प्रवासी कामगारों की संख्या में 50 लाख की वृद्धि – यूएन श्रम एजेंसी  

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी कामगारों की संख्या बढ़कर 16 करोड़ 90 लाख तक पहुँच गई है. वर्ष 2017 के बाद से इसमें तीन प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.   

यूएन श्रम एजेंसी की नई रिपोर्ट, ILO Global Estimates on International Migrant Workers: Results and Methodology, के मुताबिक वर्ष 2019 में विश्व के कुल श्रम बल में अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी कामगारों का हिस्सा पाँच फ़ीसदी है.

Latest ILO estimates show the number of migrant #workers has increased by 5 million since 2017. The #COVID19 crisis has highlighted the critical role migrants play as essential workers & exposed their vulnerabilities in informal or unprotected jobs.➡️https://t.co/7QkVK2gluE pic.twitter.com/1CuypEYtyq— International Labour Organization (@ilo) June 30, 2021

प्रवासी कामगार, विश्व अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग हैं और स्वास्थ्य देखभाल से लेकर परिवहन और अन्य सैक्टरों में अहम भूमिका निभाते हैं. 
यूएन श्रम संगठन में कामकाजी परिस्थितियाँ और समानता विभाग में निदेशक मैन्युएला टोमेई ने बताया, “हमने देखा है कि अनेक क्षेत्रों में प्रवासी कामगार, श्रमबल का एक बड़ा हिस्सा हैं.”
“वे ना सिर्फ़, अपने मेज़बान देशों की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों में निश्चित रूप से योगदान दे रहे हैं, बल्कि धन-प्रेषण के ज़रिये अपने मूल देशों को भी.” 
यूएन एजेंसी ने सचेत किया है कि विश्व अर्थव्यवस्था में उनके मूल्य के बावजूद, बहुत से प्रवासी कामगारों को कार्यस्थल पर अनिश्चित हालात का सामना करना पड़ता है. 
अक्सर उन्हें अस्थाई, अनौपचारिक और असुरक्षित रोज़गारों के अवसर ही प्राप्त होते हैं. इन हालात में उनके बदतक परिस्थितियों में काम करने, आजीविका का साधन गँवाने और असुरक्षा का ख़तरा अधिक होता है. 
कोविड-19 महामारी के दौरान यह स्थिति और भी ख़राब हुई है, विशेष रूप से महिला प्रवासी कामगारों के लिये. 
यूएन एजेंसी ने 189 देशों से मिले आँकड़ों के आधार पर इस रिपोर्ट को तैयार किया है. 
वर्ष 2017 में प्रवासी कामगारों की संख्या 16 करोड़ 40 लाख थी, जो 2019 में बढ़कर 16 करोड़ 90 लाख हो गई है. 
धनी देशों में संख्या अधिक
रिपोर्ट बताती है कि दो-तिहाई से अधिक अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी कामगार, उच्च-आय वाले देशों में काम कर रहे हैं.
16 करोड़ 90 लाख प्रवासी कामगारों में से, छह करोड़ 38 लाख (37 फ़ीसदी) योरोप व मध्य एशिया और चार करोड़ 33 लाख (25 प्रतिशत) अमेरिकी क्षेत्र में हैं. 
अरब और एशिया-प्रशान्त क्षेत्रों में, लगभग ढाई-ढाई करोड़ प्रवासी कामगार हैं जबकि अफ़्रीका में एक करोड़ 37 लाख प्रवासी कामगार हैं. 
15 से 24 वर्ष आयु वर्ग के कामगारों का हिस्सा, वर्ष 2017 में 8.3 फ़ीसदी था, जो 2019 में बढ़कर 10 प्रतिशत तक पहुँच गया है. 
मगर, युवा प्रवासी कामगारों में इस वृद्धि के बावजूद, अभी भी कामगारों का एक बड़ा हिस्सा 25 से 64 वर्ष आयु वर्ग में है.
नौ करोड़ 90 लाख पुरुष प्रवासी कामगार हैं जबकि महिलाओं की संख्या सात करोड़ है.
इनमें से अधिकाँश कामगार सेवा क्षेत्र में काम करते हैं जिसके बाद विनिर्माण का स्थान है. , अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी कामगारों की संख्या बढ़कर 16 करोड़ 90 लाख तक पहुँच गई है. वर्ष 2017 के बाद से इसमें तीन प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.   

