मध्य सहेल में बदतर होते हालात की रोकथाम के लिये तत्काल कार्रवाई की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि अफ़्रीका के मध्य सहेल क्षेत्र में भुखमरी, हिंसा और कोविड-19 जैसी विकराल चुनौतियों के मद्देनज़र मानवीय राहत आवश्यकताएँ चरम स्तर पर पहुँच रही हैं जिनसे निपटने के लिये दुनिया को प्रयास अभी करने होंगे. महासचिव ने क्षेत्र में पनपते संकट के मुद्दे पर मंगलवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में यह पुकार लगाई है.

यूएन एजेंसियों के मुताबिक माली, बुरकिना फ़ासो और निजेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती हिंसा, असुरक्षा और कोविड-19 महामारी की वजह से आवश्यकताएँ अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गई हैं.

Why is the Sahel the world’s fastest growing displacement crisis? #SahelNow pic.twitter.com/W9QoA9xqGY— UNHCR, the UN Refugee Agency (@Refugees) October 20, 2020

इन वजहों से इस क्षेत्र को दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ते मानवीय संकटों के रूप में देखा जा रहा है.
आगामी वर्ष तक राहत ज़रूरतों को पूरा करने के लिये दो अरब 40 करोड़ डॉलर की अपील को जारी किया गया है.
यूएन प्रमुख ने कार्यक्रम को दिये वीडियो सन्देश कहा, “हमें हालात में तेज़ी से आ रही गिरावट की दिशा को पलटने के लिये शान्ति और आपसी मेलमिलाप को नए सिरे से बढ़ावा देना होगा.”
“और हमें महत्वपूर्ण मानवीय सहायता और विकास व व्यक्तियों में निवेश के लिये स्थान सृजित करने की ज़रूरत है.”
भुखमरी, ग़रीबी और विस्थापन
संयुक्त राष्ट्र मानवीय राहत मामलों के कार्यालय (UNOCHA) के अनुसार मध्य सहेल दुनिया के निर्धनतम इलाक़ों में से एक है.
हथियारबन्द गुटों के बीच हिंसा, व्यापक स्तर पर व्याप्त ग़रीबी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण रिकॉर्ड संख्या में एक करोड़ 34 लाख लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं – इनमें आधी संख्या बच्चों की है.
क्षेत्र में, पिछले दो वर्षों के दौरान मानवीय हालात तेज़ी से बदतर हुए हैं जिसके कारण 74 लाख लोग भुखमरी का शिकार हुए हैं और 16 लाख लोगों को विस्थापन के लिये मजबूर होना पड़ा है.
कोविड-19 महामारी के कारण तालाबन्दी और अन्य ऐहतियाती उपायों की वजह से 60 लाख अतिरिक्त लोग चरम ग़रीबी के गर्त में धँस गए हैं.
महासचिव गुटेरेश ने कहा कि सहेल एक बानगी है कि वैश्विक जोखिम किस तरह से एक क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रहे हैं,
“यह हम सभी को सचेत करने वाला संकेत है जिस पर तत्काल ध्यान दिये जाने और संकल्प लेने की आवश्यकता है.”
मध्य सहेल क्षेत्र में उपजती चुनौतियों पर इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन डेनमार्क, जर्मनी, योरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने किया था.
युद्धविराम और सहायता अहम
यूएन प्रमुख ने कार्यक्रम में शिरकत कर रहे प्रतिनिधियों को कोविड-19 के दौरान अपनी वैश्विक युद्धविराम की अपील को ध्यान दिलाते हुए कहा कि इस क्षेत्र के लोगों के लिये यह अपील महत्वपूर्ण है.
“हमें और भी ज़्यादा मानवीय सहायता की आवश्यकता है. यह हिंसा का कोई समाधान नहीं है लेकिन यह ज़िन्दगियाँ बचाती है.”
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ और अन्य ग़ैरसरकारी संगठन ज़मीनी स्तर पर मौजूद हैं जिनके प्रयासों के परिणामस्वरूप लाखों लोगों की ज़िन्दगियों की रक्षा करने में मदद मिली है.
महासचिव ने स्पष्ट किया कि राहत कार्यों के लिये बेहतर वित्तीय धनराशि की उपलब्धता से इन प्रयासों का दायरा और ज़्यादा बढ़ाया जा सकता है.
उन्होंने दो अरब 40 करोड़ डॉलर की अपील के लिये मज़बूत समर्थन दर्शाए जाने का आग्रह किया है. इस धनराशि से वर्ष 2020 के शेष महीनों और उसके बाद 2021 में भी आपात राहत सुनिश्चित की जा सकेगी.
“दीर्घकालीन समाधान टिकाऊ विकास, सुशासन और सर्वजन के लिये समान अवसरों के ज़रिये आएँगे, विशेष तौर पर युवाओं के लिये. यह रातों-रात नहीं होगा.”
“लेकिन हम इस संकट को भविष्य में और भी ज़्यादा घातक और महँगा साबित होने से रोक सकते हैं. हमें कार्रवाई करनी होगी – और अभी करनी होगी.”, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि अफ़्रीका के मध्य सहेल क्षेत्र में भुखमरी, हिंसा और कोविड-19 जैसी विकराल चुनौतियों के मद्देनज़र मानवीय राहत आवश्यकताएँ चरम स्तर पर पहुँच रही हैं जिनसे निपटने के लिये दुनिया को प्रयास अभी करने होंगे. महासचिव ने क्षेत्र में पनपते संकट के मुद्दे पर मंगलवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में यह पुकार लगाई है.

