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भारतीय आध्यात्म को विश्व में प्रतिष्ठित किया परहंस योगानंद ने

भारतीय आध्यात्म को विश्व में प्रतिष्ठित किया परहंस योगानंद ने
January 05
09:09 2019

कुछ एक बहुमूल्य आध्यात्मिक सुक्तियां : परमहंस योगानंद

ईश्वर क्या है?

लगातार मिलने वाला, हमेशा नया दिखने वाला आनन्द।

ईश्वर को देखने और समझने के लिए खुद से ही कोशिश करनी होगी, यही एकमात्र जरिया है। किसी धार्मिक विश्वास या नियति जैसे बोलों के प्रभाव में आकर ईश्वर को खुद से समझने का प्रयास न करना गलत होगा।

मनुष्य जब तक अपनी नकारात्मक सोच से बरी नहीं हो जाता, तब तक वह यथार्थ सच को नहीं पा सकता है।

जिन्दगी मौत से ताकतवर है क्योंकि वह पापों को धोकर भी आगे बढती है।

केवल अज्ञानी व्यक्ति ही दूसरों के दुखों के जीवन के प्रति संवेदनशीलता खो देता है क्योंकि वह अपने ही छोटे-छोटे दुखों में डूबा रहता है।

योग साधना विचारों की आपसी टकराहट से पैदा होने वाले शोर को पार कर शांति हासिल करने का एक तरीका है।

चूंकि चरम ज्ञान अर्थात् वह जो मानवीय बुद्धि के अधिकतम उपयोग से जाना जा सकता है, मानव का अंतिम लक्ष्य है, तब क्यों न सीखा जाए कि मनुष्य सही ढंग से कैसे जिए।

लोग अपना संतुलन खो देते हैं एवं धनोपार्जन के पागलपन तथा व्यावसायिक उन्माद के कारण कष्ट भोगते हैं, क्योंकि उनको कभी भी एक संतुलित जीवन की आदत को विकसित करने का मौका ही नहीं मिला।

हमारे जीवन को हमारे आकस्मिक या प्रतिभाशाली विचार नहीं वरन हमारी दैनन्दिन आदतें नियंत्रित करती हैं।

बच्चों में आध्यात्मिक महत्वाकांक्षा के विचार डालने चाहिए ताकि वे केवल सेवा की भावना से ही धनोपार्जन करें।

मनुष्य उसी पाठ को दोहराता है, जिसकी शिक्षा उसे दो से दस या पंद्रह वर्ष की आयु में मिली है।

मानव का लक्ष्य केवल धन कमाना ही न हो। वरन नामधन की भी भूख सदा रहे।

 

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