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बथुआ एक, स्वाद अनेक, लाभ अनेकानेक

बथुआ एक, स्वाद अनेक, लाभ अनेकानेक
February 10
10:42 2019

रूक रूक कर होते पेशाब में बथुआ का रस लाभकारी

गर्भवती महिलाओं के लिए बथुए का सेवन मना

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ 

भोजन की भारतीय थाली में परोसे गये व्यंजनों में किसी न किसी मौसम में उपार्जित साग का स्थान होता है। स्थान और प्रकृति के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में कतिपय विशेष प्रकार के साग भी उपजते हैं। उन्हें ‘देसी’ साग कहते हैं। लेकिन ऐसे साग भी बहुत गुणकारी होते हैं। रोग निवारक तो होते ही है ।

उसी प्रकार पालक, मेथी, मूली आदि के पत्ते का साग भी बहुधा प्रचलित साग हैं जिनकी पहुंच प्रत्येक रसोई घर में है। प्रचलित श्रेणी के साग में ‘बथुआ का साग’ भी बहुत फायदेमंद साग माना जाता है। बथुआ में प्रचूर लौह तत्व होता है। शरीर में लौह तत्व की कमी से पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।

बथुआ एक, स्वाद अनेक, लाभ अनेकानेक

इस कारण खून बनना भी कम हो जाता है। शरीर रोग का शिकार होने लगता है। ऐसी हालत में बथुआ का सेवन लाभकारी होता है। यहां ध्यान रखने की बात है कि आमतौर पर बथुआ सर्दी के मौसम में उपजता है। इसीलिए मौसम के अनुकूल शाक-सब्जियों का सेवन करने वाले जागरूक लोग सर्दी में बथुआ के साग का उचित सेवन कर आरोग्य प्राप्त करते हैं।

बथुआ के साग का इच्छा और स्वाद के अनुसार किसी भी रूप में प्रयोग कर हम आसानी से बिना अधिक श्रम और अधिक व्यय किए शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं और शरीर में लोहे की कमी को पूरा कर सकते हैं। खून में लाल रक्तकण बढ़ाकर रोग मुक्त हो सकते हैं।

व्यंजन बनाने वाले आहार विशेषज्ञों के अनुसार पालक, मेथी, सरसो एवं चने के साग की तरह बथुआ की सूखी भुजिया आसानी से बनायी जाती है। बथुए को अच्छी तरह धोकर उबाल लिया जाता है और ठंडा होने पर उसे निचोड़ लिया जाता है। अब इसे कड़ाही में बिना पानी डाले घी-अदरक के साथ भून लेते हैं।

बथुआ एक, स्वाद अनेक, लाभ अनेकानेक

स्वाद के अनुसार इसमें नमक, मिर्च या अन्य गुणकारी मसाले भी डाल देते हैं। इस व्यंजन को रोटी-चावल-दाल के साथ खाया जा सकता है। बथुए के साग को दाल में सिझा कर भी पकाया जाता है। यहां यह भी समझ लेना जरूरी है कि उबले हुए बथुए का पानी यूं ही फेकना नहीं चाहिए क्योंकि उस पानी में बथुए में निहित पौष्टिक तत्व चले जाते हैं। उस पानी में नमक, जीरा, नींबू का रस आदि मिलाकर पी लेने से खूब फायदा होता है।

यह साग हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद होते हुए भी इसका सेवन सीमित मात्रा में हीं करना चाहिए वर्ना लाभ के बदले हानि भी हो सकती है। विशेषकर गर्भवती स्त्रियों के लिए इसका सेवन करना मना है। इसके सेवन से गर्भपात का खतरा बना रहता है।

लेकिन जिन महिलाओं को अनियमित माहवारी आने की बीमारी लगी रहती है उन महिलाओं के लिए बथुआ का सेवन गुणकारी है। पेट के रोगों में तो यह फायदेमंद ही है। कुछ अन्य प्रकार के रोगों में भी बथुए का सेवन करने की सलाह दी गई है। जैसेः

  • बवासीर से पीड़ित लोग यदि मौसम में बथुए के साग का सुबह-शाम रोज सेवन करें तो इस भयानक कष्ट से छुटकारा मिल सकता है।
  • प्लीहा (स्पिलीन) वृद्धि में बथुए को काली मिर्च और सेंधा नमक के साथ उबाल कर खाने से लाभ मिलता है।
  • कमजोर पाचन, भूख में कमी, खट्टी डकार आने और कब्ज आदि की शिकायत में रोजाना कुछ सप्ताह तक उबाले हुए बथुए का सेवन करने से लाभ मिल जाता है।
  • बथुआ पेट के कीड़े नष्ट करता है। बच्चों के पेट में कीड़े की शिकायत होने पर उन्हें भी बथुए के साग का सेवन कराया जाता है।
  • पीलिया से ग्रस्त रोगी को दिन में दो बार 25-25 ग्राम की मात्रा में बथुए का रस और गिलोय का रस मिलाकर पिलाने पर लाभ पहुंचता है।
  • गर्भवती महिलाओं को भले बथुए का सेवन करना मना है लेकिन प्रसव के बाद की समस्या को दूर करने में बथुआ लाभ पहुंचाता है। प्रसवोपरांत 10-15 दिनों तक 10 ग्राम बथुआ के साथ आजवाइन, मेथी और गुड़ मिलाकर खिलाने से संक्रमण सहित किसी भी प्रकार की समस्या दूर होती है।
  • रूक-रूक कर पेशाब आने की समस्या बथुए के सेवन से दूर होती है। बथुए की पत्तियों का दस ग्राम रस 50 ग्राम पानी में मिलाकर लेने से आराम पाने का दावा किया जाता है।
  • बथुए की पत्तियों का रस और नीम की पत्ती का रस मिलाकर लेने से खून की सफाई होती है और रक्त प्रवाह में कोई बाधा नहीं उत्पन्न होती है।
  • बथुए की पत्तियां चबाने से पायरिया, मुंह का अल्सर और दांतों का हिलना भी ठीक होता है। मुंह सम्बन्धी रोग दूर होते हैं।
  • बालों की समस्या से ग्रस्त उदास लोगों को बथुए का सेवना करना चाहिए। इसमें विटामिन-ए प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इसीलिए बथुए के सेवन से बालों का रंग प्राकृतिक बना रहता है और बाल लंबे घने और मजबूत रेशमी बने रहते हैं।

यहां बथुए के औषधीय गुणों के साथ उसके विविध व्यंजनों का स्वाद भी अलग-अलग तरह का होता है। बथुए से कुछ निम्न प्रकार के व्यंजन आसानी से बनाए जाते हैं। यथाः-

  • कढ़ी: आम घरों में दही और बेसन से स्वादिष्ट कढ़ी बनती है। उसी कढ़ी में साफ किये हुए बथुए के साग के छोटे-छोटे टुकड़ों की छौंक दी जाए तो कढ़ी का स्वाद तो बदलता ही है कढ़ी भी और अधिक गुणकारी हो जाती है। बथुए की कढ़ी बनाते समय यह ध्यान रखा जाता है कि अच्छी तरह पकने पर ही उसे चुल्हे से उतारा जाए।
  • रायता:- बथुए का रायता भी स्वादिष्ट और सुपाच्च होता है। साफ सुथरे बथुए को उबालकर और फिर निचोड़ कर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। उसे किसी भी साधन से पीस भी लिया जा सकता है। फिर मथी हुई दही में बथुए को मिलाकर ऊपर से नमक, मिर्च, मसाला आदि डाल दिया जाता है। इसमें जीरे और हीं ग की छौंक लगा देने से स्वाद बढ़ जाता है। यह रायता इतना स्वादिष्ट हो जाता है कि अंगुली चाट कर खायी जाती है।
  • साग:- साफ पानी से अच्छी तरह बथुए को धोकर टूकड़े-टूकड़े काट लिया जाता है। फिर गर्म कड़ाही में सरसो तेल या अन्य खाद्य तेल डालकर सूखे या हरी मिर्च की छौंक लगा दी जाती है। फिर कटा हुआ बथुआ डालकर थोड़ी देर भूनते हैं। थोड़ा पानी छोड़ते ही जरूरत हो तो थोड़ा और पानी उबालकर नमक, अदरक, लहसुन आदि मिलाकर पकने देते हैं। बीच-बीच में ढक्कन उठाकर चलाते रहा जाता है। पूरी तरह पक जाने पर इस स्वादिष्ट और सादा व्यंजन को रोटी या चावल-दाल के साथ भी खाया जाता है।

मुंग या चने की दाल के साथ पका कर भी बथुए का स्वादिष्ट साग बनाया जाता है। बथुए के साग का चीला भी बनता है। इस तरह बथुआ एक, स्वाद अनेक, लाभ अनेकानेक।

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