दक्षिण-पूर्व एशिया में बिजली-चालित वाहनों को प्रोत्साहन

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), दक्षिण पूर्व एशिया में, ऊर्जा की बढ़ती खपत, वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की समस्या से निपटने के लिये, सभी देशों के साथ मिलकर, बिजली-चालित वाहनों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है.
 

इण्डोनेशिया के जकार्ता शहर में एक प्रमुख चौराहे की एक भीड़-भरी सुबह में, गर्मी की चिपचिपी हवा को चीरती हुई गड़गहाहट सुनाई दे रही है.
एक यातायात चौराहे (ट्रैफिक सिग्नल) पर दर्जनों मोटरबाइक और स्कूटर बेताबी से इन्तज़ार कर रहे हैं. जैसे ही बत्ती हरी होती है और दो-पहिया वाहन तेज़ी से आगे बढ़ते हैं, यह गड़गड़ाहट और भी तीव्र होकर, कानों को चीरने वाले शोर में बदल जाती है. 
दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख चौराहों पर यह दृश्य हर दिन देखने को मिलता है, जहाँ मोटर-साइकिल और स्कूटर जैसे दो-पहिया वाहन आम हैं.
उदाहरण के लिये, इण्डोनेशिया, मलेशिया, थाईलैण्ड और वियतनाम में 80 प्रतिशत से अधिक घरों में, ख़ुद की मोटरसाइकिलें हैं.
दक्षिण-पूर्वी देशों के संगठन (आसियान) की, छह सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों में, 2019 में मोटर साइकिलों और स्कूटरों की बिक्री, 1 करोड़ 37 लाख तक पहुँच गई. इनमें केवल चीन और भारत में सबसे अधिक बिक्री देखी गई.
लेकिन यह एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. शोर होने के साथ, पारम्परिक मोटर साइकिल और स्कूटरों की बढ़ती संख्या से, ऊर्जा की खपत, वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भी बढ़ोत्तरी हो रही है.

UN News/Yasmina Guerdaचालकरहित और बिजली से चलने वाली कार. भविष्य में, इस तरह के वाहनों की लोकप्रियता बढ़ने के भी अनुमान व्यक्त किये गए हैं.

