भारत: कोविड-19 की दूसरी लहर का रूप बहुत अलग, बहुत घातक

भारत में संयुक्त राष्ट्र की रैज़िडेण्ट कोऑर्डिनेटर, रेनाटा डेज़ालिएन ने कहा है कि देश में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर और वायरस के फैलाव की तेज़ रफ़्तार ने सभी को हैरान कर दिया है. इससे सबक़ लेकर सम्भावित तीसरी लहर के लिये तैयारियों को पुख़्ता बनाना होगा. उन्होंने यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि मौजूदा संकट के दौरान यूएन एजेंसियाँ, स्वास्थ्य सेवा प्रणाली व टीकाकरण मुहिम को मज़बूती प्रदान करने और कोविड-19 से प्रभावित लोगों तक सहायता पहुँचाने, सभी मोर्चों पर सक्रिय हैं.

इस साक्षात्कार को, प्रकाशन ज़रूरतों के लिये सम्पादित किया गया है…
यूएन न्यूज़: भारत एक अभूतपूर्व कोविड संकट से जूझ रहा है. अप्रैल के बाद से, हमने संक्रमण मामलों में तेज़ वृद्धि देखी है, स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी बोझ है, और संक्रमण ग्रामीण क्षेत्रों में भी फैल रहा है. भारत में संयुक्त राष्ट्र की रैज़ीडेण्ट कोऑर्डिनेटर के रूप में, आप इस स्थिति को किस तरह से देखती हैं?
रेनाटा डेज़ालिएन: सबसे पहले तो, मैं उन सभी लोगों के प्रति अपनी गहरी सम्वेदना और सहानुभूति व्यक्त करना चाहती हूँ, जिन्होंने अपने किसी प्रियजन को खोया है या जो इस दूसरी कोविड लहर में किसी भी रूप में प्रभावित हुए हैं.
जैसा कि आपने कहा, यह दूसरी लहर, विशेष रूप से विनाशकारी रही है – बहुत भीषण और पहली लहर से बिल्कुल अलग. पहली लहर में मामले धीरे-धीरे बढ़े. उसके चरम पर पहुँचने से पहले हमारे पास 6-7 महीने थे, जिससे हमें तैयारी के लिये काफ़ी समय मिल गया.
इसके अलावा, मुझे लगता है कि पहली बार सभी पूरी ऊर्जा से जुटे थे, क्योंकि उस तरह की वैश्विक महामारी अभी भी नई थी. हमने पहले इसका अनुभव नहीं किया था और हम सभी ख़राब स्थिति की तैयारी करते हुए भी बेहतरी की ही उम्मीद कर रहे थे.
तीसरा, पहली लहर के दौरान, वायरस की संचारण क्षमता दूसरी लहर की तुलना में काफ़ी कम थी. दूसरी लहर ने हमें बहुत तेज़ी से पस्त किया. कुछ ही हफ़्तों के भीतर, बहुत ही कम समय में मामलों में अचानक तेज़ी से वृद्धि हुई.
इसलिए, भले ही कई तैयारियाँ पहले से ही की जा चुकी थीं, फिर भी इसने हम सभी को हैरान कर दिया. आश्चर्य की बात यह नहीं थी कि दूसरी लहर आई, बल्कि हैरानी, उसकी गहनता और तेज़ फैलाव को लेकर है.
भारत में अब हालात बेहतर हैं. जैसा कि आप जानते हैं, यह एक विशाल देश है. जनसंख्या के मामले में, हम योरोपीय संघ के आकार से तीन गुना हैं, और इसलिए भले ही इतनी बड़ी संख्या में मामले सामने आना एक कहानी बयाँ करती है, लेकिन महज़ कुल आँकड़ों को देखना ही सही नहीं होगा.
भारत में 28 राज्य हैं और केंद्र शासित प्रदेश भी हैं, और देश के विभिन्न हिस्सों में लहर का प्रभाव अलग-अलग रहा है. अधिकाँश देश दूसरी लहर की चपेट में आया है, लेकिन देश के भीतर इसकी गति समान नहीं रही है.
इसलिए भारत के समग्र प्रदर्शन को समझने के लिये, कुल आँकड़ों पर ना जाकर, ज़मीनी स्तर पर विभिन्न लहरों का सम्पूर्ण विश्लेषण करना ज़रूरी है.
अब हम दूसरी लहर से धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं. देश के कुछ हिस्से अभी भी पीड़ित हैं. अन्य हिस्सों में मामलों की संख्या में कमी आई है. हर दिन लगभग साढ़े तीन हज़ार लोगों की मौत हो रही है, इसलिए यह अभी भी गम्भीर है.

