जलवायु संकट: नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन के संकल्प की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सभी देशों से, वर्ष 2050 तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य साकार करने का आहवान किया है, ताकि इस सदी के अन्त तक, वैश्विक तापमान में 2.4 डिग्री सेल्सियस की विनाशकारी बढ़ोत्तरी को टाला जा सके. उन्होंने गुरुवार को जर्मनी के पीटर्सबर्ग में आयोजित उच्चस्तरीय जलवायु बैठक को सम्बोधित करते हुए भरोसा जताया है कि कार्बन उत्सर्जन से उपजे पर्यावरणीय झटकों के सबसे ख़राब प्रभावों की रोकथाम अब भी सम्भव है.

पीटर्सबर्ग में यह बैठक स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक बैठक (कॉप-26) से छह महीने पहले आयोजित की गई है.
​​महासचिव गुटेरेश ने कहा, “मैंने कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से उत्साहजनक संकेतों को देखा है.”

We have a small and narrowing window of opportunity to do the right thing – @antonioguterres told leaders at the Petersberg Climate Dialogue this morning. His full remarks: https://t.co/UJTXUAwGLR #ClimateAction— UN Spokesperson (@UN_Spokesperson) May 6, 2021

उनका मंतव्य उन देशों से था जोकि 73 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जनों के लिये ज़िम्मेदार हैं, और जिन्होंने इस सदी के अन्त तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का संकल्प लिया है.
“वर्ष 2030 तक, हमें 2010 के स्तर की तुलना में, वैश्विक उत्सर्जनों में 45 फ़ीसदी की कटौती करनी होगी, और 2050 तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन को हासिल करना होगा.”
“इस तरीक़े से हम 1.5 डिग्री सेल्सियस की आशाओं को जीवित रख सकते हैं.”
यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने कहा, विश्व की सर्वोपरि प्राथमिकता इस समय कोयला-चालित ऊर्जा संयंत्रों से पीछे हटते हुए, नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने पर होनी चाहिए.
यूएन प्रमुख ने जीवाश्म ईंधनों को दिये जाने वाली सब्सिडी का अन्त करने वाले देशों की सराहना की है. साथ ही ध्यान दिलाया है कि यह समय है, जब सभी देश कार्बन की क़ीमत तय करें और कर (टैक्स) को आय से हटाकर कार्बन पर लगाएँ.
उन्होंने बहुपक्षीय विकास बैन्कों और विकास वित्तीय संस्थाओं के साझाधारकों से आग्रह किया कि उन निम्न-कार्बन, जलवायु-सहनशील विकास के लिये वित्तीय समाधानों की दिशा में प्रयास करना होगा, जोकि पेरिस समझौते में 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य के अनुरूप हैं.  
जलवायु वित्त पोषण
यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि विकासशील देशों को वित्तीय पोषण की आवश्यकता होगी – विकासशील जगत में वार्षिक अनुकूलन प्रयासों की क़ीमत 70 अरब डॉलर आँकी गई है, और यह 2030 तक बढ़कर 300 अरब डॉलर हो सकती है.
“मैं दानदाताओं और बहुपक्षीय विकास बैन्कों से अपनी अपील को फिर दोहराता हूँ, यह सुनिश्चित करने के लिये कि कम से कम जलवायु वित्त पोषण का 50 फ़ीसदी, अनुकूलन व सहनक्षमता के लिये हो.”
महासचिव गुटेरेश ने कहा कि विकासशील देशों के लिये, अनुकूलन मद में वित्तीय संसाधन, कुल जलवायु वित्त पोषण का महज़ 21 फ़ीसदी ही प्रदर्शित करता है.
उन्होंने कहा कि इन निर्धन देशों की मदद के लिये, विकसित देशों को लम्बे समय से चला आ रहा वादा पूरा करना होगा, जिसमें विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई के लिये हर साल 100 अरब डॉलर मुहैया कराने की बात कही गई है.
एंतोनियो गुटेरेश ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक बैठक (कॉप-26) की सफलता, अनुकूलन और वित्तीय मुद्दों पर प्रगति पर टिकी है. यह तात्कालिता और भरोसा जगाने का विषय है.
‘पीटर्सबर्ग जलवायु सम्वाद’ एक वार्षिक बैठक है जिसे जर्मन सरकार वर्ष 2010 से आयोजित करती रही है.
इस कार्यक्रम में मंत्री, शीर्ष कार्यकारी अधिकारी, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों समेत अन्य लोग, कॉप की वार्षिक बैठक की तैयारी के लिये शिरकत करते हैं., संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सभी देशों से, वर्ष 2050 तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य साकार करने का आहवान किया है, ताकि इस सदी के अन्त तक, वैश्विक तापमान में 2.4 डिग्री सेल्सियस की विनाशकारी बढ़ोत्तरी को टाला जा सके. उन्होंने गुरुवार को जर्मनी के पीटर्सबर्ग में आयोजित उच्चस्तरीय जलवायु बैठक को सम्बोधित करते हुए भरोसा जताया है कि कार्बन उत्सर्जन से उपजे पर्यावरणीय झटकों के सबसे ख़राब प्रभावों की रोकथाम अब भी सम्भव है.

