पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाओं ने वैश्विक व्यापार को दिया सहारा 

संयुक्त राष्ट्र के विश्लेषकों का कहना है कि पूर्व एशिया और प्रशान्त क्षेत्र में स्थित देशों की अर्थव्यवस्थाओं की सुदृढ़ता और मज़बूती के बिना, वर्ष 2020 के अन्तिम महीनों में वैश्विक व्यापार में बेहतरी सम्भव नहीं थी.  

व्यापार एवँ विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 की आख़िरी तिमाही में, पूर्व एशिया से निर्यात लगभग 12 फ़ीसदी की दर से बढ़े हैं, जबकि आयात में पाँच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. 
यूएन एजेंसी में अर्थशास्त्री ऐलेसान्द्रो निसिता ने बताया कि, “पुनर्बहाली प्रक्रिया असमान रही है, और बहुत से देश पिछड़ रहे हैं.”

Global trade rebounded in the 4th quarter of 2020, reducing its overall decline last year to 9%, according to a new @UNCTAD report.But the recovery was highly uneven. Get the full analysis in the latest Global Trade Update: https://t.co/GdS9RBZZQL. pic.twitter.com/NIBxH27LbZ— UNCTAD (@UNCTAD) February 10, 2021

इन नतीजों से पहले 2020 की तीसरी तिमाही में चीन से निर्यात में, वर्ष 2019 की उसी अवधि की तुलना में तीन प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी. 
लगभग सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में, गिरावट के दौर में यह एक अपवाद साबित हुआ है. 
वैश्विक व्यापार के बारे में, यूएन एजेंसी की नई जानकारी बताती है कि चीन और पूर्वी एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में प्रगति हुई है, लेकिन अन्य क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाओं में अब भी नकारात्मक रुझान जारी हैं.  
इनमें ब्राज़ील भी है जहाँ 2020 की चौथी तिमाही में सामान एवँ सेवाओं के निर्यात में क्रमश: 4 और 17 प्रतिशत की कमी आई है.
ये दरें रूस में 19 प्रतिशत और 34 प्रतिशत, भारत में 5 प्रतिशत और 8 प्रतिशत, और अमेरिका में 5 प्रतिशत और 26 प्रतिशत रही.
इसके विपरीत चीन में वस्तुओं के निर्यात में 17 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है और सेवाओं के निर्यात में दो प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हासिल हुई है. 
दक्षिण अफ़्रीका में भी देश के बाहर भेजे जाने वाली वस्तुओं में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है लेकिन सेवाओं के निर्यात में 64 प्रतिशत की गिरावट आई है. 
जापान और योरोपीय संघ में वस्तुओं के निर्यात में तीन प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन सेवाओं के निर्यात में क्रमश: 20 फ़ीसदी और 14 प्रतिशत की गिरावट आई है. 
ग्लोबल साउथ के देशों (वैश्विक गोलार्ध में स्थित देश) में व्यापार अब भी औसत से कम है, लेकिन पूर्वी एशिया की अर्थव्यवस्थाएँ इसका अपवाद हैं. 
पाबन्दियों का असर
यूएन विशेषज्ञों का कहना है कि विनिर्माण क्षेत्र  के अधिकाँश हिस्से में, वर्ष 2020 की आख़िरी तिमाही में व्यापार में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन ऊर्जा व परिवहन सैक्टर में ऐसा नहीं हो पाया है. 
यात्राओं और आवाजाही सम्बन्धी पाबन्दियों को, इसकी वजह बताया गया है. 
यूएन एजेंसी का कहना है कि कोविड-19 के कारण वैश्विक व्यापार मूल्य में वर्ष 2020 में नौ प्रतिशत की गिरावट आई है.
ताज़ा जानकारी के अनुसार 2020 की तीसरी और चौथी तिमाही में व्यापार फिर से बढ़ना शुरू हुआ है, लेकिन सेवाओं में ज़्यादा सुधार देखने को नहीं मिला है.
उनका स्तर कमोबेश उतना ही है जितना कि तीसरी तिमाही के अन्त में देखा गया था. 
वर्ष 2021 के लिये अनुमान दर्शाते हैं कि वस्तुओं के निर्यात में बेहतरी की दर धीमी रहेगी जबकि सेवाओं में यात्रा सम्बन्धी व्यवधानों के जारी रहने के कारण और भी गिरावट दर्ज किये जाने की आशंका है., संयुक्त राष्ट्र के विश्लेषकों का कहना है कि पूर्व एशिया और प्रशान्त क्षेत्र में स्थित देशों की अर्थव्यवस्थाओं की सुदृढ़ता और मज़बूती के बिना, वर्ष 2020 के अन्तिम महीनों में वैश्विक व्यापार में बेहतरी सम्भव नहीं थी.  

