थाली से गायब हुई हरी सब्जियां, रुलाने लगी है आलू और प्याज

नई दिल्ली । कोरोना के कारण हुई आर्थिक तंगी से उत्पन्न स्थिति से निपटने के सरकारी प्रयासों के बाद लोगों की हालत धीरे-धीरे ठीक हो ही रही थी कि अब थाली से सब्जियां गायब हो गई है। आलू के भाव जहां आसमान छू रहे हैं, वहीं हरी सब्जियों की तो चर्चा ही करना बेकार है। प्याज ने भी रुलाना शुरू कर दिया है। सब्जियों के थाली से गायब होने के पीछे सिर्फ कोरोना ही नहीं लगातार हो रही बारिश भी बड़ा कारण है। लगातार हो रही बारिश से जलजमाव के कारण जिला के विभिन्न क्षेत्रों में लाखों मूल्य की सब्जी गल कर बर्बाद हो गयी है।

हालत यह हो गई है कि आलू 35 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, प्याज का दाम 45 रुपए किलो को पार कर गया है। हरी सब्जियों में सबसे सस्ता बैगन और झिंगा (नेनुआ) है जो 30 रुपए किलो बिक रहा है। पिछले साल इस समय दस रुपए में बिकने वाला कद्दू 25 से 30 रुपया में बिक रहा है। भिंडी, परवल, बोरा, टमाटर के भाव 50 को पार कर गया है। कोबी 80 से एक सौ रुपए किलो तक बिक रहा है। 10 से 15 रुपए किलो बिकने वाला मिर्च एक सौ रुपए किलो में बिक रहा है। करेला, खीरा और मूली का भाव भी 40 को पार कर गया है। गरीब परिवार के लोग जहां सब्जी को खाना भूल चुके हैं। वही मध्यमवर्गीय परिवार की हालत खास्ता है। लोग झोला लेकर सब्जी खरीदने जाते हैं, लेकिन उनकी हिम्मत पॉलिथीन में भी खरीदने की नहीं होती है।

आलू और प्याज के संबंध में थोक व्यापारियों का कहना है कि बाहर से अवाक कम होने के कारण भाव बढ़ रहे हैं। इस समय में पहाड़ी आलू आ जाता था तो भाव कम जाते थे, लेकिन इस वर्ष अभी तक पहाड़ी आलू आना शुरू नहीं हुआ है। मंडी आए किसान विनय महतों एवं राधे महतों आदि का कहना है कि गंगा और गंडक दियारा में सबसे अधिक सब्जी होती थी, दोनों जगह बाढ़ के कारण सब्जी बर्बाद हो गया। उसके बाद ग्रामीण इलाकों के किसान हरी सब्जी लेकर मंडी आते थे। लेकिन पिछले एक महीने से रुक-रुक कर लगातार हो रही बारिश से जलजमाव के कारण हजारों एकड़ में लगी हरी सब्जियां बर्बाद हो गई है। जलजमाव के कारण हम किसानों को लाखों का घाटा हुआ है। जो कुछ सब्जी अभी बाजार ला रहे हैं, उसमें काफी खर्च और मेहनत करनी पड़ रही है।

(हि.स.)

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