ यौन सम्बन्ध बनाने के बारे में फ़ैसला करने की बात हो.
स्वस्थ और उत्पादक समाजों के निर्माण के लिये रास्ता तब निकलता है जब महिलाओं को अपने यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में अपनी पसन्द के फ़ैसले करने का अधिकार हो, और उन्हें अपने फ़ैसलों को सहारा देने के लिये समुचित स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता हासिल हो.
जिस महिला को अपने शरीर के बारे में ख़ुद फ़ैसला करने का हक़ हासिल होता है तो वो ना केवल स्वायत्ता के मामले में बढ़त हासिल करती है बल्कि स्वास्थ्य और शिक्षा, आय व सुरक्षा क्षेत्रों में आगे बढ़ती है. ऐसा करने से बहुत सम्भावना है कि ऐसा करने से वो बहुत ख़ुश रहेगी, प्रगति करेगी और उसके साथ-साथ उसका परिवार भी.
कोविड-19 ने देशों के भीतर और उनके बीच, स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में मौजूद गहरी विषमताएँ और कमज़ोरियाँ उजागर कर दी हैं.
आइये, इन कमियों को दूर करने के लिये कार्रवाई करें, क्योंकि यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ अत्यावश्यक हैं. इस संकट ने पहले से ही भारी दबाव का सामना कर रही स्वास्थ्य प्रणालियों को यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं से ध्यान हटाने के लिये मजबूर कर दिया है, जिन्हें अक्सर बहुत ज़रूरी नहीं समझा जाता है.
ये सेवाएँ जबकि एक मानवाधिकार हैं, मगर इन्हें ज़्यादा तात्कालिक चिन्ताओं की ख़ातिर दर-किनार कर दिया गया है. आर्थिक दबावों और बजट कटौतियों के बीच, ऐसा भी जोखिम है कि कुछ देश यौन व प्रजनन सेवाएँ बरक़रार ही ना रख पाएँ.
विश्व जनसंख्या दिवस पर, आइये, इन खाइयों को दूर करने के लिये क़दम उठाएँ क्योंकि यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ अत्यावश्यक हैं. यहाँ तक कि अगर स्वास्थ्य प्रणालियों पर बड़ा दबाव भी हो तो भी ये सेवाएँ प्रतीक्षा नहीं कर सकतीं.
किसी भी तरह की देरी किये जाने से महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और जीवन बेहतरी पर बुरा असर पड़ेगा जिसके गम्भीर परिणाम जीवन पर्यन्त चल सकते हैं.
आइये, अपना परिवार शुरू करने या आगे बढ़ाने के बारे में महिलाओं के अधिकार को ताक़त देने के लिये एकजुट होकर काम करें, और आइये, तमाम महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों और पसन्दों की हिमायत में खड़े हों.

 , संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने कहा है कि  कुछ महिलाओं के लिये, ये दौर मातृत्व को टाल देने के लिये मजबूर होने का रहा है, जबकि कुछ अन्य के लिये, स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा उत्पन्न होने के कारण, अनचाहा गर्भधारण करना पड़ा है.

यूएन जनसंख्या कोष की कार्यकारी निदेशिक डॉक्टर नतालिया कनेम ने 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर एक वक्तव्य जारी किया है… 

हालाँकि, प्रजनन पर कोविड-19 के प्रभाव की पूर्ण तस्वीर अभी हासिल किया जाना बाक़ी है, लेकिन इस तरह के रुझानों ने बड़ी संख्या में बच्चे पैदा होने या फिर कुछ के इस सुख से वंचित होने पर, बड़ी चिन्ताओं को जन्म दिया है.

जो सबसे बड़ी चिन्ता की बात होनी चाहिये वो ये कि जब महिलाओं को अपने यौन व प्रजनन अधिकारों और अपनी पसन्द चुनने का मौक़ा नहीं मिलता, चाहें उसके लिये स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा उत्पन्न होना ज़िम्मेदार हो, या फिर लैंगिक भेदभाव उन्हें अपनी तरह के विकल्प चुनने से रोकता हो, गर्भनिरोधक इस्तेमाल करने या नहीं करने की बात हो या फिर अपने साथी के साथ यौन सम्बन्ध बनाने के बारे में फ़ैसला करने की बात हो.

स्वस्थ और उत्पादक समाजों के निर्माण के लिये रास्ता तब निकलता है जब महिलाओं को अपने यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में अपनी पसन्द के फ़ैसले करने का अधिकार हो, और उन्हें अपने फ़ैसलों को सहारा देने के लिये समुचित स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता हासिल हो.

जिस महिला को अपने शरीर के बारे में ख़ुद फ़ैसला करने का हक़ हासिल होता है तो वो ना केवल स्वायत्ता के मामले में बढ़त हासिल करती है बल्कि स्वास्थ्य और शिक्षा, आय व सुरक्षा क्षेत्रों में आगे बढ़ती है. ऐसा करने से बहुत सम्भावना है कि ऐसा करने से वो बहुत ख़ुश रहेगी, प्रगति करेगी और उसके साथ-साथ उसका परिवार भी.

कोविड-19 ने देशों के भीतर और उनके बीच, स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में मौजूद गहरी विषमताएँ और कमज़ोरियाँ उजागर कर दी हैं.

आइये, इन कमियों को दूर करने के लिये कार्रवाई करें, क्योंकि यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ अत्यावश्यक हैं. इस संकट ने पहले से ही भारी दबाव का सामना कर रही स्वास्थ्य प्रणालियों को यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं से ध्यान हटाने के लिये मजबूर कर दिया है, जिन्हें अक्सर बहुत ज़रूरी नहीं समझा जाता है.

ये सेवाएँ जबकि एक मानवाधिकार हैं, मगर इन्हें ज़्यादा तात्कालिक चिन्ताओं की ख़ातिर दर-किनार कर दिया गया है. आर्थिक दबावों और बजट कटौतियों के बीच, ऐसा भी जोखिम है कि कुछ देश यौन व प्रजनन सेवाएँ बरक़रार ही ना रख पाएँ.

विश्व जनसंख्या दिवस पर, आइये, इन खाइयों को दूर करने के लिये क़दम उठाएँ क्योंकि यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ अत्यावश्यक हैं. यहाँ तक कि अगर स्वास्थ्य प्रणालियों पर बड़ा दबाव भी हो तो भी ये सेवाएँ प्रतीक्षा नहीं कर सकतीं.

किसी भी तरह की देरी किये जाने से महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और जीवन बेहतरी पर बुरा असर पड़ेगा जिसके गम्भीर परिणाम जीवन पर्यन्त चल सकते हैं.

आइये, अपना परिवार शुरू करने या आगे बढ़ाने के बारे में महिलाओं के अधिकार को ताक़त देने के लिये एकजुट होकर काम करें, और आइये, तमाम महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों और पसन्दों की हिमायत में खड़े हों.

 

,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *