बेरूत विस्फोट: गहरे ज़ख्मों पर मरहम लगाने के लिये वित्तीय सहारे की दरकार 

लेबनान के बेरूत बन्दरगाह पर तीन महीने पहले हुए भीषण विस्फोट में 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी और हज़ारों लोग घायल और बेघर हुए थे. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने आगाह किया है कि प्रभावितों के जीवन को पटरी पर लाने के लिये सहायता धनराशि की ज़रूरत है. 

लेबनान में यूनीसेफ़ की प्रतिनिधि यूकी मोकुओ ने कहा कि ज़मीनी स्तर पर असाधारण प्रयासों के फलवस्वरूप तात्कालिक ज़ख़्म अब भरने शुरू हुए हैं.

Beirut is still reeling 100 days after devastating explosions.This is how @UNICEFLebanon is supporting children and families.https://t.co/X5BMEX3VUP— UNICEF (@UNICEF) November 11, 2020

लेकिन आपात हालात का सामना करने वाले बच्चों और उनके परिवारों पर दृश्य व अदृश्य ज़ख्मों पर मरहम लगाने के लिये सतत एकजुटता, संकल्प और सहारे की आवश्यकता होगी.  
यूनीसेफ़ की रिपोर्ट, Rising from Destruction. 100 days of UNICEF’s response to the Beirut explosions and the road ahead for children and families, में स्पष्ट किया गया है कि मनोसामाजिक सहायता के ज़रिये विस्फोटों के दौरान और उसके बाद नागरिकों को सदमेपूर्ण हालात से उबारने में मदद मिली है. 
“बच्चों और अभिभावकों को मनोसामाजिक सहारा प्रदान करना लोगों को टूटे हुए जीवन का फिर से निर्माण करने में एक अहम क़दम है.”
सहायता के 100 दिन
यूनीसेफ़ को अपनी विभिन्न पहलों के ज़रिये 33 हज़ार लोगों तक पहुँचने में सफलता मिली है जिनमें सात हज़ार से ज़्यादा बच्चे, अभिभावक और प्राथमिक देखभालकर्मी हैं. इन प्रयासों के तहत प्रभावित इलाक़ों में बच्चों के अनुकूल स्थलों को सुनिश्चित किया गया है.
यूएन एजेंसी ने आपात नक़दी हस्तान्तरण कार्यक्रम को भी स्थापित किया है जिसके ज़रिये आने वाले दिनों में 80 हज़ार निर्बलों को सहारा प्रदान किया जायेगा और पाँच वर्ष से कम उम्र के 22 हज़ार बच्चों को पोषक आहार का वितरण किया जायेगा. 
इसके अतिरिक्त एक हज़ार से ज़्यादा इमारतों में जल आपूर्ति कनेक्शन को फिर से स्थापित किया गया है और साढ़े चार हज़ार से ज़्यादा जल टण्कियों की व्यवस्था की गई है. 
संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने 37 लाख डॉलर मूल्य की महत्वपूर्ण मानवीय राहत सामग्री, कोविड-19 से बचाव और स्वच्छता उपकरणों का भी वितरण किया है.
इनमें 80 फ़ीसदी से ज़्यादा सामग्री की ख़रीदारी स्थानीय तौर पर की गई है जिससे देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया गया है.
यूनीसेफ़ की प्रतिनिधि यूकी मोकुओ ने कहा है कि पिछले 100 दिनों में यूनीसेफ़ की जवाबी कार्रवाई जीवनदायी, त्वरित और अतिआवश्यक रही है लेकिन अभी आराम नहीं किया जा सकता और कामकाज जारी रखने की ज़रूरत है.
सहायता की अपील
यूनीसेफ़ के मुताबिक लेबनान में ज़रूरतमन्दों की बड़ी संख्या के मद्देनज़र बाल संरक्षण सहित अन्य प्रमुख कार्यक्रमों के लिये सहायता धनराशि का दायरा बढ़ाने की ज़रूरत है. 
यूएन एजेंसी का मानना है कि बेरूत के पुनर्निर्माण और लोगों में फिर ऊर्जा का संचार करने के लिये दीर्घकालीन संकल्प की आवश्यकता है.  
“यूनीसेफ़ और साझीदार संगठनों ने विस्फोट से प्रभावित हज़ारों बच्चों और परिवारों को सहारा दिया है लेकिन ज़रूरत अब भी प्रबल है.”
यूएन एजेंसी के अनुसार बच्चों व परिवारों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये पाँच करोड़ डॉलर की आवश्यकता है लेकिन इसका एक-तिहाई ही अभी हासिल हो पाया है. 
सहायता धनराशि की उपलब्धता बढ़ने से बाल संरक्षण चुनौतियों का असरदार ढँग से सामना कर पाने में मदद मिलेगी. उन परिवारों के लिये भी जिनके लिये अतिआवश्यक सेवाओं की क़ीमतों को सहन कर पाना कठिन है. 
साथ ही शहर में स्कूलों के पुनर्निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने और युवाओं के लिये रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न कर पाना सम्भव होगा. , लेबनान के बेरूत बन्दरगाह पर तीन महीने पहले हुए भीषण विस्फोट में 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी और हज़ारों लोग घायल और बेघर हुए थे. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने आगाह किया है कि प्रभावितों के जीवन को पटरी पर लाने के लिये सहायता धनराशि की ज़रूरत है. 

