भारत: कोविड-19 के संक्रमण में तेज़ उभार से चिन्ता की लहर

भारत में, मार्च महीने के अन्तिम दिनों और अप्रैल के शुरू में, कोरोनावायरस के संक्रमण मामलों में अचानक तेज़ी से उछाल देखा गया है. अलबत्ता, देश में, कोविड-19 की वैक्सीन का टीकाकरण भी विशाल पैमाने पर चल रहा है. फिर भी, संक्रमण के मामलों में इतनी तेज़ी चौतरफ़ा चिन्ता का कारण बन रही है. यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने, इस स्थिति पर और ज़्यादा जानकारी के लिये, भारत में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि डॉक्टर रॉड्रिको ऑफ़्रिन के साथ बात की…

भारत में कोविड-19 के संक्रमण की दूसरी और बेहद गम्भीर लहर दिखाई दे रही है. 9 अप्रैल को, एक दिन में, कोरानावायरस के संक्रमण के एक लाख 30 हज़ार से ज़्यादा मामले दर्ज किये गए हैं. आपकी नज़र में, संक्रमण मामलों में तेज़ उभार की क्या वजह हो सकती है?
देश में आर्थिक व सामाजिक गतिविधियाँ शुरू हो गई है. कार्यालय, स्कूल, सामाजिक समारोह, सार्वजनिक परिवहन और अन्य क्षेत्रों में जनजीवन फिर पटरी पर आने से, वायरस को दोबारा फैलने का मौक़ा मिल रहा है. 
पिछले वर्ष संक्रमण की पहली लहर के दौरान घनी आबादी वाली शहरी बस्तियों में महामारी तेज़ी से फैली थी. भारत में अब भी महामारी का फैलाव अधिकतर शहरी इलाक़ों में केन्द्रित है, लेकिन अब संक्रमण मध्य वर्ग आबादी वाले रिहायशी और ऊँची इमारतों वाले इलाक़ों में भी फैल रहा है. 
क्या वायरस अपना रूप बदल रहा है, और क्या कोरोनावायरस के नए प्रकार ज़्यादा चुनौतीपूर्ण हैं? ऐसे में क्या उपाय किये जा सकते हैं? 
वायरस संचारण अनेक कारकों पर निर्भर करता है. वायरस की चारित्रिक विशेषताएँ, स्थानीय आबादी का बर्ताव, और नीतिगत व सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय, सभी की भूमिका है. 
हम अभी पक्के तौर पर यह नहीं कह सकते है कि वायरस की कुछ क़िस्में, कुछ देशों में ज़्यादा क्यों फैल रही हैं, लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि हमने फैलने के तौर-तरीक़ों में बदलाव नहीं देखा है. 
इसका अर्थ यह है कि वायरस के फैलाव को रोकने के लिये जिन उपायों को बढ़ावा दिया गया है, उनमें कोई बदलाव की ज़रूरत नहीं है. 

WHO Indiaभारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉक्टर रोड्रिको ऑफ़्रिन.

