ब्रिटेन: ‘सैन्य बल विधेयक’ से युद्धापराधों की जवाबदेही सीमित होने की आशंका

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि ब्रिटेन में, सशस्त्र सैनिकों के सम्बन्ध में एक विचाराधीन विधेयक अगर मौजूदा रूप में ही क़ानून बन गया तो उसके कारण, युद्धापराधों के लिये जवाबदेही सीमित होने की आशंका है.

मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने, सोमवार को एक वक्तव्य में ब्रितानी संसद से इन चेतावनियों को सुनने का आग्रह किया कि नया प्रस्तावित विदेशी अभियान विधेयक, ऐसी कुछ प्रमुख मानवाधिकार ज़िम्मेदारियों की साख़ के लिये जोखिम पैदा करता है, जिनके लिये सांसद अतीत में सहमति दे चुके हैं.

🇬🇧 UN Human Rights Chief @mbachelet urges UK Parliament to amend proposed law that risks undermining key human rights obligations by shielding military personnel operating abroad from accountability for torture and other war crimes.Read 👉 https://t.co/xJogFkl5RT pic.twitter.com/tst2B32paF— UN Human Rights (@UNHumanRights) April 12, 2021

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा, “ये विधेयक अपने मौजूदा प्रारूप में, ये सम्भावना बहुत कम कर देगा कि विदेशी अभियानों में तैनात ब्रितानी सैनिकों को, मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघन के लिये जवाबदेह ठहराया जा सके, जो अन्तरराष्ट्रीय अपराधों की श्रेणी में आते हों.”
जाँच से बचाव
मिशेल बाशेलेट ने कहा कि ये विधेयक विदेशों में तैनात सैन्य कर्मियों को प्रताड़ना या गम्भीर अन्तरराष्ट्रीय अपराधों की गतिविधियों के लिये जवाबदेही से बचा सकता है.
यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने कहा कि अपने मौजूदा प्रारूप में ये विधेयक, सम्भवतः 1949 के जिनीवा कन्वेन्शन और उत्पीड़न के विरुद्ध कन्वेन्शन के विरोधाभासी प्रावधान पेश करता है.
मिशेल बाशेलेट ने ब्रिटेन सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई इस विधेयक की पृष्ठभूमि का सन्दर्भ भी रेखांकित किया जिसमें कहा गया है कि इस विधेयक का उद्देश्य “मौजूदा और रिटायर्ड सैन्य कर्मचारियों को, विदेशों में जटिल वातावरण व सशस्त्र संघर्षों के दौरान हुई, अतीत की घटनाओं के लिये सम्भावित दावों के सन्दर्भ में और ज़्यादा सुनिश्चितता मुहैया कराना है”.
उच्च मानदण्ड
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि भविष्य में, अभियोजकों को, विदेशी अभियानों के दौरान हुई कथित घटनाओं के सम्बन्ध में, इस चुनौतीपूर्ण सन्दर्भ का उचित ख़याल रखना होगा.
उन्होंने, अलबत्ता ये भी बताया कि ब्रिटेन सरकार, इस मुद्दे पर यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के सम्पर्क में रही है.
“ब्रिटेन सरकार द्वारा इस मुद्दे पर, मेरे कार्यालय से सम्पर्क स्थापित किया जाना सराहनीय है.”
उन्होंने कहा, “मैं ये भी रेखांकित करती हूँ कि इसी तरह की चिन्ताएँ, अनेक राजनैतिक हस्तियों, ग़ैर-सरकारी संगठनों, वकीलों और ब्रिटिश सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ, उत्पीड़न के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र कमेटी और संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्टेयरों के एक समूह  ने भी उठाई हैं, इनमें उत्पीड़न पर विशेष रैपोर्टेयर भी शामिल हैं.”
ये विधेयक क़ानूनी प्रक्रिया के अन्तिम चरण में पहुँच रहा है, और इस पर जल्द  ही, ब्रितानी संसद के उच्च सदन – लॉर्ड्स सभा में तीसरे और अन्तिम चरण में, चर्चा होगी.
इस विधेयक में, लॉर्ड्स सभा में भी बदलाव किया जा सकते हैं.
इस विधेयक को रक्षा मंत्रालय ने प्रायोजित किया था और इसे ब्रितानी संसद के निचले सदन – कॉमन सभा में पेश किया गया था., संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि ब्रिटेन में, सशस्त्र सैनिकों के सम्बन्ध में एक विचाराधीन विधेयक अगर मौजूदा रूप में ही क़ानून बन गया तो उसके कारण, युद्धापराधों के लिये जवाबदेही सीमित होने की आशंका है.

मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने, सोमवार को एक वक्तव्य में ब्रितानी संसद से इन चेतावनियों को सुनने का आग्रह किया कि नया प्रस्तावित विदेशी अभियान विधेयक, ऐसी कुछ प्रमुख मानवाधिकार ज़िम्मेदारियों की साख़ के लिये जोखिम पैदा करता है, जिनके लिये सांसद अतीत में सहमति दे चुके हैं.

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा, “ये विधेयक अपने मौजूदा प्रारूप में, ये सम्भावना बहुत कम कर देगा कि विदेशी अभियानों में तैनात ब्रितानी सैनिकों को, मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघन के लिये जवाबदेह ठहराया जा सके, जो अन्तरराष्ट्रीय अपराधों की श्रेणी में आते हों.”

जाँच से बचाव

मिशेल बाशेलेट ने कहा कि ये विधेयक विदेशों में तैनात सैन्य कर्मियों को प्रताड़ना या गम्भीर अन्तरराष्ट्रीय अपराधों की गतिविधियों के लिये जवाबदेही से बचा सकता है.

यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने कहा कि अपने मौजूदा प्रारूप में ये विधेयक, सम्भवतः 1949 के जिनीवा कन्वेन्शन और उत्पीड़न के विरुद्ध कन्वेन्शन के विरोधाभासी प्रावधान पेश करता है.

मिशेल बाशेलेट ने ब्रिटेन सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई इस विधेयक की पृष्ठभूमि का सन्दर्भ भी रेखांकित किया जिसमें कहा गया है कि इस विधेयक का उद्देश्य “मौजूदा और रिटायर्ड सैन्य कर्मचारियों को, विदेशों में जटिल वातावरण व सशस्त्र संघर्षों के दौरान हुई, अतीत की घटनाओं के लिये सम्भावित दावों के सन्दर्भ में और ज़्यादा सुनिश्चितता मुहैया कराना है”.

उच्च मानदण्ड

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि भविष्य में, अभियोजकों को, विदेशी अभियानों के दौरान हुई कथित घटनाओं के सम्बन्ध में, इस चुनौतीपूर्ण सन्दर्भ का उचित ख़याल रखना होगा.

उन्होंने, अलबत्ता ये भी बताया कि ब्रिटेन सरकार, इस मुद्दे पर यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के सम्पर्क में रही है.

“ब्रिटेन सरकार द्वारा इस मुद्दे पर, मेरे कार्यालय से सम्पर्क स्थापित किया जाना सराहनीय है.”

उन्होंने कहा, “मैं ये भी रेखांकित करती हूँ कि इसी तरह की चिन्ताएँ, अनेक राजनैतिक हस्तियों, ग़ैर-सरकारी संगठनों, वकीलों और ब्रिटिश सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ, उत्पीड़न के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र कमेटी और संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्टेयरों के एक समूह  ने भी उठाई हैं, इनमें उत्पीड़न पर विशेष रैपोर्टेयर भी शामिल हैं.”

ये विधेयक क़ानूनी प्रक्रिया के अन्तिम चरण में पहुँच रहा है, और इस पर जल्द  ही, ब्रितानी संसद के उच्च सदन – लॉर्ड्स सभा में तीसरे और अन्तिम चरण में, चर्चा होगी.

इस विधेयक में, लॉर्ड्स सभा में भी बदलाव किया जा सकते हैं.

इस विधेयक को रक्षा मंत्रालय ने प्रायोजित किया था और इसे ब्रितानी संसद के निचले सदन – कॉमन सभा में पेश किया गया था.

,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *