महामारी – एक लड़की की नज़र से

कोविड-19 महामारी से दुनिया भर में करोड़ों बच्चों पर असर पड़ा है. स्कूल बन्द होने और वायरस के प्रसार को रोकने के लिये अपनाए गए तालाबन्दी और अन्य उपायों ने लाखों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,महत्वपूर्ण टीकों और पौष्टिक आहार से दूर कर दिया है. ख़ासतौर पर, लड़कियों के लिये स्थिति और भी ज़्यादा ख़राब हो गई है. इस तरह की संकट स्थितियों के दौरान लिंग आधारित हिंसा और हानिकारक प्रथाओं का ख़तरा बढ़ जाता है – विशेषकर ग़रीब और कमज़ोर वर्ग की लड़कियों के लिये. अनुमानों के मुताबिक, स्कूल फिर से खुलने पर भी शायद बहुत सी लड़कियाँ फिर कभी भी वापस विद्यालय ना जा सकें या फिर हालात से मजबूर होकर बाल विवाह का शिकार हो जाएँ.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़), दुनियाभर में कोविड-19 से जूझ रही युवा लड़कियों की की कुछ ऐसी ही कहानियाँ पेश कर रहा है – जो अकेलेपन, बाल-विवाह, दूरस्थ शिक्षा के लिये संघर्ष जैसी परेशानियों का सामना कर रही हैं.
ये कहानियाँ नौ देशों की 16 लड़कियों ने एक निष्पक्ष दुनिया की परिकल्पना करते हुए अपने कष्टों, भय और आशाओं को मोबाइल फोन कैमरे के ज़रिये पेश की हैं. 
पहली कहानी में 15 साल की संधामित्रा कहती हैं कि महामारी के कारण स्कूल बन्द होने के कारण अनेक अभिभावकों के पास कामकाज नहीं है. जीवनयापन के लिये अब उन्होंने अपने बच्चों को काम करने के लिये भेजना शुरू कर दिया है. उसे डर है कि आर्थिक तंगी के कारण उसकी जैसी अनेक लड़कियों को बाल-विवाह का दंश भी झेलना पड़ सकता है. 
(लड़कियों ने ख़ुद ही, ये वीडियो बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में प्रस्तुत किये हैं)…, कोविड-19 महामारी से दुनिया भर में करोड़ों बच्चों पर असर पड़ा है. स्कूल बन्द होने और वायरस के प्रसार को रोकने के लिये अपनाए गए तालाबन्दी और अन्य उपायों ने लाखों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,महत्वपूर्ण टीकों और पौष्टिक आहार से दूर कर दिया है. ख़ासतौर पर, लड़कियों के लिये स्थिति और भी ज़्यादा ख़राब हो गई है. इस तरह की संकट स्थितियों के दौरान लिंग आधारित हिंसा और हानिकारक प्रथाओं का ख़तरा बढ़ जाता है – विशेषकर ग़रीब और कमज़ोर वर्ग की लड़कियों के लिये. अनुमानों के मुताबिक, स्कूल फिर से खुलने पर भी शायद बहुत सी लड़कियाँ फिर कभी भी वापस विद्यालय ना जा सकें या फिर हालात से मजबूर होकर बाल विवाह का शिकार हो जाएँ.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़), दुनियाभर में कोविड-19 से जूझ रही युवा लड़कियों की की कुछ ऐसी ही कहानियाँ पेश कर रहा है – जो अकेलेपन, बाल-विवाह, दूरस्थ शिक्षा के लिये संघर्ष जैसी परेशानियों का सामना कर रही हैं.

ये कहानियाँ नौ देशों की 16 लड़कियों ने एक निष्पक्ष दुनिया की परिकल्पना करते हुए अपने कष्टों, भय और आशाओं को मोबाइल फोन कैमरे के ज़रिये पेश की हैं.

पहली कहानी में 15 साल की संधामित्रा कहती हैं कि महामारी के कारण स्कूल बन्द होने के कारण अनेक अभिभावकों के पास कामकाज नहीं है. जीवनयापन के लिये अब उन्होंने अपने बच्चों को काम करने के लिये भेजना शुरू कर दिया है. उसे डर है कि आर्थिक तंगी के कारण उसकी जैसी अनेक लड़कियों को बाल-विवाह का दंश भी झेलना पड़ सकता है.

(लड़कियों ने ख़ुद ही, ये वीडियो बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में प्रस्तुत किये हैं)…

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