कोविड-19 से बचाव के लिये उपयुक्त व्यवहार जारी रखना होगा – मास्क पहनना, हाथ धोना और सामाजिक दूरी बरतना.  
महामारी का अन्त करने के लिये हमारे औज़ारों में अब वैक्सीन भी शामिल हो गई है. टीकाकरण बढ़ाकर, सक्रियता से मामलों का पता लगाकर, बड़ी संख्या में मामलों वाले इलाक़ों की शिनाख़्त करके, संक्रमित लोगों को अलगाव में उनकी देखभाल सुनिश्चित करके, संचारण की कड़ी को तोड़ा जा सकता है. इन सभी उपायों से कोविड-19 पर नियन्त्रण पाने में सहायता मिलेगी. 
दुनिया के जिन क्षेत्रों में अभी वायरस के नए रूप व प्रकार फैल रहे हैं, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी उन देशों में वैज्ञानिकों व स्वास्थ्य अधिकारों के साथ मिलकर पड़ताल कर रही है कि इससे वायरस के व्यवहार पर किस तरह का असर पड़ रहा है.
इस सम्बन्ध में जैसे-जैसे और ज़्यादा जानकारी उपलब्ध होगी, विश्व स्वास्थ्य संगठन देशों को सूचित करता रहेगा. 
भारत भिन्न-भिन्न प्राथमिकता वाले समूहों के लिये विशाल स्तर पर टीकाकरण मुहिम चला रहा है. देश में मौजूदा टीकाकरण मुहिम की क्या स्थिति है, और क्या मौजूदा वैक्सीनें, वायरस के नए रूपों व प्रकारों पर भी कारगर होंगी?
वैक्सीन के ज़रिये सामान्य से बेहद गम्भीर बीमारी की रोकथाम की जाती है, जिसका अर्थ है, अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीज़ों व मौतों की संख्या में कमी. 
भारत में तीन महीनों से भी कम समय में वैक्सीन की लगभग दस करोड़ ख़ुराकें दी जा चुकी हैं – 8 अप्रैल तक नौ करोड़ 43 लाख ख़ुराकें दी गई हैं. 
टीकाकरण मुहिम के विशाल स्तर को देखते हुए यह एक असाधारण उपलब्धि है. मौजूदा जानकारी के आधार पर, यह कहा जा सकता है कि कोविड-19 की जिन वैक्सीनों को इस्तेमाल को मंज़ूरी मिली है, और जो वैक्सीनें अभी विकसित की जा रही हैं, उनसे वायरस की नई क़िस्मों के प्रति कुछ हद तक सुरक्षा हासिल ज़रूर होगी. 
इन वैक्सीनों का, प्रतिरोधक क्षमता पर व्यापक असर होता है, जिसमें एण्टीबॉडीज़ व कोशिकाएँ शामिल होती हैं.  वायरस के रूपों व प्रकारों में आने वाले बदलावों से वैक्सीन के पूर्ण रूप से बेअसर होने की सम्भावना नहीं है. 
जैसे-जैसे ज़्यादा संख्या में लोगों का टीकाकरण होगा, और हमारे पास विश्लेषण के लिये ज़्यादा आँकड़े उपलब्ध होंगे, WHO अन्य शोधकर्ताओं, स्वास्थ्य अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ मिलकर यह समझने की कोशिश करेगा कि ये नए प्रकार, वायरस के व्यवहार पर किस तरह असर डालते हैं.
साथ ही ये भी परखा जाएगा कि क्या इनसे वैक्सीन की कारगरता पर भी असर होता है या नहीं.  
सामान्य जीवन की ओर लौटने और आबादी में व्यापक प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्युनिटी) तक पहुँचने के लिये किस स्तर पर टीकाकरण की आवश्यकता होगी?
जैसाकि हम जानते हैं कि SARS-CoV-2 एक बेहद तेज़ी से फैलने वाला वायरस है. अगर हम स्वाभाविक रूप से प्रतिरोधक क्षमता को हासिल होने देते हैं तो इसमें लम्बा समय लगेगा. इससे भी अहम बात यह है कि इसकी वजह से संक्रमण मामले, अस्पतालों में मरीज़ों के भर्ती होने और मौतों के मामले ज़्यादा बड़ी संख्या सामने आएंगे. 
इसलिये, अगर संक्रमित होने वाले लोगों में से एक फ़ीसदी लोगों की भी मृत्यु हुई, तो विश्व आबादी को ध्यान में रखते हुए मौतों की संख्या बहुत अधिक होगी. 
मैं महामारी की रोकथाम के लिये कोविड-उपयुक्त बर्ताव और टैस्टिंग, ट्रैकिंग, उपचार और टीकाकरण की अहमियत पर ज़ोर देना चाहूंगा. 
इसलिये हमारा मानना है कि वायरस को तेज़ी से फैलने देकर, और बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमित बनाकर हर्ड इम्युनिटी को हासिल करने का विचार सही नहीं है. 

