ट्रान्सजैण्डर लोगों के स्वास्थ्य एवं कल्याण की मुहिम

ट्रान्सजैण्डर अधिनियम और नियमों के सफल कार्यान्वयन के लिये एक आम और पारदर्शी तन्त्र की खोज पर, मेडिकल एपिडेमियोलॉजिस्ट, व भारत में यूएनएड्स (UNAIDS) के देश-निदेशक और संगठन की मानवाधिकार कार्रवाई के लिये सम्मान प्राप्त डॉक्टर बिलाली कैमारा का ब्लॉग…

भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मन्त्रालय के एचआईवी एलायन्स व राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) ने सितम्बर 2021 को, पहला ट्रान्सजेण्डर शिखर सम्मेलन आयोजित किया.
इस सम्मेलन में, संयुक्त राष्ट्र के एचआईवी/एड्स (यूएनएड्स) कार्यक्रम की ओर से अपना दृष्टिकोण साझा करने के लिये, मैंने भी शिरकत की. 
 
मैंने अपनी बात इस तरह रखी…
चूँकि ट्रान्सजैण्डर-अधिनियम स्वास्थ्य और ट्रान्सजैण्डर लोगों के पूर्ण कल्याण के बारे में है, तो ऐसा सम्पूर्ण व्यापक ढाँचा विकसित करने की आवश्यकता है जो सभी हितधारकों को, हर चरण में ट्रान्सजैण्डर मुद्दों का हल करने में मदद करे – बचपन से किशोरावस्था, वयस्कता और वृद्धावस्था तक जीवन के इन चरणों में से हर एक में, ट्रान्सजैण्डर लोगों के सामने आने वाले विभिन्न मसलों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी. 
इसलिये, परिवार से लेकर सामुदायिक स्तर, स्कूली शिक्षा, रोज़गार, और कार्यस्थल पर हर वातावरण में बुनियादी देखभाल, मनो-सामाजिक समर्थन, मानवाधिकारों, सामाजिक और क़ानूनी संरक्षण आवश्यक हैं . साथ ही, क़ानूनी व स्वास्थ्य सम्बन्धी  विशिष्ट मुद्दों में मदद (मेडिकल या सर्जिकल) और शादी, बच्चे को गोद लेना जैसे नागरिक अधिकार सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है.
मेरा दृढ़ विश्वास है कि “आधे-अधूरे उपाय असरदार नहीं होते हैं और वास्तविक परिस्थितियों में पूरी ताक़त लगाने से ही हल सम्भव है.” साथ ही, यह भी कि “कोई एक मन्त्रालय या कार्यक्रम अकेले इस विशाल सामाजिक चुनौती का समाधान नहीं कर सकता”.
इसलिये उस व्यापक ढाँचे को विकसित करने के लिये हमें एक अन्तर-मन्त्रालय समन्वय स्थापित करना होगा, जो सामाजिक न्याय और अधिकारिता मन्त्रालय, नैको/स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मन्त्रालय, महिला और बाल विकास मन्त्रालय, गृह मन्त्रालय, रक्षा मन्त्रालय, श्रम मन्त्रालय, शिक्षा मन्त्रालय जैसे प्रत्येक प्रमुख हितधारकों की भूमिकाएँ और ज़िम्मेदारियाँ स्पष्ट करे व ट्रान्सजैण्डर समुदाय और सिविल सोसाइटी के सहयोग से लागू किया जाए.
नैको (NACO) के सहयोग व ट्रान्सजैण्डर काउंसिल के साथ समन्वय के तहत, राज्य और ज़िला संरचनाओं के माध्यम से कार्य करते हुए, इस अन्तर-मन्त्रालय तन्त्र के सदस्य अपनी भूमिकाओं और ज़िम्मेदारियों पर काम करें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बचपन, किशोरावस्था, वयस्कता, बुढ़ापे से मृत्यु तक, ट्रान्जैण्डर अधिनियम का पूरा लाभ ट्रान्सजैण्डरों तक पहुँचे. 
अरादने रिबेरो फ़ेरेरा का जीवन:

UNAIDSअरादने रिबेरो फेरेरा, ब्राज़ील में यूएनएड्स कार्यालय में सामुदायिक सहयोग सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं.

