भूटान, टीकाकरण में अग्रणी देश: यूएन रैज़ीडेण्ट कोऑर्डिनेटर ब्लॉग

पर्वतों से घिरे देश, भूटान ने अभी तक कोविड-19 का सफलतापूर्वक सामना किया है, जबकि इसकी सीमाएँ भारत और चीन, दो ऐसे देशों से मिलती हैं जो वैश्विक महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र के रैज़ीडेण्ट कोऑर्डिनेटर जेराल्ड डैली का कहना है कि भूटान अपनी 90 फ़ीसदी वयस्क आबादी का टीकाकरण पूरा करने की दिशा में अग्रसर है. इसे सम्भव बनाने में स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं और संक्रमण की रोकथाम के लिये सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

“भूटान ने कोविड-19 पर जिस तरह से जवाबी कार्रवाई की है, वह अनुकरणीय है.
मोटे तौर पर, देश की लगभग पूरी वयस्क आबादी, पाँच लाख 30 हज़ार से ज़्यादा वैक्सीन पाने के योग्य लोगों को पहली ख़ुराक लगाई जा चुकी है – उन सभी लोगों को वैक्सीन दी जा रही है जिन्हें अतीत में वैक्सीन से कोई ऐलर्जी या अन्य कोई समस्या नहीं हुई.
ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन की ख़ुराकों की पहली खेप, भारत ने उपहारस्वरूप प्रदान की थी, और संयुक्त राष्ट्र ने कोल्ड चेन सहित अन्य ज़रूरी सहायता सुनिश्चित की.
भूटान की एक ख़ास बात यह है कि यहाँ अनेक समुदाय दूरदराज़ के भोगौलिक क्षेत्रों में रहते हैं. सरकार ने समन्वित ढँग से अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए इन सभी दूरदराज़ के इलाक़ों के निवासियों के साथ सम्पर्क स्थापित करते हुए वैक्सीन पहुँचाई.

UN Photoभूटान में यूएन के रैज़ीडेण्ट कोऑर्डिनेटर जेराल्ड जेम्स डैली.

अनेक मर्तबा ऐसा हैलीकॉप्टर के ज़रिये किया गया.
इसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने पैदल, बर्फ़ीले रास्तों से होते हुए गाँव-गाँव घूमकर इन्हें लोगों तक पहुँचाया.
भूटान की सफलता में स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है.
उदाहरणस्वरूप, वे स्वास्थ्य मंत्रालय को टीकाकरण कार्यक्रमों के लिये लॉजिस्टिक सम्बन्धी समर्थन प्रदान करते हैं और क्वारण्टीन सुविधा केंद्रों की देखरेख करते हैं.
उन्होंने तालाबन्दी को लागू करने और उस दौरान भोजन व अहम सामग्री के वितरण में भी कारगर भूमिका निभाई.
भूटान की राष्ट्रीय स्वयंसेवी योजना (शान्ति के रक्षक) महामारी से चार साल पहले से जारी थी.
स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं का योगदान
कोविड-19 के फैलाव के बाद, लोगों ने महसूस किया कि स्वयंसेवी, स्वास्थ्य व अन्य मंत्रालयों की भी मदद कर सकते हैं.
इसके मद्देनज़र, स्वयंसेवी योजना को मज़बूती प्रदान की गई है और उसे दुरुस्त किया गया, जिसके परिणामस्वरूप, कोविड-19 से असरदार ढँग से निपटने में भूटान को मिली सफलता का, वे मुख्य हिस्सा बन गए हैं.
19 अप्रैल को जारी आँकड़ों के मुताबिक, भूटान में कोरोनावायरस के लगभग एक हज़ार 300 मामलों की पुष्टि हुई है और एक संक्रमित की मौत हुई.
एक भी स्वास्थ्यकर्मी के कोविड-19 से संक्रमित होने की सूचना नहीं है. सामान्य दिनों में, सीमा के आर-पार लोगों की आवाजाही रहती है, मगर सरकार ने सीमा पर बेहद सख़्ती सुनिश्चित की है.

