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झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: 98 प्रतिशत अल्पसंख्यक गठबंधन के साथ ही जायेंगे

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: 98 प्रतिशत अल्पसंख्यक गठबंधन के साथ ही जायेंगे
December 07
09:43 2019
  • महागठबंधन यदि मत विभाजन रोक पाया तो भाजपा जिसे 2009 में 18 सीटें मिली थी कहीं उसी स्थिति में न पहुंच जाये

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ से रोशी की रिपोर्ट

झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में लगभग 28-30 विधानसभा क्षेत्रों में अल्पसंख्यक मतों का विशेष प्रभाव है और उनमें लगभग 24 विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों की जीत-हार की निर्णायक भूमिका में है।

लोकसभा चुनाव में जहां एक-एक क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र होते हैं उसमें अल्पसंख्यक मत एकआध क्षेत्र में ही निर्णायक भूमिका निभा पाते हैं क्योंकि दायरा बहुत बड़ा होता है। वहीं विधानसभा क्षेत्र का दायरा छोटा होता है और उन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक मत 15 से 20 प्रतिशत के अंदर होते हैं। यदि उनका मतदान 80 प्रतिशत के लगभग किसी एक दल के पक्ष में हो जाता है तो वह निर्णायक भूमिका में आ जाते हैं।

वर्तमान झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में एक ओर भाजपा और दूसरी ओर झामुमो, कांग्रेस और राजद गठबंधन आमने-सामने दिखाई देते हैं। अल्पसंख्यक मतों का इस चुनाव में पूर्णतः ध्रुवीकरण दिखाई देता है और परंपरागत अल्पसंख्यक मत भाजपा विरोधी रहे हैं। एकआध क्षेत्र को छोड़कर अल्पसंख्यक मतों के बिखराव की संभावना क्षीन नजर आती है।

गठबंधन और भाजपा के साथ-साथ जेवीएम एवं आजसू भी बड़ा मोर्चा खोलकर विधानसभा की लगभग सभी सीटों पर अपनी किस्मत अजमा रहे हैं और अपनी चुनावी घोषणाओं में अल्पसंख्यकों के लिए भी लुभावने वादे कर रहे हैं। पूर्व में अल्पसंख्यकों के मत से जीते जेवीएम के कुद उम्मीदवार भाजपा में सरीक हो गये हैं। वहीं अल्पसंख्यक मत बिलकुल सचेत हैं और महसूस करते हैं कि आजसू, भाजपा की बी टीम के रूप में चुनावी मैदान में जोर-शोर और धन-बल से मौजूद हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के आम मतदाता एवं अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाता भी बहुत ही जागरूक हैं। यहां तक कि जातीय उम्मीदवार जो वोटकटवा दलों से खड़े हैं उनसे भी काफी दूरी बनाये हुये हैं।
आकलन और संभावनाएं बिल्कुल स्पष्ट हैं कि 98 प्रतिशत अल्पसंख्यक मतदाता झामुमो, कांग्रेस और राजद गठबंधन के साथ ही जायेंगे। इनसाईट ऑनलाइन न्यूज ने झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 के भाग-02 में बिखरने और बंटने की जो संभावना व्यक्त की थी वह चुनाव के पूर्व की थी। जैसे-जैसे चुनाव होते जा रहे हैं, स्थिति साफ हो रही है। हमारे पयर्वेक्षकों के अनुसार, अल्पसंख्यक मत प्रथम चरण से ही एक मुश्त गठबंधन को प्राप्त हुये हैं और अगले चरणों में भी यही स्थिति बरकरार रहेगी।

अल्पसंख्यकों के साथ-साथ आदिवासी क्षेत्रों में भी संभावनाएं और आकलन बताते हैं कि मतों का भारी रूझान गठबंधन की तरफ रहा है।

2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सिर्फ 18 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। वर्तमान में भाजपा की रणनीति में विभिन्न दलों से कद्दावर नेताओं को तोड़कर टिकट देना उनकी कमजोरी को उजागर करता है और अपने संगठन की मौलिक क्षमता पर प्रश्न चिह्न लगाता है।

कांग्रेस अभी झारखंड में बहुत कमजोर संगठन वाली पार्टी है लेकिन बहुत पुरानी पार्टी होने के कारण आज भी अलग-अलग क्षेत्रों में उसकी जड़ें काफी मजबूत है। अपनी रणनीति के तहत झारखंड की मजबूत संगठन वाली स्थानीय पार्टी जेएमएम से गठबंधन कर मतों के बिखराव को रोकने का काम किया है जो गठबंधन के पक्ष में जायेगा। 2009 में लगभग यही स्थिति थी और मत विभाजन नहीं हो पाया और भाजपा 18 सीटों पर सिमट कर रह गई।

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