© UNICEF/Dhiraj Singhभारत के पश्चिमी शहर पुण में, कोविड-19 की वैक्सीन में काम आने वाले सामान का उत्पादन

हमें हमेशा हर्ड इम्युनिटी के बारे में बात, टीकाकरण के ज़रिये लोगों को सुरक्षा प्रदान किये जाने के सन्दर्भ में करनी चाहिये. जैसाकि, पोलियो, ख़सरा सहित उन अन्य बीमारियों के लिये किया जा रहा है जिनकी वैक्सीन से रोकथाम हो सकती है. 
इस स्तर पर हर्ड इम्युनिटी हासिल करने का एकमात्र रास्ता, व्यापक स्तर पर टीकाकरण है. इस सम्बन्ध में प्राथमिकता, पहले से संक्रमण का ज़्यादा जोखिम झेल रहे लोगों को दी जानी होगी, जिसके बाद टीकाकरण का दायरा सभी आयु-वर्गों के लिये बढ़ाना जाना होगा. 
जब तक ऐसा नहीं होता, हमें उन सभी सावधानियों का पालन करते रहने की ज़रूरत है, जिनकी हमें सलाह दी गई है, और जैसा कि हम पिछले महीनों में करते आ रहे हैं. 
बच्चों में कोविड-19 महामारी और उसके फैलाव के जोखिम के बारे में क्या जानकारी है?
वयस्कों की तुलना में बच्चों व किशोरों में आम तौर पर संक्रमण के हल्के मामले ही देखने को मिले हैं. कुछ बच्चों में जठरांत्र (gastrointestinal) सम्बन्धी लक्षण, जैसेकि हैज़ा या उल्टी सामने आ सकते हैं.   
बहुत से बच्चों में बिना किसी लक्षण के संक्रमण हो सकता है, जिसका अर्थ यह है कि उनके संक्रमित होने का कोई संकेत ना दिखाई दे. मगर, बच्चे संक्रमित हो सकते हैं और अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं, इसलिये उनके लिये सुरक्षा बरती जानी चाहिये और कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार सुनिश्चित किया जाना होगा. 
बच्चों के लिये कोविड-19 टीकाकरण के विषय में क्या प्रगति हुई है?
भारत में कोविड-19 वैक्सीन को बच्चों को दिये जाने की अनुमति नहीं है.
देश भर में अनेक शिक्षण संस्थान कोविड-19 संक्रमण के प्रमुख केन्द्रों के रूप में उभरे हैं. महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली सहित अनेक राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने स्कूलों में तालाबन्दी या रात्रिकालीन करफ़्यू की घोषणा की है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की ओर से फैलाव की रोकथाम करने के सम्बन्ध में क्या दिशानिर्देश हैं?  
भारत में संक्रमण की दूसरी लहर ज़्यादा तीव्र प्रतीत होती है, और सितम्बर 2020 की पहली लहर की तुलना में, कम अवधि में ही तेज़ी से मामलों में उछाल आया है. 
दूसरी लहर पर क़ाबू पाने के लिये, साबित हो चुकी और असरदार जवाबी कार्रवाई के उपाय तेज़ी से लागू करने होंगे. 
इसके तहत, मौजूदा जोखिमों के बारे में समुदायों तक जानकारी पहुँचाना, रोकथाम के लिये उनके दायित्व को समझाया जाना, कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा देना होगा. 
साथ ही बुनियादी व आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य व सामाजिक उपायों को ध्यान में रखते हुए, कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार के साथ दैनिक गतिविधियों में सन्तुलन क़ायम करते हुए, नए सामान्य हालात (new normal) जीवनशैली को अपनाना होगा. 
इसके समानान्तर, टीकाकरण कवरेज को रफ़्तार देते हुए, निर्बल व संक्रमण का जोखिम झेल रही आबादी को सुरक्षा देनी होगी, और फिर वृहद आबादी के लिये भी टीकाकरण सुनिश्चित करना होगा. , भारत में, मार्च महीने के अन्तिम दिनों और अप्रैल के शुरू में, कोरोनावायरस के संक्रमण मामलों में अचानक तेज़ी से उछाल देखा गया है. अलबत्ता, देश में, कोविड-19 की वैक्सीन का टीकाकरण भी विशाल पैमाने पर चल रहा है. फिर भी, संक्रमण के मामलों में इतनी तेज़ी चौतरफ़ा चिन्ता का कारण बन रही है. यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने, इस स्थिति पर और ज़्यादा जानकारी के लिये, भारत में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि डॉक्टर रॉड्रिको ऑफ़्रिन के साथ बात की…

भारत में कोविड-19 के संक्रमण की दूसरी और बेहद गम्भीर लहर दिखाई दे रही है. 9 अप्रैल को, एक दिन में, कोरानावायरस के संक्रमण के एक लाख 30 हज़ार से ज़्यादा मामले दर्ज किये गए हैं. आपकी नज़र में, संक्रमण मामलों में तेज़ उभार की क्या वजह हो सकती है?

देश में आर्थिक व सामाजिक गतिविधियाँ शुरू हो गई है. कार्यालय, स्कूल, सामाजिक समारोह, सार्वजनिक परिवहन और अन्य क्षेत्रों में जनजीवन फिर पटरी पर आने से, वायरस को दोबारा फैलने का मौक़ा मिल रहा है. 

पिछले वर्ष संक्रमण की पहली लहर के दौरान घनी आबादी वाली शहरी बस्तियों में महामारी तेज़ी से फैली थी. भारत में अब भी महामारी का फैलाव अधिकतर शहरी इलाक़ों में केन्द्रित है, लेकिन अब संक्रमण मध्य वर्ग आबादी वाले रिहायशी और ऊँची इमारतों वाले इलाक़ों में भी फैल रहा है. 

क्या वायरस अपना रूप बदल रहा है, और क्या कोरोनावायरस के नए प्रकार ज़्यादा चुनौतीपूर्ण हैं? ऐसे में क्या उपाय किये जा सकते हैं? 

वायरस संचारण अनेक कारकों पर निर्भर करता है. वायरस की चारित्रिक विशेषताएँ, स्थानीय आबादी का बर्ताव, और नीतिगत व सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय, सभी की भूमिका है. 

हम अभी पक्के तौर पर यह नहीं कह सकते है कि वायरस की कुछ क़िस्में, कुछ देशों में ज़्यादा क्यों फैल रही हैं, लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि हमने फैलने के तौर-तरीक़ों में बदलाव नहीं देखा है. 

इसका अर्थ यह है कि वायरस के फैलाव को रोकने के लिये जिन उपायों को बढ़ावा दिया गया है, उनमें कोई बदलाव की ज़रूरत नहीं है. 


WHO India
भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉक्टर रोड्रिको ऑफ़्रिन.

कोविड-19 से बचाव के लिये उपयुक्त व्यवहार जारी रखना होगा – मास्क पहनना, हाथ धोना और सामाजिक दूरी बरतना.  

महामारी का अन्त करने के लिये हमारे औज़ारों में अब वैक्सीन भी शामिल हो गई है. टीकाकरण बढ़ाकर, सक्रियता से मामलों का पता लगाकर, बड़ी संख्या में मामलों वाले इलाक़ों की शिनाख़्त करके, संक्रमित लोगों को अलगाव में उनकी देखभाल सुनिश्चित करके, संचारण की कड़ी को तोड़ा जा सकता है. इन सभी उपायों से कोविड-19 पर नियन्त्रण पाने में सहायता मिलेगी. 

दुनिया के जिन क्षेत्रों में अभी वायरस के नए रूप व प्रकार फैल रहे हैं, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी उन देशों में वैज्ञानिकों व स्वास्थ्य अधिकारों के साथ मिलकर पड़ताल कर रही है कि इससे वायरस के व्यवहार पर किस तरह का असर पड़ रहा है.

