भुखमरी का शिकार लोग, हिंसक संघर्ष पनपने का सबब

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि हिंसक संघर्ष से भुखमरी के हालात पैदा होते हैं, और भुखमरी हिंसक संघर्ष का सबब बन जाती है. उन्होंने गुरुवार को सुरक्षा परिषद में हिंसक संघर्ष और खाद्य सुरक्षा के बीच सम्बन्ध पर आयोजित चर्चा को सम्बोधित करते हुए स्पष्ट किया कि दोनों समस्याएँ एक दूसरे से जुड़ी हैं, और उन्हें अलग-अलग नहीं सुलझाया जा सकता. 

यूएन महासचिव ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा, “जब एक देश या क्षेत्र, हिंसक संघर्ष और भुखमरी में जकड़ता है तो वे एक दूसरे को पोषित करते रहते हैं….और उनसे अलग-अलग नहीं निपटा जा सकता.”
उन्होंने कहा कि भुखमरी जब विषमता, जलवायु व्यवधान, जातीय व साम्प्रदायिक तनाव, और संसाधनों पर कथित अन्याय-जनित भावनाओं से मिलती हो तो हिंसा व टकराव का सबब बन जाती है.
यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि हिंसक संघर्ष के कारण लोगों को घर, ज़मीन और रोज़गार छोड़ने के लिये मजबूर होना पड़ता है, कृषि और व्यापार में व्यवधान आता है, जल व विद्युत जैसे अहम संसाधनों की सुलभता कम होती है और भुखमरी पैर पसार लेती है.
वर्ष 2020 के अन्त तक, दुनिया भर में आठ करोड़ 80 लाख से ज़्यादा लोग, हिंसक संघर्ष व अस्थिरता के कारण भुखमरी का शिकार थे. एक वर्ष में इस संख्या में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
महासचिव गुटेरेश ने आशंका जताई कि वर्ष 2021 के लिये अनुमान दर्शाते हैं कि यह भयावह रूझान जारी रह सकता है.
उन्होंने सुरक्षा परिषद को सचेत किया कि हिंसक संघर्ष के कारण अनेक अकाल जैसी परिस्थितियाँ पैदा हो सकती हैं, और कोविड-19 व जलवायु प्रभाव इसे और भड़का रहे हैं.
“तत्काल कार्रवाई के अभाव में, लाखों लोग चरम भुखमरी व मौत के कगार पर पहुँच जाएँगे.”
उन्होंने बताया कि तीन दर्जन से ज़्यादा देशों में तीन करोड़ से ज़्यादा लोग अकाल से महज़ एक क़दम दूर हैं.
उन्होंने सहेल, हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका, दक्षिण सूडान, यमन और अफ़ग़ानिस्तान में हालात की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि मानवीय राहत पहुँचाने में आई मुश्किलों से खाद्य असुरक्षा के ख़तरे पैदा हो रहे हैं.
यूएन प्रमुख ने बताया कि खाद्य असुरक्षा के उच्चस्तर पर पहुँचने से पहले ही भुखमरी व मौत की शुरुआत हो जाती है. 
महासचिव गुटेरेश ने अकाल की रोकथाम के लिये उच्चस्तरीय टास्क फ़ोर्स के गठन की घोषणा की है, जिसका नेतृत्व यूएन आपात राहत समन्वयक मार्क लोकॉक और विश्व खाद्य कार्यक्रम करेंगे.
इस पहल के ज़रिये सबसे अधिक प्रभावित देशों के लिये संगठित प्रयासों को मज़बूती दी जाएगी.
बताया गया है कि तीन करोड़ से ज़्यादा लोग पहले से ही आपात स्तर की गम्भीर खाद्य असुरक्षा के हालात का सामना कर रहे हैं.
यूएन के शीर्ष अधिकारी ने विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा जारी साढ़े पाँच अरब डॉलर की अपील का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने विनाश टालने के लिये अहम बताया है.
यूएन प्रमुख ने बताया कि युद्ध की एक रणनीति के तौर पर लोगों को भूखा रखा जाता है, और इस “युद्धापराध” को सीरिया, दक्षिण सूडान और म्याँमार में आज़माया जा चुका है.
उन्होंने सुरक्षा परिषद से इन क्रूरतापूर्ण कृत्यों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए दोषियों की जवाबदेही तय किये जाने का आग्रह किया है.
महासचिव गुटेरेश ने भुखमरी से निपटे जाने को शान्ति व स्थिरता की नींव क़रार दिया है. “अगर हमें किसी एक से भी निपटना है तो हमें भुखमरी व हिंसक संघर्ष, दोनों से निपटने की ज़रूरत है.”
बदतर हालात
विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख डेविड बीज़ली ने रसातल की ओर बढ़ने की चेतावनी जारी की है.
“हिंसक संघर्ष और अस्थिरता, अकाल की एक नई विध्वसंकारी लहर को ताक़त प्रदान कर रहे हैं जिसके दुनिया भर को अपनी चपेट में लेने का ख़तरा है.”
उन्होंने कहा कि हिंसा, भुखमरी व हताशा का चक्र, पहले से ज़्यादा बड़ी संख्या में लोगों के लिये दुष्प्रभावों का सबब बन रहा है – आर्थिक बदहाली से सामूहिक प्रवासन और भुखमरी तक.
यूएन एजेंसी के प्रमुख ने बताया कि यमन, सीरिया और काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य में लोगों को विकट हालात का सामना करना पड़ रहा है.
उन्होंने दक्षिण सूडान का विशेष रूप से उल्लेख किया है जहाँ बताया गया है कि मजबूरी में बच्चों को कीचड़ खिलाया जा रहा है.
डेविड बीज़ली ने साढ़े पाँच अरब डॉलर की पुकार दोहराते हुए सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों से उदारतापूर्वक सहयोग देने का आग्रह किया है., संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि हिंसक संघर्ष से भुखमरी के हालात पैदा होते हैं, और भुखमरी हिंसक संघर्ष का सबब बन जाती है. उन्होंने गुरुवार को सुरक्षा परिषद में हिंसक संघर्ष और खाद्य सुरक्षा के बीच सम्बन्ध पर आयोजित चर्चा को सम्बोधित करते हुए स्पष्ट किया कि दोनों समस्याएँ एक दूसरे से जुड़ी हैं, और उन्हें अलग-अलग नहीं सुलझाया जा सकता. 

यूएन महासचिव ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा, “जब एक देश या क्षेत्र, हिंसक संघर्ष और भुखमरी में जकड़ता है तो वे एक दूसरे को पोषित करते रहते हैं….और उनसे अलग-अलग नहीं निपटा जा सकता.”

उन्होंने कहा कि भुखमरी जब विषमता, जलवायु व्यवधान, जातीय व साम्प्रदायिक तनाव, और संसाधनों पर कथित अन्याय-जनित भावनाओं से मिलती हो तो हिंसा व टकराव का सबब बन जाती है.

यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि हिंसक संघर्ष के कारण लोगों को घर, ज़मीन और रोज़गार छोड़ने के लिये मजबूर होना पड़ता है, कृषि और व्यापार में व्यवधान आता है, जल व विद्युत जैसे अहम संसाधनों की सुलभता कम होती है और भुखमरी पैर पसार लेती है.

वर्ष 2020 के अन्त तक, दुनिया भर में आठ करोड़ 80 लाख से ज़्यादा लोग, हिंसक संघर्ष व अस्थिरता के कारण भुखमरी का शिकार थे. एक वर्ष में इस संख्या में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

महासचिव गुटेरेश ने आशंका जताई कि वर्ष 2021 के लिये अनुमान दर्शाते हैं कि यह भयावह रूझान जारी रह सकता है.

उन्होंने सुरक्षा परिषद को सचेत किया कि हिंसक संघर्ष के कारण अनेक अकाल जैसी परिस्थितियाँ पैदा हो सकती हैं, और कोविड-19 व जलवायु प्रभाव इसे और भड़का रहे हैं.

“तत्काल कार्रवाई के अभाव में, लाखों लोग चरम भुखमरी व मौत के कगार पर पहुँच जाएँगे.”

उन्होंने बताया कि तीन दर्जन से ज़्यादा देशों में तीन करोड़ से ज़्यादा लोग अकाल से महज़ एक क़दम दूर हैं.

उन्होंने सहेल, हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका, दक्षिण सूडान, यमन और अफ़ग़ानिस्तान में हालात की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि मानवीय राहत पहुँचाने में आई मुश्किलों से खाद्य असुरक्षा के ख़तरे पैदा हो रहे हैं.

यूएन प्रमुख ने बताया कि खाद्य असुरक्षा के उच्चस्तर पर पहुँचने से पहले ही भुखमरी व मौत की शुरुआत हो जाती है. 

महासचिव गुटेरेश ने अकाल की रोकथाम के लिये उच्चस्तरीय टास्क फ़ोर्स के गठन की घोषणा की है, जिसका नेतृत्व यूएन आपात राहत समन्वयक मार्क लोकॉक और विश्व खाद्य कार्यक्रम करेंगे.

इस पहल के ज़रिये सबसे अधिक प्रभावित देशों के लिये संगठित प्रयासों को मज़बूती दी जाएगी.

बताया गया है कि तीन करोड़ से ज़्यादा लोग पहले से ही आपात स्तर की गम्भीर खाद्य असुरक्षा के हालात का सामना कर रहे हैं.

यूएन के शीर्ष अधिकारी ने विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा जारी साढ़े पाँच अरब डॉलर की अपील का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने विनाश टालने के लिये अहम बताया है.

यूएन प्रमुख ने बताया कि युद्ध की एक रणनीति के तौर पर लोगों को भूखा रखा जाता है, और इस “युद्धापराध” को सीरिया, दक्षिण सूडान और म्याँमार में आज़माया जा चुका है.

उन्होंने सुरक्षा परिषद से इन क्रूरतापूर्ण कृत्यों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए दोषियों की जवाबदेही तय किये जाने का आग्रह किया है.

महासचिव गुटेरेश ने भुखमरी से निपटे जाने को शान्ति व स्थिरता की नींव क़रार दिया है. “अगर हमें किसी एक से भी निपटना है तो हमें भुखमरी व हिंसक संघर्ष, दोनों से निपटने की ज़रूरत है.”

बदतर हालात

विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख डेविड बीज़ली ने रसातल की ओर बढ़ने की चेतावनी जारी की है.

“हिंसक संघर्ष और अस्थिरता, अकाल की एक नई विध्वसंकारी लहर को ताक़त प्रदान कर रहे हैं जिसके दुनिया भर को अपनी चपेट में लेने का ख़तरा है.”

उन्होंने कहा कि हिंसा, भुखमरी व हताशा का चक्र, पहले से ज़्यादा बड़ी संख्या में लोगों के लिये दुष्प्रभावों का सबब बन रहा है – आर्थिक बदहाली से सामूहिक प्रवासन और भुखमरी तक.

यूएन एजेंसी के प्रमुख ने बताया कि यमन, सीरिया और काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य में लोगों को विकट हालात का सामना करना पड़ रहा है.

उन्होंने दक्षिण सूडान का विशेष रूप से उल्लेख किया है जहाँ बताया गया है कि मजबूरी में बच्चों को कीचड़ खिलाया जा रहा है.

डेविड बीज़ली ने साढ़े पाँच अरब डॉलर की पुकार दोहराते हुए सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों से उदारतापूर्वक सहयोग देने का आग्रह किया है.

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