दुनिया वैश्विक तापमान में 1.5 °C बढ़ोत्तरी के नज़दीक – WMO की चेतावनी

वैश्विक औसत तापमान में वार्षिक बढ़ोत्तरी, पूर्व औद्योगिक काल में तापमान के स्तर से, 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा होने की सम्भावना लगातार बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) ने गुरुवार को अपनी एक रिपोर्ट के साथ चेतावनी भी जारी की है कि ऐसा अगले पाँच वर्षों के भीतर ही हो सकता है. रिपोर्ट दर्शाती है कि इस अवधि के दौरान, तापमान में बढ़ोत्तरी के इस स्तर को छूने की सम्भावना 40 फ़ीसदी है, और यह सम्भावना लगातार प्रबल हो रही है.

इससे पहले, अप्रैल में जारी रिपोर्ट (State of the Global Climate 2020) के मुताबिक वर्ष 2020, अब तक के तीन सबसे गर्म सालों में शामिल है, जब पूर्व औद्योगिक काल में तापमान के स्तर की तुलना में वैश्विक औसत तापमान 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया था.

90% chance of at least 1 year between 2021-2025 being warmest on record and about 40% chance of annual average global temperature temporarily reaching 1.5°C above pre-industrial level in at least one of the next 5 years.These are more than just statisticshttps://t.co/pl4ciBiGQZ pic.twitter.com/KW5nxMufYT— World Meteorological Organization (@WMO) May 27, 2021

गुरुवार को जारी अपडेट इस रूझान की पुष्टि करता है. अगले पाँच वर्षों में, वार्षिक वैश्विक तापमान के कम से कम एक डिग्री सेल्सियस (0.9 डिग्री सेल्सियस से 1.8 डिग्री सेल्सियस तक के बीच) ज़्यादा रहने की सम्भावना जताई गई है  
पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते के तहत, तापमान में बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस के स्तर तक सीमित रखने को, सभी देशों के लिये एक लक्ष्य के रूप में स्थापित किया गया था.
इसका उद्देश्य, पृथ्वी पर मानवता के लिये सम्भावित ख़तरे से बचाव और लोगों के कल्याण को सुनिश्चित करना था.
पेरिस समझौते में वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को दो डिग्री सेल्सियस या उससे कम तक सीमित रखने की पुकार लगाई गई है.
बताया गया है कि वर्ष 2021-2025 की अवधि में 90 फ़ीसदी सम्भावना है कि कम से कम कोई एक वर्ष अब तक का सबसे गर्म साल साबित होगा.
‘Global Annual to Decadal Climate Update’ नामक रिपोर्ट दर्शाती है कि ऐसी स्थिति में, वर्ष 2016 पीछे रह जाएगा, जोकि अब तक सबसे गर्म साल रहा है.
इस रिपोर्ट को ब्रिटेन के मौसम विज्ञान कार्यालय ने तैयार किया है, जोकि ऐसे पूर्वानुमानों के लिये यूएन एजेंसी का अग्रणी केंद्र है.  
चरम मौसम घटनाओं का प्रकोप
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 के अन्त तक, उच्च-अक्षांश (High-latitude) क्षेत्रों और सहेल क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होगी.
साथ ही, अटलाण्टिक क्षेत्र में 1980 के दशक की शुरुआत से नापे गए औसत से ज़्यादा चक्रवाती तूफ़ान आने के आने की सम्भाना है,
यूएन मौसम-विज्ञान एजेंसी के महासचिव पेटेरी टालस ने कहा, “ये आँकड़ों से कहीं बढ़कर हैं.”
“तापमान में बढ़ोत्तरी का अर्थ, ज़्यादा मात्रा में हिम का पिघलाव होना, समुद्री जल स्तर बढ़ना, ज़्यादा गर्म हवाएँ और अन्य चरम मौसम हैं, और खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और टिकाऊ विकास पर कहीं ज़्यादा असर है.”
उन्होंने कहा कि यह एक और नींद से जगा देने वाली घण्टी है जो आगाह करती है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों में कटौती लाने और कार्बन तटस्थता को हासिल करने के संकल्पों के लिये कार्रवाई तेज़ करने की आवश्यकता है.
यूएन एजेंसी प्रमुख के मुताबिक, आधुनिकतम टैक्नॉलॉजी के सहारे, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों का उनके स्रोत तक पता लगाना सम्भव है, जिससे कटौती लाने के प्रयासों को बड़ी मदद मिल सकती है.  
जलवायु अनुकूलन पर बल
पेटेरी टालस ने बताया कि रिपोर्ट में जलवायु अनुकूलन की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया है.
यूएन एजेंसी के 193 सदस्य देशों में से, महज़ पचास फ़ीसदी देशों के पास ही आधुनिक समय-पूर्व चेतावनी प्रणाली सेवाओं की व्यवस्था है.
उन्होंने सचेत किया कि देशों को उन सेवाओं का विकास जारी रखना होगा, जिनसे जलवायु परिवर्तन के नज़रिये से सम्वेदनशील सैक्टरों में अनुकूलन प्रयासों को समर्थन देना ज़रूरी हो, विशेषकर स्वास्थ्य, जल, कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा.
साथ ही समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियों को बढ़ावा देने का आग्रह किया गया है ताकि चरम मौसम की घटनाओँ के दुष्परिणामों को कम किया जा सके., वैश्विक औसत तापमान में वार्षिक बढ़ोत्तरी, पूर्व औद्योगिक काल में तापमान के स्तर से, 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा होने की सम्भावना लगातार बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) ने गुरुवार को अपनी एक रिपोर्ट के साथ चेतावनी भी जारी की है कि ऐसा अगले पाँच वर्षों के भीतर ही हो सकता है. रिपोर्ट दर्शाती है कि इस अवधि के दौरान, तापमान में बढ़ोत्तरी के इस स्तर को छूने की सम्भावना 40 फ़ीसदी है, और यह सम्भावना लगातार प्रबल हो रही है.