UN Photo/Gill Ficklingभूटान में बड़ी संख्या में लोग दूरदराज़ के इलाक़ों में रहते हैं.

देश में प्रवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को 21 दिनों तक क्वारण्टीन में रहना ज़रूरी है.
भूटान में, सामाजिक दूरी का पालन करने के प्रति संकल्प वास्तविक है. निजी बचाव सामग्री को हर स्थान पर उपलब्ध कराया गया है और लोग छोटी संख्या में ही एकत्र हो रहे हैं.
जब भी किसी स्थान पर वायरस के फैलाव का पता चलता है, उन इलाक़ों में तालाबन्दी लागू कर दी जाती है.
निर्बलों को सम्बल
भूटान में स्वास्थ्य संकट को टालने में सफलता मिली है, मगर इसके आर्थिक प्रभाव बेहद कठिनाई भरे रहे हैं.
देश मुख्यत: पर्यटन पर निर्भर है, और हम जानते हैं कि इस क्षेत्र में पुनर्बहाली की रफ़्तार बेहद धीमी रहने वाली है: बेरोज़गारी 14 प्रतिशत तक बढ़ गई है.
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सबसे निर्बलों की मदद कर रहा है और आत्मनिर्भरता व सहनक्षमता को बढ़ावा देने के रास्तों की तलाश की जा रही है.
हम घरों में खाद्य उत्पादन बढ़ाने की सरकारी रणनीति को समर्थन दे रहे हैं, हमारे ऐसे कार्यक्रम हैं जिनके ज़रिये लिंग आधारित हिंसा व मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी चुनौतियों से निपटा जा रहा है.
साथ ही वित्तीय नज़रिये से टिकाऊ व्यवस्था निर्माण के लिये सरकारी रणनीति को समर्थन दिया जा रहा है. इसके लिये, उदाहरणस्वरूप, एक स्मार्ट कर (टैक्स) प्रणाली को पेश किया गया है.

© UNICEF/SPeldenस्वास्थ्य सहायताकर्मियों ने डगाना ज़िले के एक स्कूल में टीकाकरण केंद्र स्थापित किया है.

भूटान ‘सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता’ (Gross National Happiness) की भूमि है. इसका देश के लिये एक बुनियादी महत्व है, और यह ऐसी नैतिक व व्यावहारिक दिशा निर्धारक है जिसका देश अनुसरण करता है.
इसका अर्थ यह है कि भूटान के लोग, सबसे निर्बलों सहित एक दूसरे का ख़याल रखते हैं.
निरन्तर सतर्कता ज़रूरी
तालाबन्दी के दौरान, हम सामुदायिक सहारे के इस मज़बूत भाव के साथ-साथ स्थानीय आबादी के सहज बोध को देख चुके हैं.
उन्होंने ये स्वीकार किया है कि तालाबन्दी ठोस कारणों की वजह से ही की गई है और हर किसी को साथ मिलकर प्रयास करना है.
अभी तक इस महामारी का सामना करने में मिली सफलता, संचारण की बेहद कम और टीकाकरण की ऊँची दर के बावजूद, हर कोई समझता है कि निरन्तर सतर्कता बरते जाने की ज़रूरत है.
भूटान के पास सीमित संख्या में ही वेण्टीलेटर और ऑक्सीजन की व्यवस्था है. भूटान के लोग जानते हैं कि बाक़ी दुनिया में किस तरह के हालात हैं, और वे इस तरह की परिस्थितियों का सामना नहीं करना चाहते.
इसलिये हर किसी की ओर से यह दृढ़ इच्छा है कि कोविड-19 के ख़िलाफ़ इत्मीनान से बैठ जाने के बजाय, लगातार चौकसी बरती जाए. ”
रैज़िडैण्ट कोऑर्डिनेटर (आरसी) संयुक्त राष्ट्र विकास प्रणाली में देशीय स्तर पर यूएन के वरिष्ठतम प्रतिनिधि होते हैं., पर्वतों से घिरे देश, भूटान ने अभी तक कोविड-19 का सफलतापूर्वक सामना किया है, जबकि इसकी सीमाएँ भारत और चीन, दो ऐसे देशों से मिलती हैं जो वैश्विक महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र के रैज़ीडेण्ट कोऑर्डिनेटर जेराल्ड डैली का कहना है कि भूटान अपनी 90 फ़ीसदी वयस्क आबादी का टीकाकरण पूरा करने की दिशा में अग्रसर है. इसे सम्भव बनाने में स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं और संक्रमण की रोकथाम के लिये सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

