बांग्लादेश और भारत में परिवहन सम्पर्क – आय वृद्धि का सम्भावित स्रोत

विश्व बैन्क (World Bank) विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में स्थित, विभिन्न देशों के बीच मज़बूत परिवहन सम्पर्क स्थापित करने से ना सिर्फ़ सभी देशों को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय लोगों की आय में भी बढ़ोत्तरी होगी. इस विषय पर, विश्व बैन्क में दक्षिण एशिया के लिये क्षेत्रीय एकीकरण निदेशक सेसिल फ्रुमेन, वरिष्ठ परिवहन से जुड़े मामलों के लिये वरिष्ठ अर्थशास्त्री मातिआस हरेरा डप्पे, और निजी क्षेत्र विकास के लिये मुख्य विशेषज्ञ चार्ल्स कुनाका का संयुक्त ब्लॉग…

मज़बूत सीमा-पार परिवहन सम्पर्क की मदद से माल आयात और निर्यात करना आसान हो जाता है. इसके लाभ आम तौर पर पूरी अर्थव्यवस्था को मिलते हैं, जिससे निकट और दूर – सभी लोगों की आय बढ़ती है.
बांग्लादेश के मामले में, पड़ोसी देश भारत के साथ निर्बाध परिवहन एकीकरण से, सीमा पर माल परिवहन के लिये ट्रकों की आवश्यकता ख़त्म हो जाएगी.
हालाँकि, एकीकरण के लिये आधुनिक कस्टम प्रणालियों और अनेक प्रकार के मॉडलों के बीच सम्पर्क स्थापित करने की आवश्यकता होगी, ताकि ट्रकों, ट्रेन की बग्गियों, नावों और विमानों के ज़रिये माल को आसानी से स्थानान्तरित किया जा सके. 
इन सबसे आयात और निर्यात की लागत में कमी आती है. ये सुधार, सीमा के दोनों ओर के अधिकाँश लोगों के लिये बेहतर जीवन और अधिक आय लेकर आएँगे.
हमारा ताज़ा विश्लेषण बताता है कि परिवहन सम्पर्क के ज़रियें, पूरे बांग्लादेश में वास्तविक आय में 17 प्रतिशत और भारत में 8 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हो सकती है. 
बांग्लादेश के हर एक ज़िले और भारतीय राज्य की आय पर होने वाले प्रभाव की गणना करने के लिये माल, मज़दूरी और आर्थिक गतिविधियों की क़ीमतों पर आधारित एक अभिनव आर्थिक मॉडल का उपयोग किया गया है. 
क्षेत्रीय व्यापार एकीकरण और परिवहन सम्पर्क के क्षेत्र में, दक्षिण एशिया दुनिया के बाक़ी हिस्सों से काफ़ी पीछे है. इस क्षेत्र के देशों ने उच्च कर (टैक्स) दर, व्यापार बाधाओं और अन्य सीमा प्रतिबन्धों को बरक़रार रखा है.
सौभाग्य से, बेहतर परिवहन सम्पर्क बनाने के लिये पहले से ही कई देशों के बीच नींव मौजूद है. 
वर्ष 2015 के मोटर वाहन समझौते का उद्देश्य बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल (BBIN ) के बीच मालवाहक, यात्रियों और निजी वाहनों की सीमा पार आवाजाही पर लगे प्रतिबंध हटाना था. 
मौजूदा चुनौतियाँ
BBIN समझौते में यात्री और माल की आवाजाही के लिये कुछ प्रोटोकॉल और संचालन प्रक्रियाएँ हैं, जिन पर सहमति बनाया जाना अभी बाक़ी है.
वर्तमान में, ना तो बांग्लादेश और ना ही भारत, एक दूसरे के ट्रकों को सीमा पार करने और माल पहुँचाने की अनुमति देते हैं, जोकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिये एक प्रमुख बाधा बन गई है. 
ट्रकों को सीमा पर रोककर व माल को उठाकर, एक से दूसरे देश के ट्रक में स्थानान्तरित करना पड़ता है. इसलिये ये हैरानी की बात नहीं कि परिवहन लागत के मामले में, दक्षिण एशिया, दुनिया के सबसे ज़्यादा वाले क्षेत्रों में है. 
देरी और बोझिल सीमा प्रक्रियाओं के कारण,  योरोप के साथ व्यापार करने की तुलना में, बांग्लादेश और भारत में कंपनियों को व्यापार करने के लिये 20 प्रतिशत तक अधिक भुगतान करना पड़ता है.
बेहतर परिवहन सम्पर्क, तेज़ी से सामान पहुँचाने के अलावा और नज़रियों से भी बहुत लाभप्रद हैं. 
अनेक लाभ
दुनिया के अन्य हिस्सों में स्थित परिवहन गलियारे, वाणिज्य के अवसर पैदा कर, समुदायों को सम्पन्न बनाते हैं. उदाहरण के लिये, खेती और मत्स्य पालन वाले छोटे व्यवसाय, अक्सर महिलाओं द्वारा चलाये जाते हैं और परिवहन गलियारों के पास स्थित होने पर लाभान्वित होते हैं.
मौजूदा समय में, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से सिलीगुड़ी गलियारे के माध्यम से जोड़ा गया है, जोकि एक पतला ज़मीनी रास्ता है, जिसे “चिकन्स नैक” कहा जाता है. 
उदाहरण के लिये, अगर निर्यातक बांग्लादेश के चटोग्राम के पास वाले बन्दरगाह का उपयोग करें, तो पूर्वोत्तर भारत के एक बड़े शहर अगरतला से माल ढुलाई की लागत में 80 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है. 
फ़िलहाल, अगरतला का सामान बांग्लादेश की पूरी परिधि का चक्कर काटकर और “चिकन्स नैक” के माध्यम से कोलकाता पहुँचता है, जोकि वहाँ से भारत का निकटतम बन्दरगाह है.
इससे बांग्लादेश को भी काफी फ़ायदा होगा. वहाँ कई उद्योग विशाल भारतीय बाज़ार तक बेहतर पहुँच बनाने के लिये उत्सुक हैं.
बांग्लादेश, दक्षिण पूर्व एशिया में बढ़ते बाज़ारों के लिये एक प्राकृतिक प्रवेश द्वार है और पूरे दक्षिण एशिया के लिये एक परिवहन केंद्र बन सकता है. 
अब जबकि, वर्ष 2026 में बांग्लादेश विकासशील देश की श्रेणी में शामिल होने की तरफ़ बढ़ रहा है, ऐसे में, ये अवसर उसके लिये बेहद आकर्षक साबित हो सकते हैं.
यह लेख, यहाँ प्रकाशित हो चुके ब्लॉग का संक्षिप्त संस्करण है. , विश्व बैन्क (World Bank) विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में स्थित, विभिन्न देशों के बीच मज़बूत परिवहन सम्पर्क स्थापित करने से ना सिर्फ़ सभी देशों को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय लोगों की आय में भी बढ़ोत्तरी होगी. इस विषय पर, विश्व बैन्क में दक्षिण एशिया के लिये क्षेत्रीय एकीकरण निदेशक सेसिल फ्रुमेन, वरिष्ठ परिवहन से जुड़े मामलों के लिये वरिष्ठ अर्थशास्त्री मातिआस हरेरा डप्पे, और निजी क्षेत्र विकास के लिये मुख्य विशेषज्ञ चार्ल्स कुनाका का संयुक्त ब्लॉग…