इससे पहले, अप्रैल में जारी रिपोर्ट (State of the Global Climate 2020) के मुताबिक वर्ष 2020, अब तक के तीन सबसे गर्म सालों में शामिल है, जब पूर्व औद्योगिक काल में तापमान के स्तर की तुलना में वैश्विक औसत तापमान 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया था.

90% chance of at least 1 year between 2021-2025 being warmest on record and about 40% chance of annual average global temperature temporarily reaching 1.5°C above pre-industrial level in at least one of the next 5 years.
These are more than just statisticshttps://t.co/pl4ciBiGQZ pic.twitter.com/KW5nxMufYT

— World Meteorological Organization (@WMO) May 27, 2021

गुरुवार को जारी अपडेट इस रूझान की पुष्टि करता है. अगले पाँच वर्षों में, वार्षिक वैश्विक तापमान के कम से कम एक डिग्री सेल्सियस (0.9 डिग्री सेल्सियस से 1.8 डिग्री सेल्सियस तक के बीच) ज़्यादा रहने की सम्भावना जताई गई है  

पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते के तहत, तापमान में बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस के स्तर तक सीमित रखने को, सभी देशों के लिये एक लक्ष्य के रूप में स्थापित किया गया था.

इसका उद्देश्य, पृथ्वी पर मानवता के लिये सम्भावित ख़तरे से बचाव और लोगों के कल्याण को सुनिश्चित करना था.

पेरिस समझौते में वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को दो डिग्री सेल्सियस या उससे कम तक सीमित रखने की पुकार लगाई गई है.

बताया गया है कि वर्ष 2021-2025 की अवधि में 90 फ़ीसदी सम्भावना है कि कम से कम कोई एक वर्ष अब तक का सबसे गर्म साल साबित होगा.

‘Global Annual to Decadal Climate Update’ नामक रिपोर्ट दर्शाती है कि ऐसी स्थिति में, वर्ष 2016 पीछे रह जाएगा, जोकि अब तक सबसे गर्म साल रहा है.

इस रिपोर्ट को ब्रिटेन के मौसम विज्ञान कार्यालय ने तैयार किया है, जोकि ऐसे पूर्वानुमानों के लिये यूएन एजेंसी का अग्रणी केंद्र है.  

चरम मौसम घटनाओं का प्रकोप

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 के अन्त तक, उच्च-अक्षांश (High-latitude) क्षेत्रों और सहेल क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होगी.

साथ ही, अटलाण्टिक क्षेत्र में 1980 के दशक की शुरुआत से नापे गए औसत से ज़्यादा चक्रवाती तूफ़ान आने के आने की सम्भाना है,

यूएन मौसम-विज्ञान एजेंसी के महासचिव पेटेरी टालस ने कहा, “ये आँकड़ों से कहीं बढ़कर हैं.”

“तापमान में बढ़ोत्तरी का अर्थ, ज़्यादा मात्रा में हिम का पिघलाव होना, समुद्री जल स्तर बढ़ना, ज़्यादा गर्म हवाएँ और अन्य चरम मौसम हैं, और खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और टिकाऊ विकास पर कहीं ज़्यादा असर है.”

उन्होंने कहा कि यह एक और नींद से जगा देने वाली घण्टी है जो आगाह करती है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों में कटौती लाने और कार्बन तटस्थता को हासिल करने के संकल्पों के लिये कार्रवाई तेज़ करने की आवश्यकता है.

यूएन एजेंसी प्रमुख के मुताबिक, आधुनिकतम टैक्नॉलॉजी के सहारे, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों का उनके स्रोत तक पता लगाना सम्भव है, जिससे कटौती लाने के प्रयासों को बड़ी मदद मिल सकती है.  

जलवायु अनुकूलन पर बल

पेटेरी टालस ने बताया कि रिपोर्ट में जलवायु अनुकूलन की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया है.

यूएन एजेंसी के 193 सदस्य देशों में से, महज़ पचास फ़ीसदी देशों के पास ही आधुनिक समय-पूर्व चेतावनी प्रणाली सेवाओं की व्यवस्था है.

उन्होंने सचेत किया कि देशों को उन सेवाओं का विकास जारी रखना होगा, जिनसे जलवायु परिवर्तन के नज़रिये से सम्वेदनशील सैक्टरों में अनुकूलन प्रयासों को समर्थन देना ज़रूरी हो, विशेषकर स्वास्थ्य, जल, कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा.

साथ ही समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियों को बढ़ावा देने का आग्रह किया गया है ताकि चरम मौसम की घटनाओँ के दुष्परिणामों को कम किया जा सके.

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