लेबनान में यूनीसेफ़ की प्रतिनिधि यूकी मोकुओ ने कहा कि ज़मीनी स्तर पर असाधारण प्रयासों के फलवस्वरूप तात्कालिक ज़ख़्म अब भरने शुरू हुए हैं.

लेकिन आपात हालात का सामना करने वाले बच्चों और उनके परिवारों पर दृश्य व अदृश्य ज़ख्मों पर मरहम लगाने के लिये सतत एकजुटता, संकल्प और सहारे की आवश्यकता होगी.  

यूनीसेफ़ की रिपोर्ट, Rising from Destruction. 100 days of UNICEF’s response to the Beirut explosions and the road ahead for children and families, में स्पष्ट किया गया है कि मनोसामाजिक सहायता के ज़रिये विस्फोटों के दौरान और उसके बाद नागरिकों को सदमेपूर्ण हालात से उबारने में मदद मिली है. 

“बच्चों और अभिभावकों को मनोसामाजिक सहारा प्रदान करना लोगों को टूटे हुए जीवन का फिर से निर्माण करने में एक अहम क़दम है.”

सहायता के 100 दिन

यूनीसेफ़ को अपनी विभिन्न पहलों के ज़रिये 33 हज़ार लोगों तक पहुँचने में सफलता मिली है जिनमें सात हज़ार से ज़्यादा बच्चे, अभिभावक और प्राथमिक देखभालकर्मी हैं. इन प्रयासों के तहत प्रभावित इलाक़ों में बच्चों के अनुकूल स्थलों को सुनिश्चित किया गया है.

यूएन एजेंसी ने आपात नक़दी हस्तान्तरण कार्यक्रम को भी स्थापित किया है जिसके ज़रिये आने वाले दिनों में 80 हज़ार निर्बलों को सहारा प्रदान किया जायेगा और पाँच वर्ष से कम उम्र के 22 हज़ार बच्चों को पोषक आहार का वितरण किया जायेगा. 

इसके अतिरिक्त एक हज़ार से ज़्यादा इमारतों में जल आपूर्ति कनेक्शन को फिर से स्थापित किया गया है और साढ़े चार हज़ार से ज़्यादा जल टण्कियों की व्यवस्था की गई है. 

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने 37 लाख डॉलर मूल्य की महत्वपूर्ण मानवीय राहत सामग्री, कोविड-19 से बचाव और स्वच्छता उपकरणों का भी वितरण किया है.

इनमें 80 फ़ीसदी से ज़्यादा सामग्री की ख़रीदारी स्थानीय तौर पर की गई है जिससे देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया गया है.

यूनीसेफ़ की प्रतिनिधि यूकी मोकुओ ने कहा है कि पिछले 100 दिनों में यूनीसेफ़ की जवाबी कार्रवाई जीवनदायी, त्वरित और अतिआवश्यक रही है लेकिन अभी आराम नहीं किया जा सकता और कामकाज जारी रखने की ज़रूरत है.

सहायता की अपील

यूनीसेफ़ के मुताबिक लेबनान में ज़रूरतमन्दों की बड़ी संख्या के मद्देनज़र बाल संरक्षण सहित अन्य प्रमुख कार्यक्रमों के लिये सहायता धनराशि का दायरा बढ़ाने की ज़रूरत है. 

यूएन एजेंसी का मानना है कि बेरूत के पुनर्निर्माण और लोगों में फिर ऊर्जा का संचार करने के लिये दीर्घकालीन संकल्प की आवश्यकता है.  

“यूनीसेफ़ और साझीदार संगठनों ने विस्फोट से प्रभावित हज़ारों बच्चों और परिवारों को सहारा दिया है लेकिन ज़रूरत अब भी प्रबल है.”

यूएन एजेंसी के अनुसार बच्चों व परिवारों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये पाँच करोड़ डॉलर की आवश्यकता है लेकिन इसका एक-तिहाई ही अभी हासिल हो पाया है. 

सहायता धनराशि की उपलब्धता बढ़ने से बाल संरक्षण चुनौतियों का असरदार ढँग से सामना कर पाने में मदद मिलेगी. उन परिवारों के लिये भी जिनके लिये अतिआवश्यक सेवाओं की क़ीमतों को सहन कर पाना कठिन है. 

साथ ही शहर में स्कूलों के पुनर्निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने और युवाओं के लिये रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न कर पाना सम्भव होगा. 

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