बेलारूस: व्यापक मानवाधिकार हनन के बीच, सिविल सोसायटी पर ‘चौतरफ़ा हमला’

बेलारूस में मानवाधिकारों की स्थिति की निगरानी के लिये नियुक्त स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ अनाइस मरीन ने सोमवार को कहा है कि देश में बीते वर्ष मानवाधिकार स्थिति का अभूतपूर्व संकट देखा गया है. उन्होंने साथ ही, देश में प्रशासन व अधिकारियों से दमन की नीति तुरन्त रोकने और देश के लोगों की वाजिब और जायज़ आकांक्षाओं का पूर्ण सम्मान करने का आहवान किया है.

स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ अनाइस मरीन ने मानवाधिकार परिषद को सौंपी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि उन्हें बेलारूस में अगस्त 2020 में हुए राष्ट्रपति पद के विवादास्पद चुनाव के बाद, प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस द्वारा व्यापक पैमाने पर हिंसा किये जाने की जानकारी मिली है. 

🇧🇾 #Belarus witnesses an unprecedented #HumanRights crisis over the past year, with massive human rights violations. UN expert Anaïs Marin calls on authorities to end policy of repression and to fully respect their people’s legitimate aspirations.👉https://t.co/woVJQIGnP8#HRC47 pic.twitter.com/q983ZZveq1— UN Special Procedures (@UN_SPExperts) July 5, 2021

उस चुनाव के विरोध में लाखों लोग सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिये उतर पड़े थे और इन प्रदर्शनों के दौरान लोगों को जबरन लापता किये जाने, प्रताड़ित किये जाने और सिविल सोसायटी के सदस्यों व कार्यकर्ताओं के साथ बुरा बर्ताव किये जाने, उन्हें डराने-धमकाने और परेशान करने की भी ख़बरें मिली हैं.
अमाइस मरीन ने मानवाधिकार परिषद को बताया कि बेलारूस में अधिकारियों ने सिविल सोसायटी के ख़िलाफ़ पूर्ण स्तर का दमन अभियान शुरू किया हुआ है जिस दौरान अनेक  मानवाधिकारों व स्वतंत्रताओं का हनन करने के साथ-साथ समाज के हर तबक़े के लोगों को निशाना बनाया जाना शामिल है. 
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, मीडियाकर्मियों और विशेष रूप में वकीलों को व्यवस्थित तरीक़े से परेशान करने की जानकारी मिली है.
उन्होंने कहा कि ये दमन इतना व्यापक और सघन है कि हज़ारों बेलारूस वासियों को सुरक्षा का ख़ातिर अपना देश छोड़कर अन्य देशों के लिये विस्थापित होने के लिये या तो ख़ुद मजबूर होना पड़ा है या उन्हें जबरन विस्थापित कर दिया गया है.
मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा कि देश के सत्ता तंत्र से असहमति रखने वाले एक व्यक्ति रोमन प्रोतासेविच को गिरफ़्तार करने के इरादे से 23 मई को एक यात्रि विमान को जबरन मिन्स्क में उतारा जाना दिखाता है कि मौजूदा सरकार का कोई भी विरोधी, किसी भी स्थान पर सुरक्षित नहीं है. 
सत्ता पक्ष से विरोधी विचार रखने वाले पत्रकार रोमन प्रोतासेविच, रविवार 23 मई को रायन एयर के एक विमान में ग्रीस से लिथुआनिया जा रहे थे जब उस विमान को बेलारूस की राजधानी मिन्स्क में उतरने के लिये मजबूर किया गया. 
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के प्रवक्ता ने उस समय कहा था कि ऐसा समझा जाता है कि उस विमान को झूठे कारण बताकर और केवल रोमन प्रोतासेविच को गिरफ़्तार करने के इरादे से जबरन मिन्स्क में उतारा गया था.
मानवाधिकार विशेषज्ञ अनाइस मरीन ने बताया कि बेलारूस में मानवाधिकार स्थिति में वर्ष 2020 के बसन्त मौसम गहरी गिरावट शुरू हुई थी जो 9 अगस्त को हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव के बाद चरम पर पहुँच गई. उस चुनाव के नतीजों का व्यापक पैमाने पर विरोध हुआ था.
चुनाव अभियान के दौरान गड़बड़ियाँ और धाँधलियाँ किये जाने की ख़बरें मिली थीं क्योंकि ज़्यादातर विपक्षी प्रत्याशियों को चुनावी दौड़ से बाहर कर दिया गया था, और पूरी मतगड़ना में धाँधली किये जाने का आरोप लगे थे., बेलारूस में मानवाधिकारों की स्थिति की निगरानी के लिये नियुक्त स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ अनाइस मरीन ने सोमवार को कहा है कि देश में बीते वर्ष मानवाधिकार स्थिति का अभूतपूर्व संकट देखा गया है. उन्होंने साथ ही, देश में प्रशासन व अधिकारियों से दमन की नीति तुरन्त रोकने और देश के लोगों की वाजिब और जायज़ आकांक्षाओं का पूर्ण सम्मान करने का आहवान किया है.

