Online News Channel

News

बाॅलिवुड के ‘ट्रेजडी किंग‘ दिलीप कुमार

बाॅलिवुड के ‘ट्रेजडी किंग‘ दिलीप कुमार
January 11
10:53 2019

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ 

बॉलीवुड में युसूफ खान उर्फ दिलीप कुमार एक ऐसे अभिनेता के रूप में शुमार किये जाते है जिन्होंने दमदार अभिनय और जबरदस्त संवाद अदायगी से सिने प्रेमियों के दिल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। दिलीप कुमार ने ऐसे नायकों की भूमिका निभाई जिसके जीवन में दुख है, जो अपने जीवन के संघर्षों से लड़ रहा है।

फिर 1951 में उनकी फिल्म आई दीदार और 1955 में आई फिल्म देवदास। ये फिल्में उनके करियर की हिट फिल्मों में शामिल हैं, जिनमें जबरदस्त अभिनय से उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई। ऐसे माना जाने लगा कि दिलीप कुमार ट्रेजडी रोल बहुत बेहतरीन तरीके से निभाते हैं। इस तरह के किरदारों में उनका ढल जाना और पूरी सच्चाई से उस किरदार को निभाना दिलीप कुमार की ताकत बन गया। अपनी भूमिकाओं में वह इस कदर मशहूर हो गए कि उन्हें ’ट्रेजडी किंग’ के नाम से जाना जाने लगा।

बाॅलिवुड के ‘ट्रेजडी किंग‘ दिलीप कुमार

फिल्म ‘देवदास’

वर्ष 1955 में प्रदर्शित फिल्म ‘देवदास’ के उस दृश्य को कौन भूल सकता है जिसमें पारो के गम में देवदास यह कहते है ..कौन कमबख्त पीता है जीने के लिये.. तो उस समय उनका चेहरा स्क्रीन पर नहीं था लेकिन उनकी गमजदा आवाज दिल की गहराई को छू जाती है। पेशावर अब पाकिस्तान में 11 दिसंबर 1922 को जन्में युसूफ खान उर्फ दिलीप कुमार अपनी माता-पिता की 13 संतानों में तीसरी संतान थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पुणे और देवलाली से हासिल की। इसके बाद वह अपने पिता गुलाम सरवर खान कि फल के व्यापार में हाथ बंटाने लगे।

कुछ दिनों के बाद फल के व्यापार में मन नही लगने के कारण दिलीप कुमार ने यह काम छोड़ दिया और पुणे में कैंटीन चलाने लगे। वर्ष 1943 में उनकी मुलाकात बांबे टॉकीज की व्यवस्थापिका देविका रानी से हुयी जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचान मुंबई आने का न्यौता दिया। पहले तो दिलीप कुमार ने इस बात को हल्के से लिया लेकिन बाद में कैंटीन व्यापार में भी मन उचट जाने से उन्होंने देविका रानी से मिलने का निश्चय किया।

बाॅलिवुड के ‘ट्रेजडी किंग‘ दिलीप कुमार

देविका रानी और दिलीप कुमार

देविका रानी ने युसूफ खान को सुझाव दिया कि यदि वह अपना फिल्मी नाम बदल दे तो वह उन्हें अपनी नई फिल्म ‘ज्वार भाटा’ में बतौर अभिनेता काम दे सकती हैं। देविका रानी ने युसूफ खान को वासुदेव,जहांगीर और दिलीप कुमार में से एक नाम को चुनने को कहा। वर्ष 1944 में प्रदर्शित फिल्म ‘ज्वारभाटा’ से बतौर अभिनेता दिलीप कुमार ने अपने सिने करियर की शुरूआत की। फिल्म ‘ज्वार भाटा’ की असफलता के बाद दिलीप कुमार ने प्रतिमा, जुगनू, अनोखा प्यार, नौका डूबी जैसी कुछ बी और सी ग्रेड वाली फिल्मों में बतौर अभिनेता काम किया लेकिन इन फिल्मों से उन्हें कोई खास फायदा नहीं पहुंचा। चार वर्ष तक मायानगरी मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1948 में फिल्म ‘मेला’ की सफलता के बाद दिलीप कुमार बतौर अभिनेता फिल्म इंडस्ट्री में अपनी बनाने में सफल हो गये।