यूएन एजेंसियों के मुताबिक माली, बुरकिना फ़ासो और निजेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती हिंसा, असुरक्षा और कोविड-19 महामारी की वजह से आवश्यकताएँ अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गई हैं.

इन वजहों से इस क्षेत्र को दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ते मानवीय संकटों के रूप में देखा जा रहा है.

आगामी वर्ष तक राहत ज़रूरतों को पूरा करने के लिये दो अरब 40 करोड़ डॉलर की अपील को जारी किया गया है.

यूएन प्रमुख ने कार्यक्रम को दिये वीडियो सन्देश कहा, “हमें हालात में तेज़ी से आ रही गिरावट की दिशा को पलटने के लिये शान्ति और आपसी मेलमिलाप को नए सिरे से बढ़ावा देना होगा.”

“और हमें महत्वपूर्ण मानवीय सहायता और विकास व व्यक्तियों में निवेश के लिये स्थान सृजित करने की ज़रूरत है.”

भुखमरी, ग़रीबी और विस्थापन

संयुक्त राष्ट्र मानवीय राहत मामलों के कार्यालय (UNOCHA) के अनुसार मध्य सहेल दुनिया के निर्धनतम इलाक़ों में से एक है.

हथियारबन्द गुटों के बीच हिंसा, व्यापक स्तर पर व्याप्त ग़रीबी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण रिकॉर्ड संख्या में एक करोड़ 34 लाख लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं – इनमें आधी संख्या बच्चों की है.

क्षेत्र में, पिछले दो वर्षों के दौरान मानवीय हालात तेज़ी से बदतर हुए हैं जिसके कारण 74 लाख लोग भुखमरी का शिकार हुए हैं और 16 लाख लोगों को विस्थापन के लिये मजबूर होना पड़ा है.

कोविड-19 महामारी के कारण तालाबन्दी और अन्य ऐहतियाती उपायों की वजह से 60 लाख अतिरिक्त लोग चरम ग़रीबी के गर्त में धँस गए हैं.

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि सहेल एक बानगी है कि वैश्विक जोखिम किस तरह से एक क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रहे हैं,

“यह हम सभी को सचेत करने वाला संकेत है जिस पर तत्काल ध्यान दिये जाने और संकल्प लेने की आवश्यकता है.”

मध्य सहेल क्षेत्र में उपजती चुनौतियों पर इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन डेनमार्क, जर्मनी, योरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने किया था.

युद्धविराम और सहायता अहम

यूएन प्रमुख ने कार्यक्रम में शिरकत कर रहे प्रतिनिधियों को कोविड-19 के दौरान अपनी वैश्विक युद्धविराम की अपील को ध्यान दिलाते हुए कहा कि इस क्षेत्र के लोगों के लिये यह अपील महत्वपूर्ण है.

“हमें और भी ज़्यादा मानवीय सहायता की आवश्यकता है. यह हिंसा का कोई समाधान नहीं है लेकिन यह ज़िन्दगियाँ बचाती है.”

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ और अन्य ग़ैरसरकारी संगठन ज़मीनी स्तर पर मौजूद हैं जिनके प्रयासों के परिणामस्वरूप लाखों लोगों की ज़िन्दगियों की रक्षा करने में मदद मिली है.

महासचिव ने स्पष्ट किया कि राहत कार्यों के लिये बेहतर वित्तीय धनराशि की उपलब्धता से इन प्रयासों का दायरा और ज़्यादा बढ़ाया जा सकता है.

उन्होंने दो अरब 40 करोड़ डॉलर की अपील के लिये मज़बूत समर्थन दर्शाए जाने का आग्रह किया है. इस धनराशि से वर्ष 2020 के शेष महीनों और उसके बाद 2021 में भी आपात राहत सुनिश्चित की जा सकेगी.

“दीर्घकालीन समाधान टिकाऊ विकास, सुशासन और सर्वजन के लिये समान अवसरों के ज़रिये आएँगे, विशेष तौर पर युवाओं के लिये. यह रातों-रात नहीं होगा.”

“लेकिन हम इस संकट को भविष्य में और भी ज़्यादा घातक और महँगा साबित होने से रोक सकते हैं. हमें कार्रवाई करनी होगी – और अभी करनी होगी.”

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