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पानी पीजिए जरूर लेकिन जरूरत से अधिक नहीं

पानी पीजिए जरूर लेकिन जरूरत से अधिक नहीं
October 11
09:20 2018

इनसाईट आॅनलाईन न्यूज

भारतीय चिकित्सा विशेषज्ञों ने प्राण रक्षा के साथ-साथ आजीवन स्वस्थ रहने में जल से रोग उपचार की पद्धति को पूरी प्रमाणिकता के साथ उपयोग में लाकर चमत्कृत किया है। प्राकृतिक चिकित्साशास्त्र में जलोपचार की विधियां खूब उपयोग में लायी जाती हैं। जबकि जल का सेवन हर कोई चाहे व मनुष्य हो या अन्य जीव-जंतु रोज-रोज करते ही हैं। इसी कारण तो कवि रहीम ने पानी की जरूरत पर एक दोहा ही लिख दिया है जो खूब पढ़ा जाता है जो इस तरह हैः

रहीमन पानी राखिये, बिना पानी सब सून।
पानी गए न उबरे, मोती, मानुष, चून।।

अब हमें स्वयं सोचना-विचारना है और अनुभवी चिकित्सकों और आहार शास्त्रियों के द्वारा जल सेवन से संबंधित स्थापनाओं पर ध्यान देकर जल-सेवन कितना और कैसे करें, इस पर गौर करते हुए अपनी स्वास्थ्य रक्षा करनी है। इस संदर्भ में मेरा एक बहुत विचारणीय अनुभव है।

पानी पीजिए जरूर लेकिन जरूरत से अधिक नहीं

स्वास्थ्य जांच के क्रम में मैं एक चिकित्सक के कक्ष में अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। कक्ष में कम से कम अन्य पंद्रह लोग भी थे जो स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचे थे। ऐसे अवसर पर सयाने चिकित्सक की सलाह, जो किसी और के लिए दी जा रही थी, उसे वहां बैठा प्रत्येक लाभार्थी सुन समझ रहा था।

आहार, औषधि, आचार, व्यायाम आदि की सलाह पर लोग विशेष चैकस लग रहे थे। इसी दौरान चिकित्सा विशेषज्ञ ने साबूत फल को जूस से अधिक उपयोगी बताया और टहलने के साथ नियमित व्यायाम करने पर बल दिया। और तो और, उन्होंने स्वच्छ पानी पीने की सलाह देते हुए यह बताकर अपने रोगी के साथ-साथ अन्यों को भी चैंका दिया कि ‘पानी पीजिए जरूर लेकिन जरूरत से अधिक पानी नहीं पीजिए।’

चिकित्सक के कक्ष में औषधि सेवन से इतर, स्वास्थ्य लाभ के लिए आहार-विहार सम्बन्धी सलाह पर अन्य लोगों की क्या सोच रही, मैं नहीं जानता, परन्तु मेरे मन में यह बात जम गई कि रोग निदान के लिए विविध और उपयोगी औषधि के सेवन के साथ आहार और विहार औषधि के बराबर ही स्वास्थ्य लाभ का पूरक है। पानी को तो जीवन ही कहा गया है। लेकिन अधिक पानी पीने पर प्रतिबंध क्यों।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शरीर विज्ञानियों और चिकित्सकों के शोध से प्राप्त निष्कर्ष के अनुसार जरूरत से अधिक पानी पीने से हमारी पाचन प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अधिक पानी पाचन प्रणाली को बिगाड़ देता है। इससे खाना देर से पचता है जिससे पाचन और पेट सम्बन्धी रोग हो सकता है।

विशेषज्ञों की मानें तो हमारे शरीर में किडनी एक महत्वपूर्ण अंग है जो प्रतिघंटा अपनी क्षमता के अनुसार एक हजार मिलीलीटर पानी छान सकती है। अधिक पानी पीने से किडनी पर ज्यादा दबाव पड़ता है जो किडनी के लिए नुकसान देह है। हृदय रोगियों में जिनकी बाय-पास सर्जरी हुई है उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सक कम पानी पीने की सलाह देते हैं। अधिक पानी रक्त के गाढ़ेपन (घनत्व) को बढ़ा देता है जिससे रक्त पंप करने में हृदय पर दबाव पड़ता है।

पानी पीजिए जरूर लेकिन जरूरत से अधिक नहीं

यही नहीं जरूरत से अधिक पानी शरीर में जाता है तो रक्त में सोडियम का स्तर अप्रत्याशित रूप से बहुत गिर जाता है। इसे हाइपोनेटेªमिया कहा जाता है। इससे थकान के अतिरिक्त नाक बहने, उलटी-मितली जैसी स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न हो जाती है। दिमाग पर भी असर पड़ सकता है जिससे सोचने-समझने की शक्ति कम हो जाती है और सिर में दर्द भी हो जाता है।

पानी जहां जीवन रक्षक है वही जरूरत से अधिक पानी का पीना इतना पीड़ादायक हो सकता है, हमें शायद पता नहीं है। शरीर में पोटैशियम नामक पोषक तत्व की जरूरत होती है। इसका शरीर में उचित स्तर बना रहना जरूरी है। लेकिन जरूरत से अधिक पानी पीने से पोटैशियम का स्तर बिगड़ जाता है। इससे स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ता है जिससे सीने और पैर में दर्द आदि की समस्या पैदा हो जाती है।