दक्षिण-पूर्व एशिया के देश, इन समस्याओं से निपटने के लिये, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) के सहयोग से, चालकों को, ये गैस छोड़ने वाले वाहनों के बदले, बिजली से चलने वाली (इलैक्ट्रिक) मोटर बाइक वाली ख़रीदने के लिये प्रोत्साहित कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की वायु गुणवत्ता और गतिशीलता इकाई के कार्यक्रम अधिकारी, बर्ट फ़ेबियन का कहना है, “दक्षिण-पूर्व एशिया में, बड़ी संख्या में, लोग दुपहिया और तिपहियाँ वाहनों का इस्तेमाल करते हैं.”
“इस हिस्से को इलैक्ट्रिक मॉडल में परिवर्तित करने से, प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी, ख़ासतौर पर जब ये सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों में उचित ढंग से एकीकृत हों.”
यूनेप ने नीति निर्माताओं द्वारा इलैक्ट्रिक दुपहिया और तिपहिया वाहनों को बढ़ावा देने के लिये, मलेशिया, फिलीपीन्स, सिंगापुर और थाईलैण्ड में इलैक्ट्रिक वाहन संघों के साथ मिलकर व्यापक सिफ़ारिशों पर काम किया है.
इनमें से कुछ उपायों में विनिर्माण और उपभोक्ता अनुदान, बिजली-चालित और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के लिये, कर व बीमा समायोजन एवँ ईंधन अर्थव्यवस्था के मानकों व खपत की सीमा अनिवार्य करना शामिल हैं.
इस क्षेत्र के देशों ने, इनमें से कुछ उपाय अपनाने में प्रगति हासिल की है. उदाहरण के लिये, थाईलैण्ड में, वर्ष 2025 तक 53 हज़ार इलैक्ट्रिक मोटर-साइकिल बनाने के लक्ष्य पर काम चल रहा है और इलैक्ट्रिक वाहनों को सस्ता करने के लिये एक व्यापार-योजना बनाई जा रही है.
वहीं, इण्डोनेशिया में, वर्ष 2025 से, पारम्परिक मोटर-साइकिलों को धीरे-धीरे ख़त्म करने की योजना है.
मलेशिया और अन्य देशों ने मोटर-साइकिलों के ज़्यादा इस्तेमाल के लिये, व्यापक बुनियादी ढाँचा विकसित किया है.
ई-बाइकों का बढ़ता चलन
दक्षिण-पूर्व एशिया में, दुपहिया वाहनों का, सामाजिक आर्थिक रूप से भी एक ऊँचा स्थान है. चूँकि कारों की तुलना में इन्हें ख़रीदना आसान है और इनका ईंधन भी सस्ता है, ये वाहन, उन तेज़ी से बढ़ते शहरों के लिये आदर्श परिवहन साधन हैं, जहाँ भीड़-भाड़ अधिक है व सार्वजनिक परिवहन साधनों की कमी है.
हालाँकि ये वाहन, कम और मध्यम आय वाले शहरी लोगों में ज़्यादा लोकप्रिय हैं, मगर, उच्च आय वाले लोगों को भी, भारी यातायात भीड़ से बचने के लिये, दुपहिया वाहनों का इस्तेमाल, नियमित रूप से, करते हुए देखा जाता है.
इस आसान परिवहन साधन से, उस सेवा उद्योग को भी बढ़ावा मिला है जिसमें कोविड-19 के दौरान बढ़ोत्तरी हुई है.
वाहन चालकों के लिये रोज़गार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ, घर पर सामान पहुँचाने की सेवाओं में वृद्धि से अनेक कम्पनियों की लोकप्रियता बढ़ी है.
यह बढ़त आगे भी जारी रहने की उम्मीद है.
अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2050 तक एक सामान्य व्यवसायिक परिदृश्य में, डेढ़ अरब मोटरयुक्त, दुपहिया और तिपहिया वाहन, वैश्विक सड़कों पर दौड़ते नज़र आएँगे.
दूरदर्शी नीति
यूनेप ने, दक्षिण-पूर्व एशिया में,  नीतिगत सुधार के लिये, सरकारों के साथ काम करने के अलावा, बिजली-चालित वाहनों के बुनियादी ढाँचे की व्यवहारिकता प्रदर्शित करने के लिये, कई पायलट कार्यक्रम भी शुरू किये हैं.
संगठन ने, फिलीपीन्स में, क्लीन एयर एशिया, फिलीपीन्स पोस्टल कॉर्पोरेशन, सिटी ऑफ़ पसिग और इलैक्ट्रिक वाहन निर्माता TAILG के साथ मिलकर, शहरों में सामान के परिवहन के लिये, दो व तीन पहिया इलैक्ट्रिक वाहनों की क्षमता का प्रदर्शन किया.

UNFCCC Secretariatबिजली से चार्ज होने वाली हरित साइकिलों और मोटर साइकिलों का चलन भी बढ़ रहा है.

महामारी की शुरुआत में, इन वाहनों को तालाबन्दी के दौरान महत्वपूर्ण राहत सामग्री पहुँचाने के लिये उपयोग किया गया.
वियतनाम में, यूनेप, परिवहन प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ मिलकर एक ऐसी ही परियोजना पर काम कर रहा है.
मार्च 2019 में, होण्डा-वियतनाम ने, इलैक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिये, नीति और नियामक बाधाओं की पहचान करने में मदद की परियोजना को, 50 इलैक्ट्रिक स्कूटर प्रदान किये.
यूनेप, साथ ही, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी अफ्रीका में शहरी क्षेत्रों के लिये एक व्यापक स्तर के वैश्विक कार्यक्रम में, जर्मनी के संघीय पर्यावरण मन्त्रालय, पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा (BMU) की अन्तरराष्ट्रीय जलवायु पहल के साथ काम कर रहा है.
इन देशों में चल रही गतिविधियों में गैस चालित मोटरयुक्त दो व तिपहिया वाहनों की संख्या और ईंधन-दक्षता को बेहतर ढंग से समझने के लिये, अध्ययन, एवं बिजली के ग्रिड और इलैक्ट्रिक वाहनों की सम्भावित मांग का विश्लेषण शामिल है.
फ़ेबियन कहते हैं, “दुपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि को देखते हुए, सरकारें इलैक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर पूर्णत: ध्यान नहीं देना चाहेंगी. दूरदर्शी सोच वाले नीतिगत फ़ैसले ही यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि यह बदलाव सम्भव हो.”, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), दक्षिण पूर्व एशिया में, ऊर्जा की बढ़ती खपत, वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की समस्या से निपटने के लिये, सभी देशों के साथ मिलकर, बिजली-चालित वाहनों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है.
 

इण्डोनेशिया के जकार्ता शहर में एक प्रमुख चौराहे की एक भीड़-भरी सुबह में, गर्मी की चिपचिपी हवा को चीरती हुई गड़गहाहट सुनाई दे रही है.

एक यातायात चौराहे (ट्रैफिक सिग्नल) पर दर्जनों मोटरबाइक और स्कूटर बेताबी से इन्तज़ार कर रहे हैं. जैसे ही बत्ती हरी होती है और दो-पहिया वाहन तेज़ी से आगे बढ़ते हैं, यह गड़गड़ाहट और भी तीव्र होकर, कानों को चीरने वाले शोर में बदल जाती है. 

दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख चौराहों पर यह दृश्य हर दिन देखने को मिलता है, जहाँ मोटर-साइकिल और स्कूटर जैसे दो-पहिया वाहन आम हैं.

उदाहरण के लिये, इण्डोनेशिया, मलेशिया, थाईलैण्ड और वियतनाम में 80 प्रतिशत से अधिक घरों में, ख़ुद की मोटरसाइकिलें हैं.

दक्षिण-पूर्वी देशों के संगठन (आसियान) की, छह सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों में, 2019 में मोटर साइकिलों और स्कूटरों की बिक्री, 1 करोड़ 37 लाख तक पहुँच गई. इनमें केवल चीन और भारत में सबसे अधिक बिक्री देखी गई.

लेकिन यह एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. शोर होने के साथ, पारम्परिक मोटर साइकिल और स्कूटरों की बढ़ती संख्या से, ऊर्जा की खपत, वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भी बढ़ोत्तरी हो रही है.


UN News/Yasmina Guerda
चालकरहित और बिजली से चलने वाली कार. भविष्य में, इस तरह के वाहनों की लोकप्रियता बढ़ने के भी अनुमान व्यक्त किये गए हैं.

दक्षिण-पूर्व एशिया के देश, इन समस्याओं से निपटने के लिये, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) के सहयोग से, चालकों को, ये गैस छोड़ने वाले वाहनों के बदले, बिजली से चलने वाली (इलैक्ट्रिक) मोटर बाइक वाली ख़रीदने के लिये प्रोत्साहित कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की वायु गुणवत्ता और गतिशीलता इकाई के कार्यक्रम अधिकारी, बर्ट फ़ेबियन का कहना है, “दक्षिण-पूर्व एशिया में, बड़ी संख्या में, लोग दुपहिया और तिपहियाँ वाहनों का इस्तेमाल करते हैं.”

“इस हिस्से को इलैक्ट्रिक मॉडल में परिवर्तित करने से, प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी, ख़ासतौर पर जब ये सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों में उचित ढंग से एकीकृत हों.”

यूनेप ने नीति निर्माताओं द्वारा इलैक्ट्रिक दुपहिया और तिपहिया वाहनों को बढ़ावा देने के लिये, मलेशिया, फिलीपीन्स, सिंगापुर और थाईलैण्ड में इलैक्ट्रिक वाहन संघों के साथ मिलकर व्यापक सिफ़ारिशों पर काम किया है.

इनमें से कुछ उपायों में विनिर्माण और उपभोक्ता अनुदान, बिजली-चालित और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के लिये, कर व बीमा समायोजन एवँ ईंधन अर्थव्यवस्था के मानकों व खपत की सीमा अनिवार्य करना शामिल हैं.

इस क्षेत्र के देशों ने, इनमें से कुछ उपाय अपनाने में प्रगति हासिल की है. उदाहरण के लिये, थाईलैण्ड में, वर्ष 2025 तक 53 हज़ार इलैक्ट्रिक मोटर-साइकिल बनाने के लक्ष्य पर काम चल रहा है और इलैक्ट्रिक वाहनों को सस्ता करने के लिये एक व्यापार-योजना बनाई जा रही है.

वहीं, इण्डोनेशिया में, वर्ष 2025 से, पारम्परिक मोटर-साइकिलों को धीरे-धीरे ख़त्म करने की योजना है.

