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बिहार : वेद है संसार की सर्वोच्च रचना, इसी पर टिका है सम्पूर्ण जीवन दर्शन : डॉ भारती मेहता

बिहार : वेद है संसार की सर्वोच्च रचना, इसी पर टिका है सम्पूर्ण जीवन दर्शन : डॉ भारती मेहता
November 14
09:24 2019

बेगूसराय, 14नवम्बर । सर्वमंगला आध्यात्म योग विद्यापीठ सिमरिया धाम में आयोजित ‘वर्तमान परिवेश में वेद का महत्व’ विषयक तीन दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. भारती मेहता ने कहा कि वेद संसार के साहित्य रचना का प्रथम ग्रंथ है। वेद सनातन धर्म के साथ ही संसार की सर्वोच्च रचना है, जिस पर जीवन दर्शन टिका हुआ है। यह धार्मिक, आध्यात्मिक, राजनीतिक, सामाजिक दृष्टि से ही नहीं, संपूर्ण सृष्टि का ग्रंथ है। साहित्य की सभी विधाओं का आदिम स्रोत है, यह रचना नहीं भगवान है। बुधवार की देर शाम सर्वमंगला सिद्धाश्रम के सभागार में संगोष्ठी का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करने के बाद उन्होंने कहा कि यूनेस्को ने दुनिया के 158 पांडुलिपि का संरक्षण किया है जिसमें से 38 पांडुलिपि भारत और वेद का है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, वैदिक रीति विश्व को परिवार मानती है। जबकि पाश्चात्य संस्कृति विश्व को बाजार समझती है। यही सोच का अंतर है। हमारी परंपरा है साईं इतना दीजिए जामे कुटुम समाय। जबकि पाश्चात्य परंपरा कहती है स्काई इज द लिमिट और यह स्काई इज द लिमिट बच्चों में पूंजीवाद का भूख जगाता है। जिससे मूल जीवन, परिवारिक जीवन, आध्यात्मिक जीवन, इहलोक और परलोक का बैलेंस गड़बड़ हो रहा है।

बेटी बचाओ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भ्रूण हत्या जैसा घिनौना शब्द हमारे किसी ग्रंथ में नहीं है। लेकिन पूंजीवादी मानसिकता के कारण बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है। जबकि बेटियों को भगवान का प्रतीक माना है। हमारे यहां कन्या पूजन की परंपरा है। सीता प्रतीक चिन्ह है कि जिस धनुष को कोई उठा नहीं पाता था उसे वह रोज उठा कर पूजा करती थी। समाज के लिए बेेटियां क्या होती है यह पीएमसीएच और आईजीआईएमएस में दिखता है। एक सौ बीमार माता-पिता में से 95 की सेवा बेटी और दामाद कर रहे हैं।

संगोष्ठी का संचालन और विषय प्रवेश कराते हुए डॉ घनश्याम झा ने कहा कि वेद से सभी सामाजिक समस्याओं का निदान होता है। मानवता की मौलिकता परिलक्षित होती है। इस मौके पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ जीवानंद झा, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो जयशंकर झा, प्राचार्य हितलाल पाठक, राष्ट्रीय मैथिली परिषद के महासचिव डॉ अशोक पाठक आदि ने कहा कि वेेद नारायण का साक्षात स्वरूप है। दुनिया की तमाम समस्याओं का निष्कर्ष वेद में है। अथर्ववेद में तो ग्लोबल वार्मिंग के निदान का भी उपाय है। जरूरत है कि उसे समझ कर धरातल पर उतारा जाए।

इससे पहले तमाम अतिथियों ने स्वामी चिदात्मन जी महाराज के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोचार के बीच संगोष्ठी का शुभारंभ किया। मौके पर तमाम अतिथियों को मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग और अंग वस्त्र से सम्मानित किया। मौके पर सर्वमंगला के व्यवस्थापक रविंद्र जी ब्रह्मचारी एवं मीडिया प्रभारी नीलमणि भी उपस्थित थे।

(हि.स.)

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