यूएन श्रम एजेंसी की नई रिपोर्ट, ILO Global Estimates on International Migrant Workers: Results and Methodology, के मुताबिक वर्ष 2019 में विश्व के कुल श्रम बल में अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी कामगारों का हिस्सा पाँच फ़ीसदी है.

Latest ILO estimates show the number of migrant #workers has increased by 5 million since 2017.

The #COVID19 crisis has highlighted the critical role migrants play as essential workers & exposed their vulnerabilities in informal or unprotected jobs.

➡️https://t.co/7QkVK2gluE pic.twitter.com/1CuypEYtyq

— International Labour Organization (@ilo) June 30, 2021

प्रवासी कामगार, विश्व अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग हैं और स्वास्थ्य देखभाल से लेकर परिवहन और अन्य सैक्टरों में अहम भूमिका निभाते हैं. 

यूएन श्रम संगठन में कामकाजी परिस्थितियाँ और समानता विभाग में निदेशक मैन्युएला टोमेई ने बताया, “हमने देखा है कि अनेक क्षेत्रों में प्रवासी कामगार, श्रमबल का एक बड़ा हिस्सा हैं.”

“वे ना सिर्फ़, अपने मेज़बान देशों की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों में निश्चित रूप से योगदान दे रहे हैं, बल्कि धन-प्रेषण के ज़रिये अपने मूल देशों को भी.” 

यूएन एजेंसी ने सचेत किया है कि विश्व अर्थव्यवस्था में उनके मूल्य के बावजूद, बहुत से प्रवासी कामगारों को कार्यस्थल पर अनिश्चित हालात का सामना करना पड़ता है. 

अक्सर उन्हें अस्थाई, अनौपचारिक और असुरक्षित रोज़गारों के अवसर ही प्राप्त होते हैं. इन हालात में उनके बदतक परिस्थितियों में काम करने, आजीविका का साधन गँवाने और असुरक्षा का ख़तरा अधिक होता है. 

कोविड-19 महामारी के दौरान यह स्थिति और भी ख़राब हुई है, विशेष रूप से महिला प्रवासी कामगारों के लिये. 

यूएन एजेंसी ने 189 देशों से मिले आँकड़ों के आधार पर इस रिपोर्ट को तैयार किया है. 

वर्ष 2017 में प्रवासी कामगारों की संख्या 16 करोड़ 40 लाख थी, जो 2019 में बढ़कर 16 करोड़ 90 लाख हो गई है. 

धनी देशों में संख्या अधिक

रिपोर्ट बताती है कि दो-तिहाई से अधिक अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी कामगार, उच्च-आय वाले देशों में काम कर रहे हैं.

16 करोड़ 90 लाख प्रवासी कामगारों में से, छह करोड़ 38 लाख (37 फ़ीसदी) योरोप व मध्य एशिया और चार करोड़ 33 लाख (25 प्रतिशत) अमेरिकी क्षेत्र में हैं. 

अरब और एशिया-प्रशान्त क्षेत्रों में, लगभग ढाई-ढाई करोड़ प्रवासी कामगार हैं जबकि अफ़्रीका में एक करोड़ 37 लाख प्रवासी कामगार हैं. 

15 से 24 वर्ष आयु वर्ग के कामगारों का हिस्सा, वर्ष 2017 में 8.3 फ़ीसदी था, जो 2019 में बढ़कर 10 प्रतिशत तक पहुँच गया है. 

मगर, युवा प्रवासी कामगारों में इस वृद्धि के बावजूद, अभी भी कामगारों का एक बड़ा हिस्सा 25 से 64 वर्ष आयु वर्ग में है.

नौ करोड़ 90 लाख पुरुष प्रवासी कामगार हैं जबकि महिलाओं की संख्या सात करोड़ है.

इनमें से अधिकाँश कामगार सेवा क्षेत्र में काम करते हैं जिसके बाद विनिर्माण का स्थान है. 

,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *