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जिंगल बेल-जिंगल बेल….. मैरी क्रिसमस

जिंगल बेल-जिंगल बेल….. मैरी क्रिसमस
December 23
11:20 2018

इनसाईट ऑनलाईन न्यूज

क्रिसमस ईसाईयों का सबसे बड़ा त्योहार है। यह हर वर्ष 25 दिसंबर को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। इसी दिन प्रभु ईसा मसीह या जीसस क्राइस्ट का जन्म हुआ था इसलिए इसे बड़ा दिन भी कहते हैं।

जिंगल बेल-जिंगल बेल..... मैरी क्रिसमस

(Photo : IANS)

लोग 15 दिन पहले से ही क्रिसमस की तैयारियों में जुट जाते हैं। क्रिसमस को लेकर बाजारों की रौनक बढ़ जाती है। घर और बाजार रंगीन रोशनियों से जगमगा उठते हैं। क्रिसमस के कुछ दिन पहले से ही चर्च में विभिन्न कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं जो न्यू ईयर तक चलते रहते हैं।

मसीह गीतों की अंताक्षरी खेली जाती है, विभिन्न प्रकार के गेम्स खेले जाते है, प्रार्थनाएं की जाती हैं आदि। इर्साई समुदाय के लोगों द्वारा अपने घरों की सफाई की जाती है, नए कपड़े खरीदे जाते हैं एवं विभिन्न प्रकार के व्यंजन भी बनाए जाते हैं। इस दिन के लिए विशेष रूप से चर्चों को सजाया जाता है और प्रभु यीशु मसीह की जन्म गाथा को नाटक के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।

जिंगल बेल-जिंगल बेल..... मैरी क्रिसमस

कई जगह क्रिसमस की पूर्व रात्रि, गिरिजाघरों में रात्रिकालीन प्रार्थना सभा की जाती है जो रात के 12 बजे तक चलती है। ठीक 12 बजे लोग अपने प्रियजनों को क्रिसमस की बधाइयां देते हैं और खुशियां मनाते हैं।

ऐसा माना जाता है क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री सजाने की परंपरा जर्मनी से शुरू हुई थी। इसके बाद 19वीं सदी से यह परंपरा इंग्लैंड में पहुंची और वहां से पूरे विश्व में यह परंपरा फैल गई। क्रिसमस ट्री की कहानी प्रभु यीशु मसीह के जन्म से मानी जाती है। जब उनका जन्म हुआ था तब उनके माता-पिता मरियम और जोसेफ को बधाई देने वालो में स्वर्गदूत भी थे। जिन्होंने एक सदाबहार फर को सितारों से जगमगा दिया था।

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इसके बाद से ही सदाबहार क्रिसमस फर के पेड़ को क्रिसमस ट्री के रूप में पहचान मिली। क्रिसमस ट्री की सजावट के लिए लोग ट्री में मोमबत्तियां, टॉफियां, केक, लाइटें आदि लगाते हैं। मान्यता है कि क्रिसमस ट्री सजाने से घर के बच्चों की उम्र बढ़ती है। साथ ही इससे बुरी आत्माएं दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। क्रिसमस के दिन सुबह गिरिजाघरों में विशेष प्राथना सभा होती है।

क्रिसमस पर बच्चों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र होता है सांताक्लॉज, जो लाल और सफेद कपड़ों में बच्चों के लिए ढेर सारे उपहार और चॉकलेट्स लेकर आता है। यह एक काल्पनिक किरदार होता है जिसके प्रति बच्चों का लगाव होता है। ऐसा कहा जाता है कि सांताक्लाज स्वर्ग से आता है और लोगों को मनचाही चीजें उपहार के तौर पर देकर जाता है। यही कारण है कि कुछ लोग सांताक्लाज की वेशभूषा पहन कर बच्चों को भी खुश कर देते हैं।

