महत्वाकाँक्षा, निर्णय क्षमता, स्पष्टता – जलवायु कार्रवाई के मन्त्र

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक महामारी की वजह से महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई में देरी नहीं की जा सकती और वर्चुअल वार्ताओं के ज़रिये तेज़ी से आगे बढ़ना होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र, प्रभावित समुदायों तक मदद पहुँचाने, देशों को पूर्ण समर्थन प्रदान करने और सभी की आवाज़ सुने जाने के लिये संकल्पबद्ध है और महत्वाकाँक्षी कार्रवाई के लिये स्पष्टता व निर्णायक ढंग से आगे बढ़ा जाना होगा. 

यूएन महासचिव ने मंगलवार को जलवायु कार्रवाई पर आयोजित मन्त्रिस्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए, इस वर्ष ग्लासगो में होने वाले वार्षिक जलवायु सम्मेलन से पहले अपनी जलवायु प्राथमकिताएँ साझा की हैं.  

The #ClimateAction decisions countries take during this make-or-break year have the power to limit temperature rise to 1.5 degrees.We simply cannot contemplate any alternative.This is the path to peace and prosperity on a healthy planet.https://t.co/wN6sZDaRf6— António Guterres (@antonioguterres) March 23, 2021

यूएन प्रमुख ने कहा कि सबसे अहम प्राथमकिता, पेरिस समझौते के अनुरूप, वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना है. 
उन्होंने चेतावनी भरे अन्दाज़ में 2021 को एक ऐसा वर्ष क़रार दिया, जब दुनिया के पास सही निर्णयों के ज़रिये इस लक्ष्य तक अपनी पहुँच बनाए रखने का अवसर है, नहीं तो हालात हात से निकल जाने का ख़तरा है.
“हम किसी अन्य विकल्प के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं.”
उन्होंने दोहराया कि वर्ष 2050 तक कार्बन तटस्थता (नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य) हासिल करने का संकल्प लेने वाले देशों के गठबन्धन में विस्तार जारी रखना होगा. 
“एक स्वस्थ ग्रह पर शान्ति व समृद्धि का एक यही रास्ता है, लेकिन दुनिया अभी लक्ष्य से बहुत दूर है.”
यूएन प्रमुख ने मौजूदा हालात से निपटने के लिये चार अहम क्षेत्रों पर ध्यान आकृष्ट किया है.
जलवायु कार्रवाई का आहवान 
पहला, महासचिव ने कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिये बड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है. 
“वर्ष 2010 के स्तर की तुलना में, 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 45 फ़ीसदी की कटौती लाने के लिये, विश्वसनीय और सुसंगत योजनाओं की ज़रूरत है.”
इस क्रम में उन्होंने देशों से, महत्वाकाँक्षी राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई योजनाओं को तात्कालिक तैयार करने का आहवान किया है.
दूसरा, उन्होंने जलवायु अनुकूलन को भी अहम बताया है ताकि चक्रवाती तूफ़ानों, जंगलों में आग और चरम मौसम की अन्य घटनाओं को झेल रहे लोगों को सहारा प्रदान किया जा सके. 
इसके तहत बड़े विकास बैंकों व दानदाताओं द्वारा वार्षिक जलवायु वित्तीय संसाधन, अनुकूलन गतिविधियों के लिये आबंटित किया जाना और इसे सबसे निर्बलों के लिये सुलभ बनाना महत्वपूर्ण होगा.  
तीसरा, वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना. 
यूएन प्रमुख ने जी-7 समूह के नेताओं और मुख्य दानदाताओं से हर वर्ष, 100 अरब डॉलर के संसाधन मुहैया कराए जाने की अपील की है, जिसका वादा एक दशक से भी ज़्यादा समय पहले किया गया था. 
उन्होंने कहा कि यह विश्वसनीयता और न्याय से जुड़ा सवाल है. इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, बहुपक्षीय विकास बैंकों को, क़र्ज़ व सहायता सम्बन्धी नीतियों में, पेरिस समझौते के प्रति, वर्ष 2024 तक, पूर्ण संकल्प दर्शाना होगा.
चौथा, कोयले पर निर्भरता का अन्त.
यूएन प्रमुख ने कहा कि वैश्विक तापमान बढ़ोत्तरी को, 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये यह ज़रूरी है कि चरणबद्ध ढंग से कोयले पर निर्भरता ख़त्म की जाए. 
इसके तहत, कोयला-चालित संयन्त्रों के लिये वित्तीय संसाधन रोके जाने होंगे, और वर्ष 2040 तक दुनिया में कोयले के इस्तेमाल को रोका जाना होगा. 
महासचिव ने बताया कि जी7 समूह के देशों ने पहले ही इस लक्ष्य के प्रति संकल्प प्रदर्शित किया है, और अब जी20 समूह के देशों को भी ऐसा ही करना होगा. , संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक महामारी की वजह से महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई में देरी नहीं की जा सकती और वर्चुअल वार्ताओं के ज़रिये तेज़ी से आगे बढ़ना होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र, प्रभावित समुदायों तक मदद पहुँचाने, देशों को पूर्ण समर्थन प्रदान करने और सभी की आवाज़ सुने जाने के लिये संकल्पबद्ध है और महत्वाकाँक्षी कार्रवाई के लिये स्पष्टता व निर्णायक ढंग से आगे बढ़ा जाना होगा. 

यूएन महासचिव ने मंगलवार को जलवायु कार्रवाई पर आयोजित मन्त्रिस्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए, इस वर्ष ग्लासगो में होने वाले वार्षिक जलवायु सम्मेलन से पहले अपनी जलवायु प्राथमकिताएँ साझा की हैं.  

यूएन प्रमुख ने कहा कि सबसे अहम प्राथमकिता, पेरिस समझौते के अनुरूप, वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना है. 

उन्होंने चेतावनी भरे अन्दाज़ में 2021 को एक ऐसा वर्ष क़रार दिया, जब दुनिया के पास सही निर्णयों के ज़रिये इस लक्ष्य तक अपनी पहुँच बनाए रखने का अवसर है, नहीं तो हालात हात से निकल जाने का ख़तरा है.

“हम किसी अन्य विकल्प के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं.”

उन्होंने दोहराया कि वर्ष 2050 तक कार्बन तटस्थता (नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य) हासिल करने का संकल्प लेने वाले देशों के गठबन्धन में विस्तार जारी रखना होगा. 

“एक स्वस्थ ग्रह पर शान्ति व समृद्धि का एक यही रास्ता है, लेकिन दुनिया अभी लक्ष्य से बहुत दूर है.”

यूएन प्रमुख ने मौजूदा हालात से निपटने के लिये चार अहम क्षेत्रों पर ध्यान आकृष्ट किया है.

जलवायु कार्रवाई का आहवान 

पहला, महासचिव ने कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिये बड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है. 

“वर्ष 2010 के स्तर की तुलना में, 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 45 फ़ीसदी की कटौती लाने के लिये, विश्वसनीय और सुसंगत योजनाओं की ज़रूरत है.”

इस क्रम में उन्होंने देशों से, महत्वाकाँक्षी राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई योजनाओं को तात्कालिक तैयार करने का आहवान किया है.

दूसरा, उन्होंने जलवायु अनुकूलन को भी अहम बताया है ताकि चक्रवाती तूफ़ानों, जंगलों में आग और चरम मौसम की अन्य घटनाओं को झेल रहे लोगों को सहारा प्रदान किया जा सके. 

इसके तहत बड़े विकास बैंकों व दानदाताओं द्वारा वार्षिक जलवायु वित्तीय संसाधन, अनुकूलन गतिविधियों के लिये आबंटित किया जाना और इसे सबसे निर्बलों के लिये सुलभ बनाना महत्वपूर्ण होगा.  

तीसरा, वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना. 

यूएन प्रमुख ने जी-7 समूह के नेताओं और मुख्य दानदाताओं से हर वर्ष, 100 अरब डॉलर के संसाधन मुहैया कराए जाने की अपील की है, जिसका वादा एक दशक से भी ज़्यादा समय पहले किया गया था. 

उन्होंने कहा कि यह विश्वसनीयता और न्याय से जुड़ा सवाल है. इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, बहुपक्षीय विकास बैंकों को, क़र्ज़ व सहायता सम्बन्धी नीतियों में, पेरिस समझौते के प्रति, वर्ष 2024 तक, पूर्ण संकल्प दर्शाना होगा.

चौथा, कोयले पर निर्भरता का अन्त.

यूएन प्रमुख ने कहा कि वैश्विक तापमान बढ़ोत्तरी को, 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये यह ज़रूरी है कि चरणबद्ध ढंग से कोयले पर निर्भरता ख़त्म की जाए. 

इसके तहत, कोयला-चालित संयन्त्रों के लिये वित्तीय संसाधन रोके जाने होंगे, और वर्ष 2040 तक दुनिया में कोयले के इस्तेमाल को रोका जाना होगा. 

महासचिव ने बताया कि जी7 समूह के देशों ने पहले ही इस लक्ष्य के प्रति संकल्प प्रदर्शित किया है, और अब जी20 समूह के देशों को भी ऐसा ही करना होगा. 

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