भारत में कोविड-19 के बीच चक्रवात ‘ताउते’ का संकट

भारत में कोरोनोवायरस की दूसरी लहर के बीच अब चक्रवाती तूफ़ान का भी संकट पैदा हो गया है. चक्रवात ताउते, देश के पश्चिमी घाट के पास स्थित शहरों से टकराया है, जिससे इलाक़ों में भारी बारिश, तेज़ हवाएँ और तूफ़ान से लोग परेशान हैं.

सोमवार, 17 मई को, ये समाचार लिखे जाने तक, भारत में ताउते तूफ़ान से, गोवा और कर्नाटक में बारिश से सम्बन्धित घटनाओं में 10 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. 
‘ताउते’ एक बर्मी शब्द है, जिसका अर्थ है बहुत तेज़ चीखने वाली एक छिपकली. भारतीय उपमहाद्वीप के पास स्थित महासागर प्रणाली में यह अपनी तरह का पहला तूफ़ान है.
केरल और कर्नाटक जैसे प्रदेशों में पिछले 48 घंटों में हुई भारी बारिश से, चक्रवात ताउते ‘बेहद गम्भीर चक्रवाती तूफ़ान’ में बदल गया है. 
ताउते तूफ़ान ने इससे पहले, मुंबई शहर का रुख् किया था, जहाँ 114 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से तेज़ हवाएँ चल रही हैं. जगह-जगह तेज़ हवाओं के कारण पेड़ों के गिरने से रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं. 
यह चक्रवात अब ख़तरनाक गति से पश्चिमी प्रदेश गुजरात की ओर बढ़ गया है. चक्रवात ताउते, सोमवार देर शाम गुजरात के भावनगर में पोरबंदर के तटों से टकराया. 
गुजरात में यूनीसेफ़ की प्रमुख, लक्ष्मी भवानी ने बताया, “चक्रवात ताउते एक भीषण तूफ़ान में बदल गया है और सोमवार, 17 मई को गुजरात में दस्तक दे चुका है.
अगले कुछ दिनों में इसकी तीव्रता बढ़ने की सम्भावना है, 18 मई को सौराष्ट्र और कच्छ में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा और 19 मई को कच्छ और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम राजस्थान में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की सम्भावना है.
16 से 19 मई तक, हवा की गति 150-160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से लेकर 175 किमी प्रति घंटे तक बढ़ेगी, जिससे इस चक्रवाती तूफ़ान के और ज़्यादा तेज़ होने की सम्भावना है.
भारतीय मौसम संस्थान के अनुसार, 17 मई तक, सौराष्ट्र और कच्छ ज़िलों के लगभग एक लाख 50 हज़ार लोगों को, सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है.”
महाराष्ट्र और गुजरात में बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने का अभियान जारी है.
भारत सरकार की आपदा राहत एजेंसी NDRF और अन्य राहत अधिकारीगण, स्थिति पर निगरानी रखे हुए हैं और राहत कार्यों के लिये मुस्तैदी से तैयार हैं. इन कार्यों में यूनीसेफ़ भी भारत सरकार के साथ सक्रिय सहयोग कर रहा है.
गुजरात में यूनीसेफ़ की प्रमुख ने कहा, “यूनीसेफ़, गुजरात में आपातकालीन तैयारी और जवाबी कार्रवाई की योजना को सुविधाजनक बनाने के लिये सरकार और भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है.
यह सहायता अन्तर प्रदेशीय एजेन्सी ग्रुप (आईएजी) के माध्यम से दी जाता है, जिसके पास प्रदेश भर में 78 नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ) का नेटवर्क है.
ये सीएसओ साझीदार, त्वरित स्थिति का मूल्यांकन करने, राहत आश्रयों में भोजन उपलब्ध कराने और राहत और बचाव के लिये स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय स्थापित करने व बुनियादी सेवा वितरण की सुविधा प्रदान करने में, सरकारी एजेंसियों की मदद करेंगे.
यूनीसेफ़, गुजरात सरकार और गुजरात आपदा प्रबन्धन संस्थान के साथ कोविड-19 जोखिम प्रबन्धन पर हितधारकों की क्षमता निर्माण और प्रमुख ख़तरों पर संचार सामग्री विकसित करने हेतु प्रयासरत है.
यूनीसेफ़ की मानवीय कार्रवाई के मूल में बच्चों के लिये प्रतिबद्धताएँ (सीसीसी) हैं, जो स्वास्थ्य, पोषण, पानी, स्वच्छता और स्वच्छता (वॉश), बाल संरक्षण, और शिक्षा जैसे सभी क्षेत्रों में वो सभी कार्य करने के लिये संकल्पबद्ध है, जो किसी भी मानवीय सहायता कार्रवाई का अहम हिस्सा होता है.” , भारत में कोरोनोवायरस की दूसरी लहर के बीच अब चक्रवाती तूफ़ान का भी संकट पैदा हो गया है. चक्रवात ताउते, देश के पश्चिमी घाट के पास स्थित शहरों से टकराया है, जिससे इलाक़ों में भारी बारिश, तेज़ हवाएँ और तूफ़ान से लोग परेशान हैं.

