भारत में लैंगिक हब बनाने के लिये पहल

संयुक्त राष्ट्र की महिला संस्था, UN Women, और भारत के केरल प्रदेश की सरकार ने, देश के पहले लैंगिक डेटा हब की स्थापना के मक़सद से, सोमवार को एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं.

यह लैंगिक हब, नवम्बर 2015 में आयोजित हुए लैंगिक समानता पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्थापित लक्ष्यों पर आधारित है. इसके तहत, अधिक सुव्यवस्थित डेटा एकत्र करके, उसका विश्लेषण व उपयोग करने व उसे नीति-निर्माण के तरीक़ों में शामिल करना है, जिससे महिलाओं के अधिकारों को केन्द्र में रखा जा सके. 
केरल राज्य के मुख्यमन्त्री, पिनाराई विजयन ने इस अवसर पर कहा, “मुझे यक़ीन है कि यह सहयोग, केरल के सामाजिक न्याय विभाग द्वारा शुरू की गई लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की विभिन्न अग्रणी पहलों को लैंगिक पार्क के ज़रिये और ज़्यादा व्यापक व गहरा करेगा.” 

“A unique moment for the @Govtofkerala and the people of Kerala to associate with @unwomenindia in establishing the southern South Asian hub. The first phase of @thegenderpark to be inaugurated in a couple of weeks”. – @BPIAS, Secretary, Dept. of Social Justice and WCD pic.twitter.com/gmpvJNpdPy— UN Women India (@unwomenindia) December 21, 2020

“हम लैंगिक समानता के लिये ऐसी नीति और सामाजिक-आर्थिक पहल में निवेश करने का लक्ष्य रखते हैं, जहाँ लैंगिक पार्क यूएन महिला संस्था (UN Women) के साथ मिलकर लैंगिक मुद्दों से सम्बन्धित गतिविधियों के लिये दक्षिण एशियाई हब के रूप में काम करेगा.” 
भारत में यूएनवीमेन की उप-प्रतिनिधि, निष्ठा सत्यम ने कहा, “हम एजेंडा 2030 को साकार करने और अपनाए गए संकेतकों व लक्ष्यों के बीच लैंगिक अन्तराल पाटने के लिये समान दृष्टिकोण लेकर भागीदारों के रूप में एक मंच पर आए हैं.” 
“इस सहयोग के ज़रिये हम लैंगिक असमानता को दूर करने के लिये अभिनव और तकनीक-सक्षम समाधानों पर काम करेंगे व महिलाओं और लड़कियों को विकास प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश करेंगे.”
दिसम्बर 2020 के इस समझौते को औपचारिक रूप देने से पहले, यूएनवीमेन के अधिकारियों की भारत सरकार की स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय मन्त्री, के के शैलजा के साथ बैठक हुई, जिसमें इसके स्वरूप पर व्यापक चर्चा हुई.
स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय मन्त्री, के. के. शैलजा ने समझौते पर हस्ताक्षर होने के मौक़े पर कहा, “हमें यूएनवीमेन के साथ इस साझेदारी को औपचारिक रूप देने पर गर्व है. यह लैंगिक न्याय की पहल के अन्तर्गत, एकजुट होकर काम करने की दिशा में लैंगिक पार्क के लिये एक नए अध्याय की शुरुआत है.”
एक व्यापक मंच
समझौते के मुताबिक, राज्य में स्थित लैंगिक पार्क में डेटा सेन्टर बनाया जाएगा, जो लैंगिक समानता पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे संस्करण की शुरूआत होगी, और वैश्विक मानक ढाँचों में लैंगिक समानता व महिलाओं के सशक्तिकरण पर बढ़ती भागीदारी का हिस्सा बनेगा.
लैंगिक पार्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉक्टर पीटीएम सुनीश ने इस अवसर पर कहा, “लैंगिक पार्क को एक ऐसे मंच के रूप में देखा जा रहा है, जो लैंगिक नीति, अनुसन्धान, शिक्षा और सामाजिक पहलों को समाज में मौजूद लैंगिक भेदभाव को दूर करने के लिये एकजुट करेगा.”
इस लैंगिक पार्क में, केरल प्रदेश में सभी लैंगिक विकास कार्यों के केन्द्र के रूप में, अनेक अद्वितीय सुविधाएँ मौजूद हैं. मसलन, लैंगिक विषयों सम्बन्धी पुस्तकालय, लैंगिक संग्रहालय, और आर्थिक रूप से पिछड़े सामाजिक समूहों की महिलाओं के लिये स्थाई उद्यमिता, सामाजिक व्यवसाय व बाज़ारों पर प्रशिक्षण केन्द्र.
यूएन महिला संस्था – UN Women, भारत में, छह प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करके, उन पर काम करने में लगी है. 
इनमें महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को रोकना, महिलाओं के नेतृत्व और भागीदारी को बढ़ावा देना, राष्ट्रीय योजनाओं और बजट में महिलाओं की ज़रूरतों, आर्थिक सशक्तिकरण, व महिलाओं की शान्तिरक्षा और सुरक्षा एजेंडे को आगे बढ़ाना; और कामकाजी प्रवासी महिलाओं के लिये, लैंगिक रूप से उत्तरादायी नीतियों को बढ़ावा देना, शामिल हैं., संयुक्त राष्ट्र की महिला संस्था, UN Women, और भारत के केरल प्रदेश की सरकार ने, देश के पहले लैंगिक डेटा हब की स्थापना के मक़सद से, सोमवार को एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं.

