मज़बूत जलवायु कार्रवाई के बिना, दुनिया के बिखर जाने का डर, 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सुरक्षा परिषद की एक उच्चस्तरीय परिचर्चा में कहा है कि जलवायु परिवर्तन ने, वैश्विक शान्ति और सुरक्षा के लिये जो ख़तरा उत्पन्न कर दिया है, उसका सामना करने के लिये, और अधिक एकजुट कार्रवाई की दरकार है. इसी परिचर्चा में, प्रख्यात प्रकृति इतिहासकार सर डेविड ऐटेनबरॉ ने भी देशों को आगाह करते हुए कहा कि पृथ्वी ग्रह पूर्ण बिखराव के निकट पहुँच जाने के जोखिम का सामना कर रहा है.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि रिकॉर्ड उच्च तापमान और जंगली आग, बाढ़ और सूखा की स्थितियाँ जैसे जलवायु झटके, ना केवल नई सामान्य स्थिति बन गए हैं, बल्कि इनसे राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिरता के लिये भी जोखिम उत्पन्न हो गया है.

The climate emergency not only damages the environment; it weakens our political, economic & social systems.We need to protect countries & communities and address the specific risks the climate crisis poses to international peace & security. pic.twitter.com/mCPykgiHDH— António Guterres (@antonioguterres) February 23, 2021

यूएन महासचिव ने कहा, “विज्ञान का सन्देश स्पष्ट है: हमें, इस सदी के अन्त तक, वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना होगा.”
“और हमारा कर्तव्य भी अधिक स्पष्ट है: हमें उन लोगों व समुदायों को सुरक्षा उपलब्ध करानी है जो जलवायु आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. हमें, अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा के लिये, जलवायु आपदा के बढ़ते दुष्परिणामों का सामना करने के लिये अपनी तैयारियाँ तेज़ करनी होंगी.”
किसी भ्रम की गुंजाइश नहीं
सुरक्षा परिषद की इस बैठक का आयोजन ब्रिटेन ने किया था जिसमें देशों व सरकारों के अध्यक्षों के साथ-साथ, वरिष्ठ राजनैतिक नेताओं शिरकत की. ध्यान रहे कि जलवायु परिवर्तन पर अगला वैश्विक सम्मेलन कॉप26, नवम्बर 2021 में, स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में प्रस्तावित है, जिसकी मेज़बानी ब्रिटेन कर रहा है.
ब्रिटेन के प्रधानमनन्त्री बोरिस जॉन्सन ने इस वर्चुअल बैठक की अधियक्षता की और तत्काल कार्रवाई किये जाने का आहवान किया.
उन्होंने कहा, “आप इसे पसन्द करें या ना करें, ये स्पष्ट है कि कार्रवाई करने, या नहीं करने के बीच में से किसी एक रास्ते को चुनने का विकल्प ही नहीं बचा है, बस इतना तय करना है कि कार्रवाई कब की जानी है. आपके देश और आपके लोगों को जलवायु परिवर्तन के सुरक्षा प्रभावों से निपटना ही होगा.”
उन्होंने विश्व नेताओं से आग्रह किया कि वो दुनिया को सुरक्षित रखने के लिये आवश्यक नेतृत्व कौशल दिखाएँ.
सर डेविड ऐटेनबरा की चेतावनी
फ़रवरी महीने के लिये, 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता ब्रिटेन के पास है. ये ज़िम्मेदारी हर महीने बदलती है. ब्रिटेन के प्रख्यात प्रकृति इतिहासकार सर डेविड ऐटेनबरा ने सुरक्षा परिषद की इस बैठक को सम्बोधित करते हुए स्पष्ट चेतावनी भी जारी की.
उन्होंने कहा, “अगर हम अपनी इसी रफ़्तार के साथ आगे चलते रहे तो, हम वो सब गँवाने के निकट पहुँच जाएँगे चिससे हमें सुरक्षा प्राप्त होती है: खाद्य उत्पादन, ताज़ा पानी की उपलब्धता, इनसानों के रहने योग्य तापमान, और समुद्री खाद्य सामग्री का सिलसिला.”
“और अगर प्राकृतिक दुनिया, हमारी अधिकतर बुनियादी ज़रूरतों को सहारा नहीं दे सकती तो, बाक़ी सभ्यता के बहुत जल्द बिखर जाएगी.”
सर ऐटेनबरा ने कहा, “दुनिया भर में, आज लोग ये समझन लगे हैं कि ये अब ऐसा मुद्दा नहीं बचा है जिससे आने वाली पीढ़ियाँ प्रभावित होंगी. इससे प्रभावित होने वालों में आज के जीवित लोग भी हैं. विशेष रूप में, युवा पीढ़ी, जो हमारी गतिविधियों के नतीजे भुगतेगी.”, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सुरक्षा परिषद की एक उच्चस्तरीय परिचर्चा में कहा है कि जलवायु परिवर्तन ने, वैश्विक शान्ति और सुरक्षा के लिये जो ख़तरा उत्पन्न कर दिया है, उसका सामना करने के लिये, और अधिक एकजुट कार्रवाई की दरकार है. इसी परिचर्चा में, प्रख्यात प्रकृति इतिहासकार सर डेविड ऐटेनबरॉ ने भी देशों को आगाह करते हुए कहा कि पृथ्वी ग्रह पूर्ण बिखराव के निकट पहुँच जाने के जोखिम का सामना कर रहा है.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि रिकॉर्ड उच्च तापमान और जंगली आग, बाढ़ और सूखा की स्थितियाँ जैसे जलवायु झटके, ना केवल नई सामान्य स्थिति बन गए हैं, बल्कि इनसे राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिरता के लिये भी जोखिम उत्पन्न हो गया है.

