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भूपेश सरकार का प्लॉप हुआ क्रेता-विक्रेता सम्मेलन

September 22
17:50 2019
बिक्री कम होने के बाद दुकानदारों ने दुखी मन से कही बात  
रायपुर, 22 सितम्बर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भूपेश सरकार द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन एवं प्रदर्शनी पूरी तरह फ्लॉप हो गया है। तीन दिवसीय सम्मेलन में दो दिन देशी-विदेशी मेहमानों के लिए रखा गया था जबकि रविवार को आखिरी दिन आम लोगों के लिए खोला गया था । आखिरी दिन होने की वजह से यहां प्रदेश के दूर दराज क्षेत्रों से आये दुकानदारों की बिक्री न के बराबर हुई जिससे उन दुकानदारों की नजर में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन फ्लॉप हो गया । बिक्री के हिसाब से दुकानदार सम्मेलन को पूरी तरह असफल मान रहे हैं जबकि बिक्री को लेकर किये गए समझौते से भविष्य में लाभ नजर आएगा और दूरगामी प्रभाव व्यवसाय व कृषि पर पड़ेगा ।
कई दुकानदारों से जब बात की गयी तो पता चला कि चार से 6 हजार की ही बिक्री हुई। शहर के सायाजी होटल में हुए सम्मेलन में सन फ्लैग एग्रो के सुधांशु बताते हैं कि उनके यहां तीन दिनों में 6 हजार के आसपास की बिक्री हुई। उनके स्टॉल में मुनगा से बने ऑरगेनिक पाउडर, कैप्सुल, चोकलेट बेचे जा रहे थे। सुधांशु बताते हैं कि मुनगा पाउडर और कैप्सुल खाने से शरीर के भीतर की कमजोरियां दूर होती हैं । साथ ही गैस, एसिडीटी वगैरह भी दूर करती है। सन फ्लैग के दूसरे स्टॉल में जहां लेमन ग्रास व अन्य पौधों से बने सुगंधित तेल, मच्छर भगाने के तेल वगैरह मिल रहे थे, वहां लगभग मात्र 14 हजार रुपये की ब्रिक्री हुई। धमतरी से चावल के कई किस्मों को बेचने आये ओजस्वी कृषि उत्पादन समिति के किसान एफ. एल. पटेल कहते हैं कि उनके स्टॉल में मात्र 4 से 5 हजार रुपये की ही बिक्री हुई है। हालांकि वे यह जरूर कहते हैं कि उन्हें छत्तीसगढ़ के बाहर से 100 क्वींटल के एक बड़े ऑर्डर मिले हैं। वही, प्रदर्शनी होटल के सामने लगी बस्तर कला के कांसे की ढ़ेरों मूर्तियों वाली मोबाइल एम्पोरियम के मैनेजर राजू ठाकुर बताते हैं कि उनके यहां भी मात्र 4 हजार की ही ब्रिक्री हुई। हालांकि, राज्य सरकार की छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अधिकारी आई.ए. खान का दावा है कि उनके स्टॉल में 35000 हजार रुपये की ब्रिक्री हुई। उनके स्टॉल में मिट्टी से बर्तन बनाने वाले किसानों के कप, प्लेट, मिट्टी का पानी बॉटल वगैरह की बिक्री हो रही थी।
सम्मेलन में सभी स्टॉलों पर बिक्री हुई कुल उत्पादों को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा महज लाख तक ही पहुंचता है। हालांकि सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि इस सम्मेलन में 10 लाख के आस-पास की बिक्री हुई। इस सम्मेलन में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाये गए हैं। इसके उलट बिक्री अधिक नहीं होना, यह दर्शाता है कि क्रेता-विक्रेता सम्मेलन उम्मीदों पर खड़ा नहीं उतरा । हालांकि शहर के चार सितारा होटल सायाजी में हुए इस सम्मेलन में राज्य सरकार ने कुछ कंपनियों और देशों के साथ एमओयू करार भी किया है, जिनमें टाटा व कुछ यूरोपीय कंपनियां शामिल हैं। समझौते से सम्मलेन का लाभ भविष्य में नजर आएगा और दूरगामी प्रभाव व्यवसाय व कृषि पर पड़ेगा ।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के कृषि, उद्यानिकी और वनोपज सहित हैण्डलूम-कोसा आदि उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन देने तथा विक्रय को बढ़ावा देने के लिए आयोजित इस सम्मेलन एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 20 सितम्बर को किया था। सम्मेलन में 16 देशों के 57 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि तथा क्रेतागण तथा देश के विभिन्न राज्यों से 60 प्रतिनिधि और क्रेतागण पहुंचे थे और राज्य के 60 प्रकार के कृषि उत्पाद, लघु वनोपज और हैण्डलूम उत्पादों को प्रदर्शित किया गया था ।
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