11 अप्रैल 2021 को, मुझे अपने ट्रान्सजैण्डर सहयोगियों में से एक, अरादने रिबेरो फ़ेरेरा (अरी) की मार्मिक कहानी मालूम हुई. वो ब्राज़ील में यूएनएड्स कार्यालय में सामुदायिक सहयोग सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं. उनकी कहानी कुछ इस तरह है:
“एक ट्रान्स महिला के रूप में, मैंने सामाजिक बहिष्कार का अनुभव किया है. मेरा परिवार मुझे स्वीकार नहीं कर पाया और एक किशोरी के रूप में मुझे जबरन स्कूल से हटा दिया गया क्योंकि मेरे सौतेले पिता यह समझ नहीं पाए और न ही उन्होंने समझने का प्रयास किया कि मैं कौन हूँ. 
लेकिन मैंने इस स्थिति को बदला और अध्ययन के अवसर का सहारा लिया, जो हमेशा मेरा सबसे बड़ा जुनून रहा है. 
मैंने 25 साल की उम्र में स्नातक की डिग्री पूरी की, जिसने मुझे सबसे कमज़ोर लोगों के साथ काम करने का मौक़ा दिया. इसके साथ ही, लोगों के लिये मेरे लगाव और ब्राज़ील में पीछे छूट गए लोगों की मदद करने की मेरी इच्छा से प्रेरणा लेते हुए, मैंने परास्नातक और मनो-चिकित्सा विज्ञान में पी.एच.डी. हासिल की.”
व्यापक ढाँचे की ज़रूरत
जिस तरह इस दृष्टिकोण से अरादने का जीवन और ज़रूरतें स्पष्ट होते हैं, हम निश्चित हैं कि दुनिया भर में और विशेष रूप से भारत में, अनेक ट्रान्सजैण्डर लोग इस कहानी में अपनी झलक देखेंगे. 
समाज और निर्णय लेने वालों के लिये, ये कहानियाँ अपने जीवन के हर चरण में ट्रान्सजैण्डरों की ज़रूरतों और मसलों का सामना करने के लिये एक व्यापक ढाँचा बनाने का आहवान करती हैं, क्योंकि यह उनके मानव अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, अच्छे हालात व आमदनी वाले कामकाज और आर्थिक अवसरों की रक्षा करेगा. 
यह स्पष्ट है कि अरादने बड़ी चुनौतियों के बावजूद अपने सपने पूरे करने में कामयाब रहीं. 
इसी तरह, बिहार या मणिपुर के हर ट्रान्सजैण्डर बच्चे, पश्चिम बंगाल या महाराष्ट्र के हर ट्रान्सजैण्डर किशोर, मणिपुर या दिल्ली के हर ट्रान्सजैण्डर वयस्क, या गुजरात या ओडिशा के हर बुज़ुर्ग ट्रान्सजैण्डर को मौक़ा मिलना चाहिये कि वो एक सुरक्षित, स्वस्थ और सहायक वातावरण में अपने लक्ष्य हासिल कर सकें. , ट्रान्सजैण्डर अधिनियम और नियमों के सफल कार्यान्वयन के लिये एक आम और पारदर्शी तन्त्र की खोज पर, मेडिकल एपिडेमियोलॉजिस्ट, व भारत में यूएनएड्स (UNAIDS) के देश-निदेशक और संगठन की मानवाधिकार कार्रवाई के लिये सम्मान प्राप्त डॉक्टर बिलाली कैमारा का ब्लॉग…

भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मन्त्रालय के एचआईवी एलायन्स व राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) ने सितम्बर 2021 को, पहला ट्रान्सजेण्डर शिखर सम्मेलन आयोजित किया.

इस सम्मेलन में, संयुक्त राष्ट्र के एचआईवी/एड्स (यूएनएड्स) कार्यक्रम की ओर से अपना दृष्टिकोण साझा करने के लिये, मैंने भी शिरकत की. 
 
मैंने अपनी बात इस तरह रखी…

चूँकि ट्रान्सजैण्डर-अधिनियम स्वास्थ्य और ट्रान्सजैण्डर लोगों के पूर्ण कल्याण के बारे में है, तो ऐसा सम्पूर्ण व्यापक ढाँचा विकसित करने की आवश्यकता है जो सभी हितधारकों को, हर चरण में ट्रान्सजैण्डर मुद्दों का हल करने में मदद करे – बचपन से किशोरावस्था, वयस्कता और वृद्धावस्था तक जीवन के इन चरणों में से हर एक में, ट्रान्सजैण्डर लोगों के सामने आने वाले विभिन्न मसलों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी. 

इसलिये, परिवार से लेकर सामुदायिक स्तर, स्कूली शिक्षा, रोज़गार, और कार्यस्थल पर हर वातावरण में बुनियादी देखभाल, मनो-सामाजिक समर्थन, मानवाधिकारों, सामाजिक और क़ानूनी संरक्षण आवश्यक हैं . साथ ही, क़ानूनी व स्वास्थ्य सम्बन्धी  विशिष्ट मुद्दों में मदद (मेडिकल या सर्जिकल) और शादी, बच्चे को गोद लेना जैसे नागरिक अधिकार सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है.

