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झारखण्ड सरकार पर भी कब्जे की भापजा की मंत्रणा जारी ?

झारखण्ड सरकार पर भी कब्जे की भापजा की मंत्रणा जारी ?
July 13
15:16 2020

कर्नाटक और मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के बाद भाजपा का रूख राजस्थान और झारखण्ड की ओर!

Insightonlinenews Team

भाजपा को दल-बदल करा कर सरकार गिराने और बनाने में जो कर्नाटक और मध्यप्रदेश में सफलता मिली है उसी कड़ी में बहुत समय से राजस्थान पर टकटकी लगायेे भाजपा ने अपना खेल शुरू कर दिया। भाजपा की अंदरूनी चाल ने राजस्थान सरकार को जहां एक तरफ अस्थिर कर दिया है वहीं सरकार बचाने की मुहिम में पूरी कांग्रेस पार्टी को ताकत लगाने के लिए झोंक दिया है। समाचारों का विश्लेषण करने पर लगता है कि संकट से उभर पाना कांग्रेस की राजस्थान में लगभग दो साल पुरानी सरकार को कठिन होगा। राजस्थान में तोड़-फोड़ के बाद यदि भाजपा की सरकार बनती है तो भाजपा की तीसरी बड़ी राजनीतिक जीत होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान के बादझारखण्ड की बारी है और इस बारी का निर्णय बिहार चुनाव के नतीजे करेंगे! वैसे भी टकटकी लगाये भाजपा की नजर झारखण्ड पर है और तर्क-वितर्क जेएमएम, कांग्रेस और राजद गठबंधन की सरकार के बनने के तीन माह के बाद से ही दिये जा रहे हैं।

  • झारखण्ड खनिज संपदाओं से भरपूर है और यहां बड़े-बड़े उद्योगपतियों का व्यवसाय दांव पर है या रहता है। केंद्र की सरकार को प्रदेश की सरकार से तालमेल रखने में सुविधा होती है जब दोनों सरकारें एक ही पार्टी की हो। केंद्र की भाजपा के लिए झारखण्ड में भाजपा सरकार का न होना कभी भी गंवारा नहीं।

झारखण्ड में निवर्तमान गठबंधन सरकार को 81 विधानसभा सीटों में जहां बहुमत के लिए 42 विधायकों की आवश्यकता है, गठबंधन सरकार के पास 50 सीटों के साथ बहुमत से 8 सीटें ज्यादा हैं। झारखण्ड में 2019 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा के पास कोई बड़ा आदिवासी नेता या चेहरा नहीं होने के कारण सत्ता से बाहर होना पड़ा। भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने बहुत दूर की कौड़ी खेलते हुए एक पुराने अनुभवी आदिवासी नेता और पूर्व में रहें प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को पार्टी में शामिल कर विधायक दल का नेता घोषित कर दिया।

धीरे-धीरे गठबंधन की सरकार गिराने की मुहिम की ओर बढ़ते हुए भाजपा ने बाबूलाल के प्रयोग से राज्यसभा चुनाव में 31 मत बटोरकर झारखण्ड की राजनीति को नया मोड़ देकर अचंभित कर दिया। बिहार विधानसभा के साथ झारखण्ड में दो रिक्त विधानसभा बेरमो एवं दुमका में भी उपचुनाव होने निश्चित हैं इसमें भी गठबंधन और भाजपा दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर है।

अभी की परिस्थिति में झारखण्ड में भाजपा के पास एक बड़ा आदिवासी चेहरा है, बिहार विधानसभा चुनाव के बाद यदि परिस्थिति भाजपा के पक्ष में बनती है तो भाजपा को झारखण्ड में सरकार बनाने की मुहिम में बल मिलेगा। राज्यसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार भाजपा को 31 विधायकों का समर्थन है और गठबंधन को 50 विधायकों का समर्थन है। झारखण्ड सरकार को अल्पमत में पहुंचाने के लिए भाजपा को कम से कम 11 सदस्यों का समर्थन जुटाना होगा।

भाजपा अभी देश में बहुत समृद्ध एवं शक्तिशाली स्थिति में है तथा झारखण्ड में अपनी सरकार बनाने के लिए हर तरह से परिपूर्ण है। कुछ जानकारों का मानना है कि भाजपा 11 से भी बहुत अधिक सदस्यों को तोड़ने में कामयाब हो सकती है। चर्चा है कि नवंबर-दिसंबर तक भाजपा अपने पत्ते खोलेगी।

झारखण्ड में गठबंधन सरकार के सभी सहयोगियों के लिए हमेशा सतर्क रहने की आवश्यकता है। राजनीति में सत्ता और अन्य लोभ को बेविचार नहीं कहा जाता। झारखण्ड के नेताओं को देश के उन दिग्गज नेताओं जिन्होंने पार्टी की निष्ठा को दरकिनार कर सरकार गिराने का कुछ प्रदेशों में जो काम किया है या कर रहे हैं से प्रेरणा मिलेगी!

बाबूलाल मरांडी भाजपा एवं झारखंड में अतिप्रभावशाली नेता के रूप में उभरे

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Prashant Kumar

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