Online News Channel

News

परमात्मा के गुण सब ग्रंथों में एक समान

परमात्मा के गुण सब ग्रंथों में एक समान
December 29
09:51 2018

विचारो में एकता लाने में अध्यात्म की भूमिका

भगवद् गीता में मोक्ष प्राप्ति का संदेश — चम्पा भाटिया

हम अगर विचारों में एकता लाना चाहे तो एक जैसी भाषा, एक जेसी बोली, एक जैसा पहनावा या एक जैसा खाना पीना हमारे विचारों को एक समान नहीं कर सकते।

सारा संसार आज एकता की बात कर रहा है पर अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियाँ, समाज विचारों में विविधता बनाए हुए हैं। अध्यात्म ही एक विषय है जिसमें सब के विचार एक समान है।

सारे धर्म ग्रंथ परमात्मा को जानने की और जानकर भक्ति करने की बात करते हैं। परमात्मा के गुण सब ग्रंथों में एक समान है।

पुरातन धर्म ग्रंथों में यह विदित है कि परमात्मा ने पाँच तत्व (मिट्टी, अग्नि, पानी, वायु, आकाश) से पुतला बनाया। इसमें ईश्वर का अंश छठा तत्व जीव है, जिससे यह जीवित है। यह जीवात्मा (दुनिया के हर मानव चाहे वह स्त्री है या पुरूष, गोरा है या काला, दुनिया के किसी भी हिस्से में रहता है। सब में समान रूप में विद्यमान है। सब में एक समान तत्व हैं, किसी में छः तत्व नहीं और न हीं किसी में चार तत्व लगे हैं। प्रभु ने सब में अपना अंश डाला, एक जैसा बनाया, संवारा, कहीं कोई भेद नहीं किया।

परमात्मा के गुण सब ग्रंथों में एक समान

माटी एक, अनेक भात कर साजी साजन हारे।
न किछ भेज माटी के भाडें न किछ भोज कुम्हारे।।

एक मिट्टी से अनेक भांति के कुम्हार ने बर्तन बनाकर सजाए और संवारे हैं। न कुम्हार में कोई भेद है और न हीं मिट्टी अलग है। ईश्वर के बारे में हर धर्म ग्रंथ की धारणा एक है। यह चाहे भगवद्गीता हो या पवित्र बाइबिल आदि ग्रंथ हो या पाक कुरान। ईश्वर की व्याख्या में कहीं दो राय नहीं। जब धार्मिक व्यक्ति इन विचारों को धारण करता है, तो विचारों में स्वतः एकरूपता आ जाती है।
परमात्मा एक है अब जिससे भी यह कहें आगे से यही उत्तर आएगा, बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। भाव-विचार एक समान हैं, इसी तरह परमात्मा के जितने भी गुणों का वर्णन करते जाएँ, हम पाएँगे कि सब के विचार एक समान है।

इसका कोई रंग, रूप, आकार नहीं यह निराकार है। हाँ है।

यह विशालतम है और सूक्ष्म से अति सूक्ष्म भी है, इसका कोई आदि नहीं, मध्य नहीं, अन्त नहीं।

यह परिवर्तन शील नहीं। कभी प्रत्यक्ष नहीं होता, कभी मिटता नहीं।

यह सनातन है, अनादि है, सदा रहने वाला है।

यह स्वयंभू है, अपने आप बना है, किसी ने बनाया नहीं।

यह सर्वशक्तिमान है, सारी सृष्टि सूरज, चाँद, तारे, धरती, हवा, सबको शक्ति प्रदान करता है।

यह सारे ब्रह्मण्डों का कर्ता है और चलाने वाला है।

यह सर्वव्यापक है, चर और अचर में व्यापक विद्यमान है।

यह निर्गुण (कोई गुण नहीं) होते हुए भी सारे गुणों का भंडार है। इसके गुणों की गिनती नहीं की जा सकती।

अनगिनत ऐसे विचार हम आध्यात्मिक व्यक्ति के एक जैसे है।

हर धर्म प्यार करना सिखाता है, नफरत नहीं।

दया करना सिखाता है, क्रूरता नहीं।
सहनशीलता सिखाता है, अन्याय नहीं।

वास्तव में हम सभी इस गौरवशाली के एकत्व के अंग है। हम सब एक ही स्त्रोत से आए हैं। जो भी मनुष्य इन धर्म ग्रंथों के विचारों की गहराई को समझते हैं, उनके विचारों में समानता आ जाती है। यह विचार अलग नहीं होते।

एक बार एक उदाहरण पढ़ा कि एक पिता के चार पुत्र बचपन में किसी कारणवश बिछड़ गए। अलग-अलग स्थान पर रहने से सबकी भाषा अलग-अलग हो गई। पिता के देहान्त के बाद सभी पिता के घर एकत्रित हुए, पर एक दूसरे की भाषा ने समझने की वजह से विचारों में भिन्नता थी।