पीटर्सबर्ग में यह बैठक स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक बैठक (कॉप-26) से छह महीने पहले आयोजित की गई है.

​​महासचिव गुटेरेश ने कहा, “मैंने कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से उत्साहजनक संकेतों को देखा है.”

उनका मंतव्य उन देशों से था जोकि 73 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जनों के लिये ज़िम्मेदार हैं, और जिन्होंने इस सदी के अन्त तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का संकल्प लिया है.

“वर्ष 2030 तक, हमें 2010 के स्तर की तुलना में, वैश्विक उत्सर्जनों में 45 फ़ीसदी की कटौती करनी होगी, और 2050 तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन को हासिल करना होगा.”

“इस तरीक़े से हम 1.5 डिग्री सेल्सियस की आशाओं को जीवित रख सकते हैं.”

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने कहा, विश्व की सर्वोपरि प्राथमिकता इस समय कोयला-चालित ऊर्जा संयंत्रों से पीछे हटते हुए, नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने पर होनी चाहिए.

यूएन प्रमुख ने जीवाश्म ईंधनों को दिये जाने वाली सब्सिडी का अन्त करने वाले देशों की सराहना की है. साथ ही ध्यान दिलाया है कि यह समय है, जब सभी देश कार्बन की क़ीमत तय करें और कर (टैक्स) को आय से हटाकर कार्बन पर लगाएँ.

उन्होंने बहुपक्षीय विकास बैन्कों और विकास वित्तीय संस्थाओं के साझाधारकों से आग्रह किया कि उन निम्न-कार्बन, जलवायु-सहनशील विकास के लिये वित्तीय समाधानों की दिशा में प्रयास करना होगा, जोकि पेरिस समझौते में 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य के अनुरूप हैं.  

जलवायु वित्त पोषण

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि विकासशील देशों को वित्तीय पोषण की आवश्यकता होगी – विकासशील जगत में वार्षिक अनुकूलन प्रयासों की क़ीमत 70 अरब डॉलर आँकी गई है, और यह 2030 तक बढ़कर 300 अरब डॉलर हो सकती है.

“मैं दानदाताओं और बहुपक्षीय विकास बैन्कों से अपनी अपील को फिर दोहराता हूँ, यह सुनिश्चित करने के लिये कि कम से कम जलवायु वित्त पोषण का 50 फ़ीसदी, अनुकूलन व सहनक्षमता के लिये हो.”

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि विकासशील देशों के लिये, अनुकूलन मद में वित्तीय संसाधन, कुल जलवायु वित्त पोषण का महज़ 21 फ़ीसदी ही प्रदर्शित करता है.

उन्होंने कहा कि इन निर्धन देशों की मदद के लिये, विकसित देशों को लम्बे समय से चला आ रहा वादा पूरा करना होगा, जिसमें विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई के लिये हर साल 100 अरब डॉलर मुहैया कराने की बात कही गई है.

एंतोनियो गुटेरेश ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक बैठक (कॉप-26) की सफलता, अनुकूलन और वित्तीय मुद्दों पर प्रगति पर टिकी है. यह तात्कालिता और भरोसा जगाने का विषय है.

‘पीटर्सबर्ग जलवायु सम्वाद’ एक वार्षिक बैठक है जिसे जर्मन सरकार वर्ष 2010 से आयोजित करती रही है.

इस कार्यक्रम में मंत्री, शीर्ष कार्यकारी अधिकारी, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों समेत अन्य लोग, कॉप की वार्षिक बैठक की तैयारी के लिये शिरकत करते हैं.

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