‘न्यायसंगत टीकाकरण’ से ज़िन्दगियों की रक्षा और स्वास्थ्य प्रणालियों को सहारा सम्भव

कोविड-19 महामारी से बचाव के लिये सुरक्षित और असरदार वैक्सीन की दो अरब खुराकों का इन्तज़ाम अन्तरराष्ट्रीय वैक्सीन अलायन्स COVAX के तहत किया गया है और जैसे ही वे तैयार होंगी उनका वितरण सुनिश्चित किया जायेगा. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने शुक्रवार को इस आशय की जानकारी देते हुए कहा कि न्यायोचित टीकाकरण से ज़िन्दगियों की रक्षा करने और स्वास्थ्य प्रणालियों को स्थायित्व प्रदान करने में मदद मिलेगी.

जिनिवा में एक पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए यूएन स्वास्थ्य एजेंसी प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बताया कि फ़िलहाल 42 देश सुरक्षित और असरदार कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं. इनमे से 36 उच्च आय और छह मध्य आय वाले देश हैं.

Media briefing on #COVID19 with @DrTedros https://t.co/vh96v5PbYg— World Health Organization (WHO) (@WHO) January 8, 2021

उन्होंने चिन्ता जताई है कि निम्न और और अधिकाँश मध्य आय वाले देशों को अभी तक वैक्सीन नहीं मिल पाई है जोकि एक बड़ी समस्या है जिसे COVAX पहल के तहत सुलझाया जाना होगा. 
इस पहल की शुरुआत अप्रैल 2020 में यूएन एजेंसी, वैक्सीन अलायन्स (GAVI) और महामारी की तैयारी के लिये नवाचारी समाधानों के गठबंधन (CEPI) ने की थी.
यह ‘Access to COVID-19 Tools (ACT) Accelerator’ का हिस्सा है जिसका उद्देश्य कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में उपचारों, निदानों और वैक्सीनों को न्यायसंगत ढँग से उपलब्ध कराना है. 
बताया गया है कि शुरुआत में ही धनी देशों ने अनेक प्रकार के टीकों की अधिकाँश आपूर्ति अपने लिये सुनिश्चित कर ली है.
इसके अलावा उच्च और मध्य आय वाले देश अतिरिक्त द्विपक्षीय समझौतों को भी कर रहे हैं – वो देश भी जो विश्व स्वास्थ्य संगठन और वैक्सीन अलायन्स गैवी की COVAX मुहिम का हिस्सा हैं. 
“इससे हर किसी के लिये क़ीमत ऊपर पहुँचने की सम्भावना है, और इसका अर्थ यह हुआ कि निर्धनतम और सबसे वँचित देशों में ज़्यादा जोखिम वाले लोगों को वैक्सीन नहीं मिल पायेगी.” 
वैक्सीन राष्ट्रवाद चिन्ताजनक
महानिदेशक घेबरेयेसस ने चिन्ता जताई कि उभरता वैक्सीन राष्ट्रवाद दुनिया को चोट पहुँचा रहा है और असल में ख़ुद के लिये नुक़सान का सबब है. 
लेकिन उनके मुताबिक अगर न्यायसंगत ढँग से टीकाकरण होता है तो ज़िन्दगियों को बचाने और स्वास्थ्य प्रणालियों में स्थायित्व लाने में मदद मिलेगी. 
इससे वैश्विक आर्थिक पुनर्बहाली का मार्ग प्रशस्त होगा और रोज़गार के अवसरों के सृजन में भी तेज़ी आयेगी. 
यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि वैक्सीन मिलने से वायरस द्वारा अपना प्रकार बदल लिये जाने के अवसर भी सीमित हो जायेंगे. 
फ़िलहाल वायरस का नया स्ट्रेन दर्शाता है कि उसमें मानव आबादी में ज़्यादा तेज़ी से फैलने के लिये बदलाव आ रहे हैं.  
उनके मुताबिक आमतौर पर यह हर वायरस के लिये सामान्य बात है लेकिन अगर फैलाव को घटाने और न्यायोचित टीकाकरण के प्रयास नहीं किये गये तो कोरोनावायरस को फलने-फूलने में मदद मिलेगी.
इसके मद्देनज़र यूएन एजेंसी प्रमुख ने वैक्सीन निर्माताओं से COVAX पहल के ज़रिये आपूर्ति को प्राथमिकता दिये जाने का आग्रह किया है. 
साथ ही जिन देशों ने ज़रूरत से ज़्यादा टीकों को हासिल करने के लिये कॉन्ट्रैक्ट लिया है, उनसे COVAX पहल में दान करने और द्विपक्षीय समझौतों को रोकने की अपील की गई है. 
महानिदेशक घेबरेयेसस ने स्पष्ट शब्दों मे कहा कि कोई भी देश असाधारण नहीं है, इसलिये क़तार को तोड़ अपनी आबादी में टीकाकरण नहीं किया जाना चाहिये जबकि अन्य देशों के पास वैक्सीन की आपूर्ति ना हो. , कोविड-19 महामारी से बचाव के लिये सुरक्षित और असरदार वैक्सीन की दो अरब खुराकों का इन्तज़ाम अन्तरराष्ट्रीय वैक्सीन अलायन्स COVAX के तहत किया गया है और जैसे ही वे तैयार होंगी उनका वितरण सुनिश्चित किया जायेगा. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने शुक्रवार को इस आशय की जानकारी देते हुए कहा कि न्यायोचित टीकाकरण से ज़िन्दगियों की रक्षा करने और स्वास्थ्य प्रणालियों को स्थायित्व प्रदान करने में मदद मिलेगी.