मेरा दृढ़ विश्वास है कि “आधे-अधूरे उपाय असरदार नहीं होते हैं और वास्तविक परिस्थितियों में पूरी ताक़त लगाने से ही हल सम्भव है.” साथ ही, यह भी कि “कोई एक मन्त्रालय या कार्यक्रम अकेले इस विशाल सामाजिक चुनौती का समाधान नहीं कर सकता”.

इसलिये उस व्यापक ढाँचे को विकसित करने के लिये हमें एक अन्तर-मन्त्रालय समन्वय स्थापित करना होगा, जो सामाजिक न्याय और अधिकारिता मन्त्रालय, नैको/स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मन्त्रालय, महिला और बाल विकास मन्त्रालय, गृह मन्त्रालय, रक्षा मन्त्रालय, श्रम मन्त्रालय, शिक्षा मन्त्रालय जैसे प्रत्येक प्रमुख हितधारकों की भूमिकाएँ और ज़िम्मेदारियाँ स्पष्ट करे व ट्रान्सजैण्डर समुदाय और सिविल सोसाइटी के सहयोग से लागू किया जाए.

नैको (NACO) के सहयोग व ट्रान्सजैण्डर काउंसिल के साथ समन्वय के तहत, राज्य और ज़िला संरचनाओं के माध्यम से कार्य करते हुए, इस अन्तर-मन्त्रालय तन्त्र के सदस्य अपनी भूमिकाओं और ज़िम्मेदारियों पर काम करें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बचपन, किशोरावस्था, वयस्कता, बुढ़ापे से मृत्यु तक, ट्रान्जैण्डर अधिनियम का पूरा लाभ ट्रान्सजैण्डरों तक पहुँचे. 

अरादने रिबेरो फ़ेरेरा का जीवन:

UNAIDS
अरादने रिबेरो फेरेरा, ब्राज़ील में यूएनएड्स कार्यालय में सामुदायिक सहयोग सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं.

11 अप्रैल 2021 को, मुझे अपने ट्रान्सजैण्डर सहयोगियों में से एक, अरादने रिबेरो फ़ेरेरा (अरी) की मार्मिक कहानी मालूम हुई. वो ब्राज़ील में यूएनएड्स कार्यालय में सामुदायिक सहयोग सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं. उनकी कहानी कुछ इस तरह है:

“एक ट्रान्स महिला के रूप में, मैंने सामाजिक बहिष्कार का अनुभव किया है. मेरा परिवार मुझे स्वीकार नहीं कर पाया और एक किशोरी के रूप में मुझे जबरन स्कूल से हटा दिया गया क्योंकि मेरे सौतेले पिता यह समझ नहीं पाए और न ही उन्होंने समझने का प्रयास किया कि मैं कौन हूँ. 

लेकिन मैंने इस स्थिति को बदला और अध्ययन के अवसर का सहारा लिया, जो हमेशा मेरा सबसे बड़ा जुनून रहा है. 

मैंने 25 साल की उम्र में स्नातक की डिग्री पूरी की, जिसने मुझे सबसे कमज़ोर लोगों के साथ काम करने का मौक़ा दिया. इसके साथ ही, लोगों के लिये मेरे लगाव और ब्राज़ील में पीछे छूट गए लोगों की मदद करने की मेरी इच्छा से प्रेरणा लेते हुए, मैंने परास्नातक और मनो-चिकित्सा विज्ञान में पी.एच.डी. हासिल की.”

व्यापक ढाँचे की ज़रूरत

जिस तरह इस दृष्टिकोण से अरादने का जीवन और ज़रूरतें स्पष्ट होते हैं, हम निश्चित हैं कि दुनिया भर में और विशेष रूप से भारत में, अनेक ट्रान्सजैण्डर लोग इस कहानी में अपनी झलक देखेंगे. 

समाज और निर्णय लेने वालों के लिये, ये कहानियाँ अपने जीवन के हर चरण में ट्रान्सजैण्डरों की ज़रूरतों और मसलों का सामना करने के लिये एक व्यापक ढाँचा बनाने का आहवान करती हैं, क्योंकि यह उनके मानव अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, अच्छे हालात व आमदनी वाले कामकाज और आर्थिक अवसरों की रक्षा करेगा. 

यह स्पष्ट है कि अरादने बड़ी चुनौतियों के बावजूद अपने सपने पूरे करने में कामयाब रहीं. 

इसी तरह, बिहार या मणिपुर के हर ट्रान्सजैण्डर बच्चे, पश्चिम बंगाल या महाराष्ट्र के हर ट्रान्सजैण्डर किशोर, मणिपुर या दिल्ली के हर ट्रान्सजैण्डर वयस्क, या गुजरात या ओडिशा के हर बुज़ुर्ग ट्रान्सजैण्डर को मौक़ा मिलना चाहिये कि वो एक सुरक्षित, स्वस्थ और सहायक वातावरण में अपने लक्ष्य हासिल कर सकें. 

,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *