भोजन और खाद्य सुरक्षा में ‘दालों’ की महत्ता, विश्व दिवस

संयुक्त राष्ट्र, बुधवार को, विश्व दालें दिवस मना रहा है जिसके तहत, ना केवल पोषण के स्रोत के रूप में दालों की महत्ता को रेखांकित करने, बल्कि ज़मीन की उर्वरता बढ़ाने और फ़सलों के कीड़ों का असर कम करने में, उनकी भूमिका के बारे में भी जानकारी बढाई जाती है.

दालें, दरअसल मटर परिवार के पौधों के कुछ बीज होते हैं, जो खाने योग्य होते हैं, और उन्हें भोजन में प्रयोग करने के इरादे से ही उगाया जाता है.

10th February is #WorldPulsesDay! Pulses are not only packed with nutrients but they help combat climate change, increase biodiversity and so much more. 👉https://t.co/gM9DODuav7#LovePulses pic.twitter.com/s05GXSJRsZ— FAO (@FAO) February 5, 2021

दालें, दुनिया भर में, रेस्तराँओं और होटलों में, स्वादिष्ट व्यंजनों का अटूट हिस्सा हैं: भूमध्य सागर के देशों में हुमूस; अंग्रेज़ी ख़ुराकों में पकी हुई फलियाँ, और दक्षिण एशियाई व्यंजनों में, सरल रूप में दाल.
दालें, बहुत से देशों में, सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा हैं. उदाहरण के लिये, नेपाल में, कवाति एक ऐसा सूप होता है जो नौ प्रकार की दालों को मिलाकर बनाया जाता है.
ये सूप, प्रमुख त्यौहारों और महोत्सवों के दौरान पिया-खाया जाता है, और यह सूप, गर्भवती महिलाओं की ख़ुराक़ का मुख्य हिस्सा होता है.
अलबत्ता, दालों में, वे फ़सलें शामिल नहीं हैं जिन्हें हरित अवस्था में ही प्रयोग में लाया जाता है. जैसेकि, हरी मटर और हरी फलियाँ (beans). इनमें वो फ़सलें भी शामिल नहीं हैं, जोकि तेल निकालने या अगली फ़सल के लिये बीज के तौर पर इस्तेमाल की जाती हैं.
भोजन में दालों की महत्ता
दालें, प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, विशेष रूप में, शाकाहारी भोजन खाने वाले लोगों के लिये, या फिर उन लोगों के लिये भी जिन्हें, माँस, मछली या दूध-दही पर आधारित ख़ुराक खाने के बावजूद प्रोटीन प्रचुर मात्रा में नहीं मिल पाता.
इसके अलावा, माँस खाने वाले लोगों के लिये भी दालें, एक स्वस्थ विकल्प हैं, जोकि ख़ुराकों से अतिरिक्त वसा को कम करने में मदद करती हैं, और इनमें कोलस्ट्रोल बिल्कुल भी नहीं होता. दालें, ख़ुराक में भूसी (फ़ाइबर), विटामिनों, और लौह (Iron) व ज़िंक जैसे खनिज पदार्थों (Minerals) की भी अच्छी स्रोत हैं.
अगर प्रति ग्राम तुलना की जाए तो, माँस, या प्रोटीन के अन्य स्रोतों की तुलना में, दालें, कहीं ज़्यादा सस्ती हैं, जोकि सस्ता व स्वस्थ विकल्प उपलब्ध कराती हैं.
कृषि टिकाऊपन में बेहतरी
दालों में मौजूद, नाइट्रोजन परिवर्तन गुण, कृषि भूमि की उत्पादकता और उसका दायरा बढ़ाकर, ज़मीन की उर्वरता बेहतर बनाते हैं. अनेक क्षेत्रों में, किसान, फ़सलों की उपज (पैदावार) और ज़मीन की जैवविविधता बढ़ाने के लिये, अपने खेतों में, अन्य फ़सलों के साथ-साथ दालों वाली बेलें या पौधे लगाते हैं.
दाल फ़सलों को ऐसी बीमारियाँ दूर रखने के लिये भी जाना जाता है जिससे कीड़े पैदा होते हैं, और इससे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की भी ज़रूरत नहीं पड़ती.
दाल फ़सलों के ज़रिये कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है, और इस तरह दालें, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को, अप्रत्यक्ष रूप में, कम करती हैं, और अन्ततः जलवायु कार्रवाई में उनका योगदान होता है.
विश्व दिवस
विश्व दालें दिवस हर वर्ष 10 फ़रवरी को मनाए जाने की घोषणा, वर्ष 2018 में की गई थी, जब यूएन महासभा ने, दालों की महत्ता और टिकाऊ खाद्य उत्पादन में, उनके योगदान को मान्यता देने व इस बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये ये दिवस स्थापित करने की घोषणा की.
यूएन महासभा ने 2030 का टिकाऊ विकास एजेण्डा प्राप्ति में भी दालों के सम्भावित योगदान को भी रेखांकित किया है. इसके तहत, भोजन व ख़ुराकों में, विविधता बनाए रखने में, दालों के पौष्टिक फ़ायदों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये प्रयास किये जाने का भी आग्रह किया गया है., संयुक्त राष्ट्र, बुधवार को, विश्व दालें दिवस मना रहा है जिसके तहत, ना केवल पोषण के स्रोत के रूप में दालों की महत्ता को रेखांकित करने, बल्कि ज़मीन की उर्वरता बढ़ाने और फ़सलों के कीड़ों का असर कम करने में, उनकी भूमिका के बारे में भी जानकारी बढाई जाती है.

दालें, दरअसल मटर परिवार के पौधों के कुछ बीज होते हैं, जो खाने योग्य होते हैं, और उन्हें भोजन में प्रयोग करने के इरादे से ही उगाया जाता है.

दालें, दुनिया भर में, रेस्तराँओं और होटलों में, स्वादिष्ट व्यंजनों का अटूट हिस्सा हैं: भूमध्य सागर के देशों में हुमूस; अंग्रेज़ी ख़ुराकों में पकी हुई फलियाँ, और दक्षिण एशियाई व्यंजनों में, सरल रूप में दाल.

दालें, बहुत से देशों में, सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा हैं. उदाहरण के लिये, नेपाल में, कवाति एक ऐसा सूप होता है जो नौ प्रकार की दालों को मिलाकर बनाया जाता है.

ये सूप, प्रमुख त्यौहारों और महोत्सवों के दौरान पिया-खाया जाता है, और यह सूप, गर्भवती महिलाओं की ख़ुराक़ का मुख्य हिस्सा होता है.

अलबत्ता, दालों में, वे फ़सलें शामिल नहीं हैं जिन्हें हरित अवस्था में ही प्रयोग में लाया जाता है. जैसेकि, हरी मटर और हरी फलियाँ (beans). इनमें वो फ़सलें भी शामिल नहीं हैं, जोकि तेल निकालने या अगली फ़सल के लिये बीज के तौर पर इस्तेमाल की जाती हैं.

भोजन में दालों की महत्ता

दालें, प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, विशेष रूप में, शाकाहारी भोजन खाने वाले लोगों के लिये, या फिर उन लोगों के लिये भी जिन्हें, माँस, मछली या दूध-दही पर आधारित ख़ुराक खाने के बावजूद प्रोटीन प्रचुर मात्रा में नहीं मिल पाता.

इसके अलावा, माँस खाने वाले लोगों के लिये भी दालें, एक स्वस्थ विकल्प हैं, जोकि ख़ुराकों से अतिरिक्त वसा को कम करने में मदद करती हैं, और इनमें कोलस्ट्रोल बिल्कुल भी नहीं होता. दालें, ख़ुराक में भूसी (फ़ाइबर), विटामिनों, और लौह (Iron) व ज़िंक जैसे खनिज पदार्थों (Minerals) की भी अच्छी स्रोत हैं.

अगर प्रति ग्राम तुलना की जाए तो, माँस, या प्रोटीन के अन्य स्रोतों की तुलना में, दालें, कहीं ज़्यादा सस्ती हैं, जोकि सस्ता व स्वस्थ विकल्प उपलब्ध कराती हैं.
कृषि टिकाऊपन में बेहतरी

दालों में मौजूद, नाइट्रोजन परिवर्तन गुण, कृषि भूमि की उत्पादकता और उसका दायरा बढ़ाकर, ज़मीन की उर्वरता बेहतर बनाते हैं. अनेक क्षेत्रों में, किसान, फ़सलों की उपज (पैदावार) और ज़मीन की जैवविविधता बढ़ाने के लिये, अपने खेतों में, अन्य फ़सलों के साथ-साथ दालों वाली बेलें या पौधे लगाते हैं.

दाल फ़सलों को ऐसी बीमारियाँ दूर रखने के लिये भी जाना जाता है जिससे कीड़े पैदा होते हैं, और इससे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की भी ज़रूरत नहीं पड़ती.

दाल फ़सलों के ज़रिये कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है, और इस तरह दालें, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को, अप्रत्यक्ष रूप में, कम करती हैं, और अन्ततः जलवायु कार्रवाई में उनका योगदान होता है.

विश्व दिवस

विश्व दालें दिवस हर वर्ष 10 फ़रवरी को मनाए जाने की घोषणा, वर्ष 2018 में की गई थी, जब यूएन महासभा ने, दालों की महत्ता और टिकाऊ खाद्य उत्पादन में, उनके योगदान को मान्यता देने व इस बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये ये दिवस स्थापित करने की घोषणा की.

यूएन महासभा ने 2030 का टिकाऊ विकास एजेण्डा प्राप्ति में भी दालों के सम्भावित योगदान को भी रेखांकित किया है. इसके तहत, भोजन व ख़ुराकों में, विविधता बनाए रखने में, दालों के पौष्टिक फ़ायदों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये प्रयास किये जाने का भी आग्रह किया गया है.

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