सोमवार, 17 मई को, ये समाचार लिखे जाने तक, भारत में ताउते तूफ़ान से, गोवा और कर्नाटक में बारिश से सम्बन्धित घटनाओं में 10 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. 

‘ताउते’ एक बर्मी शब्द है, जिसका अर्थ है बहुत तेज़ चीखने वाली एक छिपकली. भारतीय उपमहाद्वीप के पास स्थित महासागर प्रणाली में यह अपनी तरह का पहला तूफ़ान है.

केरल और कर्नाटक जैसे प्रदेशों में पिछले 48 घंटों में हुई भारी बारिश से, चक्रवात ताउते ‘बेहद गम्भीर चक्रवाती तूफ़ान’ में बदल गया है. 

ताउते तूफ़ान ने इससे पहले, मुंबई शहर का रुख् किया था, जहाँ 114 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से तेज़ हवाएँ चल रही हैं. जगह-जगह तेज़ हवाओं के कारण पेड़ों के गिरने से रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं. 

यह चक्रवात अब ख़तरनाक गति से पश्चिमी प्रदेश गुजरात की ओर बढ़ गया है. चक्रवात ताउते, सोमवार देर शाम गुजरात के भावनगर में पोरबंदर के तटों से टकराया. 

गुजरात में यूनीसेफ़ की प्रमुख, लक्ष्मी भवानी ने बताया, “चक्रवात ताउते एक भीषण तूफ़ान में बदल गया है और सोमवार, 17 मई को गुजरात में दस्तक दे चुका है.

अगले कुछ दिनों में इसकी तीव्रता बढ़ने की सम्भावना है, 18 मई को सौराष्ट्र और कच्छ में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा और 19 मई को कच्छ और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम राजस्थान में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की सम्भावना है.

16 से 19 मई तक, हवा की गति 150-160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से लेकर 175 किमी प्रति घंटे तक बढ़ेगी, जिससे इस चक्रवाती तूफ़ान के और ज़्यादा तेज़ होने की सम्भावना है.

भारतीय मौसम संस्थान के अनुसार, 17 मई तक, सौराष्ट्र और कच्छ ज़िलों के लगभग एक लाख 50 हज़ार लोगों को, सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है.”

महाराष्ट्र और गुजरात में बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने का अभियान जारी है.

भारत सरकार की आपदा राहत एजेंसी NDRF और अन्य राहत अधिकारीगण, स्थिति पर निगरानी रखे हुए हैं और राहत कार्यों के लिये मुस्तैदी से तैयार हैं. इन कार्यों में यूनीसेफ़ भी भारत सरकार के साथ सक्रिय सहयोग कर रहा है.

गुजरात में यूनीसेफ़ की प्रमुख ने कहा, “यूनीसेफ़, गुजरात में आपातकालीन तैयारी और जवाबी कार्रवाई की योजना को सुविधाजनक बनाने के लिये सरकार और भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है.

यह सहायता अन्तर प्रदेशीय एजेन्सी ग्रुप (आईएजी) के माध्यम से दी जाता है, जिसके पास प्रदेश भर में 78 नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ) का नेटवर्क है.

ये सीएसओ साझीदार, त्वरित स्थिति का मूल्यांकन करने, राहत आश्रयों में भोजन उपलब्ध कराने और राहत और बचाव के लिये स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय स्थापित करने व बुनियादी सेवा वितरण की सुविधा प्रदान करने में, सरकारी एजेंसियों की मदद करेंगे.

यूनीसेफ़, गुजरात सरकार और गुजरात आपदा प्रबन्धन संस्थान के साथ कोविड-19 जोखिम प्रबन्धन पर हितधारकों की क्षमता निर्माण और प्रमुख ख़तरों पर संचार सामग्री विकसित करने हेतु प्रयासरत है.

यूनीसेफ़ की मानवीय कार्रवाई के मूल में बच्चों के लिये प्रतिबद्धताएँ (सीसीसी) हैं, जो स्वास्थ्य, पोषण, पानी, स्वच्छता और स्वच्छता (वॉश), बाल संरक्षण, और शिक्षा जैसे सभी क्षेत्रों में वो सभी कार्य करने के लिये संकल्पबद्ध है, जो किसी भी मानवीय सहायता कार्रवाई का अहम हिस्सा होता है.” 

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