मलेशिया और अन्य देशों ने मोटर-साइकिलों के ज़्यादा इस्तेमाल के लिये, व्यापक बुनियादी ढाँचा विकसित किया है.

ई-बाइकों का बढ़ता चलन

दक्षिण-पूर्व एशिया में, दुपहिया वाहनों का, सामाजिक आर्थिक रूप से भी एक ऊँचा स्थान है. चूँकि कारों की तुलना में इन्हें ख़रीदना आसान है और इनका ईंधन भी सस्ता है, ये वाहन, उन तेज़ी से बढ़ते शहरों के लिये आदर्श परिवहन साधन हैं, जहाँ भीड़-भाड़ अधिक है व सार्वजनिक परिवहन साधनों की कमी है.

हालाँकि ये वाहन, कम और मध्यम आय वाले शहरी लोगों में ज़्यादा लोकप्रिय हैं, मगर, उच्च आय वाले लोगों को भी, भारी यातायात भीड़ से बचने के लिये, दुपहिया वाहनों का इस्तेमाल, नियमित रूप से, करते हुए देखा जाता है.

इस आसान परिवहन साधन से, उस सेवा उद्योग को भी बढ़ावा मिला है जिसमें कोविड-19 के दौरान बढ़ोत्तरी हुई है.

वाहन चालकों के लिये रोज़गार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ, घर पर सामान पहुँचाने की सेवाओं में वृद्धि से अनेक कम्पनियों की लोकप्रियता बढ़ी है.

यह बढ़त आगे भी जारी रहने की उम्मीद है.

अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2050 तक एक सामान्य व्यवसायिक परिदृश्य में, डेढ़ अरब मोटरयुक्त, दुपहिया और तिपहिया वाहन, वैश्विक सड़कों पर दौड़ते नज़र आएँगे.

दूरदर्शी नीति

यूनेप ने, दक्षिण-पूर्व एशिया में,  नीतिगत सुधार के लिये, सरकारों के साथ काम करने के अलावा, बिजली-चालित वाहनों के बुनियादी ढाँचे की व्यवहारिकता प्रदर्शित करने के लिये, कई पायलट कार्यक्रम भी शुरू किये हैं.

संगठन ने, फिलीपीन्स में, क्लीन एयर एशिया, फिलीपीन्स पोस्टल कॉर्पोरेशन, सिटी ऑफ़ पसिग और इलैक्ट्रिक वाहन निर्माता TAILG के साथ मिलकर, शहरों में सामान के परिवहन के लिये, दो व तीन पहिया इलैक्ट्रिक वाहनों की क्षमता का प्रदर्शन किया.


UNFCCC Secretariat
बिजली से चार्ज होने वाली हरित साइकिलों और मोटर साइकिलों का चलन भी बढ़ रहा है.

महामारी की शुरुआत में, इन वाहनों को तालाबन्दी के दौरान महत्वपूर्ण राहत सामग्री पहुँचाने के लिये उपयोग किया गया.

वियतनाम में, यूनेप, परिवहन प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ मिलकर एक ऐसी ही परियोजना पर काम कर रहा है.

मार्च 2019 में, होण्डा-वियतनाम ने, इलैक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिये, नीति और नियामक बाधाओं की पहचान करने में मदद की परियोजना को, 50 इलैक्ट्रिक स्कूटर प्रदान किये.

यूनेप, साथ ही, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी अफ्रीका में शहरी क्षेत्रों के लिये एक व्यापक स्तर के वैश्विक कार्यक्रम में, जर्मनी के संघीय पर्यावरण मन्त्रालय, पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा (BMU) की अन्तरराष्ट्रीय जलवायु पहल के साथ काम कर रहा है.

इन देशों में चल रही गतिविधियों में गैस चालित मोटरयुक्त दो व तिपहिया वाहनों की संख्या और ईंधन-दक्षता को बेहतर ढंग से समझने के लिये, अध्ययन, एवं बिजली के ग्रिड और इलैक्ट्रिक वाहनों की सम्भावित मांग का विश्लेषण शामिल है.

फ़ेबियन कहते हैं, “दुपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि को देखते हुए, सरकारें इलैक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर पूर्णत: ध्यान नहीं देना चाहेंगी. दूरदर्शी सोच वाले नीतिगत फ़ैसले ही यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि यह बदलाव सम्भव हो.”

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