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झारखंड की जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार हमले हुए : कांग्रेस

झारखंड की जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार हमले हुए : कांग्रेस
April 22
17:57 2019

रांची, 22 अप्रैल (हि.स.)।
कांग्रेस ने कहा है कि पिछले पांच वर्षों में भाजपा सरकार द्वारा झारखंड की जनता के लोकतांत्रिक अधिकाराेंं पर हमले हुए हैं। भूख से मौतें सामाजिक-आर्थिक अधिकारों का हनन, भीड़ तंत्र द्वारा लोगों की हत्याएं, आदिवासियों, दलितों, अल्पसंख्यकों तथा महिलाओं पर बढ़ती हिंसा, सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रताड़ना, किसानों की आत्महत्याऐं ये झारखण्ड की पहचान बन गयी है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता रांजीव रंजन प्रसाद ने सोमवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी और रघुवर दास द्वारा झारखण्डियों पर किये गये अत्याचारों पर आज राज्य की जनता के सवालों का जवाब भाजपा को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षां में राज्य में कम से कम 19 मौंतें भूख से हुई हैं। अधिकांश परिवार विभिन्न कारणों से जन वितरण प्रणाली से मिलने वाली अनाज से वंचित थे, कुछ एकल महिलाऐं व वृद्ध सामाजिक सुरक्षा पेंशन से वंचित थे। कई महीनों से नरेगा में भी काम नहीं मिला था। उन्होंने कहा कि सामाजिक-आर्थिक अधिकारों पर आधार का प्रहार भाजपा सरकार ने जन-कल्याणकारी योजनाओं में आधार को अनिवार्य बनाकर करोड़ो लोगों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया है। आधार लिंकिंग न होने के कारण लाखों राशन कार्डों, नरेगा के जॉब कार्डों व सामाजिक सुरक्षा पेंशन को रद्द कर दिया गया। इसके कारण बड़े पैमाने पर लोग अपने भोजन, काम, पेंशन के अधिकारों से वंचित हो गये। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 11.64 लाख राशन कार्ड, तीन लाख से अधिक जॉब कार्ड एवं तीन लाख पेंशनधारियों को योजना सूची से हटाया गया। बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण व्यवस्था (पॉस मशीन की विफलता के कारण) राज्य के लाखों राशनकार्डधारी सस्ते अनाज से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कम से कम 17 लाख वृद्ध, विधवा और विकलांग सामाजिक सुरक्षा पेंशन से वंचित हैं। मोदी सरकार ने पिछले पांच सालों में नरेगा मजदूरी दर में न के बराबर बढ़ोतरी की। झारखण्ड की नरेगा मजदूरी राज्य की न्यूनतम मजदूरी से 71 रूपये कम है।
प्रसाद ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में कम से कम 11 व्यक्तियों (नौ अल्पसंख्यकों और दो आदिवासियों) की गौ संरक्षण जैसे साम्प्रदायिक मुद्दों पर भीड़ द्वारा पिटाई व हत्या की गयी है। अधिकांश मामलों में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर कई सवाल रहे हैं। कार्यवाई करने बजाय भाजपा के नेताओं द्वारा लिंचिंग करने वालों को सम्मानित किया गया। भाजपा राज में लगातार आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों पर दमन बढ़ा है। साथ ही धर्म के नाम पर झारखण्डी समाज व विभिन्न धर्मों के बीच अशांति व हिंसा फैलाने के अनेक प्रयास हुए हैं। क्या भाजपा सरकार के पास जनता के इन सवालों का कोई जवाब है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही भूमि अधिग्रहण कानून को कमजोर करने की कई कोशिश की। संसद में असफल होने के बाद रघुवर दास की सरकार ने राज्य में इस कानून को संशोधित कर ग्रामसभा की सहमति की आवश्यकता को समाप्त कर दिया। साथ ही राज्य के सीएनटी-एसपीटी कानूनों में भी संशोधन की कई कोशिशें की। ग्राम सभाओं की जमीनों को बिना उनकी सहमति के लैंड बैंक में शामिल किया जा रहा है। भाजपा सरकार झारखण्ड के दिल को चीड़ कर जल, जंगल, जमीन को कारपोरेट घरानों के हवाले करने की कोशिश करती रही। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है गोड्डा में अडानी परियोजना, जहां आदिवासियों व मूलवासियों की सहमति के बिना उनकी जमीन छीन ली गयी। क्या भाजपा सरकार के पास जनता के इन सवालों का कोई जवाब है।

हिन्दुस्थान समाचार

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