जिंगल बेल-जिंगल बेल..... मैरी क्रिसमस

क्रिसमस के दिन लोग अपने आंगन में क्रिसमस ट्री लगाते हैं। ट्री विशेष रूप से सजाया जाता है और इसके माध्यम से सभी एक दूसरे को उपहार भी देते हैं। इस त्योहार में केक का विशेष महत्व है।

क्रिसमस के दिन लोग चर्च और अपने घरों में क्रिसमस ट्री को सजाने और केक बनाने का बेहद महत्व है। घर पर आने वाले मेहमानों एवं मिलने-जुलने वाले लोगों को केक खिलाकर मुंह मीठा किया जाता है और क्रिसमस की बधाई दी जाती है।

12 दिनों तक चलता है क्रिसमस का त्योहार

1. पहला दिन 25 दिसबंर: क्रिसमस के पहले दिन से ही इस त्योहार का जश्न शुरू हो जाता है। क्रिश्चियन समुदाय के लोग इस दिन को ईसा मसीह के जन्म दिवस के रूप में मनाते हैं।

2. दूसरा दिन 26 दिसंबर: क्रिसमस के अगले दिन यानी 25 दिसंबर को बॉक्सिंग डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को सेंट स्टीफन डे के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि सेंट स्टीफन पहले ऐसे शख्स थे, जिन्होंने ईसाई धर्म के लिए अपनी जीवन की कुर्बानी दी थी।

3. तीसरा दिन 27 दिसंबर: क्रिसमस का दूसरा दिन सेंट जॉन को समर्पित होता है। ये ईसा मसीह से प्रेरित और उनके मित्र माने जाते हैं।

4. चैथा दिन 28 दिसंबर: इस दिन को लेकर क्रिश्चियन लोगों की मान्यता है कि किंग हीरोद ने ईसा मसीह को ढूंढते समस कई मासूम लोगों को कत्ल कर दिया था। इस दिन उन्हीं मासूम लोगों को याद कर उनके लिए प्राथना की जाती है।

5. पांचवां दिन 29 दिसंबर: ये दिन सेंट थॉमस को समर्पित है। 12वीं सदी में चर्च पर राजा के अधिकार को चुनौती देने पर उन्हें 29 दिसंबर को कत्ल कर दिया गया था। इस दिन क्रिश्चियन समुदाय के लोग उन्हें याद करते हैं।

6. छठा दिन 30 दिसंबर: इस दिन क्रिश्चियन समुदाय के लोग सेंट ईगविन ऑफ वर्सेस्टर को याद करते हैं।

7. सांतवां दिन 31 दिसंबर: पोप सिलवेस्टर ने इस दिन को मनाया था। कई यूरोपियन देशों में न्यू ईयर इव को सिलवेस्टर कहा जाता है। यूके में इस दिन पारंपरिक रूप से गैम्स और खेल-कूद आयोजित किए जाते हैं। इस दिन नए साल से पहले की शाम के रूप में भी मनाया जाता है।

8. आठवां दिन 1 जनवरी: क्रिसमस का आंठवां दिन ईसा मसीह की मां मदर मैरी, जिन्हें मुस्लिम समुदाय के लोग हजरत मरयम कहते हैं, उन्हें समर्पित होता है।

9. नवां दिन 2 जनवरी: इस दिन चैथी सदी के सबसे पहले ईसाई सेंट बसिल द ग्रेट और श्सेंट ग्रेगरी नाजियाजेनश् को याद किया जाता है।

10. दसवां दिन 3 जनवरी: क्रिश्चियन धर्म के लोगों की मान्यता है कि इस दिन ईसा मसीह का नाम रखा गया था। इस दिन चर्च में रौनक देखने को बनती है।

11. ग्यारहवां दिन 4 जनवरी: 18वीं और 19वीं सदी की सेंट एलिजाबेथ अमेरिका की पहली संत थीं। इस दिन उन्हें याद किया जाता है।

12. बारहवां दिन 5 जनवरी: क्रिसमस पर्व का आखिरी दिन होता है। इस दिन को एपीफेनी भी कहा जाता है। यह दिन अमेरिका के पहले बीशप सेंट जॉन न्यूमन को समर्पित है।

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