बेहतर पुनर्बहाली व पुनर्निर्माण के लिये ‘मौजूदा लम्हे का लाभ उठाएँ’

संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने कहा है कि एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के देशों को कोरोनोवायरस संकट के दौरान मिली विफलताओं से निपटते हुए, एक साथ मिलकर बेहतर पुनर्निर्माण के लिये “मौजूदा लम्हे’ का पूर्ण रूप से इस्तेमाल” करना होगा.

यूएन उपमहासचिव, आमिना मोहम्मद ने मंगलवार को टिकाऊ विकास पर एशिया और प्रशान्त मंच की आठवी बैठक को सम्बोधित करते हुए टिकाऊ विकास और टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के 2030 एजेण्डा के महत्व को रेखांकित किया.
यहह मंच एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के लिये संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवँ सामाजिक आयोग (UNESCAP) ने आयोजित किया है.
उपमहासचिव ने कहा कि ये लक्ष्य, “समावेशी, सुदृढ़ और स्थाई अर्थव्यवस्थाओं व समाजों की ओर रास्ता दिखाते हैं, जिसमें लोगों एवं पृथ्वी का सम्मान किया जाए.”
यूएन उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने पुनर्बहाली के दौरान देशों से एक नए सामाजिक अनुबंध का आग्रह किया, जो बुनियादी सेवाओं, गुणवत्तापरक स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा एवँ सभी के लिये सामाजिक सुरक्षा तक पहुँच सुनिश्चित कर सके.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ सभी प्रकार की हिंसा को रोकने और समाप्त करने के लिये निर्णायक क़दम उठाए जाने होंगे, जिसके लिये महिलाओं की पूर्ण राजनैतिक और आर्थिक भागीदारी “ज़रूरी” है.
इसके साथ ही, सामाजिक विचार-विमर्श में कमी से निपटने, और सबसे कमज़ोर व हाशिए पर धकेले गए लोगों समेत सभी लोगों के अधिकारों को संरक्षित किया जाना होगा.
उन्होंने कार्बन तटस्थता की दिशा में भी अधिक प्रयास करने पर बल दिया है.
संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवँ सामाजिक आयोग की कार्यकारी सचिव आर्मिदा सालसाहिया अलिसजबाना ने कोविड-19 के बाद के युग में, समाजों को बदलने के “पैमाने” के रूप में 2030 एजेण्डा के महत्व का उल्लेख किया.
उन्होंने देशों से स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बीच “सामंजस्य बनाने वाली” नीतियाँ बनाने का आहवान किया है.
आरमिदा सालसाहिया अलिसजबाना ने कहा, “जैसे-जैसे हम टिकाऊ और सुदृढ़ पुनर्बहाली की तैयारी कर रहे हैं, हमें याद रखना होगा कि एसडीजी हमारा पैमाना है और यह कोविड-19 के बाद भी हमारे समाजों को बदलने के लिये एक उत्कृष्ट शक्ति के रूप में जारी रह सकते हैं.”
कोविड वैक्सीन – वैश्विक कल्याण
आर्थिक एवँ सामाजिक परिषद (ECOSOC) के अध्यक्ष, मुनीर अकरम ने कोविड-19 वैक्सीन को वैश्विक कल्याण के रूप में देखे जाने का आहवान की है.
साथ ही चेतावनी भी ज़ाहिर की है कि वैक्सीन के उपयोग में असमानता से ना सिर्फ़ अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता और सहयोग पर असर पड़ेगा, इससे वैश्विक स्तर पर पुनर्बहाली में भी देरी होगी.
उन्होंने सचेत किया कि,”वायरस घूमकर वापस भी लौट सकता है.”

ESCAP/Anthony Intoफिलीपींस के मनीला शहर में एक ट्राली ट्रेन.

मुनीर अकरम ने बताया कि वैश्विक महामारी ने देशों और समाजों की कमज़ोरियों को उजागर किया है और सबसे निर्बल देशों ने सबसे ज़्यादा परेशानियाँ झेली हैं.
उन्होंने बेहतर पुनर्निर्माण के लिये, तीन प्रमुख बुनियादी बातों पर ज़ोर दिया है: पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, टिकाऊ बुनियादी ढाँचे में महत्वपूर्ण निवेश, और विज्ञान, प्रौद्योगिकी व नवाचार का पूर्ण उपयोग.
ECOSOC अध्यक्ष ने कहा कि वैश्विक विकास में रूकावट डालने वाली और असमानता को बढ़ाने वाली “संरचनात्मक बाधाओं” से निपटा जाना होगा.
साथ ही, उन्होंने व्यापार, कर प्रणाली और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में न्यायोचित माहौल को सुनिश्चित करने का आहवान किया ताकि विकासशील देशों को स्थाई उत्पादन और खपत में प्राप्त करने में सक्षम बनाया जा सके,
एसडीजी हासिल करने की दिशा में प्रगति
23 से 26 मार्च के बीच आयोजित हो रही, ‘एशिया-पैसिफ़िक फ़ॉरम ऑन सस्टेनेबल डवेलेपमेंट, देशों के लिये एक वार्षिक, अन्तर-सरकारी मंच है, जोकि 2030 एजेण्डा की हासिल करने की दिशा में क्षेत्रीय प्रगति पर चर्चा और टिकाऊ विकास पर उच्चस्तरीय राजनैतिक मंच के लिये तैयारी का अवसर है.
इस वर्ष, यह बैठक कोविड-19 महामारी से स्थाई और सुदृढ़ पुनर्बहाली पर केन्द्रित है. इसमें टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर विभिन्न देशों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी.
इनमें भुखमरी, स्वस्थ जीवन, शिष्ट कामकाज, असमानताएँ कम करना और वैश्विक लक्ष्यों के लिये साझेदारी बनाने पर आधारित लक्ष्य शामिल है.
मंगलवार को पहले दिन, यूएन आयोग, यूएनडीपी व एशियाई विकास बैन्क की साझा रिपोर्ट, Responding to the COVID-19 Pandemic: Leaving No Country Behind को भी पेश किया गया, जिसमें इस क्षेत्र में पुनर्बहाली और सहनक्षमता बढ़ाने के लिये विकल्पों की पहचान की गई है.
इसके अलावा, एजेण्डे में अनेक अन्य आयोजन शामिल हैं, जिनमें महामारी से सम्बन्धित आँकड़ों, उसके असर व कोविड-19 से पुनर्बहाली, जलवायु कार्रवाई, विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों से निपटने की कार्रवाई, और टिकाऊ विकास में विविध हितधारकों को शामिल करना है., संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने कहा है कि एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के देशों को कोरोनोवायरस संकट के दौरान मिली विफलताओं से निपटते हुए, एक साथ मिलकर बेहतर पुनर्निर्माण के लिये “मौजूदा लम्हे’ का पूर्ण रूप से इस्तेमाल” करना होगा.

यूएन उपमहासचिव, आमिना मोहम्मद ने मंगलवार को टिकाऊ विकास पर एशिया और प्रशान्त मंच की आठवी बैठक को सम्बोधित करते हुए टिकाऊ विकास और टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के 2030 एजेण्डा के महत्व को रेखांकित किया.

यहह मंच एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के लिये संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवँ सामाजिक आयोग (UNESCAP) ने आयोजित किया है.

उपमहासचिव ने कहा कि ये लक्ष्य, “समावेशी, सुदृढ़ और स्थाई अर्थव्यवस्थाओं व समाजों की ओर रास्ता दिखाते हैं, जिसमें लोगों एवं पृथ्वी का सम्मान किया जाए.”

यूएन उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने पुनर्बहाली के दौरान देशों से एक नए सामाजिक अनुबंध का आग्रह किया, जो बुनियादी सेवाओं, गुणवत्तापरक स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा एवँ सभी के लिये सामाजिक सुरक्षा तक पहुँच सुनिश्चित कर सके.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ सभी प्रकार की हिंसा को रोकने और समाप्त करने के लिये निर्णायक क़दम उठाए जाने होंगे, जिसके लिये महिलाओं की पूर्ण राजनैतिक और आर्थिक भागीदारी “ज़रूरी” है.

इसके साथ ही, सामाजिक विचार-विमर्श में कमी से निपटने, और सबसे कमज़ोर व हाशिए पर धकेले गए लोगों समेत सभी लोगों के अधिकारों को संरक्षित किया जाना होगा.

उन्होंने कार्बन तटस्थता की दिशा में भी अधिक प्रयास करने पर बल दिया है.

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवँ सामाजिक आयोग की कार्यकारी सचिव आर्मिदा सालसाहिया अलिसजबाना ने कोविड-19 के बाद के युग में, समाजों को बदलने के “पैमाने” के रूप में 2030 एजेण्डा के महत्व का उल्लेख किया.

उन्होंने देशों से स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बीच “सामंजस्य बनाने वाली” नीतियाँ बनाने का आहवान किया है.

आरमिदा सालसाहिया अलिसजबाना ने कहा, “जैसे-जैसे हम टिकाऊ और सुदृढ़ पुनर्बहाली की तैयारी कर रहे हैं, हमें याद रखना होगा कि एसडीजी हमारा पैमाना है और यह कोविड-19 के बाद भी हमारे समाजों को बदलने के लिये एक उत्कृष्ट शक्ति के रूप में जारी रह सकते हैं.”

कोविड वैक्सीन – वैश्विक कल्याण

आर्थिक एवँ सामाजिक परिषद (ECOSOC) के अध्यक्ष, मुनीर अकरम ने कोविड-19 वैक्सीन को वैश्विक कल्याण के रूप में देखे जाने का आहवान की है.

साथ ही चेतावनी भी ज़ाहिर की है कि वैक्सीन के उपयोग में असमानता से ना सिर्फ़ अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता और सहयोग पर असर पड़ेगा, इससे वैश्विक स्तर पर पुनर्बहाली में भी देरी होगी.

उन्होंने सचेत किया कि,”वायरस घूमकर वापस भी लौट सकता है.”


ESCAP/Anthony Into
फिलीपींस के मनीला शहर में एक ट्राली ट्रेन.

मुनीर अकरम ने बताया कि वैश्विक महामारी ने देशों और समाजों की कमज़ोरियों को उजागर किया है और सबसे निर्बल देशों ने सबसे ज़्यादा परेशानियाँ झेली हैं.

उन्होंने बेहतर पुनर्निर्माण के लिये, तीन प्रमुख बुनियादी बातों पर ज़ोर दिया है: पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, टिकाऊ बुनियादी ढाँचे में महत्वपूर्ण निवेश, और विज्ञान, प्रौद्योगिकी व नवाचार का पूर्ण उपयोग.

ECOSOC अध्यक्ष ने कहा कि वैश्विक विकास में रूकावट डालने वाली और असमानता को बढ़ाने वाली “संरचनात्मक बाधाओं” से निपटा जाना होगा.

साथ ही, उन्होंने व्यापार, कर प्रणाली और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में न्यायोचित माहौल को सुनिश्चित करने का आहवान किया ताकि विकासशील देशों को स्थाई उत्पादन और खपत में प्राप्त करने में सक्षम बनाया जा सके,

एसडीजी हासिल करने की दिशा में प्रगति

23 से 26 मार्च के बीच आयोजित हो रही, ‘एशिया-पैसिफ़िक फ़ॉरम ऑन सस्टेनेबल डवेलेपमेंट, देशों के लिये एक वार्षिक, अन्तर-सरकारी मंच है, जोकि 2030 एजेण्डा की हासिल करने की दिशा में क्षेत्रीय प्रगति पर चर्चा और टिकाऊ विकास पर उच्चस्तरीय राजनैतिक मंच के लिये तैयारी का अवसर है.

इस वर्ष, यह बैठक कोविड-19 महामारी से स्थाई और सुदृढ़ पुनर्बहाली पर केन्द्रित है. इसमें टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर विभिन्न देशों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी.

इनमें भुखमरी, स्वस्थ जीवन, शिष्ट कामकाज, असमानताएँ कम करना और वैश्विक लक्ष्यों के लिये साझेदारी बनाने पर आधारित लक्ष्य शामिल है.

मंगलवार को पहले दिन, यूएन आयोग, यूएनडीपी व एशियाई विकास बैन्क की साझा रिपोर्ट, Responding to the COVID-19 Pandemic: Leaving No Country Behind को भी पेश किया गया, जिसमें इस क्षेत्र में पुनर्बहाली और सहनक्षमता बढ़ाने के लिये विकल्पों की पहचान की गई है.

इसके अलावा, एजेण्डे में अनेक अन्य आयोजन शामिल हैं, जिनमें महामारी से सम्बन्धित आँकड़ों, उसके असर व कोविड-19 से पुनर्बहाली, जलवायु कार्रवाई, विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों से निपटने की कार्रवाई, और टिकाऊ विकास में विविध हितधारकों को शामिल करना है.

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