बांग्लादेश: रोहिंज्या शिविर में आग से हुई तबाही में, यूएन एजेंसियों की मदद तेज़

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने, बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी इलाक़े में स्थित एक भीड़ भरे शरणार्थी शिविर में गुरूवार को विनाशकारी आग लगने के बाद बेसहारा बचे हज़ारों रोहिंज्या शरणार्थियों की मदद करने के लिये प्रयास तेज़ कर दिये हैं. 

कॉक्सेस बाज़ार इलाक़े के नयापाड़ा शरणार्थी शिविर में, स्थानीय समय के अनुसार, बुधवार और गुरूवार की मध्यरात्रि को अचानक भड़क उठी आग ने लगभग 550 टैंट और 150 दुकानों को तबाह कर दिया. इस आग में, एक सामुदायिक केन्द्र के भी तबाह होने की ख़बरें हैं. 

This week, a large fire broke out in the #Rohingya camps in Cox’s Bazar, #Bangladesh. There were no casualties, but 3500 people were affected and 550 shelters &150 shops were destroyed.WFP is providing emergency food assistance including hot meals to families in need. pic.twitter.com/pD2neR5Ahu— World Food Programme (@WFP) January 15, 2021

यूएन एजेंसियों का कहना है कि इस आग के कारण हुई तबाही में, लगभग 3 हज़ार 500 रोहिंज्या शरणार्थी बेहसहारा रह गए हैं. जिनमें बच्चे भी हैं.
कोरोनावायरस महामारी और कड़ाके की सर्दी के बीचों-बीच लगी इस आग ने, इन शरणार्थियों के आश्रय स्थल और तमाम सामान तबाह कर दिये हैं.
ग़नीमत है कि इस आग पर दमकलकर्मियों, स्वेच्छाकर्मियों और शरणार्थियों के प्रयासों की बदौलत कुछ ही घंटों के भीतर क़ाबू पा लिया गया और किसी ज़िन्दगी का नुक़सान नहीं हुआ.
नयापाड़ा शिविर में, लगभग साढ़े 22 हज़ार शरणार्थी ठहरे हुए थे जिनमें लगभग 17 हज़ार 800 महिलाएँ, बच्चे और वृद्धजन शामिल हैं.
संयुक्त राष्ट्र के प्रयास
यूएन एजेंसियाँ, गुरूवार प्रातः से ही घटनास्थल पर मौजूद हैं और नुक़सान का आकलन करने के साथ-साथ प्रभावितों की मदद करने में सक्रिय हैं.
कॉक्सेस बाज़ार में यूएन शरणार्थी एजेंसी के एक स्थानीय अधिकारी मैरिन डिन कैजोमकाज का कहना है, “हम सरकार और ग़ैर-सरकारी संगठन साझीदारों, अन्य यूएन एजेंसियों और रोहिंज्या शरणार्थियों के साथ मिलकर, उन लोगों की मदद करने में लगे हैं जिनके आश्रय स्थल और सामान इस आग में तबाह हो गए हैं.”
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने आपदा खाद्य सहायता मुहैया करानी शुरू कर दी है जिसमें ज़रूरतमन्द परिवारों को ताज़ा भोजन की खुराकें मुहैया कराना भी शामिल है.
साथ-साथ, मानवीय सहायता साझीदार, बांग्लादेश रैड क्रैसेंट और अन्य ग़ैर-सरकारी संगठन (NGOs) भी प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं. 
एक जटिल शरणार्थी संकट
जटिल रोहिंज्या शरणार्थी संकट अगस्त, 2017 में उस समय शुरू हुआ था जब म्याँमार क पश्चिमी इलाक़ें में एक दूर-दराज़ स्थित पुलिस चौकी पर कुछ सशस्त्र गुटों ने हमला किया था. इस हमले का आरोप रोहिंज्या समुदाय से जुड़े तत्वों पर लगाया गया था. 

WFP Bangladeshबांग्लादेश के नयापाड़ा शरणार्थी शिविर में विनाशकारी आग लगने के बाद, अपने शिविर के बचे-खुचे स्थल पर मौजूद एक रोहिंज्या शरणार्थी परिवार.

उस हमले के बाद, रोहिंज्या अल्पसंख्यक समुदाय, मुख्य रूप से मुसलमानों के ख़िलाफ़ व्यवस्थित और सुनियोजित हमले हुए थे, जिन्हें मानवाधिकार संगठनों और एक वरिष्ठ यूएन अधिकारी ने, रोहिंज्या समुदाय का नस्लीय सफ़ाया करने की कार्रवाई क़रार दिया था.
उन हमलों के समय और बाद के कुछ सप्ताहों के दौरान, लगभग 7 लाख रोहिंज्या शरणार्थी सुरक्षा की ख़ातिर बांग्लादेश पहुँच गए जिनमें बहुसंख्या महिलाओं और बच्चों की थी.
ये रोहिंज्या लोग हमलों से बचने और सुरक्षा पाने की चाह में, आनन-फ़ानन में वहाँ से भागे और पहने हुए कपड़ों के अलावा कोई अन्य सामान वग़ैरा, अपने साथ नहीं ले जा सके. 
म्याँमार से, उससे पहले भी, लगभग 2 लाख रोहिंज्या लोग भागकर बांग्लादेश में पनाह ले चुके थे, और अगस्त 2017 के बाद से विस्थापित हुए लगभग 7 लाख रोहिंज्या शरणार्थियों को मिलाकर, बांग्लादेश में लगभग 9 लाख रोहिंज्या शरणार्थी पनाह लिये हुए हैं., संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने, बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी इलाक़े में स्थित एक भीड़ भरे शरणार्थी शिविर में गुरूवार को विनाशकारी आग लगने के बाद बेसहारा बचे हज़ारों रोहिंज्या शरणार्थियों की मदद करने के लिये प्रयास तेज़ कर दिये हैं. 