यूएन महासचिव ने कहा, “विज्ञान का सन्देश स्पष्ट है: हमें, इस सदी के अन्त तक, वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना होगा.”

“और हमारा कर्तव्य भी अधिक स्पष्ट है: हमें उन लोगों व समुदायों को सुरक्षा उपलब्ध करानी है जो जलवायु आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. हमें, अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा के लिये, जलवायु आपदा के बढ़ते दुष्परिणामों का सामना करने के लिये अपनी तैयारियाँ तेज़ करनी होंगी.”

किसी भ्रम की गुंजाइश नहीं

सुरक्षा परिषद की इस बैठक का आयोजन ब्रिटेन ने किया था जिसमें देशों व सरकारों के अध्यक्षों के साथ-साथ, वरिष्ठ राजनैतिक नेताओं शिरकत की. ध्यान रहे कि जलवायु परिवर्तन पर अगला वैश्विक सम्मेलन कॉप26, नवम्बर 2021 में, स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में प्रस्तावित है, जिसकी मेज़बानी ब्रिटेन कर रहा है.

ब्रिटेन के प्रधानमनन्त्री बोरिस जॉन्सन ने इस वर्चुअल बैठक की अधियक्षता की और तत्काल कार्रवाई किये जाने का आहवान किया.

उन्होंने कहा, “आप इसे पसन्द करें या ना करें, ये स्पष्ट है कि कार्रवाई करने, या नहीं करने के बीच में से किसी एक रास्ते को चुनने का विकल्प ही नहीं बचा है, बस इतना तय करना है कि कार्रवाई कब की जानी है. आपके देश और आपके लोगों को जलवायु परिवर्तन के सुरक्षा प्रभावों से निपटना ही होगा.”

उन्होंने विश्व नेताओं से आग्रह किया कि वो दुनिया को सुरक्षित रखने के लिये आवश्यक नेतृत्व कौशल दिखाएँ.

सर डेविड ऐटेनबरा की चेतावनी

फ़रवरी महीने के लिये, 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता ब्रिटेन के पास है. ये ज़िम्मेदारी हर महीने बदलती है. ब्रिटेन के प्रख्यात प्रकृति इतिहासकार सर डेविड ऐटेनबरा ने सुरक्षा परिषद की इस बैठक को सम्बोधित करते हुए स्पष्ट चेतावनी भी जारी की.

उन्होंने कहा, “अगर हम अपनी इसी रफ़्तार के साथ आगे चलते रहे तो, हम वो सब गँवाने के निकट पहुँच जाएँगे चिससे हमें सुरक्षा प्राप्त होती है: खाद्य उत्पादन, ताज़ा पानी की उपलब्धता, इनसानों के रहने योग्य तापमान, और समुद्री खाद्य सामग्री का सिलसिला.”

“और अगर प्राकृतिक दुनिया, हमारी अधिकतर बुनियादी ज़रूरतों को सहारा नहीं दे सकती तो, बाक़ी सभ्यता के बहुत जल्द बिखर जाएगी.”

सर ऐटेनबरा ने कहा, “दुनिया भर में, आज लोग ये समझन लगे हैं कि ये अब ऐसा मुद्दा नहीं बचा है जिससे आने वाली पीढ़ियाँ प्रभावित होंगी. इससे प्रभावित होने वालों में आज के जीवित लोग भी हैं. विशेष रूप में, युवा पीढ़ी, जो हमारी गतिविधियों के नतीजे भुगतेगी.”

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