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दीपावली पर्व पर ठाकुर जी की हटरी में पड़ने वाला प्रकाश बन जाता है इन्द्रधनुषी

November 06
07:46 2018

मथुरा, 6 नवम्बर : दीपावली पर्व के अवसर पर ठाकुर जी कांच की हटरी में इस प्रकार विराजते है कि उस पर पड़नेवाला प्रकाश इन्द्रधनुषी बन जाता है।

गोकुल में स्थित राजा ठाकुर मंदिर के महंत भीखू महराज ने बताया कि दीपावली के दिन ठाकुर जी कांच की हटरी में इस प्रकार विराजते हैं कि उस पर पड़नेवाला प्रकाश इन्द्रधनुषी बन जाता है। मंदिर में घी के दीपकों की दीप माला बन जाती हैक्। शयन के दर्शन में ठाकुर जी ’’कान जगाई’’ करते हैं। वे ’’मोर मुकुट कटि काछनी कर मुरली उर माल ’’ धारण कर मंदिर की चौक में आते हैं। मंदिर में लाई गई गाय के कान में कहते हैं कि कल उसे आना है क्योंकि गोवर्धन पूजा है। कन्हैया की नगरी नन्दबाबा का ऐसा आंगन बन जाती है जिसका विस्तार 84 कोस ब्रजमंडल में दिखाई पड़ता है।

उन्होने बताया कि उधर गोकुल, नन्दगांव, वृन्दावन, गोवर्धन, बल्देव, डीग और कामा में इस पर्व को अलग अलग तरीके से मनाने की होड़ मच जाती है। अधिकांश मंदिरों में ठाकुर जी हटरी में विराजते हैं और समूचा ब्रजमंडल कृष्णमय हो जाता है। इन सबसे अलग कान्हा के गोकुल के प्रमुख राजा ठाकुर मंदिर में तो ऐसी भाव प्रधान सेवा होती है कि भक्ति वहां पर नृत्य करने लगती है।

राधा बल्लभ मंदिर वृन्दावन में फल, फूल एवं मोरपंख से सजाई लगभग 150 किलो चांदी से निर्मित पांच फीट ऊंची हटरी में ठाकुर विराजमान होकर चौसर खेलते हैं। ठाकुर जी कहीं सकड़ी , असकड़ी और निकरा का भोग अरोगते हैं। कहीं 56 भोग अरोगते है। नन्दगांव में ’’नन्द जू के आंगन में निराली दिवारी है’’ को चरितार्थ करने के लिए पहले नन्दबाबा मंदिर के शिखर पर अनूठा दीपक जलाया जाता है।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान में तो छोटी दीपावली से ही मंदिरों में न केवल दीपावली की धूम मच जाती है बल्कि जन्मस्थान स्थित मंदिरों में यह पर्व सामूहिक दीपावली के रूप में मनाया जाता है।

जनसंपर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह के अनुसार मंदिर प्रांगण में बहुत बड़ी रंगोली बनाकर उसके चारों ओर 21 हजार दीपक जलाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि पहले केशव देव मंदिर में दीपक जलाया जाता है और फिर जन्मस्थान पर स्थित अन्य योगमाया, राधाकृष्ण आदि मंदिरों में दीपक जलाते हैं। सबसे अंत में रंगोली के चारो तरफ 21 हजार दीपक जलाते हैं। इसमें ब्रजवासियों के साथ साथ तीर्थयात्रियों को भी शामिल किया जाता है। ठाकुर सबसे अधिक सामूहिक आराधना में ही प्रसन्न होते हैं।

राधाश्यामसुन्दर मंदिर वृन्दावन के सेवायत आचार्य कृष्णगोपालानन्द देवगोस्वामी प्रभुपाद के अनुसार इस दिन ठाकुर जी मां काली के वेश में दर्शन देते हैं। इस दिन मंदिर में आ़काश दीप के साथ साथ पूरे मंदिर परिसर में दीप जलाते है। राधा द़ामोदर मंदिर वृन्दावन के सेवायत आचार्य कनिका गोस्वामी ने बताया कि दीपावली पर ’’दाम बंधन लीला’’ का पाठ किया जाता है। इसी दिन मां यशेादा ने मक्खन की चोरी करने पर श्यामसुन्दर को ऊखल से बांधा था। मंदिर में शाम को जहां दीपदान होता हैक। वहीं प्रातः सवा चार बजे से गिर्राज शिला की चार परिक्रमा शुरू हो जा़ती है। इस शिला को ठाकुर जी ने स्वयं सनातन गोस्वामी को दिया था।

वृन्दावन के सप्त देवालयों में मशहूर राधा रमण मंदिर में इस दिन ठाकुर जी हटरी पर विराजमान होते हैं तथा संध्या काल में राधारानी के साथ ठाकुर चौसर खेलते हैं। दीपावली के दिन संध्या आरती के बाद जगमोहन में लक्ष्मी पूजन होता है तथा अंदर ठाकुर जी का तिलक होता है। मंदिर के सेवायत दिनेश चन्द्र गोस्वामी के अनुसार ठाकुर के ब्यालू भोग में सभी पकवान रखे जाते हैं और दर्शन खुलते ही मंदिर के सेवायत आचार्य एवं उनके परिवारीजन झोली में प्रसाद लेकर जाते हैं।

भारत विख्यात द्वारकाधीश मंदिरके मशहूर ज्योतिषाचार्य अजय कुमार त़ैलंग ने बताया कि मंदिर में दीपावली पर दीपदान किया जाता है। ठाकुर मोती की हटरी में विराजते हैं तथा शाम को कान जगाई होती है जिसमें ठ़ाकुर गाय के कान में कहते हैं कि कल गोवर्धन पूजा है और उन्हें आना है। मंदिर के कुबेर में लक्ष्मी पूजन बिशन लग्न में वैदिक मंत्रो के मध्य होता ह़ै तथा मंदिर में पर्यावरणहितैषी दीपावली मनाई जाती ह़ै जिसमें मिट़्टी के दीपक में घी या तेल डालकर दिए जलाते है, जहां मंदिर के गर्भगृह में शुद्ध घी के दीपक जलाए जाते है। वहीं दीपोत्सव स्थल मंदिर के जगमोहन में सरसों के तेल के दीपक जलाए जाते है़ं। वृन्दावन के मशहूर बांके बिहारी मंदिर के सेवायत आचार्य ज्ञानेन्द्र गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में दीपावली पर वृहद दीपदान होता है। चौदण्डी की जगह ठाकुर जी चांदी की हटरी में विराजते हैं। मंदिर में शरदपूर्णिमा से पंखों का चलना बंद हो गया है। ठाकुर के भोग में इस दिन से केशर चालू हो जाती है।

दानघाटी मंदिर मेें दीपावली के दिन मंदिर में एक लाख एक दीपकों से दीपोत्सव होगा। यहां का दीपोत्सव सामूहिक आराधना का पर्व बनता है। इसमें श्रद्धालु दीप जलाकर रखते जाते हैं और उन्हें क्रम से हटाना जारी रहता है। कई घंटे चलनेवाला यह कार्यक्रम दर्शनीय होता है। इस दिन मंदिर में वृहद फूल बंगला बनाया जाएगा। कुल मिलाकर दीपावली पर समूचे ब्रजमंडल मे असंख्य दीपकों की दीपमाला बन जाती है। बिजली की सजावट से ब्रज के प्रत्येक मंदिर का मुख्य द्वार तारागणों का समूह बन जाता हैं।

एजेंसी 

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