नफ़रत के सभी रूपों का विरोध हो, यूएन प्रमुख की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने वैश्विक समुदाय से नफ़रत के सभी रूपों के ख़िलाफ़ खड़ा होने और उन झूठों व घृणाओं को ख़ारिज करने का आहवान किया है जो अतीत में नाज़ीवाद के उभार और मौजूदा दौर में समाजों में दरारों के लिये ज़िम्मेदार हैं.  उन्होंने एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि कोविड-19 संक्रमणों के फैलाव के साथ-साथ यहूदीवाद-विरोध और पहचान-आधारित नफ़रत के अन्य रूपों का भी प्रसार हो रहा है.  

महासचिव गुटेरेश ने कहा, “हाल के महीनों में पूर्वाग्रहों का निरन्तर प्रवाह हमारी दुनिया को दागदार बनाता रहा है: यहूदी-विरोधी हमले, उत्पीड़न और तोड़फोड़; हॉलोकॉस्ट का नकारा जाना; यहूदी उपासना स्थल को विस्फोट से उड़ाने की एक नव-नाज़ी साज़िश में जुर्म का क़बूलनामा.”

Kristallnacht was not just the night of broken glass; it was the night of broken lives, families, societies and dreams.82 years on, a steady stream of anti-Semitism & hatred continues to blight our world.We must stand together & speak up against hatred in all its forms.— António Guterres (@antonioguterres) November 9, 2020

“हमारी दुनिया को आज तार्किकता पर फिर लौटने की ज़रूरत है – और उन झूठों व नफ़रतों को ख़ारिज़ करने की जिन्होंने नाज़ियो को आगे बढ़ाया और जो आज भी समाजों में दरार डालते हैं.” 
महासचिव ने सोमवार को 2020 थियॉडॉर हर्त्ज़ेल अवार्ड स्वीकार करते हुए दिये गये अपने भाषण के दौरान नफ़रत का अन्त किये जाने की यह अपील जारी की है. 
यह पुरस्कार ‘विश्व यहूदी कॉन्ग्रेस’ द्वारा दिये जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान है. इस वर्ष कोरोनावायरस के कारण पुरस्कार समारोह को वर्चुअली आयोजित किया गया. 
नाज़ी शासन के दौरान 9-10 नवम्बर 1938, की रात यहूदियों के घरों, व्यवसायों और यहूदी उपासना स्थलों को निशाना बनाया गया था जिसके पीड़ितों की स्मृति में यह सम्मान समारोह उसी घटना की बरसी पर आयोजित किया गया. 
इस रात को जर्मन भाषा में ‘क्रिस्टलनाख्ट’ (Night of broken glass) के रूप में याद किया जाता है. 
कट्टरता के ख़िलाफ़ वैश्विक एकजुटता
यूएन प्रमुख ने कहा कि महासचिव के तौर पर वह कट्टरता के ख़िलाफ़ वैश्विक गठबन्धन को लामबन्द कर रहे हैं. 
उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस संकट से पहले ही संयुक्त राष्ट्र नफ़रत भरे सन्देशों व भाषणों पर रोक लगाने के लिये प्रयासरत है जिसके तहत एक औपचारिक कार्ययोजना को पेश किया गया है. 
यहूदी उपासना स्थलों, मस्जिदों और चर्चों पर हमलों की बढ़ती संख्या के मद्देनज़र यूएन एलायन्स ऑफ़ सिविलाइज़ेशन्स (UNAOC) के नेतृत्व में उपासना व धार्मिक स्थलों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिये प्रयास आगे बढ़ाये जा रहे हैं.  
“इस वर्ष वायरस का फैलना शुरू होने से अब तक हमारी नई ‘वैरीफ़ाइड’ पहल कोविड-19 पर ग़लत जानकारियों का मुक़ाबला कर रही है.”
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने वैश्विक युद्धविराम की अपनी पुकार को फिर दोहराया है ताकि दुनिया साझा दुश्मन कोविड-19 की चुनौती से निपटने पर अपने प्रयास केंद्रित कर सके. 
ये भी पढ़ें – मानवाधिकार: ‘नस्लभेद व नफ़रत भी संक्रामक हत्यारे हैं’
महासचिव के मुताबिक नफ़रत भेदभाव नहीं करती है और जब समाज दमन व हिंसा में धँस जाते हैं तो हर किसी के लिये हालात नाज़ुक हो जाते हैं. 
यूएन प्रमुख ने इसराइल की स्थापना में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि अगले वर्ष इसराइलियों व फ़लस्तीनियों के बीच दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाया जा सकेगा.
इससे दोनों देश समरसता व शान्ति के साथ एक दूसरे के साथ रह सकेंगे और क्षेत्रीय सहयोग के सन्दर्भ में सकारात्मक माहौल का निर्माण होगा.  
एंतोनियो गुटेरेश ने भरोसा दिलाया कि यहूदीवाद-विरोध और हर प्रकार के भेदभाव के ख़िलाफ़ लड़ाई में वह साथ हैं और सभी के लिये समानता और गरिमा सुनिश्चित करने के प्रयासों में यूएन एक मज़बूत साझीदार है. , संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने वैश्विक समुदाय से नफ़रत के सभी रूपों के ख़िलाफ़ खड़ा होने और उन झूठों व घृणाओं को ख़ारिज करने का आहवान किया है जो अतीत में नाज़ीवाद के उभार और मौजूदा दौर में समाजों में दरारों के लिये ज़िम्मेदार हैं.  उन्होंने एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि कोविड-19 संक्रमणों के फैलाव के साथ-साथ यहूदीवाद-विरोध और पहचान-आधारित नफ़रत के अन्य रूपों का भी प्रसार हो रहा है.  