पानी पीने में सावधानी बरतनी है लेकिन अत्यधिक भयभीत होने की जरूरत भी नहीं है। प्रकृति और शरीर स्वयं विशेषज्ञ है और हमें पता चल जाता है कि शरीर को कितने पानी की जरूरत है। अधिक श्रम, व्यायाम करने पर प्यास तो लगती ही है, मधुमेह रोगियों को भी अधिक प्यास लग सकती है जबकि उसके शरीर में पानी की जरूरत नहीं हो। फिर भी प्रातः जागरण के उपरांत दो से चार ग्लास पानी पीना लाभदायक माना जाता है।

पानी की मात्रा को मौसम में बदलाव के अनुसार घटाना-बढ़ाना चाहिए। खाने के साथ पानी पीना स्वास्थ्यकर नहीं माना जाता है। खाने के आधा घंटा बाद ही पानी पीने की सलाह दी जाती है। दिनभर पानी सेवन के बाद सोने से बहुत पहले रात में पानी पीना रोक देना चाहिए। जरूरत हो तो घूँट-घूँट कर अल्पमात्रा में पानी ले सकते हैं। रात में अधिक पानी पीने से पेशाब लगने के कारण नींद में खलल पड़ती है। अतिशीतल अर्थात फ्रीज का पानी बहुत हानिकारक माना जाता है।

पानी पीजिए जरूर लेकिन जरूरत से अधिक नहीं

पानी गुनगुना या सामान्य तापमान वाला ही पीना चाहिए। एक बार में घटाघट अधिक पानी नहीं पीना चाहिए। वातानुकूलित वातावरण में काम करने वालों को बहुत अधिक पानी पीने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे लोग दिनभर में दो लीटर से ढाई लीटर तक पानी पी सकते हैं। इनके लिए अधिक सेवन करना उपयुक्त नहीं है। अत्यधिक श्रम करनेवाले रोज तीन लीटर पानी का सेवन करें तो अच्छा है। दौड़धूप का काम करने वालों को भी संतुलित मात्रा में ही पानी पीना चाहिए। ठंडा पानी पीने से शरीर के कुछ अंगों में रक्त नहीं पहुंचता है।

शरीर में पानी की जरूरत का पता तो स्वयं लगता ही है पेशाब से भी शरीर में पानी की जरूरत का आभास हो जाता है। यदि पेशाब का रंग पीला हो तो मानना चाहिए कि शरीर में पानी की जरूरत है। कभी-कभी किसी औषधि के कारण भी पेशाब का रंग पीला हो जाता है। इस स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए। अनुभवी शरीर विज्ञानियों की मानें तो उनका कहना है कि जब हमें प्यास लगती है तो उससे पहले ही हमारे शरीर में पानी की कमी हो गई होती है।

इसे ही ‘डिहाईडेªशन’ कहते हैं। इस स्थिति के आने से पहले ही पानी पी लेना चाहिए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि ऐसे मधुमेह रोगी को जिसकी किडनी स्वस्थ हो थोड़ा अधिक पानी पी लेना भी फायदेमंद ही होता है। ऐसा इसलिए कि बार-बार पेशाब होने से प्राकृतिक रूप से शर्करा का स्तर कम होता है। जब चिकित्सक किसी को ज्यादा नमक लेने की मनाही करते हैं तो ऐसे लोगों को अपने चिकित्सक से मिलकर जांच कराकर उचित राय ले लेनी चाहिए।

गर्म देश हो तो गर्मी के दिनों में शरीर से पसीना भी खूब निकलता है। ऐसी स्थिति में शरीर को पानी की जरूरत भी तनिक ज्यादा महसूस होती है। वैसे भी ग्लोबल वार्मिंग के कारण और मोटापा के कारण भी शरीर में पानी की मांग में आश्चर्यजनक परिवर्तन के संकेत हैं। दो दशक पूर्व जहां गर्मी में तो तीन-चार लीटर पानी पी लेते थे वही अभी पानी सेवन की मात्रा में कमी आयी है। जाड़ा में पहले दो-तीन लीटर पानी एक व्यक्ति पी लेता था।

पानी पीजिए जरूर लेकिन जरूरत से अधिक नहीं

खान-पान में बदलाव भी आया है जिसमें पानी के अतिरिक्त भी अन्य खाद्य पदार्थों-फल, सब्जी, दूध, सूप, जूस, रस आदि से पानी का विकल्प ग्रहण करते हैं। एक तथ्य पर ध्यान देने की जरूरत है कि शरीर में पानी की आवश्यकता वातावरण, व्यक्ति का स्वास्थ्य, लिंग, उम्र और जीवन शैली पर भी निर्भर है। जैसा कि ऊपर कहा गया है कि एक स्वस्थ और सक्रिय व्यक्ति रोज 4-5 लीटर तक पानी पी सकता है। वही शारीरिक श्रम कर पसीना बहाने वालों को इससे भी अधिक पानी की जरूरत हो सकती है।

लेकिन वातानुकूलित कक्ष में रहने वालों को इतने अधिक पानीपीने की जरूरत ही नहीं है। उन्हें प्यास लगने पर ही पानी पीना चाहिए। उनके लिए औसत 2-2.5 लीटर पानी पीना काफी माना जाता है।

अधिक पानी पीने से एडीमा का खतरा बढ़ जाता है। शरीर में नमक की मात्रा की खपत के अनुपात में भी पानी सेवन का अनुपात घटता बढ़ता है। इसलिए विशेषज्ञ ऊपर से नमक लेने की मनाही करते हैं। क्योंकि तब अधिक पानी की जरूरत होगी जो कतई आवश्यक नहीं है। ऐसी स्थिति में तमाम विशेषज्ञता और विशेषज्ञों की राय के साथ हमें शरीर की जरूरत को पहचान कर अन्य पदार्थोंं के अतिरिक्त पानी की समुचित मात्रा का भी सेवन करना चाहिए।

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