कॉक्सेस बाज़ार इलाक़े के नयापाड़ा शरणार्थी शिविर में, स्थानीय समय के अनुसार, बुधवार और गुरूवार की मध्यरात्रि को अचानक भड़क उठी आग ने लगभग 550 टैंट और 150 दुकानों को तबाह कर दिया. इस आग में, एक सामुदायिक केन्द्र के भी तबाह होने की ख़बरें हैं. 

यूएन एजेंसियों का कहना है कि इस आग के कारण हुई तबाही में, लगभग 3 हज़ार 500 रोहिंज्या शरणार्थी बेहसहारा रह गए हैं. जिनमें बच्चे भी हैं.

कोरोनावायरस महामारी और कड़ाके की सर्दी के बीचों-बीच लगी इस आग ने, इन शरणार्थियों के आश्रय स्थल और तमाम सामान तबाह कर दिये हैं.

ग़नीमत है कि इस आग पर दमकलकर्मियों, स्वेच्छाकर्मियों और शरणार्थियों के प्रयासों की बदौलत कुछ ही घंटों के भीतर क़ाबू पा लिया गया और किसी ज़िन्दगी का नुक़सान नहीं हुआ.

नयापाड़ा शिविर में, लगभग साढ़े 22 हज़ार शरणार्थी ठहरे हुए थे जिनमें लगभग 17 हज़ार 800 महिलाएँ, बच्चे और वृद्धजन शामिल हैं.

संयुक्त राष्ट्र के प्रयास

यूएन एजेंसियाँ, गुरूवार प्रातः से ही घटनास्थल पर मौजूद हैं और नुक़सान का आकलन करने के साथ-साथ प्रभावितों की मदद करने में सक्रिय हैं.

कॉक्सेस बाज़ार में यूएन शरणार्थी एजेंसी के एक स्थानीय अधिकारी मैरिन डिन कैजोमकाज का कहना है, “हम सरकार और ग़ैर-सरकारी संगठन साझीदारों, अन्य यूएन एजेंसियों और रोहिंज्या शरणार्थियों के साथ मिलकर, उन लोगों की मदद करने में लगे हैं जिनके आश्रय स्थल और सामान इस आग में तबाह हो गए हैं.”

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने आपदा खाद्य सहायता मुहैया करानी शुरू कर दी है जिसमें ज़रूरतमन्द परिवारों को ताज़ा भोजन की खुराकें मुहैया कराना भी शामिल है.

साथ-साथ, मानवीय सहायता साझीदार, बांग्लादेश रैड क्रैसेंट और अन्य ग़ैर-सरकारी संगठन (NGOs) भी प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं. 

एक जटिल शरणार्थी संकट

जटिल रोहिंज्या शरणार्थी संकट अगस्त, 2017 में उस समय शुरू हुआ था जब म्याँमार क पश्चिमी इलाक़ें में एक दूर-दराज़ स्थित पुलिस चौकी पर कुछ सशस्त्र गुटों ने हमला किया था. इस हमले का आरोप रोहिंज्या समुदाय से जुड़े तत्वों पर लगाया गया था. 


WFP Bangladesh
बांग्लादेश के नयापाड़ा शरणार्थी शिविर में विनाशकारी आग लगने के बाद, अपने शिविर के बचे-खुचे स्थल पर मौजूद एक रोहिंज्या शरणार्थी परिवार.

उस हमले के बाद, रोहिंज्या अल्पसंख्यक समुदाय, मुख्य रूप से मुसलमानों के ख़िलाफ़ व्यवस्थित और सुनियोजित हमले हुए थे, जिन्हें मानवाधिकार संगठनों और एक वरिष्ठ यूएन अधिकारी ने, रोहिंज्या समुदाय का नस्लीय सफ़ाया करने की कार्रवाई क़रार दिया था.

उन हमलों के समय और बाद के कुछ सप्ताहों के दौरान, लगभग 7 लाख रोहिंज्या शरणार्थी सुरक्षा की ख़ातिर बांग्लादेश पहुँच गए जिनमें बहुसंख्या महिलाओं और बच्चों की थी.

ये रोहिंज्या लोग हमलों से बचने और सुरक्षा पाने की चाह में, आनन-फ़ानन में वहाँ से भागे और पहने हुए कपड़ों के अलावा कोई अन्य सामान वग़ैरा, अपने साथ नहीं ले जा सके. 

म्याँमार से, उससे पहले भी, लगभग 2 लाख रोहिंज्या लोग भागकर बांग्लादेश में पनाह ले चुके थे, और अगस्त 2017 के बाद से विस्थापित हुए लगभग 7 लाख रोहिंज्या शरणार्थियों को मिलाकर, बांग्लादेश में लगभग 9 लाख रोहिंज्या शरणार्थी पनाह लिये हुए हैं.

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