Latest News Site

News

झारखंड में अपनी दुर्दशा के लिए कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व दोषी

झारखंड में अपनी दुर्दशा के लिए कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व दोषी
September 19
10:24 2019

पहली बार दर्दनाक चोटें झेलने के बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को झारखंड कांग्रेस के प्रति सद्बुद्धि हुई।

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ डेस्क 

पूर्व काल में सत्ता के नशे में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व धन और जाति बल के आधार पर पार्टी में पदों और सीटों का वितरण करता रहा। शीर्ष नेतृत्व में सौदेबाजों का बोलबाला रहा है। वही प्रक्रिया यूपीए-1 और यूपीए-2 और उसके बाद भी कांग्रेस द्वारा अपनाई जाती रही।

तात्पर्य यह है कि अपनी खिसकती जमीन और टूटते समीकरण की वजह का विश्लेषण किये बिना शीर्ष नेतृत्व द्वारा समर्पित एवं ठोस कांग्रेसियों की अनदेखी कर दूसरे दलों से आये नेताओं को तत्काल तरर्जीह देना और प्रमुख पदों पर स्थापित कर देना ही आज के समय में झारखंड में कांग्रेस की दुर्दशा का मुख्य कारण है।

पिछले दिनों में जब किसी सरना आदिवासी को अध्यक्ष बनाने की बात थी जिसके विषय में पार्टी के समर्पित जानकार नेता ने पार्टी के एक समर्पित जानकार नेता ने बहुत से पत्राचार के माध्यम से पार्टी को सुझाया था कि सरना आदिवासी समाज से पार्टी के अध्यक्ष का चयन होना चाहिए। इस तरह के सुझाव का उचित प्रभाव तो हुआ पर पार्टी ने भाजपा की नीति के प्रति झुकाव वाले आदिवासी नेता सुखदेव भगत को अध्यक्ष की कमान थमा दी।

इसके विषय में पार्टी को आगाह भी किया गया पर शीर्ष नेतृत्व आंख और कान दोनों बंद कर अपने प्रर्वेक्षकों की ओर देखता रह गया। परिणाम यह हुआ कि अध्यक्ष अपने लिए ही काम करते रह गये और पार्टी की लोकसभा तथा विधानसभा में खूब दुगर्ति करा दी और अब चर्चा है कि वह भाजपा में शामिल होंगे।

शीर्ष नेतृत्व के पास पुराने निष्ठावान कांग्रेसियों जो नीति और कार्यक्रम के आधार पर कांग्रेस के जुड़े रहते हैं लगता है उनकी कोई सूची नहीं है और ना ही उनके प्रति कोई झुकाव है कि उनसे भी सुझाव लिया जाये। दुर्दशा की कड़ी में तब फिर एक नई कड़ी जुड़ गई जब पार्टी ने डाॅ. अजय कुमार को एकाएक झारखंड अध्यक्ष की कमान पिछले लोकसभा चुनाव के पहले थमा दी। यह सर्वविदित है कि जेवीएम से धोखेबाजी करके वह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की परिक्रमा करने लगे।

शीर्ष नेतृत्व न बिना छानबीन किये उन्हें भार सौंपा और उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी के धन का भी काफी दुरूपयोग किया जिससे कार्यकर्ताओं की भी दुर्दशा हुई। पार्टी में यह सर्वविदित है।

डाॅ. अजय कुमार जमशेदपुर से चुनाव लड़ना चहते हैं और इस कड़ी में झारखंड के मुख्यमंत्री की काफी परिक्रमा करते रहें। वहां दाल नहीं गलने पर एक हास्यास्पद दलबदलू कर अपने आप को स्थापित करते हुए आम आदमी पार्टी में आज शामिल हो गये। यह कांग्रेस के शीर्ष नेताओं कीे उपलब्धि का उदाहरण है। आज भी सुधार की दिशा में बहुत ठोस पार्टी के हित में कदम उठाने से गुरेज कर रहे हैं शीर्ष नेतागण।

पहली बार उपरोक्त दर्दनाक चोटें झेलने के बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को झारखंड कांग्रेस के प्रति सद्बुद्धि हुई।

सद्बुद्धि

डाॅ. रामेश्वर उरांव को झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष की कमान देकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अभी यह सिद्ध किया कि पार्टी अब डाॅ. रामेश्वर उरांव जैसे निष्ठावान और समर्पित कांग्रेसी को ही प्राथमिकता दे दी।

संक्षेप में डाॅ. रामेश्वर उरांव जो झारखंड पुलिस के शीर्ष पद पर थे आपने साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। चूंकि उनको कांग्रेस की नीतियों पर पूर्ण आस्था थी।

उस समय लगभग सभी सेवानिवृत नौकरशाह एक के बाद एक भाजपा में जा रहे थे और पूरे देश में साईनिंग इंडिया की बयार बह रही थी। उस बयार को दरकिनार करते हुये कांग्रेस में शामिल होने वाले योद्धा थे डाॅ. रामेश्वर उरांव। लगता है शीर्ष नेतृत्व इस कहावत को चरितार्थ कर रहा है कि बहुत देर से आये लेकिन दुरूस्त आयें। उम्मीद है कि डाॅ. उरांव के नेतृत्व में कांग्रेस के कुछ अच्छे दिन झारखंड में आयेंगे।

दूसरे दल से कांग्रेस में आये तरजीह पाने वालों में सुबोधकांत सहाय का भी नाम लिया जाता है।  धन्य है कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व।

यहां यह भी गौरतबल है कि आज भी कांग्रेस में वरिष्ठ नेता के रूप में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत का इतिहास गैरकांग्रेसी का है। उनकी  राजनीति में उत्पति जनता पार्टी से हुई।

चंद्रशेखर के साथ रहकर लाभ उठाया। फिर उन्हें धोखा देकर भटकते रहे। वर्षो बाद कांग्रेस से जुड़े लेकिन अब कांग्रेस को धोखा देकर कांग्रेस की नहीं कांग्रेस में सुबोधकांत की राजनीति चला रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान को अब तो चेत ही जाना होगा। कहते तो यही है कि झारखंड कांग्रेस में सुबोधकांत कांग्रेस का गठन भी पार्टी की दुर्दशा में एक और कारण है।

झारखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार ‘आप’ में शामिल

कांग्रेस : माझी जब नाव डुबोये, उसे कौन बचाये

झारखंड वि.स. चुनाव पूर्व भाजपा में शामिल होंगे कांग्रेस विधायक मनोज, सुखदेव भगत, बादल पत्रलेख और बिट्टू सिंह ?

 

TBZ
Annie’s Closet
G.E.L Shop Association
kallu
Novelty Fashion Mall
Fly Kitchen
Harsha Plastics
Status
Akash
Swastik Tiles
Reshika Boutique
Paul Opticals
Metro Glass
Krsna Restaurant
Motilal Oswal
Chotanagpur Handloom
Kamalia Sales
Home Essentials
Raymond

About Author

admin_news

admin_news

Related Articles

0 Comments

No Comments Yet!

There are no comments at the moment, do you want to add one?

Write a comment

Only registered users can comment.

Sponsored Ad

SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS SPONSORED ADS

LATEST ARTICLES

    Hungry Indian gaming creators arrive on YouTube’s global map

Hungry Indian gaming creators arrive on YouTube’s global map

Read Full Article