जिनिवा में एक पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए यूएन स्वास्थ्य एजेंसी प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बताया कि फ़िलहाल 42 देश सुरक्षित और असरदार कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं. इनमे से 36 उच्च आय और छह मध्य आय वाले देश हैं.

उन्होंने चिन्ता जताई है कि निम्न और और अधिकाँश मध्य आय वाले देशों को अभी तक वैक्सीन नहीं मिल पाई है जोकि एक बड़ी समस्या है जिसे COVAX पहल के तहत सुलझाया जाना होगा.

इस पहल की शुरुआत अप्रैल 2020 में यूएन एजेंसी, वैक्सीन अलायन्स (GAVI) और महामारी की तैयारी के लिये नवाचारी समाधानों के गठबंधन (CEPI) ने की थी.

यह ‘Access to COVID-19 Tools (ACT) Accelerator’ का हिस्सा है जिसका उद्देश्य कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में उपचारों, निदानों और वैक्सीनों को न्यायसंगत ढँग से उपलब्ध कराना है.

बताया गया है कि शुरुआत में ही धनी देशों ने अनेक प्रकार के टीकों की अधिकाँश आपूर्ति अपने लिये सुनिश्चित कर ली है.

इसके अलावा उच्च और मध्य आय वाले देश अतिरिक्त द्विपक्षीय समझौतों को भी कर रहे हैं – वो देश भी जो विश्व स्वास्थ्य संगठन और वैक्सीन अलायन्स गैवी की COVAX मुहिम का हिस्सा हैं.

“इससे हर किसी के लिये क़ीमत ऊपर पहुँचने की सम्भावना है, और इसका अर्थ यह हुआ कि निर्धनतम और सबसे वँचित देशों में ज़्यादा जोखिम वाले लोगों को वैक्सीन नहीं मिल पायेगी.”

वैक्सीन राष्ट्रवाद चिन्ताजनक

महानिदेशक घेबरेयेसस ने चिन्ता जताई कि उभरता वैक्सीन राष्ट्रवाद दुनिया को चोट पहुँचा रहा है और असल में ख़ुद के लिये नुक़सान का सबब है.

लेकिन उनके मुताबिक अगर न्यायसंगत ढँग से टीकाकरण होता है तो ज़िन्दगियों को बचाने और स्वास्थ्य प्रणालियों में स्थायित्व लाने में मदद मिलेगी.

इससे वैश्विक आर्थिक पुनर्बहाली का मार्ग प्रशस्त होगा और रोज़गार के अवसरों के सृजन में भी तेज़ी आयेगी.

यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि वैक्सीन मिलने से वायरस द्वारा अपना प्रकार बदल लिये जाने के अवसर भी सीमित हो जायेंगे.

फ़िलहाल वायरस का नया स्ट्रेन दर्शाता है कि उसमें मानव आबादी में ज़्यादा तेज़ी से फैलने के लिये बदलाव आ रहे हैं.

उनके मुताबिक आमतौर पर यह हर वायरस के लिये सामान्य बात है लेकिन अगर फैलाव को घटाने और न्यायोचित टीकाकरण के प्रयास नहीं किये गये तो कोरोनावायरस को फलने-फूलने में मदद मिलेगी.

इसके मद्देनज़र यूएन एजेंसी प्रमुख ने वैक्सीन निर्माताओं से COVAX पहल के ज़रिये आपूर्ति को प्राथमिकता दिये जाने का आग्रह किया है.

साथ ही जिन देशों ने ज़रूरत से ज़्यादा टीकों को हासिल करने के लिये कॉन्ट्रैक्ट लिया है, उनसे COVAX पहल में दान करने और द्विपक्षीय समझौतों को रोकने की अपील की गई है.

महानिदेशक घेबरेयेसस ने स्पष्ट शब्दों मे कहा कि कोई भी देश असाधारण नहीं है, इसलिये क़तार को तोड़ अपनी आबादी में टीकाकरण नहीं किया जाना चाहिये जबकि अन्य देशों के पास वैक्सीन की आपूर्ति ना हो.

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