टिकाऊ विकास व भावी पीढ़ियों के लिये महासागरों की स्वास्थ्य-रक्षा की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चिन्ता जताई है कि बढ़ते प्रदूषण व तापमान और हद से ज़्यादा मछलियाँ पकड़े जाने से महासागर और जैवविविधता पर भीषण असर हो रहा है. उन्होंने इस वर्ष, ‘विश्व महासागर दिवस’ पर अपने सन्देश में आगाह किया है कि कोविड-19 महामारी से पुनर्बहाली प्रयासों में, प्रकृति के विरुद्ध युद्ध का अन्त और भावी पीढ़ियों की भलाई के लिये महासागरों का स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जाना होगा.  

विश्व महासागर दिवस, हर वर्ष 8 जून को मनाया जाता है और यह दैनिक जीवन, भोजन, आजीविका सहित अन्य ज़रूरतों को पूरा करने में महासागरों की भूमिका को रेखांकित करता है.
तीन अरब से अधिक लोग अपनी आजीविका के लिये महासागर पर निर्भर हैं, जिनमें से ज़्यादातर विकासशील देशों में हैं.
इस वर्ष की थीम है, “महासागर: जीवन एवँ आजीविका,” जो दुनिया भर के समुदायों के सांस्कृतिक जीवन और आर्थिक अस्तित्व के लिये, महासागरों के महत्व को रेखांकित करती है.
हाल ही में जारी विश्व महासागरीय आकलन से यह पुष्टि हुई है कि दुनिया के महासागर, मानवता को जो लाभ प्रदान करते हैं, वे मानवीय गतिविधियों से घटते जा रहे हैं

महासचिव ने क्षोभ जताते हुए कहा, “हमारे समुद्रों में प्लास्टिक कचरा भरा पड़ा है, जो दूर-दराज़ के प्रवाल द्वीपों से लेकर सबसे गहरी समुद्री खाइयों तक में देखा जा सकता है.”
उन्होंने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि हद से ज़्यादा मछली पकड़े जाने से, कुल लाभ में लगभग 90 अरब डॉलर का वार्षिक नुक़सान हो रहा है.
इससे उन महिलाओं की निर्बलता भी बढ़ती है, जो छोटे पैमाने के मत्स्य उद्योगों के अस्तित्व के लिये अहम हैं.
“कार्बन उत्सर्जन से महासागर का तापमान व अम्लीकरण बढ़ रहा है, जैवविविधता नष्ट हो रही है और समुद्री जलस्तर में वृद्धि हो रही है, जिससे भारी आबादी वाले तटीय इलाकों को ख़तरा पैदा हो गया है.”
उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि इस वर्ष विश्व महासागर दिवस ऐसे समय आया है जब दुनिया, कोविड19 महामारी, जलवायु संकट और महासागरों, समुद्रों व समुद्री संसाधनों पर मानव जाति के निरन्तर हमलों से जूझ रही है.
महासचिव ने कार्रवाई का आहवान करते हुए कहा, “जैसे-जैसे हम कोविड19 से उबरने का प्रयास कर रहे हैं, आइए, प्रकृति के ख़िलाफ़ अपने युद्ध का भी अन्त करें.”
उनके मुताबिक यह टिकाऊ विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने, पेरिस समझौते के 1.5-डिग्री का लक्ष्य हासिल करने और वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के लिये, हमारे महासागरों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिये महत्वपूर्ण होगा., संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चिन्ता जताई है कि बढ़ते प्रदूषण व तापमान और हद से ज़्यादा मछलियाँ पकड़े जाने से महासागर और जैवविविधता पर भीषण असर हो रहा है. उन्होंने इस वर्ष, ‘विश्व महासागर दिवस’ पर अपने सन्देश में आगाह किया है कि कोविड-19 महामारी से पुनर्बहाली प्रयासों में, प्रकृति के विरुद्ध युद्ध का अन्त और भावी पीढ़ियों की भलाई के लिये महासागरों का स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जाना होगा.  

विश्व महासागर दिवस, हर वर्ष 8 जून को मनाया जाता है और यह दैनिक जीवन, भोजन, आजीविका सहित अन्य ज़रूरतों को पूरा करने में महासागरों की भूमिका को रेखांकित करता है.

तीन अरब से अधिक लोग अपनी आजीविका के लिये महासागर पर निर्भर हैं, जिनमें से ज़्यादातर विकासशील देशों में हैं.

इस वर्ष की थीम है, “महासागर: जीवन एवँ आजीविका,” जो दुनिया भर के समुदायों के सांस्कृतिक जीवन और आर्थिक अस्तित्व के लिये, महासागरों के महत्व को रेखांकित करती है.

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उन्होंने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि हद से ज़्यादा मछली पकड़े जाने से, कुल लाभ में लगभग 90 अरब डॉलर का वार्षिक नुक़सान हो रहा है.

इससे उन महिलाओं की निर्बलता भी बढ़ती है, जो छोटे पैमाने के मत्स्य उद्योगों के अस्तित्व के लिये अहम हैं.

“कार्बन उत्सर्जन से महासागर का तापमान व अम्लीकरण बढ़ रहा है, जैवविविधता नष्ट हो रही है और समुद्री जलस्तर में वृद्धि हो रही है, जिससे भारी आबादी वाले तटीय इलाकों को ख़तरा पैदा हो गया है.”

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि इस वर्ष विश्व महासागर दिवस ऐसे समय आया है जब दुनिया, कोविड19 महामारी, जलवायु संकट और महासागरों, समुद्रों व समुद्री संसाधनों पर मानव जाति के निरन्तर हमलों से जूझ रही है.

महासचिव ने कार्रवाई का आहवान करते हुए कहा, “जैसे-जैसे हम कोविड19 से उबरने का प्रयास कर रहे हैं, आइए, प्रकृति के ख़िलाफ़ अपने युद्ध का भी अन्त करें.”

उनके मुताबिक यह टिकाऊ विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने, पेरिस समझौते के 1.5-डिग्री का लक्ष्य हासिल करने और वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के लिये, हमारे महासागरों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिये महत्वपूर्ण होगा.

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