भारत: बिजली चार्जिंग से हरित परिवहन

भारत में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और भारतीय रेलवे ने मिलकर मुम्बई में बिजली-चालित परिवहन साधनों को बढ़ावा देने के लिये एक नवीन हरित पहल शुरू की है. इसके तहत, बिजली-चालित वाहनों के लिये शहर में सभी महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों, उपनगरों और निकटवर्ती मुम्बई महानगरीय क्षेत्र में, इलैक्ट्रिक (बिजली) चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध कराए जाएँगे.

मुम्बई रेलवे, बिजली-चालित वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिये,  यूनेप के सहयोग से एक विस्तृत इलाक़े में बिजली चार्जिंग स्टेशन बनवाएगा, जिन्हें इन वाहनों के मालिक, कुछ रक़म अदा करके, आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे.
इस साझा परियोजना का उद्देश्य है – समग्र ई-मोबिलिटी क्षेत्र स्थापित करना और रेलवे स्टेशनों के आसपास के परिवहन क्षेत्रों में हरित गतिशीलता को बढ़ावा देना.
पहले चरण में, ठाणे, दादर, परेल और बायकुला रेलवे स्टेशनों में काम शुरू हो चुका है. दूसरे चरण के लिये, लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT), भांडुप, पनवेल और कल्याण समेत कई अन्य स्टेशनों के लिये निविदाएँ मंगाए गए हैं.
उपलब्धता के अनुसार, रेलवे स्टेशनों की पार्किंग सुविधाओं के प्रवेश-निकास द्वारों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किये जाएँगे.
यूनेप के भारत कार्यालय के प्रमुख, अतुल बगई ने कहा, “ई-गतिशीलता की ओर बदलाव ही, वायु प्रदूषण और जलवायु संकट की चुनौतियों से निपटने का सबसे अच्छा समाधान है, और अर्थव्यवस्था को कार्बन मुक्त बनाने के लिये, विद्युतीकरण ही एक लचीला, ऊर्जा कुशल और टिकाऊ तरीक़ा है.” 
उन्होंने कहा, “भारत इस त्रि-पक्षीय पहल के माध्यम से एक स्वच्छ परिवहन क्षेत्र प्राप्त करने की दिशा में सही क़दम उठा रहा है. हमें स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का लाभ उठाने के लिये, मध्य रेलवे और टाटा पावर के साथ मिलकर काम करने पर गर्व है, और इससे भारत को, अधिक व्यापक रूप से इसे अपनाने की दिशा में प्रेरणा मिलती है.”
मुंम्बई के केन्द्रीय रेलवे के वरिष्ठ मण्डल वाणिज्यिक प्रबन्धक, रॉबिन कालिया ने कहा, “टाटा पावर और यूनेप की साझेदारी में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएमटी) में एक, बिजली चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया गया है. हम इस मॉडल को अपनाकर, मुम्बई के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर बिजली चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहे हैं.”
टाटा पावर के सीईओ और प्रबन्ध निदेशक, प्रवीर सिन्हा ने, इस साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए कहा, “हम इस स्वच्छ परिवहन पहल के लिये यूनेप और मध्य रेलवे के साथ सहयोग करके बेहद ख़ुश हैं.”
“यह साझेदारी हमारे लिये महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई के उपभोक्ताओं को, हरित और स्वच्छ ई-मोबिलिटी समाधान उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता उजागर करती है.”
इस समय 40 विभिन्न शहरों में टाटा पावर के 300 नैटवर्क पहले से ही स्थापित है. इन चार्जिंग स्टेशनों के विस्तार से इस नैटवर्क में वृद्धि होगी.
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और वायु प्रदूषण को कम करने के लिये ई-गतिशीलता बेहद अहम है.
आज, ऊर्जा-सम्बन्धित कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में परिवहन का लगभग एक-चौथाई योगदान है, और जिस प्रकार यह, अन्य क्षेत्रों की तुलना में, तेज़ी से बढ़ रहा है, जल्द ही इसका योगदान, एक तिहाई तक पहुँच जाएगा.
भारत में, परिवहन क्षेत्र कुल ऊर्जा खपत का 18 प्रतिशत है और वार्षिक अनुमानित 14 करोड़, 20 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के लिये ज़िम्मेदार है, जिसमें से 12 करोड़, 30 लाख टन, केवल सड़क परिवहन से होता है.
 
यूनेप दुनिया भर में इलैक्ट्रिक मोबिलिटी में बदलाव का समर्थन करता है, और इस बदलाव के लिये देशों की मदद करने के लिये एक वैश्विक कार्यक्रम लागू कर रहा है.
इस कार्यक्रम के तहत भारत सहित 60 से अधिक देशों में परियोजनाओं को सहयोग दिया जा रहा है. भविष्य की परियोजनाओं में भारत में, वैश्विक पर्यावरण सुविधा के सहयोग से सरकारी कारों का विद्युतीकरण करना शामिल है., भारत में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और भारतीय रेलवे ने मिलकर मुम्बई में बिजली-चालित परिवहन साधनों को बढ़ावा देने के लिये एक नवीन हरित पहल शुरू की है. इसके तहत, बिजली-चालित वाहनों के लिये शहर में सभी महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों, उपनगरों और निकटवर्ती मुम्बई महानगरीय क्षेत्र में, इलैक्ट्रिक (बिजली) चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध कराए जाएँगे.

मुम्बई रेलवे, बिजली-चालित वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिये,  यूनेप के सहयोग से एक विस्तृत इलाक़े में बिजली चार्जिंग स्टेशन बनवाएगा, जिन्हें इन वाहनों के मालिक, कुछ रक़म अदा करके, आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे.

इस साझा परियोजना का उद्देश्य है – समग्र ई-मोबिलिटी क्षेत्र स्थापित करना और रेलवे स्टेशनों के आसपास के परिवहन क्षेत्रों में हरित गतिशीलता को बढ़ावा देना.

पहले चरण में, ठाणे, दादर, परेल और बायकुला रेलवे स्टेशनों में काम शुरू हो चुका है. दूसरे चरण के लिये, लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT), भांडुप, पनवेल और कल्याण समेत कई अन्य स्टेशनों के लिये निविदाएँ मंगाए गए हैं.

उपलब्धता के अनुसार, रेलवे स्टेशनों की पार्किंग सुविधाओं के प्रवेश-निकास द्वारों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किये जाएँगे.

यूनेप के भारत कार्यालय के प्रमुख, अतुल बगई ने कहा, “ई-गतिशीलता की ओर बदलाव ही, वायु प्रदूषण और जलवायु संकट की चुनौतियों से निपटने का सबसे अच्छा समाधान है, और अर्थव्यवस्था को कार्बन मुक्त बनाने के लिये, विद्युतीकरण ही एक लचीला, ऊर्जा कुशल और टिकाऊ तरीक़ा है.” 

उन्होंने कहा, “भारत इस त्रि-पक्षीय पहल के माध्यम से एक स्वच्छ परिवहन क्षेत्र प्राप्त करने की दिशा में सही क़दम उठा रहा है. हमें स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का लाभ उठाने के लिये, मध्य रेलवे और टाटा पावर के साथ मिलकर काम करने पर गर्व है, और इससे भारत को, अधिक व्यापक रूप से इसे अपनाने की दिशा में प्रेरणा मिलती है.”

मुंम्बई के केन्द्रीय रेलवे के वरिष्ठ मण्डल वाणिज्यिक प्रबन्धक, रॉबिन कालिया ने कहा, “टाटा पावर और यूनेप की साझेदारी में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएमटी) में एक, बिजली चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया गया है. हम इस मॉडल को अपनाकर, मुम्बई के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर बिजली चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहे हैं.”

टाटा पावर के सीईओ और प्रबन्ध निदेशक, प्रवीर सिन्हा ने, इस साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए कहा, “हम इस स्वच्छ परिवहन पहल के लिये यूनेप और मध्य रेलवे के साथ सहयोग करके बेहद ख़ुश हैं.”

“यह साझेदारी हमारे लिये महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई के उपभोक्ताओं को, हरित और स्वच्छ ई-मोबिलिटी समाधान उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता उजागर करती है.”

इस समय 40 विभिन्न शहरों में टाटा पावर के 300 नैटवर्क पहले से ही स्थापित है. इन चार्जिंग स्टेशनों के विस्तार से इस नैटवर्क में वृद्धि होगी.

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और वायु प्रदूषण को कम करने के लिये ई-गतिशीलता बेहद अहम है.

आज, ऊर्जा-सम्बन्धित कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में परिवहन का लगभग एक-चौथाई योगदान है, और जिस प्रकार यह, अन्य क्षेत्रों की तुलना में, तेज़ी से बढ़ रहा है, जल्द ही इसका योगदान, एक तिहाई तक पहुँच जाएगा.

भारत में, परिवहन क्षेत्र कुल ऊर्जा खपत का 18 प्रतिशत है और वार्षिक अनुमानित 14 करोड़, 20 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के लिये ज़िम्मेदार है, जिसमें से 12 करोड़, 30 लाख टन, केवल सड़क परिवहन से होता है.
 
यूनेप दुनिया भर में इलैक्ट्रिक मोबिलिटी में बदलाव का समर्थन करता है, और इस बदलाव के लिये देशों की मदद करने के लिये एक वैश्विक कार्यक्रम लागू कर रहा है.

इस कार्यक्रम के तहत भारत सहित 60 से अधिक देशों में परियोजनाओं को सहयोग दिया जा रहा है. भविष्य की परियोजनाओं में भारत में, वैश्विक पर्यावरण सुविधा के सहयोग से सरकारी कारों का विद्युतीकरण करना शामिल है.

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