इस सम्बन्ध में जैसे-जैसे और ज़्यादा जानकारी उपलब्ध होगी, विश्व स्वास्थ्य संगठन देशों को सूचित करता रहेगा. 

भारत भिन्न-भिन्न प्राथमिकता वाले समूहों के लिये विशाल स्तर पर टीकाकरण मुहिम चला रहा है. देश में मौजूदा टीकाकरण मुहिम की क्या स्थिति है, और क्या मौजूदा वैक्सीनें, वायरस के नए रूपों व प्रकारों पर भी कारगर होंगी?

वैक्सीन के ज़रिये सामान्य से बेहद गम्भीर बीमारी की रोकथाम की जाती है, जिसका अर्थ है, अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीज़ों व मौतों की संख्या में कमी. 

भारत में तीन महीनों से भी कम समय में वैक्सीन की लगभग दस करोड़ ख़ुराकें दी जा चुकी हैं – 8 अप्रैल तक नौ करोड़ 43 लाख ख़ुराकें दी गई हैं. 

टीकाकरण मुहिम के विशाल स्तर को देखते हुए यह एक असाधारण उपलब्धि है. मौजूदा जानकारी के आधार पर, यह कहा जा सकता है कि कोविड-19 की जिन वैक्सीनों को इस्तेमाल को मंज़ूरी मिली है, और जो वैक्सीनें अभी विकसित की जा रही हैं, उनसे वायरस की नई क़िस्मों के प्रति कुछ हद तक सुरक्षा हासिल ज़रूर होगी. 

इन वैक्सीनों का, प्रतिरोधक क्षमता पर व्यापक असर होता है, जिसमें एण्टीबॉडीज़ व कोशिकाएँ शामिल होती हैं.  वायरस के रूपों व प्रकारों में आने वाले बदलावों से वैक्सीन के पूर्ण रूप से बेअसर होने की सम्भावना नहीं है. 

जैसे-जैसे ज़्यादा संख्या में लोगों का टीकाकरण होगा, और हमारे पास विश्लेषण के लिये ज़्यादा आँकड़े उपलब्ध होंगे, WHO अन्य शोधकर्ताओं, स्वास्थ्य अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ मिलकर यह समझने की कोशिश करेगा कि ये नए प्रकार, वायरस के व्यवहार पर किस तरह असर डालते हैं.

साथ ही ये भी परखा जाएगा कि क्या इनसे वैक्सीन की कारगरता पर भी असर होता है या नहीं.  

सामान्य जीवन की ओर लौटने और आबादी में व्यापक प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्युनिटी) तक पहुँचने के लिये किस स्तर पर टीकाकरण की आवश्यकता होगी?

जैसाकि हम जानते हैं कि SARS-CoV-2 एक बेहद तेज़ी से फैलने वाला वायरस है. अगर हम स्वाभाविक रूप से प्रतिरोधक क्षमता को हासिल होने देते हैं तो इसमें लम्बा समय लगेगा. इससे भी अहम बात यह है कि इसकी वजह से संक्रमण मामले, अस्पतालों में मरीज़ों के भर्ती होने और मौतों के मामले ज़्यादा बड़ी संख्या सामने आएंगे. 

इसलिये, अगर संक्रमित होने वाले लोगों में से एक फ़ीसदी लोगों की भी मृत्यु हुई, तो विश्व आबादी को ध्यान में रखते हुए मौतों की संख्या बहुत अधिक होगी. 

मैं महामारी की रोकथाम के लिये कोविड-उपयुक्त बर्ताव और टैस्टिंग, ट्रैकिंग, उपचार और टीकाकरण की अहमियत पर ज़ोर देना चाहूंगा. 

इसलिये हमारा मानना है कि वायरस को तेज़ी से फैलने देकर, और बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमित बनाकर हर्ड इम्युनिटी को हासिल करने का विचार सही नहीं है. 