यह लैंगिक हब, नवम्बर 2015 में आयोजित हुए लैंगिक समानता पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्थापित लक्ष्यों पर आधारित है. इसके तहत, अधिक सुव्यवस्थित डेटा एकत्र करके, उसका विश्लेषण व उपयोग करने व उसे नीति-निर्माण के तरीक़ों में शामिल करना है, जिससे महिलाओं के अधिकारों को केन्द्र में रखा जा सके. 

केरल राज्य के मुख्यमन्त्री, पिनाराई विजयन ने इस अवसर पर कहा, “मुझे यक़ीन है कि यह सहयोग, केरल के सामाजिक न्याय विभाग द्वारा शुरू की गई लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की विभिन्न अग्रणी पहलों को लैंगिक पार्क के ज़रिये और ज़्यादा व्यापक व गहरा करेगा.” 

“हम लैंगिक समानता के लिये ऐसी नीति और सामाजिक-आर्थिक पहल में निवेश करने का लक्ष्य रखते हैं, जहाँ लैंगिक पार्क यूएन महिला संस्था (UN Women) के साथ मिलकर लैंगिक मुद्दों से सम्बन्धित गतिविधियों के लिये दक्षिण एशियाई हब के रूप में काम करेगा.” 

भारत में यूएनवीमेन की उप-प्रतिनिधि, निष्ठा सत्यम ने कहा, “हम एजेंडा 2030 को साकार करने और अपनाए गए संकेतकों व लक्ष्यों के बीच लैंगिक अन्तराल पाटने के लिये समान दृष्टिकोण लेकर भागीदारों के रूप में एक मंच पर आए हैं.” 

“इस सहयोग के ज़रिये हम लैंगिक असमानता को दूर करने के लिये अभिनव और तकनीक-सक्षम समाधानों पर काम करेंगे व महिलाओं और लड़कियों को विकास प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश करेंगे.”

दिसम्बर 2020 के इस समझौते को औपचारिक रूप देने से पहले, यूएनवीमेन के अधिकारियों की भारत सरकार की स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय मन्त्री, के के शैलजा के साथ बैठक हुई, जिसमें इसके स्वरूप पर व्यापक चर्चा हुई.

स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय मन्त्री, के. के. शैलजा ने समझौते पर हस्ताक्षर होने के मौक़े पर कहा, “हमें यूएनवीमेन के साथ इस साझेदारी को औपचारिक रूप देने पर गर्व है. यह लैंगिक न्याय की पहल के अन्तर्गत, एकजुट होकर काम करने की दिशा में लैंगिक पार्क के लिये एक नए अध्याय की शुरुआत है.”

एक व्यापक मंच

समझौते के मुताबिक, राज्य में स्थित लैंगिक पार्क में डेटा सेन्टर बनाया जाएगा, जो लैंगिक समानता पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे संस्करण की शुरूआत होगी, और वैश्विक मानक ढाँचों में लैंगिक समानता व महिलाओं के सशक्तिकरण पर बढ़ती भागीदारी का हिस्सा बनेगा.

लैंगिक पार्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉक्टर पीटीएम सुनीश ने इस अवसर पर कहा, “लैंगिक पार्क को एक ऐसे मंच के रूप में देखा जा रहा है, जो लैंगिक नीति, अनुसन्धान, शिक्षा और सामाजिक पहलों को समाज में मौजूद लैंगिक भेदभाव को दूर करने के लिये एकजुट करेगा.”

इस लैंगिक पार्क में, केरल प्रदेश में सभी लैंगिक विकास कार्यों के केन्द्र के रूप में, अनेक अद्वितीय सुविधाएँ मौजूद हैं. मसलन, लैंगिक विषयों सम्बन्धी पुस्तकालय, लैंगिक संग्रहालय, और आर्थिक रूप से पिछड़े सामाजिक समूहों की महिलाओं के लिये स्थाई उद्यमिता, सामाजिक व्यवसाय व बाज़ारों पर प्रशिक्षण केन्द्र.

यूएन महिला संस्था – UN Women, भारत में, छह प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करके, उन पर काम करने में लगी है. 

इनमें महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को रोकना, महिलाओं के नेतृत्व और भागीदारी को बढ़ावा देना, राष्ट्रीय योजनाओं और बजट में महिलाओं की ज़रूरतों, आर्थिक सशक्तिकरण, व महिलाओं की शान्तिरक्षा और सुरक्षा एजेंडे को आगे बढ़ाना; और कामकाजी प्रवासी महिलाओं के लिये, लैंगिक रूप से उत्तरादायी नीतियों को बढ़ावा देना, शामिल हैं.

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