टिकाऊ विकास, ग़रीबी उन्मूलन व शान्ति के लिये अफ़्रीका है अहम

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार, 25 मई, को अफ़्रीका दिवस के अवसर पर, महाद्वीप की समृद्ध, वैविध्यपूर्ण सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासत को टिकाऊ विकास, निर्धनता उन्मूलन, और शान्ति निर्माण के लिये बेहद अहम क़रार दिया है.

यूएन प्रमुख ने अपने सन्देश में कहा कि इस वर्ष अफ़्रीका दिवस, कला, संस्कृति और विरासत के माध्यम से, अपेक्षाओं के अनुरूप अफ़्रीका का निर्माण करने का अवसर दर्शाता है.

#COVID19 has exposed deep-seated inequalities and endangered hard-won development gains throughout Africa and beyond.On this Africa Day, I renew my call to developed nations to stand in solidarity with the continent.— António Guterres (@antonioguterres) May 25, 2021

अफ़्रीका दिवस, वर्ष 1963 में अफ़्रीकी एकता संगठन (Organization of African Unity) की स्थापना को प्रदर्शित करता है, जिसे अब अफ़्रीकी संघ (African Union) के रूप में जाना जाता है.
यह अन्तरराष्ट्रीय दिवस, अफ़्रीकी महाद्वीप की सरकारों व जनता के लिये, चुनौतियों व उपलब्धियों पर चिन्तन व मनन का एक वार्षिक अवसर है.  
यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी ने गहराई तक समाई विषमताओं व निर्बलताओं का उजागर किया है.
मौजूदा संकट से अफ़्रीका और उससे परे भी, मेहनत से हासिल की गई प्रगति पर संकट मंडरा रहा है.
वैश्विक महामारी ने उन वजहों को हवा दी है जिससे अक्सर हिंसक संघर्ष व टकराव पनपते हैं, और अनेक देशों में शासन व्यवस्था के नाज़ुक हालात उजागर हो रहे हैं.
बहुत से देशों के लिये स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, बिजली, जल और साफ़-सफ़ाई जैसी बुनियादी सेवाओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है.
जलवायु संकट ने महामारी के असर को और भी ज़्यादा पैना किया है, जिससे विषमतापूर्ण ढँग से विकासशील देश अधिक प्रभावित हुए हैं.  
महासचिव ने क्षोभ जताया कि देशों के बीच, वैक्सीन वितरण में गहरा असन्तुलन है और ताज़ा आँकड़े दर्शाते हैं कि अफ़्रीकी देशों को कुल वैक्सीनों का महज़ दो प्रतिशत ही मिल पाया है.
उन्होंने महामारी का अन्त करने, आर्थिक पुनर्बहाली को सहारा देने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिये, कोविड-19 वैक्सीन की न्यायोचित व सार्वभौमिक सुलभता का आहवान किया है.
आर्थिक विकास का आहवान
महासचिव ने ज़ोर देकर कहा कि अफ़्रीका दिवस, समावेशी आर्थिक प्रगति की एक मज़बूत नींव को प्रदान करने का अवसर साबित हो सकता है.
“इस अफ़्रीका दिवस पर, मैं अफ़्रीका के साथ एकजुटता से खड़े होने विकसित देशों के नाम अपनी अपील को नए सिरे से जारी करता हूँ.”
यूएन उपमहासचिव और नाइजीरियाई सरकार में पूर्व वरिष्ठ मंत्री, आमिना मोहम्मद ने कहा कि यह दिवस एक ऐसे मुश्किल समय में आया है जब दुनिया कोविड-19 महामारी और अफ़्रीका पर उसके असर से निपटने में जुटी है.
उन्होंने चिन्ता जताई कि अफ़्रीका में आर्थिक प्रगति की दर में कमी आई है, और इसके इस वर्ष तीन प्रतिशत रहने का अनुमान है, जोकि विश्व औसत का लगभग आधा है.
उन्होंने ध्यान दिलाया कि विश्व नेताओं को अफ्रीकी संघ के साझीदारों को समर्थन देना जारी रखना होगा.
यूएन उपप्रमुख ने अफ़्रीकी नेताओं से सुशासन को बढ़ावा देने, भ्रष्टाचार का मुक़ाबला करने और अफ़्रीका के युवाओं को समर्थन सुनिश्चित किये जाने की अपील की है., संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार, 25 मई, को अफ़्रीका दिवस के अवसर पर, महाद्वीप की समृद्ध, वैविध्यपूर्ण सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासत को टिकाऊ विकास, निर्धनता उन्मूलन, और शान्ति निर्माण के लिये बेहद अहम क़रार दिया है.

यूएन प्रमुख ने अपने सन्देश में कहा कि इस वर्ष अफ़्रीका दिवस, कला, संस्कृति और विरासत के माध्यम से, अपेक्षाओं के अनुरूप अफ़्रीका का निर्माण करने का अवसर दर्शाता है.

#COVID19 has exposed deep-seated inequalities and endangered hard-won development gains throughout Africa and beyond.

On this Africa Day, I renew my call to developed nations to stand in solidarity with the continent.

— António Guterres (@antonioguterres) May 25, 2021

अफ़्रीका दिवस, वर्ष 1963 में अफ़्रीकी एकता संगठन (Organization of African Unity) की स्थापना को प्रदर्शित करता है, जिसे अब अफ़्रीकी संघ (African Union) के रूप में जाना जाता है.

यह अन्तरराष्ट्रीय दिवस, अफ़्रीकी महाद्वीप की सरकारों व जनता के लिये, चुनौतियों व उपलब्धियों पर चिन्तन व मनन का एक वार्षिक अवसर है.  

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी ने गहराई तक समाई विषमताओं व निर्बलताओं का उजागर किया है.

मौजूदा संकट से अफ़्रीका और उससे परे भी, मेहनत से हासिल की गई प्रगति पर संकट मंडरा रहा है.

वैश्विक महामारी ने उन वजहों को हवा दी है जिससे अक्सर हिंसक संघर्ष व टकराव पनपते हैं, और अनेक देशों में शासन व्यवस्था के नाज़ुक हालात उजागर हो रहे हैं.

बहुत से देशों के लिये स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, बिजली, जल और साफ़-सफ़ाई जैसी बुनियादी सेवाओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है.

जलवायु संकट ने महामारी के असर को और भी ज़्यादा पैना किया है, जिससे विषमतापूर्ण ढँग से विकासशील देश अधिक प्रभावित हुए हैं.  
महासचिव ने क्षोभ जताया कि देशों के बीच, वैक्सीन वितरण में गहरा असन्तुलन है और ताज़ा आँकड़े दर्शाते हैं कि अफ़्रीकी देशों को कुल वैक्सीनों का महज़ दो प्रतिशत ही मिल पाया है.

उन्होंने महामारी का अन्त करने, आर्थिक पुनर्बहाली को सहारा देने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिये, कोविड-19 वैक्सीन की न्यायोचित व सार्वभौमिक सुलभता का आहवान किया है.

आर्थिक विकास का आहवान

महासचिव ने ज़ोर देकर कहा कि अफ़्रीका दिवस, समावेशी आर्थिक प्रगति की एक मज़बूत नींव को प्रदान करने का अवसर साबित हो सकता है.

“इस अफ़्रीका दिवस पर, मैं अफ़्रीका के साथ एकजुटता से खड़े होने विकसित देशों के नाम अपनी अपील को नए सिरे से जारी करता हूँ.”

यूएन उपमहासचिव और नाइजीरियाई सरकार में पूर्व वरिष्ठ मंत्री, आमिना मोहम्मद ने कहा कि यह दिवस एक ऐसे मुश्किल समय में आया है जब दुनिया कोविड-19 महामारी और अफ़्रीका पर उसके असर से निपटने में जुटी है.

उन्होंने चिन्ता जताई कि अफ़्रीका में आर्थिक प्रगति की दर में कमी आई है, और इसके इस वर्ष तीन प्रतिशत रहने का अनुमान है, जोकि विश्व औसत का लगभग आधा है.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि विश्व नेताओं को अफ्रीकी संघ के साझीदारों को समर्थन देना जारी रखना होगा.

यूएन उपप्रमुख ने अफ़्रीकी नेताओं से सुशासन को बढ़ावा देने, भ्रष्टाचार का मुक़ाबला करने और अफ़्रीका के युवाओं को समर्थन सुनिश्चित किये जाने की अपील की है.

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