मज़बूत सीमा-पार परिवहन सम्पर्क की मदद से माल आयात और निर्यात करना आसान हो जाता है. इसके लाभ आम तौर पर पूरी अर्थव्यवस्था को मिलते हैं, जिससे निकट और दूर – सभी लोगों की आय बढ़ती है.

बांग्लादेश के मामले में, पड़ोसी देश भारत के साथ निर्बाध परिवहन एकीकरण से, सीमा पर माल परिवहन के लिये ट्रकों की आवश्यकता ख़त्म हो जाएगी.

हालाँकि, एकीकरण के लिये आधुनिक कस्टम प्रणालियों और अनेक प्रकार के मॉडलों के बीच सम्पर्क स्थापित करने की आवश्यकता होगी, ताकि ट्रकों, ट्रेन की बग्गियों, नावों और विमानों के ज़रिये माल को आसानी से स्थानान्तरित किया जा सके. 

इन सबसे आयात और निर्यात की लागत में कमी आती है. ये सुधार, सीमा के दोनों ओर के अधिकाँश लोगों के लिये बेहतर जीवन और अधिक आय लेकर आएँगे.

हमारा ताज़ा विश्लेषण बताता है कि परिवहन सम्पर्क के ज़रियें, पूरे बांग्लादेश में वास्तविक आय में 17 प्रतिशत और भारत में 8 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हो सकती है. 

बांग्लादेश के हर एक ज़िले और भारतीय राज्य की आय पर होने वाले प्रभाव की गणना करने के लिये माल, मज़दूरी और आर्थिक गतिविधियों की क़ीमतों पर आधारित एक अभिनव आर्थिक मॉडल का उपयोग किया गया है. 

क्षेत्रीय व्यापार एकीकरण और परिवहन सम्पर्क के क्षेत्र में, दक्षिण एशिया दुनिया के बाक़ी हिस्सों से काफ़ी पीछे है. इस क्षेत्र के देशों ने उच्च कर (टैक्स) दर, व्यापार बाधाओं और अन्य सीमा प्रतिबन्धों को बरक़रार रखा है.

सौभाग्य से, बेहतर परिवहन सम्पर्क बनाने के लिये पहले से ही कई देशों के बीच नींव मौजूद है. 

वर्ष 2015 के मोटर वाहन समझौते का उद्देश्य बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल (BBIN ) के बीच मालवाहक, यात्रियों और निजी वाहनों की सीमा पार आवाजाही पर लगे प्रतिबंध हटाना था. 

मौजूदा चुनौतियाँ

BBIN समझौते में यात्री और माल की आवाजाही के लिये कुछ प्रोटोकॉल और संचालन प्रक्रियाएँ हैं, जिन पर सहमति बनाया जाना अभी बाक़ी है.

वर्तमान में, ना तो बांग्लादेश और ना ही भारत, एक दूसरे के ट्रकों को सीमा पार करने और माल पहुँचाने की अनुमति देते हैं, जोकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिये एक प्रमुख बाधा बन गई है. 

ट्रकों को सीमा पर रोककर व माल को उठाकर, एक से दूसरे देश के ट्रक में स्थानान्तरित करना पड़ता है. इसलिये ये हैरानी की बात नहीं कि परिवहन लागत के मामले में, दक्षिण एशिया, दुनिया के सबसे ज़्यादा वाले क्षेत्रों में है. 

देरी और बोझिल सीमा प्रक्रियाओं के कारण,  योरोप के साथ व्यापार करने की तुलना में, बांग्लादेश और भारत में कंपनियों को व्यापार करने के लिये 20 प्रतिशत तक अधिक भुगतान करना पड़ता है.

बेहतर परिवहन सम्पर्क, तेज़ी से सामान पहुँचाने के अलावा और नज़रियों से भी बहुत लाभप्रद हैं. 

अनेक लाभ

दुनिया के अन्य हिस्सों में स्थित परिवहन गलियारे, वाणिज्य के अवसर पैदा कर, समुदायों को सम्पन्न बनाते हैं. उदाहरण के लिये, खेती और मत्स्य पालन वाले छोटे व्यवसाय, अक्सर महिलाओं द्वारा चलाये जाते हैं और परिवहन गलियारों के पास स्थित होने पर लाभान्वित होते हैं.

मौजूदा समय में, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से सिलीगुड़ी गलियारे के माध्यम से जोड़ा गया है, जोकि एक पतला ज़मीनी रास्ता है, जिसे “चिकन्स नैक” कहा जाता है. 

उदाहरण के लिये, अगर निर्यातक बांग्लादेश के चटोग्राम के पास वाले बन्दरगाह का उपयोग करें, तो पूर्वोत्तर भारत के एक बड़े शहर अगरतला से माल ढुलाई की लागत में 80 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है. 

फ़िलहाल, अगरतला का सामान बांग्लादेश की पूरी परिधि का चक्कर काटकर और “चिकन्स नैक” के माध्यम से कोलकाता पहुँचता है, जोकि वहाँ से भारत का निकटतम बन्दरगाह है.

इससे बांग्लादेश को भी काफी फ़ायदा होगा. वहाँ कई उद्योग विशाल भारतीय बाज़ार तक बेहतर पहुँच बनाने के लिये उत्सुक हैं.

बांग्लादेश, दक्षिण पूर्व एशिया में बढ़ते बाज़ारों के लिये एक प्राकृतिक प्रवेश द्वार है और पूरे दक्षिण एशिया के लिये एक परिवहन केंद्र बन सकता है. 

अब जबकि, वर्ष 2026 में बांग्लादेश विकासशील देश की श्रेणी में शामिल होने की तरफ़ बढ़ रहा है, ऐसे में, ये अवसर उसके लिये बेहद आकर्षक साबित हो सकते हैं.

यह लेख, यहाँ प्रकाशित हो चुके ब्लॉग का संक्षिप्त संस्करण है. 

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