पिता की जमीन पर खेती करने की सोची।

एक ने कहा कि अभी गेहूँ बोने का उपयुक्त समय है, गेहूँ बोए तो लाभ होगा।
दूसरे ने कहा ॅीमंज पे ं हववक वचजपवदए पज पे चमतंिबज जपउम पजण्

तीसरे ने कहा कनक

चैथे ने गेहूँ का ही कोई और नाम ले लिया।
अब चारों अपनी-अपनी जिद पर अड़े थे। एक सज्जन जो चारों भाषा जानते थे, हाथ में गेहूँ के दाने लेकर आए। चारों देखते ही प्रसन्न हो गए और पाया हम सबके विचार तो एक थे। सब के विचार तब तक भिन्न थे, जब तक वस्तु सामने नहीं थी। वस्तु सामने नजर आ जाए, विचार एक हो जाते हैं। परमात्मा का बोध हो जाने पर इसी तरह विचार भी अलग नहीं रहते।
श्री कृष्ण जी भगवद्गीता के छठे अध्याय के 30वें श्लोक में कहा हैः-

यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति।
तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति।

जो मुझे सब जगह देखता है और उसको सब मेें मेरा रूप दिखता है। उससे मैं कभी दूर नहीं होता और वो मुझसे दूर नहीं होता।

परमात्मा के गुण सब ग्रंथों में एक समान
भाव जिसे प्रभु का ज्ञान हो जाता है, प्रभु से नाता जुड़ जाता है, वह हर एक के अंदर मेरा रूप देखता है। उसके हृदय में कोई भेद भाव नहीं रहता। क्योंकि
ईश्वर अंश जीव अविनाशी।

हर एक मनुष्य के अंदर जीवातमा है, यह जीवित है। ये न नाश होने वाली जीवात्मा परमात्मा का अंश है। आदि ग्रंथ में कहा है,

घट घट अंतर सर्व निरंतर केवल एक मुरारी।
हजरत साबह ने फरमाया।
वह पहला सबक है किताबे हिदा का।
मखलूक सारी है कुनबा खुदा का।

सारी सृष्टि खुदा का कुनबा है, खुदा का परिवार है। यही पहला सबक याद रखता है, फिर

न को बैरी न ही बेगाना।
सगल संग हमको बन आई।।

हर युग में यह प्रयास हुआ है, सबके विचारों में एकता हो, कहीं दूरियां न हो। हर युग में इसके लिए ग्रंथों की रचना हुई ताकि मानव इससे लाभान्वित हो सके, एकता कायम हो, कोई किसी को बेगाना न माने, सत्गुरु हरदेव सिंह जी महाराज का संदेश,

एक को जानो, एक मानो, एक हो जाओ।

श्री गुरु गोविंद सिंह जी की बाणी इसी ओर इशारा करती है।

मानुष की जात सभै एक पहचानबो
मनुष्य की एक ही जाति है मानव और मनुष्य का एक ही धर्म है मानवता।

इक्को नूर है सइ दे अंदर नर है चाहे नार ए।

ब्राह्मण खतरी वैश हरिजन एक दो खलकत सारी ए।

देह सभना दी इक्को जेही इफ्को रब संवारी ए।

जात पात दे झगड़े काहदे काहदी लोकचारी ए।

हिंदु मुस्लिम सिक्ख ईसाई इक्को रब दे बन्दे ने।

बन्दे समझ के के प्यार है करना चंगे भावे मंदे ने।

जे सभना विच इक्को रब ए कौन बुरा ते कौन ए चंगा।

जिवे गंदगी मिल गंगा विथ हो जांदी ए आप बी गंगा।

सभ नूं इक्को जेहा जान के मन दी आकड़ मनणी तूं।

कहे अवतार सह दूजा प्रण ए वर्ण जात नहीं मनणी तूं।

सम्पूर्ण अवतार बाणी शब्द सं. (9 ख)

सम्पूर्ण अवतार बाणी के यह सरल भाषा के शब्द हमारे विचारों को एकत्व की ओर ले जाते हैं। परमात्मा का नूर दुनियां के हर मानव में है। परमात्मा ने सबको एक जैसी देह से संवारा सजाया है। जब सबमें एक ही प्रभु है, तो प्रभु की कोई जाति नहीं फिर मनुष्य की भी जात पात नहीं केवल एक मानव जाति हैं
अध्यात्म का सदा से यही संदेश रहा है। इसने हमेशा जोड़ने का ही काम किया है, विचारों में एकता लाने का प्रयास किया है। दूरियां दूर कर नजरिया बदला है।

(चम्पा भाटिया

9334424508)

Home Essentials
Abhushan
Sri Alankar
Raymond

About Author

admin_news

admin_news

Related Articles

0 Comments

No Comments Yet!

There are no comments at the moment, do you want to add one?

Write a comment

Write a Comment

Subscribe to Our Newsletter

LATEST ARTICLES

    People in power involved in illegal mining: Mukul Sangma

People in power involved in illegal mining: Mukul Sangma

0 comment Read Full Article