© UNICEF/Bhushan Koyandeभारत के मुम्बई शहर में स्वास्थ्यकर्मी, कोविड-19 टीकाकरण जागरूकता अभियान में जुटे हैं.

मगर, मुझे लगता है कि मोटे तौर पर, हम इसकी चरम को पार कर नीचे की ओर रूख़ करने लगे हैं. मुझे लगता है कि इसने हम सभी को संयमित कर, तीसरी लहर का सामना करने के लिये कई सबक़ सिखाए हैं.
यूएन न्यूज़: दक्षिण एशिया के कई पड़ोसी देशों में भी कोविड मामलों में इसी तरह की तेज़ वृद्धि देखी जा रही है. आपके आकलन में, भारत समेत पूरा विश्व, इतनी घातक दूसरी लहर का पूर्वानुमान क्यों नहीं लगा पाया?
रेनाटा डेज़ालिएन:: ऐसा नहीं है कि हमें दूसरी लहर का अनुमान नहीं था. सभी ने देखा है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों ने महामारी की दूसरी और तीसरी लहर का सामना किया है. इसलिए, यह विचार तो किसी को नहीं आया था कि दूसरी लहर नहीं आएगी.
हम सभी को उम्मीद थी कि दूसरी लहर आएगी.
लेकिन जैसाकि मैंने कहा, पहली लहर का स्वरूप बहुत अलग था. हम पहली लहर की तर्ज़ पर दूसरी लहर के बारे में विचार कर रहे थे – कि यह
धीमी गति से आगे बढ़ेगी, कि हमारे पास तैयारी के लिये समय होगा, कि यह पहली लहर से अधिक संक्रामक नहीं होगी. यही वजह है कि इसने हमें बुरी तरह चौंका दिया.
साथ ही, जैसा कि आप जानते हैं, पिछले वर्ष के दौरान, वैक्सीनों का रिकॉर्ड समय में उत्पादन हुआ और भारत दो बेहद महत्वपूर्ण टीकों का उत्पादन कर रहा था.
इस साल जनवरी में टीकाकरण भी शुरू हो चुका था. इसलिए, मेरा मानना है कि एक भावना थी कि अब टीके लगाए जा रहे हैं, इसलिए हमारे पास इस घातक महामारी के ख़िलाफ़ एक सुरक्षा कवच है. मेरे ख़्याल से इसी कारण थोड़ी ढिलाई हो गई.
इसके अलावा, हालाँकि भारत ने पहली लहर में महामारी विज्ञान सम्बन्धी जवाबी कार्रवाई क्षमताओं का विस्तार किया था, और इसमें से कुछ पर
इस साल की शुरुआत में कार्य भी आरम्भ कर दिया गया था, लेकिन जिस गति से दूसरी लहर आई,  उसी गति से जवाबी कार्रवाई के विस्तार का समय नहीं मिला.

© UNICEF/Amarjeet Singhभारत के ग़ाज़ियाबाद शहर में साँस लेने में कठिनाई महसूस कर रहे कुछ मरीज़, एक उपासना स्थल में ऑक्सीजन की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

यूएन न्यूज़: अब तीसरी लहर के बारे में भी चेतावनी दी जा रही है. आपने कहा कि दूसरी लहर से सबक़ मिले हैं. क्या आपको लगता है कि अब हम अगली लहर से निपटने के लिये तैयार हैं?
रेनाटा डेज़ालिएन:  मुझे लगता है कि हम सभी को तीसरी लहर की आशंका है. लेकिन हम यह नहीं जानते कि यह कैसी होगी. जब आप जानते ही नहीं कि स्वरूप कैसा होगा, तो तैयारी करना कठिन हो जाता है.
पिछले वर्ष, कई भविष्यवाणियाँ की गईं, जैसे कि महामारी कब चरम पर होगी, लेकिन वस्तुतः वे सभी ग़लत निकलीं. मुझे लगता है कि हमें समझना होना और स्वीकार करना होगा कि हम अभी भी इस वायरस के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते हैं.
और इसलिए, जिस बारे में हम अनुमान लगा रहे हैं, उसे अभी ठीक तरह से परिभाषित तक नहीं कर सके हैं.
हम केवल इतना कह सकते हैं कि हो सकता है कि यह पहली लहर की तरह हो, दूसरी लहर की तरह हो, या पूरी तरह से अलग भी हो सकती है. ऐसी किसी चीज़ के लिये तैयारी करना काफी कठिन है.
लेकिन मुझे लगता है कि एक बात स्पष्ट ज़रूर है – हमें टीकाकरण का तेज़ी से विस्तार करने की आवश्यकता है. मुझे पता है कि आपूर्ति श्रृँखला (Supply chain) आदि में कमी रही है.
उम्मीद है कि कुछ महीनों में देश में टीकों के उत्पादन में तेज़ी आएगी. इसके साथ ही मुझे आशा है कि तीसरी लहर में वायरस से काफ़ी ज़्यादा सुरक्षा हासिल होगी.
अब, हर कोई यह सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहा है कि जवाबी कार्रवाई की प्रणाली – स्वास्थ्य प्रतिक्रिया प्रणाली – अधिक तेज़ी से विस्तार कर सके.
यदि कोई ऐसी तीसरी लहर आती है, जो दूसरी लहर से मिलती जुलती हो, तो जिस हिसाब से हमने दूसरी लहर में देखा, हमें निश्चित रूप से अस्पतालों में अधिक बिस्तर व ऑक्सीजन की आवश्यकता होगी.
साथ ही,  सभी चुनौतियों के बावजूद, मैंने केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तरों पर असाधारण प्रयास होते देखे हैं. हमने कई देशों को इस वायरस से जूझते देखा है, यहाँ तक कि सबसे परिष्कृत स्वास्थ्य प्रणाली वाले देशों को भी.
इसलिए मुझे लगता है कि हम सभी को आपसी समझ बनाकर, मिलकर काम करना होगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं,  कई सबक़ भी सीख रहे हैं.

© UNICEF/Sujay Reddyभारत की राजधानी नई दिल्ली में, एक स्वास्थ्यकर्मी कोविड-19 की वैक्सीन को हाथ में थामे हुए.