स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ अनाइस मरीन ने मानवाधिकार परिषद को सौंपी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि उन्हें बेलारूस में अगस्त 2020 में हुए राष्ट्रपति पद के विवादास्पद चुनाव के बाद, प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस द्वारा व्यापक पैमाने पर हिंसा किये जाने की जानकारी मिली है. 

🇧🇾 #Belarus witnesses an unprecedented #HumanRights crisis over the past year, with massive human rights violations. UN expert Anaïs Marin calls on authorities to end policy of repression and to fully respect their people’s legitimate aspirations.
👉https://t.co/woVJQIGnP8#HRC47 pic.twitter.com/q983ZZveq1

— UN Special Procedures (@UN_SPExperts) July 5, 2021

उस चुनाव के विरोध में लाखों लोग सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिये उतर पड़े थे और इन प्रदर्शनों के दौरान लोगों को जबरन लापता किये जाने, प्रताड़ित किये जाने और सिविल सोसायटी के सदस्यों व कार्यकर्ताओं के साथ बुरा बर्ताव किये जाने, उन्हें डराने-धमकाने और परेशान करने की भी ख़बरें मिली हैं.

अमाइस मरीन ने मानवाधिकार परिषद को बताया कि बेलारूस में अधिकारियों ने सिविल सोसायटी के ख़िलाफ़ पूर्ण स्तर का दमन अभियान शुरू किया हुआ है जिस दौरान अनेक  मानवाधिकारों व स्वतंत्रताओं का हनन करने के साथ-साथ समाज के हर तबक़े के लोगों को निशाना बनाया जाना शामिल है. 

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, मीडियाकर्मियों और विशेष रूप में वकीलों को व्यवस्थित तरीक़े से परेशान करने की जानकारी मिली है.

उन्होंने कहा कि ये दमन इतना व्यापक और सघन है कि हज़ारों बेलारूस वासियों को सुरक्षा का ख़ातिर अपना देश छोड़कर अन्य देशों के लिये विस्थापित होने के लिये या तो ख़ुद मजबूर होना पड़ा है या उन्हें जबरन विस्थापित कर दिया गया है.

मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा कि देश के सत्ता तंत्र से असहमति रखने वाले एक व्यक्ति रोमन प्रोतासेविच को गिरफ़्तार करने के इरादे से 23 मई को एक यात्रि विमान को जबरन मिन्स्क में उतारा जाना दिखाता है कि मौजूदा सरकार का कोई भी विरोधी, किसी भी स्थान पर सुरक्षित नहीं है. 

सत्ता पक्ष से विरोधी विचार रखने वाले पत्रकार रोमन प्रोतासेविच, रविवार 23 मई को रायन एयर के एक विमान में ग्रीस से लिथुआनिया जा रहे थे जब उस विमान को बेलारूस की राजधानी मिन्स्क में उतरने के लिये मजबूर किया गया. 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के प्रवक्ता ने उस समय कहा था कि ऐसा समझा जाता है कि उस विमान को झूठे कारण बताकर और केवल रोमन प्रोतासेविच को गिरफ़्तार करने के इरादे से जबरन मिन्स्क में उतारा गया था.

मानवाधिकार विशेषज्ञ अनाइस मरीन ने बताया कि बेलारूस में मानवाधिकार स्थिति में वर्ष 2020 के बसन्त मौसम गहरी गिरावट शुरू हुई थी जो 9 अगस्त को हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव के बाद चरम पर पहुँच गई. उस चुनाव के नतीजों का व्यापक पैमाने पर विरोध हुआ था.

चुनाव अभियान के दौरान गड़बड़ियाँ और धाँधलियाँ किये जाने की ख़बरें मिली थीं क्योंकि ज़्यादातर विपक्षी प्रत्याशियों को चुनावी दौड़ से बाहर कर दिया गया था, और पूरी मतगड़ना में धाँधली किये जाने का आरोप लगे थे.

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