महासचिव गुटेरेश ने कहा, “हाल के महीनों में पूर्वाग्रहों का निरन्तर प्रवाह हमारी दुनिया को दागदार बनाता रहा है: यहूदी-विरोधी हमले, उत्पीड़न और तोड़फोड़; हॉलोकॉस्ट का नकारा जाना; यहूदी उपासना स्थल को विस्फोट से उड़ाने की एक नव-नाज़ी साज़िश में जुर्म का क़बूलनामा.”

“हमारी दुनिया को आज तार्किकता पर फिर लौटने की ज़रूरत है – और उन झूठों व नफ़रतों को ख़ारिज़ करने की जिन्होंने नाज़ियो को आगे बढ़ाया और जो आज भी समाजों में दरार डालते हैं.” 

महासचिव ने सोमवार को 2020 थियॉडॉर हर्त्ज़ेल अवार्ड स्वीकार करते हुए दिये गये अपने भाषण के दौरान नफ़रत का अन्त किये जाने की यह अपील जारी की है. 

यह पुरस्कार ‘विश्व यहूदी कॉन्ग्रेस’ द्वारा दिये जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान है. इस वर्ष कोरोनावायरस के कारण पुरस्कार समारोह को वर्चुअली आयोजित किया गया. 

नाज़ी शासन के दौरान 9-10 नवम्बर 1938, की रात यहूदियों के घरों, व्यवसायों और यहूदी उपासना स्थलों को निशाना बनाया गया था जिसके पीड़ितों की स्मृति में यह सम्मान समारोह उसी घटना की बरसी पर आयोजित किया गया. 

इस रात को जर्मन भाषा में ‘क्रिस्टलनाख्ट’ (Night of broken glass) के रूप में याद किया जाता है. 

कट्टरता के ख़िलाफ़ वैश्विक एकजुटता

यूएन प्रमुख ने कहा कि महासचिव के तौर पर वह कट्टरता के ख़िलाफ़ वैश्विक गठबन्धन को लामबन्द कर रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस संकट से पहले ही संयुक्त राष्ट्र नफ़रत भरे सन्देशों व भाषणों पर रोक लगाने के लिये प्रयासरत है जिसके तहत एक औपचारिक कार्ययोजना को पेश किया गया है. 

यहूदी उपासना स्थलों, मस्जिदों और चर्चों पर हमलों की बढ़ती संख्या के मद्देनज़र यूएन एलायन्स ऑफ़ सिविलाइज़ेशन्स (UNAOC) के नेतृत्व में उपासना व धार्मिक स्थलों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिये प्रयास आगे बढ़ाये जा रहे हैं.  

“इस वर्ष वायरस का फैलना शुरू होने से अब तक हमारी नई ‘वैरीफ़ाइड’ पहल कोविड-19 पर ग़लत जानकारियों का मुक़ाबला कर रही है.”

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने वैश्विक युद्धविराम की अपनी पुकार को फिर दोहराया है ताकि दुनिया साझा दुश्मन कोविड-19 की चुनौती से निपटने पर अपने प्रयास केंद्रित कर सके. 

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महासचिव के मुताबिक नफ़रत भेदभाव नहीं करती है और जब समाज दमन व हिंसा में धँस जाते हैं तो हर किसी के लिये हालात नाज़ुक हो जाते हैं. 

यूएन प्रमुख ने इसराइल की स्थापना में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि अगले वर्ष इसराइलियों व फ़लस्तीनियों के बीच दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाया जा सकेगा.

इससे दोनों देश समरसता व शान्ति के साथ एक दूसरे के साथ रह सकेंगे और क्षेत्रीय सहयोग के सन्दर्भ में सकारात्मक माहौल का निर्माण होगा.  

एंतोनियो गुटेरेश ने भरोसा दिलाया कि यहूदीवाद-विरोध और हर प्रकार के भेदभाव के ख़िलाफ़ लड़ाई में वह साथ हैं और सभी के लिये समानता और गरिमा सुनिश्चित करने के प्रयासों में यूएन एक मज़बूत साझीदार है. 

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