“भूटान ने कोविड-19 पर जिस तरह से जवाबी कार्रवाई की है, वह अनुकरणीय है.

मोटे तौर पर, देश की लगभग पूरी वयस्क आबादी, पाँच लाख 30 हज़ार से ज़्यादा वैक्सीन पाने के योग्य लोगों को पहली ख़ुराक लगाई जा चुकी है – उन सभी लोगों को वैक्सीन दी जा रही है जिन्हें अतीत में वैक्सीन से कोई ऐलर्जी या अन्य कोई समस्या नहीं हुई.

ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन की ख़ुराकों की पहली खेप, भारत ने उपहारस्वरूप प्रदान की थी, और संयुक्त राष्ट्र ने कोल्ड चेन सहित अन्य ज़रूरी सहायता सुनिश्चित की.

भूटान की एक ख़ास बात यह है कि यहाँ अनेक समुदाय दूरदराज़ के भोगौलिक क्षेत्रों में रहते हैं. सरकार ने समन्वित ढँग से अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए इन सभी दूरदराज़ के इलाक़ों के निवासियों के साथ सम्पर्क स्थापित करते हुए वैक्सीन पहुँचाई.

UN Photo
भूटान में यूएन के रैज़ीडेण्ट कोऑर्डिनेटर जेराल्ड जेम्स डैली.

अनेक मर्तबा ऐसा हैलीकॉप्टर के ज़रिये किया गया.

इसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने पैदल, बर्फ़ीले रास्तों से होते हुए गाँव-गाँव घूमकर इन्हें लोगों तक पहुँचाया.

भूटान की सफलता में स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है.

उदाहरणस्वरूप, वे स्वास्थ्य मंत्रालय को टीकाकरण कार्यक्रमों के लिये लॉजिस्टिक सम्बन्धी समर्थन प्रदान करते हैं और क्वारण्टीन सुविधा केंद्रों की देखरेख करते हैं.

उन्होंने तालाबन्दी को लागू करने और उस दौरान भोजन व अहम सामग्री के वितरण में भी कारगर भूमिका निभाई.

भूटान की राष्ट्रीय स्वयंसेवी योजना (शान्ति के रक्षक) महामारी से चार साल पहले से जारी थी.

स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं का योगदान

कोविड-19 के फैलाव के बाद, लोगों ने महसूस किया कि स्वयंसेवी, स्वास्थ्य व अन्य मंत्रालयों की भी मदद कर सकते हैं.

इसके मद्देनज़र, स्वयंसेवी योजना को मज़बूती प्रदान की गई है और उसे दुरुस्त किया गया, जिसके परिणामस्वरूप, कोविड-19 से असरदार ढँग से निपटने में भूटान को मिली सफलता का, वे मुख्य हिस्सा बन गए हैं.

19 अप्रैल को जारी आँकड़ों के मुताबिक, भूटान में कोरोनावायरस के लगभग एक हज़ार 300 मामलों की पुष्टि हुई है और एक संक्रमित की मौत हुई.

एक भी स्वास्थ्यकर्मी के कोविड-19 से संक्रमित होने की सूचना नहीं है. सामान्य दिनों में, सीमा के आर-पार लोगों की आवाजाही रहती है, मगर सरकार ने सीमा पर बेहद सख़्ती सुनिश्चित की है.

UN Photo/Gill Fickling
भूटान में बड़ी संख्या में लोग दूरदराज़ के इलाक़ों में रहते हैं.

देश में प्रवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को 21 दिनों तक क्वारण्टीन में रहना ज़रूरी है.

भूटान में, सामाजिक दूरी का पालन करने के प्रति संकल्प वास्तविक है. निजी बचाव सामग्री को हर स्थान पर उपलब्ध कराया गया है और लोग छोटी संख्या में ही एकत्र हो रहे हैं.

जब भी किसी स्थान पर वायरस के फैलाव का पता चलता है, उन इलाक़ों में तालाबन्दी लागू कर दी जाती है.

निर्बलों को सम्बल

भूटान में स्वास्थ्य संकट को टालने में सफलता मिली है, मगर इसके आर्थिक प्रभाव बेहद कठिनाई भरे रहे हैं.

देश मुख्यत: पर्यटन पर निर्भर है, और हम जानते हैं कि इस क्षेत्र में पुनर्बहाली की रफ़्तार बेहद धीमी रहने वाली है: बेरोज़गारी 14 प्रतिशत तक बढ़ गई है.

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सबसे निर्बलों की मदद कर रहा है और आत्मनिर्भरता व सहनक्षमता को बढ़ावा देने के रास्तों की तलाश की जा रही है.

हम घरों में खाद्य उत्पादन बढ़ाने की सरकारी रणनीति को समर्थन दे रहे हैं, हमारे ऐसे कार्यक्रम हैं जिनके ज़रिये लिंग आधारित हिंसा व मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी चुनौतियों से निपटा जा रहा है.

साथ ही वित्तीय नज़रिये से टिकाऊ व्यवस्था निर्माण के लिये सरकारी रणनीति को समर्थन दिया जा रहा है. इसके लिये, उदाहरणस्वरूप, एक स्मार्ट कर (टैक्स) प्रणाली को पेश किया गया है.

© UNICEF/SPelden
स्वास्थ्य सहायताकर्मियों ने डगाना ज़िले के एक स्कूल में टीकाकरण केंद्र स्थापित किया है.

भूटान ‘सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता’ (Gross National Happiness) की भूमि है. इसका देश के लिये एक बुनियादी महत्व है, और यह ऐसी नैतिक व व्यावहारिक दिशा निर्धारक है जिसका देश अनुसरण करता है.

इसका अर्थ यह है कि भूटान के लोग, सबसे निर्बलों सहित एक दूसरे का ख़याल रखते हैं.

निरन्तर सतर्कता ज़रूरी

तालाबन्दी के दौरान, हम सामुदायिक सहारे के इस मज़बूत भाव के साथ-साथ स्थानीय आबादी के सहज बोध को देख चुके हैं.

उन्होंने ये स्वीकार किया है कि तालाबन्दी ठोस कारणों की वजह से ही की गई है और हर किसी को साथ मिलकर प्रयास करना है.

अभी तक इस महामारी का सामना करने में मिली सफलता, संचारण की बेहद कम और टीकाकरण की ऊँची दर के बावजूद, हर कोई समझता है कि निरन्तर सतर्कता बरते जाने की ज़रूरत है.

भूटान के पास सीमित संख्या में ही वेण्टीलेटर और ऑक्सीजन की व्यवस्था है. भूटान के लोग जानते हैं कि बाक़ी दुनिया में किस तरह के हालात हैं, और वे इस तरह की परिस्थितियों का सामना नहीं करना चाहते.

इसलिये हर किसी की ओर से यह दृढ़ इच्छा है कि कोविड-19 के ख़िलाफ़ इत्मीनान से बैठ जाने के बजाय, लगातार चौकसी बरती जाए. “

रैज़िडैण्ट कोऑर्डिनेटर (आरसी) संयुक्त राष्ट्र विकास प्रणाली में देशीय स्तर पर यूएन के वरिष्ठतम प्रतिनिधि होते हैं.

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