यूएन न्यूज़: इन बदलते हालात में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया क्या रही है और भारत में यूएन ने इस ज़रूरत के समय में मदद के लिये क्या प्रयास किये हैं?
रेनाटा डेज़ालिएन:  महामारी का एक आयाम महामारी विज्ञान है, और दूसरा स्वास्थ्य प्रणाली, फिर निश्चित रूप से सामाजिक-आर्थिक प्रभाव. भारत में संयुक्त राष्ट्र इन सभी मोर्चों पर काम कर रहा है.
हमने शुरू से ही राष्ट्रीय जवाबी कार्रवाई में सहयोग किया है. हम भाग्यशाली हैं कि भारत में डब्ल्यूएचओ का  बड़ा कार्यालय है.
उन्होंने देश भर में लगभग 2600 स्वास्थ्यकर्मियों को तैनात किया है, जो संचारी रोगों के प्रबन्धन में अनुभवी थे और उन्हें तुरन्त कोविड-19 पर काम करने के लिये लगाया जा सका.
जैसाकि मैंने कहा, महामारी की शुरुआत से ही, हमने तकनीकी विशेषज्ञता के साथ तैयारी और रोकथाम के शुरुआती आयामों में सहयोग दिया, और तात्कालिक ज़रूरतों जैसेकि पीपीई किट आदि मुहैया करवाये.
अब इस दूसरी लहर के साथ, हमने ना केवल पहले से चल रहे कार्यों को मज़बूती दी, बल्कि मौजूदा ज़रूरतों के मुताबिक भी सहायता प्रदान की.
हमने 10 हज़ार ऑक्सीजन कॉण्सनट्रेटरों का आयात किया, कुछ संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने 72 ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करने पर काम किया, हमने आरटी-पीसीआर परीक्षण किटों व कोल्ड चेन उपकरण समेत अन्य सामग्री की आपूर्ति की.
महामारी विज्ञान प्रतिक्रिया के अलावा, संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य प्रणाली मज़बूत करने में भी भारत को सहयोग दे रहा है – ना केवल कोविड-19 सम्बन्धी स्वास्थ्य प्रणालियों को – बल्कि अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं और टीकाकरण कार्यक्रमों को जारी रखने के लिये भी, जोकि, उदाहरणस्वरूप, बच्चों को संचारी रोगों से बचाने के लिये आवश्यक हैं.
इसके अलावा, हम सामाजिक-आर्थिक प्रतिक्रिया का समर्थन भी करते रहे हैं. कई संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ आजीविकाओं की रक्षा करने पर काम कर रही हैं.
हम सभी जानते हैं कि कोविड-19 के असर से, विशेषकर आवाजाही पर लगी पाबन्दियों के कारण, पिछले साल कामकाज का भारी नुक़सान हुआ.
फिर दुर्भाग्य से, अभी भारत आर्थिक दृष्टि से पटरी पर वापस आ ही रहा था, कि दूसरी लहर आ गई.
इसलिए हम आजीविका, लोगों के कल्याण और उनके परिवारों को भोजन प्रदान करने की उनकी क्षमता पर होने वाले प्रभाव के बारे में गहराई से चिन्तित हैं.
हम समग्र रूप से अर्थव्यवस्था के प्रति भी चिन्तित हैं क्योंकि जब भारत के आकार के देश की अर्थव्यवस्था धीमी हो जाती है, जैसा कि पिछले साल हुआ था, तो इसे दोबारा शुरू होने में लम्बा समय लगता है और यह आसान नहीं होता.
इसलिए हम उस मोर्चे पर भी सहयोग प्रदान कर रहे हैं.

© UNICEF/Biju Boroभारत के पूर्वोत्तर गुवाहाटी शहर में कोविड-19 का टीका लगवाती महिला.

यूएन न्यूज़: संयुक्त राष्ट्र के बहुत से कर्मचारी भी कोविड संक्रमण से प्रभावित हुए हैं. फ़िलहाल क्या स्थिति है और आप इससे किस तरह से निपट रही हैं?
रेनाटा डेज़ालिएन:  भारत में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली बरक़रार है और अपनी सेवाएँ देती रहेगी. चाहे कितनी भी लहरें क्यों न आएँ, हम यहाँ ज़रूरत के समय देश का साथ देने के लिये हैं.
हमारे कई कर्मचारी अग्रिम पंक्ति में कार्य कर रहे हैं. जैसा कि मैंने ज़िक्र किया था, डब्ल्यूएचओ के 2600 कर्मी, और यूनीसेफ़ और अन्य एजेंसियों के अनेक लोग भी अग्रिम मोर्चे पर कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. ज़ाहिर है कि उन सभी को ख़तरा है.
लेकिन सौभाग्य से, जब सरकार ने जनवरी में टीकाकरण शुरू किया, तो इसमें अग्रिम पंक्ति के सभी कार्यकर्ताओं को इसका हिस्सा बनाया.
इनमें संयुक्त राष्ट्र के अग्रिम पंक्ति के उन कार्यकर्ताओं को भी शामिल किया गया, जो यहाँ के नागरिक हैं. इसलिए हम भाग्यशाली रहे कि उनमें से कई का टीकाकरण काफ़ी पहले हो गया.
मगर निश्चित रूप से, ख़तरा हमें भी है और हमारे अनेक कर्मचारी भी अन्य की तरह कोविड-19 का शिकार हुए हैं.
देश में ऐसे बहुत कम ही लोग हैं जिनके परिवार के एक या अधिक सदस्य, प्रियजन, क़रीबी दोस्त या पड़ोसी कोविड-19 की चपेट में न आये हों.
मुझे लगता है कि हर कोई प्रभावित हुआ है और संयुक्त राष्ट्र भी इसमें कोई अपवाद नहीं है. लेकिन मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहूँगी कि हम यहाँ काम करने के लिये हैं.
जब हालात कठिन हो जाते हैं, तो हम और कड़ी मेहनत करने की कोशिश करते हैं., भारत में संयुक्त राष्ट्र की रैज़िडेण्ट कोऑर्डिनेटर, रेनाटा डेज़ालिएन ने कहा है कि देश में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर और वायरस के फैलाव की तेज़ रफ़्तार ने सभी को हैरान कर दिया है. इससे सबक़ लेकर सम्भावित तीसरी लहर के लिये तैयारियों को पुख़्ता बनाना होगा. उन्होंने यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि मौजूदा संकट के दौरान यूएन एजेंसियाँ, स्वास्थ्य सेवा प्रणाली व टीकाकरण मुहिम को मज़बूती प्रदान करने और कोविड-19 से प्रभावित लोगों तक सहायता पहुँचाने, सभी मोर्चों पर सक्रिय हैं.

