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भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है भाईदूज

November 08
08:37 2018

पटना 08 नवंबर : भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह के प्रतीक का पर्व ‘भैयादूज’ को बहनें अपने भाइयों के स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की प्रार्थना करती हैं।
भाईदूज का त्योहार कार्तिक मास की द्वितीया को मनाया जाता है। भाईदूज का त्योहार भाई बहन के स्नेह को सुदृढ़ करता है। यह त्योहार दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है। भाईदूज पर बहनें भाई की लम्बी आयु की प्रार्थना करती हैं। इस दिन को भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। इस पर्व का प्रमुख लक्ष्य भाई तथा बहन के पावन संबंध एवं प्रेमभाव की स्थापना करना है।
भाईदूज के दिन बहनें रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीष देती हैं। साथ ही भाई अपनी बहन को उपहार देता है। यह त्योहार देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि इस पर्व को मनाने की विधि हर जगह एक जैसी नहीं है। उत्तर भारत में जहां यह चलन है कि इस दिन बहनें भाई को अक्षत और तिलक लगाकर नारियल देती हैं वहीं पूर्वी भारत में बहनें शंखनाद के बाद भाई को तिलक लगाती हैं और भेंट स्वरूप कुछ उपहार देती हैं। मान्यता है कि इस दिन बहन के घर भोजन करने से भाई की उम्र बढ़ती है।
भाई दूज के दिन बहनें बेरी पूजन भी करती हैं। इस दिन बहनें भाइयों को तेल मलकर गंगा यमुना में स्नान भी कराती हैं। भाई दूज के दिन गोधन कूटने की प्रथा भी है। गोबर की मानव मूर्ति बना कर छाती पर ईंट रखकर स्त्रियां उसे मूसलों से तोड़ती हैं। स्त्रियां घर-घर जाकर चना, गूम तथा भटकैया चराव कर जिव्हा को भटकैया के कांटे से दागती भी हैं।

एजेंसी 

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