बोलीविया में, विपक्षी हस्तियों की गिरफ़्तारी के बाद, क़ानूनी प्रक्रिया पर अमल करने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बोलीविया में, पूर्व अन्तरिम राष्ट्रपति ज्यानीन आनेस और अनेक पूर्व मन्त्रियों को गिरफ़्तार किये जाने के एक दिन बाद, तमाम निर्धारित क़ानूनी प्रक्रियाओं का पालन किये जाने की महत्ता की तरफ़ ध्यान दिलाया है.

यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने रविवार को जारी एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि यूएन प्रमुख की ये पुकार, बोलीविया में, हाल ही में, पूर्व सरकार के पदाधिकारियों और नेताओं के विरुद्ध की गई क़ानूनी कार्रवाई के सम्बन्ध में है.
बोलीविया में, वर्ष 2019 में, तत्कालीन राष्ट्रपति ईवो मोरालेस की चुनावी जीत पर विवाद उत्पन्न हो जाने के बाद, देश में संकट पैदा हो गया था.
उस जीत के बाद, ईवो मोरालेस का राष्ट्रपति के रूप में, चौथा कार्यकाल शुरू होना था. 
उनके विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए थे. बड़े पैमाने पर मानवाधिकार हनन की ख़बरों के बीच, अनेक लोग हताहत हुए थे. 
अनेक सप्ताहों चक चले हिंसक प्रदर्शनों के बाद, मोरालेस, पद से हट गए थे और देश छोड़ दिया था.
ज्यानीन आनेस, चुनाव कराए जाने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति बनी थीं. उसके बाद अक्टूबर 2020 में चुनाव हुए और ईवो मोरालेस की पार्टी को फिर से सरकार बनाने के लिये बहुमत हासिल हुआ था.
देश में सरकारी अभियोजकों ने, ज्यानीन आनेस और उनके पूर्व सहयोगियों पर, वर्ष 2019 में हुए कथित तख़्तापलट में शामिल होने का आरोप लगाया है.
ये उस समय की बात है जब ज्यानीन आनेस ने, हिंसा बन्द होने व ईवो मोरालेस के देश छोड़कर चले जाने के बाद, देश चलाना शुरू किया था.
ज्यानीन आनेस ने अपनी गिरफ़्तारी के बाद ट्वीट सन्देश में कहा है कि उन्हें राजनैतिक बदले की कार्रवाई का शिकार बनाया जा रहा है, और उनके गिरफ़्तारी वारण्ट पर आतंकवाद, देशद्रोह, और षडयन्त्र के आरोप दर्ज किये गये हैं.
ईवो मोरालेस ने, ट्वीट सन्देशों के ज़रिये, इस कार्रवाई का समर्थन किया है.
प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने रविवार के वक्तव्य में कहा कि यूएन प्रमुख ने बोलीविया में, शान्ति बहाली की दिशा में काम करने वाले तमाम पक्षों द्वारा उठाए गए क़दमों का भी ज़िक्र किया है.
उन्होंने, साथ ही, इन शान्ति प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन जारी रखे जाने का संकल्प भी व्यक्त किया है. इनमें राजनैतिक सम्वाद के लिये अनुकूल हालात बनाने और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के प्रयास शामिल हैं. , संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बोलीविया में, पूर्व अन्तरिम राष्ट्रपति ज्यानीन आनेस और अनेक पूर्व मन्त्रियों को गिरफ़्तार किये जाने के एक दिन बाद, तमाम निर्धारित क़ानूनी प्रक्रियाओं का पालन किये जाने की महत्ता की तरफ़ ध्यान दिलाया है.

यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने रविवार को जारी एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि यूएन प्रमुख की ये पुकार, बोलीविया में, हाल ही में, पूर्व सरकार के पदाधिकारियों और नेताओं के विरुद्ध की गई क़ानूनी कार्रवाई के सम्बन्ध में है.

बोलीविया में, वर्ष 2019 में, तत्कालीन राष्ट्रपति ईवो मोरालेस की चुनावी जीत पर विवाद उत्पन्न हो जाने के बाद, देश में संकट पैदा हो गया था.

उस जीत के बाद, ईवो मोरालेस का राष्ट्रपति के रूप में, चौथा कार्यकाल शुरू होना था. 

उनके विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए थे. बड़े पैमाने पर मानवाधिकार हनन की ख़बरों के बीच, अनेक लोग हताहत हुए थे. 

अनेक सप्ताहों चक चले हिंसक प्रदर्शनों के बाद, मोरालेस, पद से हट गए थे और देश छोड़ दिया था.

ज्यानीन आनेस, चुनाव कराए जाने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति बनी थीं. उसके बाद अक्टूबर 2020 में चुनाव हुए और ईवो मोरालेस की पार्टी को फिर से सरकार बनाने के लिये बहुमत हासिल हुआ था.

देश में सरकारी अभियोजकों ने, ज्यानीन आनेस और उनके पूर्व सहयोगियों पर, वर्ष 2019 में हुए कथित तख़्तापलट में शामिल होने का आरोप लगाया है.

ये उस समय की बात है जब ज्यानीन आनेस ने, हिंसा बन्द होने व ईवो मोरालेस के देश छोड़कर चले जाने के बाद, देश चलाना शुरू किया था.

ज्यानीन आनेस ने अपनी गिरफ़्तारी के बाद ट्वीट सन्देश में कहा है कि उन्हें राजनैतिक बदले की कार्रवाई का शिकार बनाया जा रहा है, और उनके गिरफ़्तारी वारण्ट पर आतंकवाद, देशद्रोह, और षडयन्त्र के आरोप दर्ज किये गये हैं.

ईवो मोरालेस ने, ट्वीट सन्देशों के ज़रिये, इस कार्रवाई का समर्थन किया है.

प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने रविवार के वक्तव्य में कहा कि यूएन प्रमुख ने बोलीविया में, शान्ति बहाली की दिशा में काम करने वाले तमाम पक्षों द्वारा उठाए गए क़दमों का भी ज़िक्र किया है.

उन्होंने, साथ ही, इन शान्ति प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन जारी रखे जाने का संकल्प भी व्यक्त किया है. इनमें राजनैतिक सम्वाद के लिये अनुकूल हालात बनाने और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के प्रयास शामिल हैं. 

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