इस साक्षात्कार को, प्रकाशन ज़रूरतों के लिये सम्पादित किया गया है…

यूएन न्यूज़: भारत एक अभूतपूर्व कोविड संकट से जूझ रहा है. अप्रैल के बाद से, हमने संक्रमण मामलों में तेज़ वृद्धि देखी है, स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी बोझ है, और संक्रमण ग्रामीण क्षेत्रों में भी फैल रहा है. भारत में संयुक्त राष्ट्र की रैज़ीडेण्ट कोऑर्डिनेटर के रूप में, आप इस स्थिति को किस तरह से देखती हैं?

रेनाटा डेज़ालिएन: सबसे पहले तो, मैं उन सभी लोगों के प्रति अपनी गहरी सम्वेदना और सहानुभूति व्यक्त करना चाहती हूँ, जिन्होंने अपने किसी प्रियजन को खोया है या जो इस दूसरी कोविड लहर में किसी भी रूप में प्रभावित हुए हैं.

जैसा कि आपने कहा, यह दूसरी लहर, विशेष रूप से विनाशकारी रही है – बहुत भीषण और पहली लहर से बिल्कुल अलग. पहली लहर में मामले धीरे-धीरे बढ़े. उसके चरम पर पहुँचने से पहले हमारे पास 6-7 महीने थे, जिससे हमें तैयारी के लिये काफ़ी समय मिल गया.

इसके अलावा, मुझे लगता है कि पहली बार सभी पूरी ऊर्जा से जुटे थे, क्योंकि उस तरह की वैश्विक महामारी अभी भी नई थी. हमने पहले इसका अनुभव नहीं किया था और हम सभी ख़राब स्थिति की तैयारी करते हुए भी बेहतरी की ही उम्मीद कर रहे थे.

तीसरा, पहली लहर के दौरान, वायरस की संचारण क्षमता दूसरी लहर की तुलना में काफ़ी कम थी. दूसरी लहर ने हमें बहुत तेज़ी से पस्त किया. कुछ ही हफ़्तों के भीतर, बहुत ही कम समय में मामलों में अचानक तेज़ी से वृद्धि हुई.

इसलिए, भले ही कई तैयारियाँ पहले से ही की जा चुकी थीं, फिर भी इसने हम सभी को हैरान कर दिया. आश्चर्य की बात यह नहीं थी कि दूसरी लहर आई, बल्कि हैरानी, उसकी गहनता और तेज़ फैलाव को लेकर है.

भारत में अब हालात बेहतर हैं. जैसा कि आप जानते हैं, यह एक विशाल देश है. जनसंख्या के मामले में, हम योरोपीय संघ के आकार से तीन गुना हैं, और इसलिए भले ही इतनी बड़ी संख्या में मामले सामने आना एक कहानी बयाँ करती है, लेकिन महज़ कुल आँकड़ों को देखना ही सही नहीं होगा.

भारत में 28 राज्य हैं और केंद्र शासित प्रदेश भी हैं, और देश के विभिन्न हिस्सों में लहर का प्रभाव अलग-अलग रहा है. अधिकाँश देश दूसरी लहर की चपेट में आया है, लेकिन देश के भीतर इसकी गति समान नहीं रही है.

इसलिए भारत के समग्र प्रदर्शन को समझने के लिये, कुल आँकड़ों पर ना जाकर, ज़मीनी स्तर पर विभिन्न लहरों का सम्पूर्ण विश्लेषण करना ज़रूरी है.

अब हम दूसरी लहर से धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं. देश के कुछ हिस्से अभी भी पीड़ित हैं. अन्य हिस्सों में मामलों की संख्या में कमी आई है. हर दिन लगभग साढ़े तीन हज़ार लोगों की मौत हो रही है, इसलिए यह अभी भी गम्भीर है.

© UNICEF/Bhushan Koyande
भारत के मुम्बई शहर में स्वास्थ्यकर्मी, कोविड-19 टीकाकरण जागरूकता अभियान में जुटे हैं.

मगर, मुझे लगता है कि मोटे तौर पर, हम इसकी चरम को पार कर नीचे की ओर रूख़ करने लगे हैं. मुझे लगता है कि इसने हम सभी को संयमित कर, तीसरी लहर का सामना करने के लिये कई सबक़ सिखाए हैं.

यूएन न्यूज़: दक्षिण एशिया के कई पड़ोसी देशों में भी कोविड मामलों में इसी तरह की तेज़ वृद्धि देखी जा रही है. आपके आकलन में, भारत समेत पूरा विश्व, इतनी घातक दूसरी लहर का पूर्वानुमान क्यों नहीं लगा पाया?

रेनाटा डेज़ालिएन:: ऐसा नहीं है कि हमें दूसरी लहर का अनुमान नहीं था. सभी ने देखा है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों ने महामारी की दूसरी और तीसरी लहर का सामना किया है. इसलिए, यह विचार तो किसी को नहीं आया था कि दूसरी लहर नहीं आएगी.

हम सभी को उम्मीद थी कि दूसरी लहर आएगी.

लेकिन जैसाकि मैंने कहा, पहली लहर का स्वरूप बहुत अलग था. हम पहली लहर की तर्ज़ पर दूसरी लहर के बारे में विचार कर रहे थे – कि यह

धीमी गति से आगे बढ़ेगी, कि हमारे पास तैयारी के लिये समय होगा, कि यह पहली लहर से अधिक संक्रामक नहीं होगी. यही वजह है कि इसने हमें बुरी तरह चौंका दिया.

साथ ही, जैसा कि आप जानते हैं, पिछले वर्ष के दौरान, वैक्सीनों का रिकॉर्ड समय में उत्पादन हुआ और भारत दो बेहद महत्वपूर्ण टीकों का उत्पादन कर रहा था.

इस साल जनवरी में टीकाकरण भी शुरू हो चुका था. इसलिए, मेरा मानना है कि एक भावना थी कि अब टीके लगाए जा रहे हैं, इसलिए हमारे पास इस घातक महामारी के ख़िलाफ़ एक सुरक्षा कवच है. मेरे ख़्याल से इसी कारण थोड़ी ढिलाई हो गई.

इसके अलावा, हालाँकि भारत ने पहली लहर में महामारी विज्ञान सम्बन्धी जवाबी कार्रवाई क्षमताओं का विस्तार किया था, और इसमें से कुछ पर

इस साल की शुरुआत में कार्य भी आरम्भ कर दिया गया था, लेकिन जिस गति से दूसरी लहर आई,  उसी गति से जवाबी कार्रवाई के विस्तार का समय नहीं मिला.

© UNICEF/Amarjeet Singh
भारत के ग़ाज़ियाबाद शहर में साँस लेने में कठिनाई महसूस कर रहे कुछ मरीज़, एक उपासना स्थल में ऑक्सीजन की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

यूएन न्यूज़: अब तीसरी लहर के बारे में भी चेतावनी दी जा रही है. आपने कहा कि दूसरी लहर से सबक़ मिले हैं. क्या आपको लगता है कि अब हम अगली लहर से निपटने के लिये तैयार हैं?

रेनाटा डेज़ालिएन:  मुझे लगता है कि हम सभी को तीसरी लहर की आशंका है. लेकिन हम यह नहीं जानते कि यह कैसी होगी. जब आप जानते ही नहीं कि स्वरूप कैसा होगा, तो तैयारी करना कठिन हो जाता है.

पिछले वर्ष, कई भविष्यवाणियाँ की गईं, जैसे कि महामारी कब चरम पर होगी, लेकिन वस्तुतः वे सभी ग़लत निकलीं. मुझे लगता है कि हमें समझना होना और स्वीकार करना होगा कि हम अभी भी इस वायरस के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते हैं.

और इसलिए, जिस बारे में हम अनुमान लगा रहे हैं, उसे अभी ठीक तरह से परिभाषित तक नहीं कर सके हैं.

हम केवल इतना कह सकते हैं कि हो सकता है कि यह पहली लहर की तरह हो, दूसरी लहर की तरह हो, या पूरी तरह से अलग भी हो सकती है. ऐसी किसी चीज़ के लिये तैयारी करना काफी कठिन है.

लेकिन मुझे लगता है कि एक बात स्पष्ट ज़रूर है – हमें टीकाकरण का तेज़ी से विस्तार करने की आवश्यकता है. मुझे पता है कि आपूर्ति श्रृँखला (Supply chain) आदि में कमी रही है.

उम्मीद है कि कुछ महीनों में देश में टीकों के उत्पादन में तेज़ी आएगी. इसके साथ ही मुझे आशा है कि तीसरी लहर में वायरस से काफ़ी ज़्यादा सुरक्षा हासिल होगी.

अब, हर कोई यह सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहा है कि जवाबी कार्रवाई की प्रणाली – स्वास्थ्य प्रतिक्रिया प्रणाली – अधिक तेज़ी से विस्तार कर सके.

यदि कोई ऐसी तीसरी लहर आती है, जो दूसरी लहर से मिलती जुलती हो, तो जिस हिसाब से हमने दूसरी लहर में देखा, हमें निश्चित रूप से अस्पतालों में अधिक बिस्तर व ऑक्सीजन की आवश्यकता होगी.

साथ ही,  सभी चुनौतियों के बावजूद, मैंने केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तरों पर असाधारण प्रयास होते देखे हैं. हमने कई देशों को इस वायरस से जूझते देखा है, यहाँ तक कि सबसे परिष्कृत स्वास्थ्य प्रणाली वाले देशों को भी.

इसलिए मुझे लगता है कि हम सभी को आपसी समझ बनाकर, मिलकर काम करना होगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं,  कई सबक़ भी सीख रहे हैं.

© UNICEF/Sujay Reddy
भारत की राजधानी नई दिल्ली में, एक स्वास्थ्यकर्मी कोविड-19 की वैक्सीन को हाथ में थामे हुए.

यूएन न्यूज़: इन बदलते हालात में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया क्या रही है और भारत में यूएन ने इस ज़रूरत के समय में मदद के लिये क्या प्रयास किये हैं?

रेनाटा डेज़ालिएन:  महामारी का एक आयाम महामारी विज्ञान है, और दूसरा स्वास्थ्य प्रणाली, फिर निश्चित रूप से सामाजिक-आर्थिक प्रभाव. भारत में संयुक्त राष्ट्र इन सभी मोर्चों पर काम कर रहा है.

हमने शुरू से ही राष्ट्रीय जवाबी कार्रवाई में सहयोग किया है. हम भाग्यशाली हैं कि भारत में डब्ल्यूएचओ का  बड़ा कार्यालय है.

उन्होंने देश भर में लगभग 2600 स्वास्थ्यकर्मियों को तैनात किया है, जो संचारी रोगों के प्रबन्धन में अनुभवी थे और उन्हें तुरन्त कोविड-19 पर काम करने के लिये लगाया जा सका.

जैसाकि मैंने कहा, महामारी की शुरुआत से ही, हमने तकनीकी विशेषज्ञता के साथ तैयारी और रोकथाम के शुरुआती आयामों में सहयोग दिया, और तात्कालिक ज़रूरतों जैसेकि पीपीई किट आदि मुहैया करवाये.

अब इस दूसरी लहर के साथ, हमने ना केवल पहले से चल रहे कार्यों को मज़बूती दी, बल्कि मौजूदा ज़रूरतों के मुताबिक भी सहायता प्रदान की.

हमने 10 हज़ार ऑक्सीजन कॉण्सनट्रेटरों का आयात किया, कुछ संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने 72 ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करने पर काम किया, हमने आरटी-पीसीआर परीक्षण किटों व कोल्ड चेन उपकरण समेत अन्य सामग्री की आपूर्ति की.

