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पटना आऊं तो जहाज हवाईअड्डे पर नहीं पानी पर लैंड करे : गडकरी

July 31
19:47 2020

पटना 31 जुलाई: देश में नदी बंदरगाह का जाल बिछाने के लिए प्रयासरत केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग, जहाजरानी, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उनकी इच्छा है कि वह कभी पटना आएं तो उनका जहाज हवाईअड्डे पर नहीं बल्कि पानी पर लैंड करे।सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बिहार के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से जल मार्ग के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का आह्वान किया और कहा कि यातायात की इस व्यवस्था से माल की ढुलाई सस्ती पड़ती है।

श्री गडकरी ने शुक्रवार को उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले देश के पहले स्टेट ऑफ आर्ट पुल का लोकार्पण करते हुए कहा कि इस पुल से बिहार में ढांचागत विकास को गति मिलेगी और राज्य का तेजी से सामाजिक तथा आर्थिक विकास होगा।

बिहार के समग्र विकास की प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में केंद्र सरकार राज्य के विकास के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जिस पुल का वह लोकार्पण कर रहे हैं उसके बनने से उत्तर और दक्षिण बिहार के जिलों के आर्थिक और सामाजिक समृद्धि तेजी से आएगी और यह पुल ‘बिहार की लाइफलाइन’ बनकर राज्य को नयी ऊंचाई प्रदान करेगा।

श्री गडकरी ने पटना में महात्मा गांधी सेतु के नए अपस्ट्रीम लेन का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा लोकार्पण किया। यह पुल पटना तथा हाजीपुर को जोड़ता है और इसकी लम्बाई 5575 मीटर है। उन्होंने कहा कि पुल के निर्माण पर 1742 करोड़ रूपए की कुल लागत आयी है। यह विशाल पुल स्टील ट्रस सुपर स्ट्रक्चर से बनाया गया है और यह देश का पहला स्टेट ऑफ आर्ट पुल है।

इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, राम विलास पासवान, अश्विनी कुमार चौबे, जनरल वी के सिंह सहित कई प्रमुख लोग मौजूद थे।

श्री गडकरी बिहार का लाइफलाइन माने जाने वाले महात्मा गांधी सेतु के पश्चिमी लेन के सुपर स्ट्रक्चर का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन करने के बाद कहा, “मेरा सपना है कि देश में सीप्लेन चले। पटना में नदी बंदरगाह बने। मेरी इच्छा है कि कभी पटना आऊं तो जहाज हवाईअड्डे पर नहीं बल्कि पानी पर लैंड करे। यह सपना अभी तक पूरा तो नहीं हुआ लेकिन जल्द ही पूरा होगा।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में 40 नदी बंदरगाह और चार मल्टी मॉडल का निर्माण किया जाना है। इनमें से झारखंड के साहेबगंज और उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी में बनने वाले रिवर पोर्ट का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन कर चुके हैं। गाजीपुर और हल्दिया में नदी बंदरगाह का काम अंतिम चरण में है। शेष रिवर पोर्ट का भी काम धीरे-धीरे अवश्य पूर्ण होगा।

गडकरी ने देश के विकास के लिए आधारभूत संरचना के विकास को बहुत जरूरी बताया और कहा कि इस कड़ी में जलमार्ग का विकास देश के लिए क्रांतिकारी साबित होगा। पहले वाराणसी से पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक गंगा नदी जलमार्ग को शुरू करना था लेकिन बाद में इसे वाराणसी से बढ़ाकर इलाहाबाद तक कर दिया गया। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि यह मार्ग दिल्ली से मथुरा-आगरा-इटावा होते हुए इलाहाबाद-वाराणसी-पटना-हल्दिया तक जाये।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जलमार्ग के इस नये स्वरूप के लिए 12 हजार करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर विश्व बैंक को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग का काम पूरा होने से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था का कायाकल्प हो जाएगा।
श्री गडकरी ने कहा कि जलमार्ग निर्माण कार्य को मजबूत बनाने के लिए ब्रह्मपुत्र समेत 12 नदियों का ड्रेजिंग कार्य पूर्ण कर लिया गया है। वहीं नेपाल की सीमा तक गंडक नदी का ड्रेजिंग करने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. सुषमा स्वराज के आदेश का पालन करते हुए उन्होंने बंगलादेश में 250 करोड़ रुपये की लागत से मुंगली बंदरगाह का भी ड्रेजिंग करवाया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस जलमार्ग पर चलने वाले जहाज में ईंधन के रूप में एलएनजी या कोयले से बने मेथेनॉल का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे लॉजिस्टिक लागत में काफी कमी आएगी और देश का निर्यात तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि परिवहन के अन्य साधनों के मुकाबले जलमार्ग से परिवहन काफी सस्ता होता है। सड़क मार्ग से परिवहन पर यदि 10 रुपये की लागत आती है तो रेलवे से छह रुपये वहीं जलमार्ग से एक रुपये का खर्च आता है।
श्री गडकरी ने कहा कि देश से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लॉजिस्टिक लागत को कम करना जरूरी है और इस दिशा में जलमार्ग परिवहन एक बेहतर उपाय है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत की लॉजिस्टिक लागत जहां 17 से 18 प्रतिशत है वहीं चीन की आठ प्रतिशत और अमेरिका की 12 प्रतिशत है।

(वार्ता)

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