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झारखण्ड में मिशनरियों एवं चर्चों के विरूद्ध ‘भूमि-हड़प’ का आरोप राजनीति से प्रेरित: डाॅ. रामेश्वर उराॅंव

झारखण्ड में मिशनरियों एवं चर्चों के विरूद्ध ‘भूमि-हड़प’ का आरोप राजनीति से प्रेरित: डाॅ. रामेश्वर उराॅंव
July 10
08:34 2019

श्री उराॅंव ने कहा कि यदि सरकार आदिवासियों की हितैषी है तो निश्चित

रूप से राजनीति को छोड़कर जमीन वापसी के फैसलों पर अमल करें।

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ 

रास्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डाॅ रामेश्वर उराॅंव ने झारखण्ड में आदिवासी एवं गैरमजरूआ भूमि पर चर्च एवं मिशनरी संगठनों द्वारा अवैध तरीके से कब्जा किये जाने के आरोप पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है और इससे झारखण्ड में आदिवासियों की ‘भूमि-हड़प’ मामले का कतई निदान नहीं होने वाला है।

श्री उराॅंव ने ‘इनसाइट ऑनलाइन  न्यूज’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि यह सत्य है कि संयुक्त बिहार-झारखण्ड काल से ही आदिवासियों की भूमि पर कब्जा कर उन्हें विस्थापित करने का जो सिलसिला और षडयंत्र शुरू हुआ, वह आज तक जारी है। गांवों की कौन कहे राॅंची शहर से भी आदिवासी अपनी भूमि खोकर पलायन कर गए हैं।

उन्होंने कहा कि महज क्रिश्चियन-मिशनरियों एवं चर्चों के विरूद्ध आदिवासी-भूमि हड़पने का आरोप लगाने से मूल समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। इस तरह की कथित लूट में सभी तरह के लोग शामिल हैं।

उन्होंने संदर्भ के साथ कहा कि यहां पहले से आदिवासियों की लाखों एकड़ भूमि हड़पी गयी है। जबकि आज किसी एक धर्म को चिन्हित कर उसे भूमि-हड़प के लिए आरोपित किया जा रहा है। यहां तक कि जनजाति समाज के किसी व्यक्ति विशेष को भी चिन्हित कर जमीन हड़पने का आरोप लगाया जा रहा है। जबकि आदिवासियों की भूमि लूट और भूमि वापसी के लिए गठित एस.ए. आर. कोर्ट से भारी मात्रा में फैसले हो चुके हैं, लेकिन जमीन वापसी नहीं हुई है।

श्री उरांव ने कहा कि ‘भूमि-हड़प’ में शामिल चाहे जिसके विरूद्ध न्यायिक फैसला हुआ है उसके विरूद्ध कार्रवाई होनी ही चाहिए।

श्री उराॅंव ने अपने बयान में कहा कि झारखण्ड एक आदिवासी बहुल प्रदेश है। शिड्युल क्षेत्रों में जनजातियों की बहुलता है। यह भी सत्य है कि शुरू से ही आदिवासियों की जमीन सभी वर्गो, धर्मों एवं समुदायों के लोग हड़पते रहे हैं। विभिन्न सरकारों ने जिनमें ब्रिटिश सरकार भी शामिल है, आदिवासियों की भूमि के हस्तांतरण को रोकने के लिए कानून बनाया, जिनमें छोटानागपुर काश्तकारी कानून एवं संताल परगना काश्तकारी कानून आज तक लागू है।

बावजूद इसके जमीनों की लूट आज भी बदस्तूर जारी है। व्यक्ति ही नहीं सरकारों ने विभिन्न दलों की लोतांत्रिक सरकारों ने भी भूमि अधिग्रहण के नाम पर आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल किया, जिसके अनेकानेक उदाहरण हैं। बिहार सरकार ने 1969 में जमीन वापसी का भी कानून बनाया।

कोर्ट बहाल किए गये। वहां से फैसले भी हुए। लेकिन दावे के साथ हम यह कह सकते हैं कि सरकारों ने जमीन वापसी का काम ईमानदारी से नहीं किया। एक आंकड़े के अनुसार सिर्फ रांची जिले में आदिवासियों की भूमि वापसी से संबंधित लगभग एक हजार ऐसे फैसले थे जिसे शासन को तुरन्त लागु कर देना था। क्या ये फैसले लागू हुए? उत्तर होगा -नहीं

वर्तमान सरकार ने भी अपने कार्यकाल के शुरू में एक समिति का गठन किया था जिसने आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण का अध्ययन किया था। समिति ने अध्ययन कर किया और रिपोर्ट सरकार को सौंपी, लेकिन उस रिपोर्ट का क्या हुआ, पता नहीं। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की मंशा आदिवासियों की जमीन वापसी का नहीं बल्कि राजनीति करने की है।

मिशनरियों एवं चर्चों द्वारा आदिवासी भूमि एवं गैर मजरूआ भूमि हड़पने के विरूद्ध जो जांच की बात अखबारों में आ रही है, वह महज राजनीतिक हैं, आदिवासियों के हित की बात नहीं है।

श्री उरांव वर्तमान सरकार से अपील हॅॅं कि सरकार सर्वप्रथम आदिवासियों की लूटी गई जमीन की वापसी से सम्बद्ध उन फैसलों को लागू करे जो सम्बन्धित अदालतों द्वारा लागू किए गए हैं। जब सरकार ऐसा करेगी तभी आदिवासी यह समझेंगे कि सरकार उनकी हितैषी है।

श्री उराॅंव ने कहा कि यदि सरकार आदिवासियों की हितैषी है तो निश्चित रूप से राजनीति को छोड़कर जमीन वापसी के फैसलों पर अमल करें।

उन्होंने झारखंड सरकार से अपील की है कि वह प्रधानमंत्री का नारा ‘सबका साथ-सबका विकास’ ‘सबका विश्वास’ को नहीं तोड़ें। विशेष रूप से झारखण्ड में इसकी जरूरत है। व्यक्ति विशेष, धर्म विशेष, समुदाय विशेष या जाति विशेष को एकल निशान पर लेकर कार्रवाई और जांच का अभियान चलाने से निश्चित रूप से आपत्ति होगी, आंदोलन होंगे और अराजकता फैलेगी। इससे सरकार से सबका विश्वास भी भंग होगा।

रास्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डाॅ रामेश्वर उराॅंव ने झारखण्ड में ऐसी स्थिति नहीं पैदा होने देने के लिए न केवल झारखण्ड सरकार बल्कि केंद्र सरकार को भी आगाह किया है।

भूमि स्वामित्व मामला: मिशनरी पर एकतरफा कार्रवाई पर आपत्ति: झारखंड क्रिश्चियन यूथ एसोसिएशन

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