महामारी विज्ञान प्रतिक्रिया के अलावा, संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य प्रणाली मज़बूत करने में भी भारत को सहयोग दे रहा है – ना केवल कोविड-19 सम्बन्धी स्वास्थ्य प्रणालियों को – बल्कि अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं और टीकाकरण कार्यक्रमों को जारी रखने के लिये भी, जोकि, उदाहरणस्वरूप, बच्चों को संचारी रोगों से बचाने के लिये आवश्यक हैं.

इसके अलावा, हम सामाजिक-आर्थिक प्रतिक्रिया का समर्थन भी करते रहे हैं. कई संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ आजीविकाओं की रक्षा करने पर काम कर रही हैं.

हम सभी जानते हैं कि कोविड-19 के असर से, विशेषकर आवाजाही पर लगी पाबन्दियों के कारण, पिछले साल कामकाज का भारी नुक़सान हुआ.

फिर दुर्भाग्य से, अभी भारत आर्थिक दृष्टि से पटरी पर वापस आ ही रहा था, कि दूसरी लहर आ गई.

इसलिए हम आजीविका, लोगों के कल्याण और उनके परिवारों को भोजन प्रदान करने की उनकी क्षमता पर होने वाले प्रभाव के बारे में गहराई से चिन्तित हैं.

हम समग्र रूप से अर्थव्यवस्था के प्रति भी चिन्तित हैं क्योंकि जब भारत के आकार के देश की अर्थव्यवस्था धीमी हो जाती है, जैसा कि पिछले साल हुआ था, तो इसे दोबारा शुरू होने में लम्बा समय लगता है और यह आसान नहीं होता.

इसलिए हम उस मोर्चे पर भी सहयोग प्रदान कर रहे हैं.

© UNICEF/Biju Boro
भारत के पूर्वोत्तर गुवाहाटी शहर में कोविड-19 का टीका लगवाती महिला.

यूएन न्यूज़: संयुक्त राष्ट्र के बहुत से कर्मचारी भी कोविड संक्रमण से प्रभावित हुए हैं. फ़िलहाल क्या स्थिति है और आप इससे किस तरह से निपट रही हैं?

रेनाटा डेज़ालिएन:  भारत में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली बरक़रार है और अपनी सेवाएँ देती रहेगी. चाहे कितनी भी लहरें क्यों न आएँ, हम यहाँ ज़रूरत के समय देश का साथ देने के लिये हैं.

हमारे कई कर्मचारी अग्रिम पंक्ति में कार्य कर रहे हैं. जैसा कि मैंने ज़िक्र किया था, डब्ल्यूएचओ के 2600 कर्मी, और यूनीसेफ़ और अन्य एजेंसियों के अनेक लोग भी अग्रिम मोर्चे पर कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. ज़ाहिर है कि उन सभी को ख़तरा है.

लेकिन सौभाग्य से, जब सरकार ने जनवरी में टीकाकरण शुरू किया, तो इसमें अग्रिम पंक्ति के सभी कार्यकर्ताओं को इसका हिस्सा बनाया.

इनमें संयुक्त राष्ट्र के अग्रिम पंक्ति के उन कार्यकर्ताओं को भी शामिल किया गया, जो यहाँ के नागरिक हैं. इसलिए हम भाग्यशाली रहे कि उनमें से कई का टीकाकरण काफ़ी पहले हो गया.

मगर निश्चित रूप से, ख़तरा हमें भी है और हमारे अनेक कर्मचारी भी अन्य की तरह कोविड-19 का शिकार हुए हैं.

देश में ऐसे बहुत कम ही लोग हैं जिनके परिवार के एक या अधिक सदस्य, प्रियजन, क़रीबी दोस्त या पड़ोसी कोविड-19 की चपेट में न आये हों.

मुझे लगता है कि हर कोई प्रभावित हुआ है और संयुक्त राष्ट्र भी इसमें कोई अपवाद नहीं है. लेकिन मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहूँगी कि हम यहाँ काम करने के लिये हैं.

जब हालात कठिन हो जाते हैं, तो हम और कड़ी मेहनत करने की कोशिश करते हैं.

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