दिलीप कुमार के सिने करियर पर नजर डालने पर पायेगे कि उन्होंने फिल्मों में विविधिता पूर्ण अभिनय कर कई किरदारों को जीवंत कर दिया। यही वजह है कि फिल्म ‘आदमी’ में दिलीप कुमार के अभिनय को देखकर हास्य अभिनेता ओम प्रकाश ने कहा था ..यकीन नही होता फन इतनी बुंलदियों तक भी जा सकता है। वही विदेशी पर्यटक उनकी अभिनीत फिल्मों में उनके अभिनय को देखकर कहते है हिंदुस्तान में दो ही चीज देखने लायक है एक ताजमहल दूसरा दिलीप कुमार।

बाॅलिवुड के ‘ट्रेजडी किंग‘ दिलीप कुमार

दिलीप कुमार के सिने कैरियर मे उनकी जोड़ी अभिनेत्री मधुबाला के साथ काफी पसंद की गयी।

दिलीप कुमार के सिने कैरियर मे उनकी जोड़ी अभिनेत्री मधुबाला के साथ काफी पसंद की गयी। फिल्म ‘तराना’ के निर्माण के दौरान मधुबाला दिलीप कुमार से मोहब्बत करने लगी। उन्होंने अपने ड्रेस डिजाइनर को गुलाब का फूल और एक खत देकर दिलीप कुमार के पास इस संदेश के साथ भेजा कि यदि वह भी उससे प्यार करते हैं तो इसे अपने पास रख लें और दिलीप कुमार ने फूल और खत को सहर्ष स्वीकार कर लिया।

वर्ष 1957 में प्रदर्शित फिल्म बी.आर.चोपड़ा की फिल्म नया दौर में पहले दिलीप कुमार के साथ नायिका की भूमिका के लिये मधुबाला का चयन किया गया और मुंबई में ही इस फिल्म की शूटिंग की जानी थी। लेकिन बाद में फिल्म के निर्माता को लगा कि इसकी शूटिंग भोपाल में भी करनी जरूरी है।

बाॅलिवुड के ‘ट्रेजडी किंग‘ दिलीप कुमार

मधुबाला के पिता अताउल्लाह खान ने बेटी को मुंबई से बाहर जाने की इजाजत देने से इंकार कर दिया। उन्हें लगा कि मुंबई से बाहर जाने पर मधुबाला और दिलीप कुमार के बीच का प्यार और परवान चढ़ेगा और वह इसके लिए राजी नही थे। बाद मे बी.आर.चोपड़ा को मधुबाला की जगह वैजयंतीमाला को लेना पड़ा। अताउल्लाह खान बाद में इस मामले को अदालत में ले गये और इसके बाद उन्होंने मधुबाला को दिलीप कुमार के साथ काम करने से मना कर दिया और यहीं से दिलीप कुमार और मधुबाला की जोड़ी अलग हो गयी।

वर्ष 1960 में दिलीप कुमार के सिने करियर की एक और अहम फिल्म ‘मुगले आजम’ प्रदर्शित हुयी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी के.आसिफ निर्देशन में सलीम-अनारकली की प्रेमकथा पर बनी इस फिल्म में दिलीप कुमार ने शहजादे सलीम की भूमिका को रूपहले पर्दे पर जीवंत कर दिया।

एजेंसी

जरी …………………………………!

Big-Shop-2
Ad Impact
Chotanagpur Handloom
Paul Optical
Novelty Fashion Mall
Jewel India
Bhatia Sports
Home Essentials
Abhushan
Sri Alankar
Raymond

About Author

admin_news

admin_news

Related Articles

0 Comments

No Comments Yet!

There are no comments at the moment, do you want to add one?

Write a comment

Write a Comment

Poll

Economic performance compared to previous government ?

LATEST ARTICLES

    भारतीय एवं विश्व इतिहास में 24 मार्च की प्रमुख घटनाएं

भारतीय एवं विश्व इतिहास में 24 मार्च की प्रमुख घटनाएं

0 comment Read Full Article

Subscribe to Our Newsletter