© UNICEF/Dhiraj Singh
भारत के पश्चिमी शहर पुण में, कोविड-19 की वैक्सीन में काम आने वाले सामान का उत्पादन

हमें हमेशा हर्ड इम्युनिटी के बारे में बात, टीकाकरण के ज़रिये लोगों को सुरक्षा प्रदान किये जाने के सन्दर्भ में करनी चाहिये. जैसाकि, पोलियो, ख़सरा सहित उन अन्य बीमारियों के लिये किया जा रहा है जिनकी वैक्सीन से रोकथाम हो सकती है. 

इस स्तर पर हर्ड इम्युनिटी हासिल करने का एकमात्र रास्ता, व्यापक स्तर पर टीकाकरण है. इस सम्बन्ध में प्राथमिकता, पहले से संक्रमण का ज़्यादा जोखिम झेल रहे लोगों को दी जानी होगी, जिसके बाद टीकाकरण का दायरा सभी आयु-वर्गों के लिये बढ़ाना जाना होगा. 

जब तक ऐसा नहीं होता, हमें उन सभी सावधानियों का पालन करते रहने की ज़रूरत है, जिनकी हमें सलाह दी गई है, और जैसा कि हम पिछले महीनों में करते आ रहे हैं. 

बच्चों में कोविड-19 महामारी और उसके फैलाव के जोखिम के बारे में क्या जानकारी है?

वयस्कों की तुलना में बच्चों व किशोरों में आम तौर पर संक्रमण के हल्के मामले ही देखने को मिले हैं. कुछ बच्चों में जठरांत्र (gastrointestinal) सम्बन्धी लक्षण, जैसेकि हैज़ा या उल्टी सामने आ सकते हैं.   

बहुत से बच्चों में बिना किसी लक्षण के संक्रमण हो सकता है, जिसका अर्थ यह है कि उनके संक्रमित होने का कोई संकेत ना दिखाई दे. मगर, बच्चे संक्रमित हो सकते हैं और अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं, इसलिये उनके लिये सुरक्षा बरती जानी चाहिये और कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार सुनिश्चित किया जाना होगा. 

बच्चों के लिये कोविड-19 टीकाकरण के विषय में क्या प्रगति हुई है?

भारत में कोविड-19 वैक्सीन को बच्चों को दिये जाने की अनुमति नहीं है.

देश भर में अनेक शिक्षण संस्थान कोविड-19 संक्रमण के प्रमुख केन्द्रों के रूप में उभरे हैं. महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली सहित अनेक राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने स्कूलों में तालाबन्दी या रात्रिकालीन करफ़्यू की घोषणा की है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की ओर से फैलाव की रोकथाम करने के सम्बन्ध में क्या दिशानिर्देश हैं?  

भारत में संक्रमण की दूसरी लहर ज़्यादा तीव्र प्रतीत होती है, और सितम्बर 2020 की पहली लहर की तुलना में, कम अवधि में ही तेज़ी से मामलों में उछाल आया है. 

दूसरी लहर पर क़ाबू पाने के लिये, साबित हो चुकी और असरदार जवाबी कार्रवाई के उपाय तेज़ी से लागू करने होंगे. 

इसके तहत, मौजूदा जोखिमों के बारे में समुदायों तक जानकारी पहुँचाना, रोकथाम के लिये उनके दायित्व को समझाया जाना, कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा देना होगा. 

साथ ही बुनियादी व आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य व सामाजिक उपायों को ध्यान में रखते हुए, कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार के साथ दैनिक गतिविधियों में सन्तुलन क़ायम करते हुए, नए सामान्य हालात (new normal) जीवनशैली को अपनाना होगा. 

इसके समानान्तर, टीकाकरण कवरेज को रफ़्तार देते हुए, निर्बल व संक्रमण का जोखिम झेल रही आबादी को सुरक्षा देनी होगी, और फिर वृहद आबादी के लिये भी टीकाकरण सुनिश्चित करना होगा. 

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