व्यापार एवँ विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 की आख़िरी तिमाही में, पूर्व एशिया से निर्यात लगभग 12 फ़ीसदी की दर से बढ़े हैं, जबकि आयात में पाँच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. 

यूएन एजेंसी में अर्थशास्त्री ऐलेसान्द्रो निसिता ने बताया कि, “पुनर्बहाली प्रक्रिया असमान रही है, और बहुत से देश पिछड़ रहे हैं.”

इन नतीजों से पहले 2020 की तीसरी तिमाही में चीन से निर्यात में, वर्ष 2019 की उसी अवधि की तुलना में तीन प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी. 

लगभग सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में, गिरावट के दौर में यह एक अपवाद साबित हुआ है. 

वैश्विक व्यापार के बारे में, यूएन एजेंसी की नई जानकारी बताती है कि चीन और पूर्वी एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में प्रगति हुई है, लेकिन अन्य क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाओं में अब भी नकारात्मक रुझान जारी हैं.  

इनमें ब्राज़ील भी है जहाँ 2020 की चौथी तिमाही में सामान एवँ सेवाओं के निर्यात में क्रमश: 4 और 17 प्रतिशत की कमी आई है.

ये दरें रूस में 19 प्रतिशत और 34 प्रतिशत, भारत में 5 प्रतिशत और 8 प्रतिशत, और अमेरिका में 5 प्रतिशत और 26 प्रतिशत रही.

इसके विपरीत चीन में वस्तुओं के निर्यात में 17 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है और सेवाओं के निर्यात में दो प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हासिल हुई है. 

दक्षिण अफ़्रीका में भी देश के बाहर भेजे जाने वाली वस्तुओं में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है लेकिन सेवाओं के निर्यात में 64 प्रतिशत की गिरावट आई है. 

जापान और योरोपीय संघ में वस्तुओं के निर्यात में तीन प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन सेवाओं के निर्यात में क्रमश: 20 फ़ीसदी और 14 प्रतिशत की गिरावट आई है. 

ग्लोबल साउथ के देशों (वैश्विक गोलार्ध में स्थित देश) में व्यापार अब भी औसत से कम है, लेकिन पूर्वी एशिया की अर्थव्यवस्थाएँ इसका अपवाद हैं. 

पाबन्दियों का असर

यूएन विशेषज्ञों का कहना है कि विनिर्माण क्षेत्र  के अधिकाँश हिस्से में, वर्ष 2020 की आख़िरी तिमाही में व्यापार में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन ऊर्जा व परिवहन सैक्टर में ऐसा नहीं हो पाया है. 

यात्राओं और आवाजाही सम्बन्धी पाबन्दियों को, इसकी वजह बताया गया है. 

यूएन एजेंसी का कहना है कि कोविड-19 के कारण वैश्विक व्यापार मूल्य में वर्ष 2020 में नौ प्रतिशत की गिरावट आई है.

ताज़ा जानकारी के अनुसार 2020 की तीसरी और चौथी तिमाही में व्यापार फिर से बढ़ना शुरू हुआ है, लेकिन सेवाओं में ज़्यादा सुधार देखने को नहीं मिला है.

उनका स्तर कमोबेश उतना ही है जितना कि तीसरी तिमाही के अन्त में देखा गया था. 

वर्ष 2021 के लिये अनुमान दर्शाते हैं कि वस्तुओं के निर्यात में बेहतरी की दर धीमी रहेगी जबकि सेवाओं में यात्रा सम्बन्धी व्यवधानों के जारी रहने के कारण और भी गिरावट दर्ज किये जाने की आशंका है.

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